रांची। बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (BIT) मेसरा और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर ने शोध, शिक्षा और संस्थागत क्षमता निर्माण को नई दिशा देने के लिए पांच वर्षों के महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच अनुसंधान, नवाचार और शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करना है। आवश्यकता पड़ने पर इस समझौते की अवधि आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाई जा सकेगी।
समझौते के तहत संयुक्त पीएचडी सुपरविजन, साझा प्रयोगशाला सुविधाओं का उपयोग, बौद्धिक संपदा (IP) विकास एवं व्यावसायीकरण, शोध परियोजनाएं, छात्र एवं संकाय आदान-प्रदान और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। एमओयू पर BIT मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना और IIT खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने हस्ताक्षर किए।
BIT मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना ने कहा कि यह साझेदारी संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे छात्रों और शिक्षकों को विश्वस्तरीय शोध सुविधाओं, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीकी संसाधनों का लाभ मिलेगा। साथ ही राष्ट्रीय जरूरतों के अनुरूप अनुसंधान और नवाचार को भी गति मिलेगी।
समझौते के तहत मास्टर्स और पीएचडी छात्रों का संयुक्त मार्गदर्शन, स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर शोध सहयोग, ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन इंटर्नशिप, छात्र एवं फैकल्टी एक्सचेंज कार्यक्रम और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फंडिंग एजेंसियों के लिए संयुक्त शोध प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। दोनों संस्थान फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, सेमिनार, कार्यशालाएं, GIAN कोर्स और माइक्रो-क्रेडिट कार्यक्रम भी मिलकर आयोजित करेंगे।
IIT खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा कि यह सहयोग राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की भावना के अनुरूप है। दोनों संस्थान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा, जल संसाधन, जलवायु परिवर्तन और रक्षा तकनीक जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान करेंगे। इसके अलावा इंटीग्रेटेड एमटेक-पीएचडी और ड्यूल डिग्री कार्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा। समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक संयुक्त कार्यान्वयन समिति बनाई जाएगी, जो हर छह महीने में प्रगति की समीक्षा करेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची से अयोध्या, जयपुर और भोपाल समेत 4 नए रूट पर वंदे भारत की मांग, यात्रियों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी रांची। झारखंड की राजधानी रांची से देश के प्रमुख शहरों के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस की कनेक्टिविटी बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। प्रस्तावित नए रूटों में अयोध्या, जयपुर और भोपाल जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ने की मांग शामिल है। हालांकि, इन रूटों पर अभी नई वंदे भारत सेवा शुरू करने की आधिकारिक मंजूरी की पुष्टि नहीं हुई है। अयोध्या कनेक्टिविटी पर जोर रांची से अयोध्या के बीच सीधी तेज ट्रेन सेवा की मांग लंबे समय से उठती रही है। धार्मिक पर्यटन के लिहाज से अयोध्या महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है और झारखंड से बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचते हैं। ऐसे में रांची-अयोध्या के बीच वंदे भारत सेवा शुरू होने से यात्रियों को तेज और सुविधाजनक रेल कनेक्टिविटी मिल सकती है। जयपुर और भोपाल के लिए भी मांग रांची से जयपुर और भोपाल जैसे प्रमुख शहरों को वंदे भारत नेटवर्क से जोड़ने की मांग भी की जा रही है। इन शहरों के बीच तेज रेल सेवा शुरू होने से यात्रियों को यात्रा समय कम करने के साथ बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मौजूदा उपलब्ध रिपोर्टों में इन प्रस्तावित रूटों पर वंदे भारत चलाने की अंतिम समय-सारिणी या रेलवे बोर्ड की स्वीकृति सामने नहीं आई है। अभी मंजूरी का इंतजार इसलिए फिलहाल इन सेवाओं को प्रस्तावित या मांग किए गए रूट के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। रेलवे की ओर से अंतिम मंजूरी, ट्रेन नंबर, संचालन की तारीख और समय-सारिणी जारी होने के बाद ही इन्हें नियमित वंदे भारत सेवा माना जा सकेगा। रांची से वंदे भारत नेटवर्क के विस्तार की मांग के बीच यात्रियों की नजर अब रेलवे की आधिकारिक घोषणा पर है।
चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा स्थित मांगीलाल रूंगटा प्लस टू विद्यालय की प्राचार्या शिल्पा गुप्ता का नाम राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए नामांकित किया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्य और विद्यालय में किए गए नवाचारों को देखते हुए उनका नाम राष्ट्रीय स्तर के चयन के लिए भेजा गया है। 30 लाख रुपये जुटाकर तैयार कराईं छह स्मार्ट क्लास प्राचार्या शिल्पा गुप्ता ने विद्यालय में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था विकसित करने के लिए करीब 30 लाख रुपये का फंड जुटाया। इस राशि से विद्यालय में छह स्मार्ट क्लास तैयार कराई गईं। स्मार्ट क्लास के माध्यम से विद्यार्थियों को तकनीक आधारित और बेहतर शिक्षण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। विद्यालय में डिजिटल संसाधनों के विस्तार से पढ़ाई को अधिक रोचक और प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की चयन प्रक्रिया जारी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए केंद्र सरकार ने आवेदन और नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, 6 से 9 अगस्त के बीच चयनित शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों को ज्यूरी के सामने चयन प्रक्रिया के लिए सूचित किया जाना है। इसके बाद राष्ट्रीय ज्यूरी द्वारा चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इस लिहाज से शिल्पा गुप्ता का नामांकन चाईबासा और पश्चिमी सिंहभूम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। शिक्षा में नवाचार पर दिया जोर शिल्पा गुप्ता के नेतृत्व में विद्यालय में तकनीक आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने के साथ विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने पर जोर दिया गया है। स्मार्ट क्लास की स्थापना को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए नामांकन के बाद अब अंतिम चयन पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि उनका चयन होता है तो यह पश्चिमी सिंहभूम के शिक्षा क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
राजकीय श्रावणी मेला-2026 के दौरान बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने विशेष जांच अभियान चलाया। अभियान के दौरान 42.5 किलोग्राम संदिग्ध पेड़ा नष्ट किया गया, जबकि खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का उल्लंघन करने पर तीन प्रतिष्ठानों पर मौके पर ही जुर्माना लगाया गया। यह कार्रवाई उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया के निर्देश पर अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह अभिहित अधिकारी की निगरानी में की गई। जांच के लिए मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब (MFTL) का भी इस्तेमाल किया गया। 45 नमूनों की जांच, तीन संदिग्ध पाए गए अभियान के दौरान गंगा साह पेड़ा भंडार, गणेश पेड़ा भंडार, बैद्यनाथ पेड़ा भंडार, अन्नपूर्णा पेड़ा भंडार, महावीर पेड़ा भंडार, श्री गंगा साह पेड़ा भंडार, बाबा पेड़ा भंडार, मां अन्नपूर्णा भोजनालय, अजय भोजनालय और शिव होटल एंड रेस्टोरेंट समेत कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान पेड़ा के 45 नमूनों की जांच की गई। इनमें 42 नमूने खाद्य मानकों के अनुरूप पाए गए, जबकि तीन नमूने संदिग्ध मिले। इसके बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 42.5 किलोग्राम संदिग्ध पेड़ा मौके पर ही नष्ट करा दिया। तीन प्रतिष्ठानों पर ऑन-द-स्पॉट जुर्माना निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता मानकों के उल्लंघन पर गंगा साह पेड़ा भंडार, श्री गंगा साह पेड़ा भंडार और शिव होटल एंड रेस्टोरेंट पर दो-दो हजार रुपये का ऑन-द-स्पॉट जुर्माना लगाया गया। साथ ही सभी कारोबारियों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 का सख्ती से पालन करने और केवल गुणवत्ता मानकों के अनुरूप खाद्य सामग्री बेचने के निर्देश दिए गए। हर खेप की होगी जांच खाद्य सुरक्षा विभाग ने सभी पेड़ा विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे खोवा, पेड़ा और पनीर की प्रत्येक खेप की आयोडीन टिंचर से जांच करें। यदि किसी भी उत्पाद में स्टार्च या अन्य प्रकार की मिलावट की आशंका हो तो उसकी बिक्री तुरंत रोक दी जाए। विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में किसी भी प्रतिष्ठान में मिलावट या खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर उसका लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मेला समाप्त होने तक जारी रहेगा अभियान खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, श्रावणी मेला समाप्त होने तक बाबा बैद्यनाथ मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की नियमित जांच जारी रहेगी। इसका उद्देश्य देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है।