झारखंड

कमड़े के रसना सेवा संस्थान में एक दूजे के हुए 21 जोड़े

Anjali Kumari अप्रैल 27, 2026 0
Rasna Seva Sansthan wedding
Rasna Seva Sansthan wedding

समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता फैलाने और जरूरतमंद परिवारों की सहायता के उद्देश्य से रसना सेवा संस्थान के तत्वावधान में रविवार 26 अप्रैल को भव्य सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। इस आयोजन में कुल 21 जोड़ों का विवाह पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराया गया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान के निर्देशक सुखेर मुंडा के अथक प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं अध्यक्ष रोहित ठाकुर और कार्यकारी अध्यक्ष विनय कुमार निराला  के सहयोग से आयोजन को भव्य रूप दिया गया। कोषाध्यक्ष अरविन्द गुप्ता  और सचिव G. N. बाबू के योगदान को भी सराहा गया।
समारोह में स्थानीय महापौर रौशनी खलखो और उपमहापौर नीरज सिंह  विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए संस्थान की इस पहल की सराहना की और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।


सामूहिक विवाह में कन्या पक्ष को वस्त्र, घरेलू उपयोग के बर्तन और अन्य आवश्यक सामग्री उपहार स्वरूप प्रदान की गई, जबकि वर पक्ष को भी वस्त्र एवं उपहार दिए गए। इस पहल ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत दी।

इस आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। अनिकेत कुमार राज, कमलेश ठाकुर, मीना कुमारी, पूनम राय, चंदन कुमार सहित कई लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इस सफल आयोजन को लेकर क्षेत्र में खुशी का माहौल है और लोगों ने इसे दहेज उन्मूलन की दिशा में एक सराहनीय कदम बताया।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

झारखंड

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झारखंड की युवा फुटबॉल दिव्यानी लिंडा ने  AFC U-17 के लिए टीम इंडिया में बनाई जगह

रांची। रांची की युवा फुटबॉलर दिव्यानि लिंडा ने अपने शानदार प्रदर्शन और कड़ी मेहनत के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनका चयन AFC U-17 Women’s Asian Cup के लिए भारतीय टीम में हुआ है। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि पूरे झारखंड और रांची जिले के लिए गर्व का क्षण है।   संघर्ष भरे सफर से हासिल की सफलता दिव्यानी लिंडा कांके प्रखंड के चंदरा गांव की रहने वाली हैं। सीमित संसाधनों, खेल सुविधाओं की कमी और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। कठिन परिस्थितियों में भी उनका आत्मविश्वास और समर्पण उन्हें आगे बढ़ाता रहा, जिसका परिणाम आज राष्ट्रीय स्तर पर चयन के रूप में सामने आया है।   रांची की पहली महिला खिलाड़ी बनीं दिव्यानी रांची की पहली महिला फुटबॉलर हैं जिन्हें इस प्रतिष्ठित एशियाई टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है। साथ ही, झारखंड से इस बार कुल चार खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जो राज्य के खेल इतिहास के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।   स्टार वॉरियर्स क्लब और कोच का योगदान दिव्यानी Star Warriors Football Club की प्रमुख खिलाड़ी हैं। उनकी सफलता में कोच अनवरूल हक (बबलू) की अहम भूमिका रही है, जिन्होंने उनकी प्रतिभा को निखारने में लगातार मार्गदर्शन दिया। क्लब और स्थानीय समुदाय ने भी उन्हें हर संभव समर्थन दिया।   युवाओं के लिए प्रेरणा बनीं दिव्यानी दिव्यानी की यह उपलब्धि उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि लगन और मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

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Bokaro Treasury Scam: CID की बड़ी कार्रवाई, होमगार्ड जवान गिरफ्तार

बोकारो। बोकारो में हुए ट्रेजरी घोटाले मामले में Criminal Investigation Department (CID) ने बड़ी कार्रवाई की है। यह घोटाला सरकारी फंड में गड़बड़ी और फर्जी निकासी से जुड़ा बताया जा रहा है। इसी कड़ी में CID ने एक होम गार्ड जवान को गिरफ्तार किया है।जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसियां पिछले कुछ समय से ट्रेजरी से हो रहे संदिग्ध लेन-देन पर नजर रखे हुए थीं। इसी दौरान उन्हें कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिसके आधार पर यह गिरफ्तारी की गई। आरोप है कि सरकारी खजाने से फर्जी दस्तावेजों और प्रक्रियाओं के जरिए पैसे निकाले गए थे।   CID खंगाल रही पूरे नेटवर्क की कड़ियां CID की टीम अब इस घोटाले के पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। जांच का फोकस यह जानने पर है कि पैसे की निकासी किस स्तर पर हुई और किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही।   डिजिटल लेन-देन और सिस्टम की भी जांच सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में डिजिटल ट्रांजैक्शन और ट्रेजरी से जुड़े तकनीकी सिस्टम की भी बारीकी से जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि फर्जीवाड़ा किस तरीके से किया गया और इसमें किस तरह की तकनीकी खामियों का फायदा उठाया गया।   आने वाले दिनों में और गिरफ्तारी संभव अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई शुरुआती चरण में है और जांच आगे बढ़ने के साथ कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। प्रशासन इस घोटाले की पूरी सच्चाई सामने लाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।

Anjali Kumari अप्रैल 27, 2026 0
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Jharkhand Weather: झारखंड में बदलेगा मौसम का मिजाज, 5 डिग्री तक लुढ़केगा पारा

रांची। झारखंड में भीषण गर्मी के बीच अब मौसम करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, आज यानी 27 अप्रैल से राज्य के कई हिस्सों में तेज हवा, बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है। राजधानी रांची सहित कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान में लगभग 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट हो सकती है, जिससे गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।    रांची में तापमान करीब 41 डिग्री सेल्सियस रहा रविवार को राज्य के कई जिलों में तापमान काफी ऊंचा दर्ज किया गया। रांची में तापमान करीब 41 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि पलामू में सबसे अधिक 44.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा सरायकेला में 42.5 डिग्री, पूर्वी सिंहभूम में 41.9 डिग्री और गुमला में 40.4 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। वहीं बोकारो और जमशेदपुर जैसे क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम तापमान दर्ज हुआ।   इन जिलों में ज्यादा असर की संभावना मौसम विभाग के अनुसार, 27 अप्रैल को संताल परगना, रांची, बोकारो और हजारीबाग में मौसम अधिक प्रभावित रहेगा। इन क्षेत्रों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, साथ ही गरज-चमक और वज्रपात की भी आशंका है। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है। 28 और 29 अप्रैल को रांची और कोल्हान क्षेत्र में इसी तरह का मौसम बना रहेगा। वहीं 30 अप्रैल से 2 मई तक पूरे झारखंड में बारिश, तेज हवाओं और बादलों का प्रभाव जारी रहने की संभावना है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने और मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

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