झारखंड

JSSC CGL परीक्षा रद्द होने से नौकरी पर संकट, नियुक्त कर्मचारियों में बढ़ी बेचैनी

anjali kumari अगस्त 18, 2026 0
JSSC CGL Exam Cancelled
JSSC CGL Exam Cancelled

रांची। झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार के एक फैसले ने पहले से नियुक्त कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की विशेष बैठक में JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया। इस फैसले के बाद परीक्षा के जरिए सरकारी नौकरी हासिल कर चुके कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

सरकार के इस निर्णय से वे अभ्यर्थी सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, जिन्हें JSSC CGL-2023 के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्ति मिल चुकी है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्ति मिलने के बाद लंबे समय से अपने-अपने विभागों में काम किया है। अब परीक्षा रद्द होने की घोषणा से उनकी नौकरी पर संकट मंडरा रहा है।

 

JSSC CGL से करीब 2 हजार लोगों को मिली थी नौकरी

 

JSSC CGL-2023 के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों को 30 दिसंबर 2025 को रांची के मोरहाबादी मैदान में नियुक्ति पत्र दिए गए थे। नियुक्ति के बाद कई कर्मचारी राज्य के अलग-अलग विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

 

इन नियुक्तियों में 847 सहायक प्रशाखा पदाधिकारी, 288 कनीय सचिवालय सहायक, 170 श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, 4 प्लानिंग असिस्टेंट, 191 प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, 249 प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और 178 अंचल निरीक्षक-सह-कानूनगो जैसे पद शामिल थे।

 

कई चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने नियुक्ति पाने के लिए लंबी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का सामना किया। कुछ अभ्यर्थियों ने दूसरे राज्यों में मिली नौकरी छोड़कर झारखंड में सेवा शुरू की थी। ऐसे में परीक्षा रद्द होने के फैसले ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

 

2024 में हुई थी JSSC CGL परीक्षा

 

JSSC ने JSSC CGL-2023 की परीक्षा जनवरी और फरवरी 2024 में आयोजित की थी। परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद अभ्यर्थियों का चयन हुआ और उन्हें विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्त किया गया।

 

अब सरकार की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने के बाद नियुक्त कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति है। कर्मचारी यह सवाल उठा रहे हैं कि नियुक्ति मिलने और लंबे समय से सरकारी सेवा में रहने के बाद उनके भविष्य का क्या होगा।

 

मुख्यमंत्री के सामने कर्मचारियों ने रखी थी मांग

 

कैबिनेट के फैसले से पहले प्रभावित कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने लिखित आवेदन देकर JSSC CGL परीक्षा रद्द नहीं करने की मांग रखी थी। कर्मचारियों ने सरकार से नियुक्त कर्मचारियों के हित में फैसला लेने की अपील की थी।

 

हालांकि, सरकार ने जांच में गड़बड़ी के संकेतों का हवाला देते हुए परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीजीएल परीक्षा की जांच के लिए गठित SIT और CID की रिपोर्ट में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे अनियमितता के संकेत मिलते हैं।

 

अब न्यायालय जाने की तैयारी

 

सरकार के फैसले के बाद कर्मचारियों में नाराजगी भी देखने को मिली। प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने रोजगार को बचाने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

कर्मचारियों ने मंगलवार को आगे की रणनीति तय करने की बात कही है। ऐसे में JSSC CGL परीक्षा रद्द करने का मामला अब सड़क से लेकर अदालत तक पहुंचने के आसार हैं।

 

TDPL से जुड़ी कई परीक्षाएं भी रद्द

 

सरकार ने केवल JSSC CGL ही नहीं, बल्कि TDPL द्वारा आयोजित कई JPSC-JSSC परीक्षाओं को भी रद्द करने का फैसला लिया है। इनमें 14वीं JPSC PT, झारखंड पात्रता परीक्षा (JET), सहायक लोक अभियोजक, इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज, सिविल जज जूनियर डिवीजन, वनरक्षक और PGT समेत कई परीक्षाएं शामिल हैं।

 

सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक आयोजित भर्ती परीक्षाओं की जांच कराने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए रिफॉर्म कमेटी के जरिए सुझाव लेने की भी बात कही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि JSSC CGL के जरिए नियुक्त कर्मचारियों की नौकरी का क्या होगा और सरकार इस पूरे मामले में आगे क्या कानूनी रास्ता अपनाएगी।

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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धनबाद में लेवी वसूलने पहुंचे अपराधियों से पुलिस की मुठभेड़, दो के पैर में लगी गोली

धनबाद। झारखंड के धनबाद में मंगलवार सुबह लेवी वसूली के लिए पहुंचे अपराधियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ हो गई। घटना बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के निरंकारी चौक और कुर्मीडीह के बीच हुई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दो अपराधियों के पैर में गोली लगी। घायल आरोपियों की पहचान इरफान आलम और नन्हे अंसारी के रूप में हुई है। दोनों को इलाज के लिए एसएनएमएमसीएच भेजा गया है।   लेवी लेने पहुंचे थे अपराधी   पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ अपराधी बरवाअड्डा इलाके में लेवी की रकम लेने पहुंचने वाले हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने निरंकारी चौक और कुर्मीडीह के बीच घेराबंदी कर दी।   बताया जा रहा है कि पुलिस की मौजूदगी का पता चलते ही अपराधियों ने वहां से भागने की कोशिश की। इसी दौरान पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ की स्थिति बन गई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दोनों अपराधियों के पैर में गोली लगी।   घायल इरफान आलम वासेपुर और नन्हे अंसारी पुटकी का रहने वाला बताया जा रहा है।   पुलिस ने दोनों को अस्पताल भेजा   गोली लगने के बाद दोनों अपराधियों को पुलिस ने कब्जे में लिया और इलाज के लिए एसएनएमएमसीएच भेजा। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। निरंकारी चौक से कुर्मीडीह तक अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।   पुलिस आसपास के इलाकों में भी तलाशी अभियान चला रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों के साथ कोई और अपराधी भी मौजूद था या नहीं।   गोपी खान से बातचीत का सामने आया कनेक्शन   धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार के अनुसार, दोनों आरोपी फोन पर गोपी खान से बातचीत कर रहे थे। पुलिस को आशंका है कि वे कथित तौर पर गोपी खान के कहने पर लेवी की रकम लेने पहुंचे थे।   पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि लेवी वसूली के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। मामले में गैंगस्टर के बेटे के नाम का कनेक्शन भी सामने आया है, जिसकी पुलिस जांच कर रही है।   लेवी नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश   मुठभेड़ के बाद पुलिस ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि लेवी वसूली से जुड़े नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। घायल आरोपियों से पूछताछ के बाद इस मामले में और नाम सामने आने की संभावना है।   फिलहाल दोनों आरोपियों का अस्पताल में इलाज चल रहा है और पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी है।

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रांची में ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार महिला और पुलिस की कार्रवाई
रांची में 5 लाख के ब्राउन शुगर के साथ महिला गिरफ्तार, पुलिस को देखकर भागने लगी थी आरोपी

रांची। नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ रांची पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जुमार पुल बस स्टैंड के पास से एक महिला को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके पास से 89.32 ग्राम ब्राउन शुगर, एक मोबाइल फोन और 20 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। बरामद ब्राउन शुगर की कीमत करीब 5 लाख रुपये बताई जा रही है।   गुप्त सूचना पर पुलिस ने बिछाया जाल   पुलिस को 16 अगस्त को सूचना मिली थी कि बिहार की ओर से एक महिला भारी मात्रा में ब्राउन शुगर लेकर रांची पहुंचने वाली है। सूचना के आधार पर वरीय पुलिस अधीक्षक को जानकारी दी गई। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक सदर के नेतृत्व में एक छापेमारी टीम गठित की गई। टीम जुमार पुल बस स्टैंड के पास पहुंची और महिला का इंतजार करने लगी। दोपहर करीब 3:10 बजे एक महिला ऑटो में अकेली बैठी दिखाई दी। पुलिस को अपनी ओर आते देखकर वह घबरा गई और ऑटो से उतरकर भागने लगी। पुलिस टीम ने महिला चौकीदार की मदद से उसे पकड़ लिया।   पर्स से मिला 89.32 ग्राम ब्राउन शुगर   पकड़े जाने के बाद महिला की तलाशी ली गई। पुलिस के अनुसार, उसके काले रंग के पर्स में रखे प्लास्टिक के पाउच से 89.32 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद हुई। इसके अलावा एक आई-टेल कंपनी का काला की-पैड मोबाइल और 20 हजार रुपये नकद भी जब्त किए गए। पूछताछ में महिला ने अपना नाम मुन्नी देवी (43) बताया। वह रांची के सदर थाना क्षेत्र के जतराटांड़ स्थित कोकर बाजार के देवी मंडप के पास रहने वाली बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में उसने रांची के अलग-अलग चौक-चौराहों पर ब्राउन शुगर की खरीद-बिक्री करने की बात स्वीकार की है।   एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज   पुलिस ने मामले में सदर (मेसरा) थाना कांड संख्या 384/26, दिनांक 16 अगस्त 2026 दर्ज किया है। आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21(बी), 22(बी), 23 और 29 के तहत कार्रवाई की गई है।   महिला के खिलाफ पहले से दर्ज हैं दो मामले   पुलिस के अनुसार, मुन्नी देवी के खिलाफ पहले से दो मामले दर्ज हैं। वर्ष 2024 में सदर थाना में कांड संख्या 496/2024 दर्ज हुआ था। इसके बाद वर्ष 2025 में सदर थाना कांड संख्या 632/2025 दर्ज किया गया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 111(2)(बी) और एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है।   20 हजार रुपये और मोबाइल भी जब्त   पुलिस ने आरोपी के पास से 500 रुपये के छह नोट, 200 रुपये के 35 नोट और 100 रुपये के 100 नोट बरामद किए। कुल नकद राशि 20 हजार रुपये है। इसके साथ मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है। कार्रवाई में सदर, कोतवाली, मेसरा और सुखदेवनगर थाना के पुलिस पदाधिकारी व जवान शामिल रहे। महिला चौकीदार कृति मुंडा ने आरोपी को पकड़ने में अहम भूमिका निभाई।

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
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