झारखंड

चांडिल पितकी ओवरब्रिज का 22 अगस्त को उद्घाटन

चांडिल के पितकी रेलवे ओवरब्रिज का 22 अगस्त को होगा उद्घाटन, जाम से मिलेगी बड़ी राहत

ranjan kumar tiwari अगस्त 21, 2026 0
चांडिल के पितकी रेलवे ओवरब्रिज का तैयार हुआ निर्माण
पितकी रेलवे ओवरब्रिज 22 अगस्त को होगा शुरू

चांडिल। चांडिल के लोगों को लंबे समय से चली आ रही जाम की समस्या से अब राहत मिलने वाली है। पितकी रेलवे ओवरब्रिज बनकर तैयार हो गया है और इसका 22 अगस्त को उद्घाटन किया जाएगा। ओवरब्रिज शुरू होने के बाद पितकी रेलवे फाटक पर ट्रेनों के गुजरने के दौरान लगने वाले लंबे जाम से लोगों को निजात मिलने की उम्मीद है।

ओवरब्रिज के चालू होने से टाटा-पुरुलिया-धनबाद-बोकारो मार्ग पर आवागमन आसान होगा। रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों, स्कूली बच्चों, कर्मचारियों और कारोबारियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।

 

रेलवे फाटक पर खत्म होगी जाम की समस्या

 

 

पितकी रेलवे फाटक पर ट्रेन आने के समय फाटक बंद होने से सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग जाती थी। कई बार जाम चांडिल से चौका-कांड्रा मार्ग तक पहुंच जाता था। ओवरब्रिज शुरू होने के बाद सड़क और रेल यातायात अलग-अलग हो जाएगा, जिससे वाहनों को फाटक खुलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

 

 

टाटा-पुरुलिया मार्ग पर सफर होगा आसान

 

 

पितकी ओवरब्रिज के चालू होने से टाटा, पुरुलिया, धनबाद और बोकारो की ओर आने-जाने वाले लोगों को बड़ी सुविधा मिलेगी। इससे समय और ईंधन की बचत के साथ आपातकालीन सेवाओं के वाहनों की आवाजाही भी सुगम होने की उम्मीद है।

 

22 अगस्त से पितकी रेलवे ओवरब्रिज के शुरू होने के बाद चांडिल क्षेत्र की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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Solar panels generating renewable energy for Tata Steel in Jamshedpur, Jharkhand
टाटा स्टील को 50 मेगावाट सौर बिजली खरीदने की मंजूरी, 2.54 रुपये प्रति यूनिट होगी दर

जमशेदपुर: झारखंड में औद्योगिक क्षेत्र के लिए हरित ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने टाटा स्टील को भारतीय सौर ऊर्जा निगम से 50 मेगावाट सौर बिजली खरीदने की मंजूरी दे दी है। यह बिजली 2.54 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदी जाएगी। इस फैसले से टाटा स्टील को अपने नवीकरणीय ऊर्जा खरीद दायित्व यानी आरपीओ को पूरा करने में मदद मिलेगी। जेएसईआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नवनीत कुमार और सदस्य कानून महेंद्र प्रसाद की पीठ ने केस संख्या 09/2026 में सुनवाई के बाद टाटा स्टील और एसईसीआई के बीच पावर सेल एग्रीमेंट को स्वीकृति प्रदान की। 2.54 रुपये प्रति यूनिट होगी बिजली की कीमत स्वीकृत समझौते के तहत टाटा स्टील 2.54 रुपये प्रति यूनिट की दर से 50 मेगावाट सौर बिजली खरीदेगी। इसके अलावा मध्यस्थ खरीदार की भूमिका निभाने के लिए भारतीय सौर ऊर्जा निगम को 0.07 रुपये प्रति यूनिट ट्रेडिंग मार्जिन दिया जाएगा। आयोग ने माना कि प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए न्यूनतम दर पर हरित ऊर्जा उपलब्ध कराना व्यापक जनहित में है। इसी आधार पर आयोग ने समझौते को मंजूरी देते हुए मामले का निष्पादन कर दिया। आरपीओ लक्ष्य पूरा करने में मिलेगी मदद सौर बिजली की यह खरीद टाटा स्टील के लिए केवल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है। इससे कंपनी को सरकार द्वारा निर्धारित नवीकरणीय ऊर्जा खपत के लक्ष्यों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। नियामक आयोग की 2024 की नियमावली के अनुसार वितरण लाइसेंसधारियों के लिए नवीकरणीय ऊर्जा खपत का लक्ष्य लगातार बढ़ाया गया है। यह लक्ष्य 2024-25 में 29.91 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 33.01 प्रतिशत और वर्ष 2029-30 तक 43.33 प्रतिशत किया जाना है। ऐसे में 50 मेगावाट सौर बिजली की खरीद टाटा स्टील के लिए अपने आरपीओ दायित्व को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 2025 में हुआ था टाटा स्टील और एसईसीआई के बीच समझौता टाटा स्टील और भारतीय सौर ऊर्जा निगम के बीच 17 अक्टूबर 2025 को इंटर स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम योजना के तहत समझौता हुआ था। इसके बाद एसईसीआई ने 50 मेगावाट सौर ऊर्जा की आपूर्ति के लिए 2 जनवरी 2026 को एज्योर सोलर प्राइवेट लिमिटेड के साथ पावर पर्चेज एग्रीमेंट किया। नियामक आयोग की मंजूरी के बाद अब इस व्यवस्था के तहत टाटा स्टील को सौर ऊर्जा की आपूर्ति का रास्ता साफ हो गया है। पहले से नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर दे रही टाटा स्टील टाटा स्टील पहले से ही नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने पर काम कर रही है। कंपनी ने टाटा पावर के सहयोग से 41 मेगावाट का सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट विकसित किया है। इस परियोजना में जमशेदपुर क्षेत्र के लिए रूफटॉप, ग्राउंड-माउंटेड और फ्लोटिंग सोलर इंस्टॉलेशन के माध्यम से लगभग 22 मेगावाट पीक क्षमता की सौर ऊर्जा उपलब्ध कराने की व्यवस्था शामिल है। 50 मेगावाट अतिरिक्त सौर बिजली की खरीद से टाटा स्टील की हरित ऊर्जा हिस्सेदारी बढ़ने के साथ औद्योगिक क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह कदम कंपनी की ऊर्जा जरूरतों और पर्यावरणीय लक्ष्यों, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

surbhi अगस्त 21, 2026 0
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केंद्र की योजना में सांसद की अनदेखी पर विवाद, पूर्व विधायक ने रुकवाया निर्माण कार्य

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HEC को पुनर्जीवन की उम्मीद: संसदीय समिति ने श्रमिक नेताओं को दिया भरोसा, केंद्र को देगी सकारात्मक रिपोर्ट

रांची: भारी वित्तीय संकट, बकाया वेतन और जर्जर मशीनों से जूझ रहे हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (HEC) के लिए संसदीय समिति का दौरा नई उम्मीद लेकर आया है। राज्यसभा की संसदीय समिति ने HEC मुख्यालय पहुंचकर श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और कंपनी के पुनरुद्धार से जुड़ी मांगों पर सकारात्मक रुख का भरोसा दिया। श्रमिक नेताओं ने समिति के सामने पुनरुद्धार पैकेज, मशीनों के आधुनिकीकरण, बकाया वेतन भुगतान, बैंक गारंटी और 500 करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी ऋण मुक्त उपलब्ध कराने जैसी मांगें रखीं। समिति के अध्यक्ष तिरुचि शिवा ने आश्वासन दिया कि इन मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को सकारात्मक रिपोर्ट सौंपी जाएगी। श्रमिक नेताओं ने रखी HEC को बचाने की मांग हटिया मजदूर यूनियन के भवन सिंह, हटिया प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन के लीलाधर सिंह और हटिया मजदूर लोक मंच के रामकुमार नायक समेत श्रमिक नेताओं ने समिति के सामने HEC की मौजूदा स्थिति रखी। उन्होंने कहा कि कंपनी को संकट से बाहर निकालने के लिए केवल आर्थिक पैकेज ही नहीं, बल्कि पुरानी मशीनों का आधुनिकीकरण और उत्पादन क्षमता बढ़ाना भी जरूरी है। कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित वेतन भुगतान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। HEC ऑफिसर्स एसोसिएशन की ओर से 34 माह के बकाया वेतन का भुगतान जल्द कराने की मांग की गयी। वहीं हटिया कामगार यूनियन ने खराब मशीनों की स्थिति और आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर समिति का ध्यान खींचा। आठ श्रमिक संगठनों ने रखीं मांगें संसदीय समिति के समक्ष HEC के आठ श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याएं और मांगें रखीं। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री रमाशंकर प्रसाद ने कर्मचारियों को नियमित रूप से हर महीने वेतन देने तथा HEC परिसर के स्कूलों में कर्मचारियों के बच्चों के लिए रियायत दर पर नामांकन की मांग की। इसके अलावा HEC कर्मचारियों के लिए पारस अस्पताल में ओपीडी सुविधा बहाल करने का मुद्दा भी उठाया गया। कंपनी प्रबंधन की ओर से स्कूल प्रबंधन से बात कर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया। जमीन, मशीनरी और देनदारियों की भी हुई समीक्षा समिति ने HEC के सीएमडी और निदेशकों के साथ बैठक कर कंपनी की संपत्तियों और औद्योगिक ढांचे की स्थिति की जानकारी ली। बैठक में HEC की जमीन, खाली भूखंड, अतिक्रमण और स्वामित्व से जुड़े मामलों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही प्लांट और मशीनरी की मौजूदा स्थिति, उत्पादन सुविधाओं, क्षमता के इस्तेमाल, आधुनिकीकरण की संभावनाओं और कंपनी की देनदारियों की भी समीक्षा की गयी। राज्यपाल से भी मिले समिति के सदस्य संसदीय समिति के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद तिरुचि शिवा, HEC पुनरुद्धार संबंधी उपसमिति के संयोजक एवं लोकसभा सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी समेत अन्य सदस्यों ने राजभवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की। समिति के सदस्यों ने राज्यपाल को HEC की मौजूदा स्थिति और दौरे के दौरान सामने आए मुद्दों की जानकारी दी। राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने भी HEC को झारखंड का महत्वपूर्ण औद्योगिक संस्थान बताते हुए केंद्र से समिति की सिफारिशों को गंभीरता से लागू करने की मांग की। 10 हजार करोड़ के पैकेज की मांग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने HEC के पुनरुद्धार के लिए केंद्र से 10 हजार करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की। उन्होंने केंद्र पर HEC की जमीन और परिसंपत्तियों को बेचने की योजना बनाने का आरोप लगाया। अब कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों की नजर संसदीय समिति की रिपोर्ट और केंद्र सरकार के अगले कदम पर है। यदि समिति की सिफारिशों के अनुरूप आर्थिक सहायता, आधुनिकीकरण और वेतन भुगतान की दिशा में ठोस फैसला होता है, तो लंबे संकट से गुजर रहे HEC को दोबारा पटरी पर लाने की उम्मीद मजबूत हो सकती है।  

surbhi अगस्त 21, 2026 0
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रांची में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाते नगर निगम की टीम
रांची में अतिक्रमण हटाने पर हंगामा, अमीन से धक्का-मुक्की; सरकारी जमीन पर बना दो मंजिला मकान ध्वस्त

रांची। सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए रांची नगर निगम की ओर से चलाए गए अभियान के दौरान गुरुवार को जमकर हंगामा हुआ। पीएचईडी चौक से बूटी मोड़ तक चले अभियान में नगर निगम की टीम सरकारी जमीन पर बने दो मंजिला मकान को हटाने पहुंची थी। कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। विरोध के दौरान बड़गाईं अंचल के अमीन के साथ धक्का-मुक्की की गई। वहीं, पीएचईडी की ओर से नगर निगम को उपलब्ध कराया गया नक्शा भी फाड़ दिया गया। करीब एक घंटे तक मौके पर हंगामा चलता रहा। हालांकि, विरोध के बावजूद नगर निगम की टीम ने कार्रवाई जारी रखी और जेसीबी की मदद से सरकारी जमीन पर बने दो मंजिला मकान को ध्वस्त कर दिया।   नोटिस के बाद भी नहीं हटाया गया था अतिक्रमण     नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई से पहले संबंधित अतिक्रमणकारियों को नोटिस दिया गया था। इसके बावजूद अवैध निर्माण नहीं हटाया गया। इसके बाद निगम की इंफोर्समेंट टीम ने कार्रवाई करते हुए मकान को तोड़ दिया। अभियान के दौरान दो अन्य अवैध संरचनाओं के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।     पुलिस सहयोग को लेकर निगमकर्मियों ने जताई नाराजगी     कार्रवाई के दौरान निगम के अमीन और इंफोर्समेंट अधिकारियों से लोगों की बहस होती रही। मौके पर पीसीआर वैन और पुलिसकर्मी मौजूद थे। निगमकर्मियों का आरोप है कि पुलिस की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने के दौरान पर्याप्त पुलिस सहयोग नहीं मिलने से ऐसे अभियान चलाने में परेशानी हो सकती है।     अलबर्ट एक्का चौक पर भी कार्रवाई     अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत नगर निगम की टीम ने अलबर्ट एक्का चौक पर भी कार्रवाई की। यहां अवैध होर्डिंग और लंबे समय से अनुपयोगी पड़े पुराने ट्रैफिक बूथ को हटाया गया। इसके अलावा मेन रोड चौड़ीकरण और पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए लगी पुरानी लोहे की रेलिंग को भी काटकर हटा दिया गया।   नगर निगम का कहना है कि इन अवैध और अनुपयोगी संरचनाओं को हटाने से सड़क पर यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और पैदल यात्रियों के लिए भी अधिक जगह उपलब्ध होगी।

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