महिलाओं पर AI का असर पुरुषों से ज्यादा पड़ने की आशंका
Artificial Intelligence तेजी से दुनिया भर के कामकाज और नौकरियों का स्वरूप बदल रहा है। बड़ी टेक कंपनियां लगातार AI में निवेश कर रही हैं, जिसके चलते कई जगह कर्मचारियों की छंटनी भी देखने को मिल रही है। अब एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि AI की वजह से महिलाओं की नौकरियों पर पुरुषों की तुलना में ज्यादा खतरा मंडरा सकता है।
अमेरिका की संस्था National Partnership for Women & Families की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाएं उन नौकरियों में बड़ी संख्या में काम कर रही हैं जिन्हें भविष्य में AI सबसे ज्यादा प्रभावित कर सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के कुल वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 47 प्रतिशत है, लेकिन AI से सबसे ज्यादा प्रभावित मानी जा रही 15 नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 83 प्रतिशत तक है।
इन नौकरियों में सचिव, रिसेप्शनिस्ट, ऑफिस क्लर्क और इंश्योरेंस एजेंट जैसे प्रोफेशन शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 60 लाख महिलाएं ऐसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं, जहां AI के कारण नौकरी पर खतरा बढ़ सकता है।
स्टडी में बताया गया कि नर्सिंग, चाइल्ड केयर और होम हेल्थ केयर जैसे क्षेत्रों में अभी पूरी तरह ऑटोमेशन संभव नहीं है, क्योंकि इन कामों में इंसानी भावनाएं, देखभाल और व्यक्तिगत संपर्क जरूरी होता है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई कि इन क्षेत्रों में भी AI आधारित निगरानी और मैनेजमेंट सिस्टम कर्मचारियों के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं की संख्या अभी भी AI डेवलपमेंट, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और टेक लीडरशिप जैसी भूमिकाओं में काफी कम है।
स्टडी में कहा गया कि AI सिस्टम कैसे डिजाइन होंगे, उनका इस्तेमाल कैसे होगा और उन्हें कैसे नियंत्रित किया जाएगा, इन फैसलों में महिलाओं की भागीदारी सीमित है। इसका असर उनके कार्यस्थल पर भी पड़ सकता है।
रिपोर्ट में AI सिस्टम में जेंडर बायस को लेकर भी चिंता जताई गई है। एक रिसर्च का उदाहरण देते हुए बताया गया कि जब ChatGPT से पुरुष और महिला नामों के आधार पर रिज्यूमे तैयार करवाए गए, तो महिलाओं के रिज्यूमे को कम अनुभवी और कम प्रभावशाली दिखाया गया।
बाद में जब AI से उन्हीं रिज्यूमे का मूल्यांकन कराया गया, तो पुरुष उम्मीदवारों को ज्यादा बेहतर रेटिंग मिली।
स्टडी के अनुसार, कार्यस्थल पर AI टूल्स इस्तेमाल करने पर महिलाओं को पुरुषों की तुलना में ज्यादा आलोचना का सामना करना पड़ सकता है।
एक रिसर्च में पाया गया कि जब किसी महिला के बारे में बताया गया कि उसने AI की मदद से काम किया है, तो उसकी क्षमता को पुरुषों की तुलना में ज्यादा कम आंका गया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि AI ने महिलाओं को ऑनलाइन टारगेट करने के नए तरीके पैदा कर दिए हैं। AI आधारित डीपफेक और फर्जी तस्वीरों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
रिपोर्ट में xAI के चैटबॉट Grok का भी जिक्र किया गया, जिसे लेकर पहले विवाद हो चुका है।
स्टडी में दावा किया गया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं के बीच जनरेटिव AI टूल्स का इस्तेमाल लगभग 25 प्रतिशत कम है।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के बीच AI उपयोग तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार 2022 से 2024 के बीच ChatGPT के करीब 42 प्रतिशत यूजर्स महिला नामों से जुड़े थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI का असर पूरी तरह तय नहीं है और आने वाले समय में सरकारी नीतियां, कंपनियों के नियम और कार्यस्थल की व्यवस्था यह तय करेगी कि इसका प्रभाव महिलाओं पर कितना पड़ेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। कर्मचारी चयन आयोग (Staff Selection Commission) ने SSC स्टेनोग्राफर ग्रेड C और D भर्ती 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया आज यानी 15 मई 2026 को समाप्त कर दी है। ऐसे में योग्य उम्मीदवारों के लिए यह अंतिम मौका है। इस भर्ती के तहत कुल 731 पदों पर नियुक्ति की जाएगी, जिसके लिए देशभर से 12वीं पास अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। भर्ती से जुड़ी मुख्य जानकारी भर्ती संस्था: SSC (Staff Selection Commission) पद: Stenographer Grade C & D कुल पद: 731 योग्यता: 12वीं पास आवेदन की अंतिम तिथि: 15 मई 2026 (रात 11:00 बजे तक) आधिकारिक वेबसाइट: ssc.gov.in महत्वपूर्ण तिथियां आवेदन शुरू: 24 अप्रैल 2026 अंतिम तिथि: 15 मई 2026 फीस जमा करने की अंतिम तिथि: 16 मई 2026 करेक्शन विंडो: 20 से 21 मई 2026 परीक्षा संभावित: जुलाई – अगस्त 2026 कौन कर सकता है आवेदन? इस भर्ती के लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं पास निर्धारित की गई है। आयु सीमा: ग्रेड C: 18 से 30 वर्ष ग्रेड D: 18 से 27 वर्ष आरक्षित वर्ग को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट मिलेगी परीक्षा पैटर्न (SSC Stenographer Exam Pattern) भर्ती प्रक्रिया दो चरणों में होगी: 1. कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) कुल प्रश्न: 200 इंग्लिश लैंग्वेज और कॉम्प्रिहेंशन: 100 प्रश्न जनरल इंटेलिजेंस और रीजनिंग: 50 प्रश्न जनरल अवेयरनेस: 50 प्रश्न नेगेटिव मार्किंग: 0.25 अंक 2. स्किल टेस्ट (Stenography Test) ग्रेड C: 100 शब्द प्रति मिनट ग्रेड D: 80 शब्द प्रति मिनट आवेदन कैसे करें? उम्मीदवार निम्न स्टेप्स फॉलो करके आवेदन कर सकते हैं: आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर जाएं नया रजिस्ट्रेशन करें लॉगिन कर आवेदन फॉर्म भरें आवश्यक विवरण और दस्तावेज अपलोड करें फीस जमा करें फॉर्म सबमिट कर प्रिंट निकाल लें अंतिम मौका, जल्दी करें आवेदन आज आवेदन की अंतिम तिथि होने के कारण वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक हो सकता है। ऐसे में उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि जल्द से जल्द आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें ताकि किसी भी तकनीकी समस्या से बचा जा सके।
बदल रही है नौकरी और सफलता की परिभाषा एक समय था जब प्रमोशन को करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता था। ऊंचा पद, ज्यादा वेतन और जिम्मेदारी सफलता की पहचान समझे जाते थे। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। बढ़ते तनाव, डिजिटल दबाव और बिगड़ते वर्क-लाइफ बैलेंस के बीच कई कर्मचारी प्रमोशन लेने से भी बचने लगे हैं। आज बड़ी संख्या में प्रोफेशनल्स यह सोचने लगे हैं कि क्या ज्यादा पद और सैलरी वास्तव में मानसिक शांति और निजी जिंदगी की कीमत पर सही है। कर्मचारियों की संतुष्टि में आई बड़ी गिरावट Gallup की State of the Global Workplace 2026 रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में वैश्विक कर्मचारी जुड़ाव (Employee Engagement) घटकर सिर्फ 20 प्रतिशत रह गया। यह 2020 के बाद सबसे निचला स्तर बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कर्मचारियों में बढ़ती थकान और असंतोष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर की उत्पादकता का नुकसान हुआ। प्रमोशन अब इनाम नहीं, बोझ जैसा क्यों लग रहा? विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के बाद कर्मचारियों की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। अब लोग केवल पद और वेतन नहीं, बल्कि मानसिक शांति, लचीलापन और निजी समय को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। Instahyre के को-फाउंडर सरबोजित मलिक के मुताबिक आज के कर्मचारी काम में अर्थ, स्वतंत्रता और संतुलन चाहते हैं। उनका कहना है कि प्रमोशन की खुशी कुछ समय के लिए रहती है, लेकिन उसके साथ आने वाला तनाव लंबे समय तक बना रहता है। डिजिटल वर्क कल्चर ने बढ़ाया दबाव वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल कार्य संस्कृति के बाद कर्मचारियों पर “हमेशा उपलब्ध रहने” का दबाव काफी बढ़ गया है। सीनियर पदों पर देर रात कॉल, लगातार ईमेल और निजी जीवन में काम का दखल आम हो गया है। Biz Staffing Comrade Pvt Ltd के मैनेजिंग पार्टनर पुनीत अरोड़ा के अनुसार आज प्रमोशन का मतलब कई लोगों के लिए ज्यादा काम और कम निजी समय बन गया है। उन्होंने बताया कि कई कर्मचारी अब मानसिक स्वास्थ्य और परिवार के समय को प्राथमिकता देते हुए नेतृत्व वाली भूमिकाएं तक ठुकरा रहे हैं। कंपनियों को बदलनी होगी सोच? विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को करियर ग्रोथ की पारंपरिक सोच बदलनी होगी। केवल लंबे घंटे काम करने और लगातार उपलब्ध रहने को सफलता मानना अब कर्मचारियों को स्वीकार नहीं है। अब कर्मचारी ऐसे प्रमोशन चाहते हैं जिनमें– बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान लचीलापन सपोर्टिव कार्य संस्कृति वास्तविक नेतृत्व स्वतंत्रता जैसी सुविधाएं भी शामिल हों। भविष्य में कैसी होगी करियर ग्रोथ? कॉर्पोरेट दुनिया में अब सफलता की परिभाषा बदल रही है। कर्मचारी अब सिर्फ बड़ी सैलरी नहीं, बल्कि बेहतर जीवन गुणवत्ता भी चाहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में वही कंपनियां सफल होंगी जो कर्मचारियों को केवल पद नहीं, बल्कि संतुलित और स्वस्थ कार्य वातावरण भी देंगी। अब सवाल यह नहीं रह गया कि लोग आगे बढ़ना चाहते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या करियर ग्रोथ बिना थकान और मानसिक दबाव के संभव है।
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। Uttar Pradesh Cooperative Institutional Service Board (UPCISB) ने वर्ष 2026 के लिए व्यापक भर्ती अभियान की घोषणा की है। इस भर्ती के तहत कुल 2085 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, जिसमें बैंकिंग, नॉन-बैंकिंग और टेक्निकल क्षेत्रों के विविध पद शामिल हैं। यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए खास अवसर है, जो वित्तीय संस्थानों या तकनीकी सेवाओं में अपना करियर बनाना चाहते हैं। आवेदन प्रक्रिया 25 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 15 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। किन-किन पदों पर भर्ती? इस भर्ती अभियान के तहत कई महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति की जाएगी: बैंकिंग सर्विस: क्लर्क, कैशियर, जूनियर मैनेजर नॉन-बैंकिंग सर्विस: एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट, ऑफिस मैनेजर टेक्निकल सर्विस: आईटी ऑफिसर, सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से जुड़े पद वैकेंसी का पूरा विवरण मैनेजर – 65 पद जूनियर मैनेजर – 486 पद बैंक सहायक / कैशियर – 887 पद कंप्यूटर मैनेजर – 10 पद जनरल मैनेजर – 42 पद अकाउंटेंट – 24 पद असिस्टेंट अकाउंटेंट – 34 पद अकाउंट क्लर्क – 2 पद स्टेनोग्राफर – 23 पद जूनियर असिस्टेंट – 45 पद टाइपिस्ट – 71 पद असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल) – 32 पद असिस्टेंट इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) – 2 पद जूनियर इंजीनियर (सिविल) – 211 पद जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) – 7 पद योग्यता और आयु सीमा बैंकिंग पदों के लिए किसी भी विषय में स्नातक (Graduation) आवश्यक है, जबकि कुछ पदों पर कॉमर्स या गणित पृष्ठभूमि को प्राथमिकता दी जा सकती है। टेक्निकल पदों के लिए संबंधित क्षेत्र में बीटेक या डिप्लोमा अनिवार्य होगा। आयु सीमा से जुड़ी विस्तृत जानकारी आधिकारिक नोटिफिकेशन में उपलब्ध है। कैसे करें आवेदन? उम्मीदवार UPCISB Official Website पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया इस प्रकार है: वेबसाइट पर जाएं और भर्ती लिंक पर क्लिक करें नया रजिस्ट्रेशन करें लॉगिन कर आवेदन फॉर्म भरें जरूरी दस्तावेज अपलोड करें ऑनलाइन फीस जमा करें फॉर्म सबमिट कर प्रिंट निकाल लें क्यों खास है यह भर्ती? इतनी बड़ी संख्या में पदों की घोषणा यह दर्शाती है कि सहकारी बैंकिंग सेक्टर में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। यह भर्ती न केवल फ्रेशर्स बल्कि अनुभवी उम्मीदवारों के लिए भी एक बड़ा अवसर है।