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UP Police Cut Off 2026

UP Police Constable Cut Off 2026: क्या यूपी एसआई की तरह बढ़ेगी सिपाही भर्ती की कटऑफ? एक्सपर्ट ने बताया सेफ स्कोर

surbhi जून 15, 2026 0
Candidates appearing for UP Police Constable Exam 2026 while discussing expected cut-off marks.
UP Police Constable Cut Off 2026 Expected Score

उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2026 की लिखित परीक्षा 8, 9 और 10 जून को छह शिफ्टों में आयोजित की जा चुकी है। 32,679 पदों के लिए आयोजित इस भर्ती में 28 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जबकि 21 लाख से ज्यादा उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए। अब परीक्षा समाप्त होने के बाद सबसे बड़ा सवाल संभावित कटऑफ को लेकर उठ रहा है।

कई अभ्यर्थी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर (UPSI) 2025 की तरह इस बार कांस्टेबल भर्ती की कटऑफ भी काफी ऊंची जा सकती है। इस विषय पर Careerwill के शिक्षक मोहित शर्मा ने विस्तार से अपनी राय दी है।

क्या यूपी पुलिस कांस्टेबल की कटऑफ बहुत हाई जाएगी?

मोहित शर्मा के अनुसार, यूपी एसआई भर्ती और कांस्टेबल भर्ती की परिस्थितियां पूरी तरह अलग हैं। उनका कहना है कि यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती की कटऑफ यूपी एसआई 2025 जैसी असामान्य रूप से ऊंची जाने की संभावना कम है।

इसके पीछे ये प्रमुख कारण हैं:

1. पदों की संख्या काफी ज्यादा

यूपी एसआई भर्ती में केवल 4,543 पद थे, जबकि कांस्टेबल भर्ती में 32,679 पद हैं। ज्यादा रिक्तियों के कारण चयन का दायरा बड़ा रहेगा और अधिक उम्मीदवार अगले चरण तक पहुंच सकेंगे।

2. फिजिकल के लिए बड़ी संख्या में उम्मीदवार होंगे शॉर्टलिस्ट

एक्सपर्ट के मुताबिक, शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के लिए लगभग 75,000 से 80,000 अभ्यर्थियों को बुलाया जा सकता है।

3. कांस्टेबल परीक्षा का स्तर अपेक्षाकृत कठिन रहा

यूपी एसआई परीक्षा का पेपर अपेक्षाकृत आसान था, जिसके कारण उम्मीदवारों के अंक अधिक आए और कटऑफ भी बढ़ गई। वहीं कांस्टेबल भर्ती की परीक्षा में मानसिक अभिरुचि, कथन-निष्कर्ष और गणित के प्रश्न लंबे तथा समय लेने वाले थे। इससे औसत प्रयास प्रभावित हुआ और मेरिट संतुलित रहने की संभावना बढ़ गई।

मोहित शर्मा का कहना है कि केवल यूपी एसआई 2025 की कटऑफ देखकर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि दोनों परीक्षाओं की चयन प्रक्रिया और रिक्तियों में बड़ा अंतर है।

कितना स्कोर माना जा रहा है सुरक्षित?

एक्सपर्ट के अनुसार, यदि किसी उम्मीदवार के लगभग 125 प्रश्न सही हैं और कुल अंक 250 से ऊपर बन रहे हैं, तो उसे सुरक्षित स्थिति में माना जा सकता है।

ऐसे अभ्यर्थियों को अब लिखित परीक्षा की चिंता छोड़कर अगले चरण यानी:

  • डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन
  • शारीरिक मानक परीक्षण (PST)
  • शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET)

की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।

यूपी पुलिस फिजिकल टेस्ट के मानक

पुरुष अभ्यर्थियों के लिए

  • सामान्य, ओबीसी और एससी वर्ग: न्यूनतम लंबाई 168 सेमी
  • एसटी वर्ग: न्यूनतम लंबाई 160 सेमी

महिला अभ्यर्थियों के लिए

  • सामान्य, ओबीसी और एससी वर्ग: न्यूनतम लंबाई 152 सेमी
  • एसटी वर्ग: न्यूनतम लंबाई 147 सेमी
  • न्यूनतम वजन: 40 किलोग्राम

रनिंग टेस्ट

पुरुष उम्मीदवार

  • 4.8 किलोमीटर दौड़
  • समय सीमा: 25 मिनट

महिला उम्मीदवार

  • 2.4 किलोमीटर दौड़
  • समय सीमा: 14 मिनट
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार शिक्षक भर्ती (TRE-4) का बड़ा ऐलान, 32,388 पदों पर होगी शिक्षकों की नियुक्ति

शिक्षा विभाग ने BPSC को भेजी अधियाचना, जल्द शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया   पटना, एजेंसियां। बिहार में शिक्षक बनने का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) के तहत राज्य में 32,388 शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। बिहार शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए पदों की अधियाचना बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) को भेज दी है।   11वीं-12वीं के लिए 16 हजार से ज्यादा पद   सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, TRE-4 भर्ती में अलग-अलग कक्षाओं के लिए शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इसमें कक्षा 11वीं और 12वीं के लिए करीब 16,101 पद शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी।   BPSC जारी करेगा भर्ती का नोटिफिकेशन   शिक्षा विभाग की अधियाचना मिलने के बाद अब BPSC की ओर से भर्ती विज्ञापन और आवेदन प्रक्रिया की घोषणा की जाएगी। अभ्यर्थियों को आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार है, जिसमें पदों का विवरण, योग्यता, आवेदन तिथि और परीक्षा से जुड़ी जानकारी जारी होगी।   शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी   बिहार सरकार का कहना है कि शिक्षक भर्ती के जरिए सरकारी स्कूलों में खाली पदों को भरा जाएगा और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। सरकार अगले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की योजना पर भी काम कर रही है।   TRE-4 अभ्यर्थियों में बढ़ी उम्मीद   TRE-4 की घोषणा के बाद शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों में उम्मीद बढ़ गई है। अब सभी की नजर BPSC के आधिकारिक नोटिफिकेशन और परीक्षा कार्यक्रम पर है।  

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नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का बड़ा अवसर जारी किया है। ISRO केंद्रीयकृत भर्ती बोर्ड (ICRB) ने असिस्टेंट, जूनियर पर्सनल असिस्टेंट, अपर डिवीजन क्लर्क (UDC) और स्टेनोग्राफर समेत कुल 244 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं।   किन पदों पर होगी भर्ती?   ISRO की इस भर्ती अभियान के तहत प्रशासनिक और सपोर्ट स्टाफ के पदों को भरा जाएगा। इसमें शामिल हैं: असिस्टेंट: 113 पद जूनियर पर्सनल असिस्टेंट (JPA): 81 पद अपर डिवीजन क्लर्क (UDC): 22 पद स्टेनोग्राफर: 10 पद अन्य ISRO यूनिट्स के लिए अतिरिक्त पद भी शामिल हैं।   योग्यता और आयु सीमा   इस भर्ती के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। कई पदों के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक या निर्धारित CGPA की आवश्यकता रखी गई है। उम्मीदवारों की अधिकतम आयु सीमा 28 वर्ष रखी गई है, जबकि आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार छूट मिलेगी।   आवेदन की तारीख और चयन प्रक्रिया   ISRO ने ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक उम्मीदवार 16 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और पद के अनुसार स्किल टेस्ट शामिल हो सकते हैं।   वेतन और नौकरी से जुड़ी जानकारी   चयनित उम्मीदवारों को ISRO में लेवल-4 पे मैट्रिक्स के तहत वेतन दिया जाएगा। इन पदों पर नियुक्ति ISRO केंद्रों, अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) की यूनिट्स और संबंधित संस्थानों में की जा सकती है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां  राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने अप्रैल-मई 2026 सेमेस्टर के लिए नेशनल इनिशिएटिव फॉर टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग (NITTT) 2026 परीक्षा का कार्यक्रम जारी कर दिया है। परीक्षा 31 जुलाई, 1 अगस्त, 7 अगस्त और 8 अगस्त 2026 को ऑनलाइन रिमोट प्रॉक्टर्ड मोड में आयोजित की जाएगी। अभ्यर्थी अपना एडमिट कार्ड आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं।   चार दिनों में दो-दो शिफ्ट में होगी परीक्षा   एनटीए के अनुसार परीक्षा प्रत्येक दिन दो शिफ्टों में आयोजित होगी। सुबह 10 बजे से 12 बजे और दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक अलग-अलग मॉड्यूल की परीक्षा होगी। इस दौरान तकनीकी शिक्षा, प्रोफेशनल एथिक्स, कम्युनिकेशन स्किल्स, इंस्ट्रक्शनल प्लानिंग, टेक्नोलॉजी एनेबल्ड लर्निंग, स्टूडेंट असेसमेंट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट तथा इंस्टीट्यूशनल मैनेजमेंट जैसे मॉड्यूल शामिल होंगे।   क्या है NITTT का उद्देश्य?   राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण पहल (NITTT) का उद्देश्य एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त संस्थानों में नियुक्त नए शिक्षकों को सेवाकालीन प्रशिक्षण प्रदान करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों के शिक्षण कौशल, पेशेवर दक्षता और कक्षा में पढ़ाने की क्षमता को बेहतर बनाया जाता है। प्रशिक्षण पूरा करना प्रोबेशन की पुष्टि और पदोन्नति के लिए भी आवश्यक है।   100 MCQ होंगे, अंग्रेजी में होगी परीक्षा   परीक्षा में 100 बहुविकल्पीय (MCQ) प्रश्न पूछे जाएंगे और प्रश्नपत्र केवल अंग्रेजी भाषा में होगा। अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान एडमिट कार्ड और वैध फोटो पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य होगा। बिना इन दस्तावेजों के परीक्षा में प्रवेश नहीं मिलेगा।   NTA ने जारी किए अहम दिशा-निर्देश   ऑनलाइन परीक्षा के दौरान मानव प्रॉक्टर उम्मीदवारों की गतिविधियों और स्क्रीन की निगरानी करेंगे। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर वेबकैम के माध्यम से आसपास का दृश्य दिखाने के लिए कहा जा सकता है। नियमों का उल्लंघन करने पर पहले चेतावनी दी जाएगी और बार-बार निर्देशों की अनदेखी करने पर परीक्षा रद्द की जा सकती है। परीक्षा के दौरान रफ वर्क के लिए कागज रखने की अनुमति नहीं होगी, जबकि पारदर्शी पानी की बोतल साथ रखी जा सकेगी।  

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