राष्ट्रीय

कलकत्ता हाई कोर्ट से ममता गुट को झटका, ऋतब्रत बनर्जी फिलहाल रहेंगे नेता प्रतिपक्ष

abhishek singh जून 18, 2026 0
Mamata Banerjee Ritabrata Banerjee
Mamata Banerjee Ritabrata Banerjee

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेतृत्व गुट को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने विधानसभा स्पीकर के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके तहत टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया गया था। इसके साथ ही फिलहाल स्पीकर का निर्णय प्रभावी रहेगा।

 

यह याचिका टीएमसी नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय की ओर से दायर की गई थी। उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति को चुनौती देते हुए इसे निरस्त करने की मांग की थी। दरअसल, नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए टीएमसी के दोनों गुटों ने अलग-अलग नाम भेजे थे। ममता बनर्जी समर्थक गुट ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय का नाम प्रस्तावित किया, जबकि बागी विधायकों के गुट ने ऋतब्रत बनर्जी का नाम आगे बढ़ाया। विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बसु ने ऋतब्रत बनर्जी के नाम को मंजूरी देते हुए उन्हें नेता प्रतिपक्ष नियुक्त कर दिया।

 

जस्टिस कृष्णा राव ने कहा


मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा राव ने कहा कि फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया जाएगा। अदालत ने दोनों पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी। तब तक ऋतब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहेंगे।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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परीक्षा घोटालों के विरोध में जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन, जवाबदेही की मांग तेज

नई दिल्ली, एजेंसियां। कथित परीक्षा घोटालों, बार-बार होने वाले पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर शनिवार को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं ने प्रदर्शन किया। युवा संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक शामिल हुए। प्रदर्शन के मद्देनजर जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।   पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लेकर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक पर रोक और छात्रों के हितों की सुरक्षा की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए परीक्षा प्रबंधन में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।   थाली-चम्मच बजाकर जताया विरोध कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन से पहले समर्थकों से थाली और चम्मच लेकर आने की अपील की थी। उनके आह्वान पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी थाली और चम्मच लेकर पहुंचे और उन्हें बजाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों और पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।   शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए और छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस पूरे समय मौके पर तैनात रही। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो भविष्य में भी आंदोलन जारी रहेगा।

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कोलकाता एयरपोर्ट पर गिरी आकाशीय बिजली, अमीरात विमान के पास काम कर रहे दो ग्राउंड स्टाफ झुलसे; दक्षिण बंगाल में येलो अलर्ट

  कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शुक्रवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। रनवे पर खड़े अमीरात एयरलाइंस के विमान के पास काम कर रहे दो ग्राउंड स्टाफ अचानक आकाशीय बिजली (वज्रपात) की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद एयरपोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई और दोनों कर्मचारियों को तत्काल चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब अमीरात एयरलाइंस की एक फ्लाइट कोलकाता हवाई अड्डे पर उतर चुकी थी और ग्राउंड स्टाफ विमान से यात्रियों का सामान उतारने के कार्य में जुटे थे। इसी दौरान तेज गर्जना के साथ अचानक बिजली गिरी, जिसकी चपेट में दोनों कर्मचारी आ गए। विमान और उसमें मौजूद यात्रियों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा। अधिकारियों के अनुसार, दोनों घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है। दक्षिण बंगाल में भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट इस बीच, अलीपुर मौसम विभाग ने कोलकाता सहित पूरे दक्षिण बंगाल में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल के 10 जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' घोषित किया है। मौसम विभाग के मुताबिक, सप्ताहांत में बारिश की तीव्रता और बढ़ सकती है। शनिवार और रविवार को कई इलाकों में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की आशंका है, जबकि यह स्थिति अगले सप्ताह मंगलवार तक बनी रह सकती है। जलजमाव से प्रभावित हुआ जनजीवन लगातार हो रही बारिश के कारण कोलकाता के कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई प्रमुख सड़कों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हुआ है और लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति से निपटने के लिए कोलकाता नगर निगम ने विशेष नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) सक्रिय कर दिया है। सभी ड्रेनेज पंपिंग स्टेशनों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और विभिन्न इलाकों की निगरानी सीसीटीवी तथा ग्राउंड रिपोर्ट के माध्यम से की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने तथा आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलने की अपील की है।  

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रांची। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा है कि 30 जून से 29 जुलाई तक 'इन्यूमरेशन फेज' यानी गणना चरण के दौरान बीएलओ (BLO) घर–घर जाकर मतदाताओं को आंशिक रूप से भरे हुए इन्यूमरेशन फॉर्म बांटेंगे। इसके साथ ही, वे मतदाताओं के वर्तमान रंगीन फोटो के साथ उनके द्वारा हस्ताक्षरित (सिग्नेचर किया हुआ) इन्यूमरेशन फॉर्म संकलित करेंगे। यह प्रक्रिया सिर्फ भारतीय नागरिकों के लिए उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईआर (SIR) की यह प्रक्रिया केवल पात्र भारतीय नागरिकों के लिए है। गैर-भारतीय नागरिक अथवा भारतीय नागरिकता त्याग चुके व्यक्ति इन्यूमरेशन फॉर्म को बिना भरे और बिना हस्ताक्षर किए ही तुरंत बीएलओ को वापस लौटा दें। गलत जानकारी देकर गणना-घोषणा पत्र जमा करना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत एक दंडनीय अपराध है। दिया गया प्रशिक्षण के. रवि कुमार ने निर्वाचन सदन से सभी जिलों के कंप्यूटर ऑपरेटरों एवं हेल्प डेस्क मैनेजरों को एसआईआर के दौरान विभिन्न चरणों में किए जाने वाले कार्यों के लिए प्रशिक्षण दिया। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा बताए गए दिशा-निर्देशों एवं कार्यप्रणाली की पीपीटी (PPT) के माध्यम से बिंदुवार जानकारी दी।  पूरे देश में एक ही स्थान पर रजिस्टर्ड रह सकते हैं वोटर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक, भारतवर्ष के किसी एक ही विधानसभा क्षेत्र में पंजीकृत हो सकता है, और उस विधानसभा क्षेत्र में भी केवल एक ही बार पंजीकृत हो सकता है। अर्थात, पूरे भारत में किसी भी मतदाता का नाम एक समय में केवल एक ही मतदान केंद्र पर रह सकता है। दो जगह नाम होने पर क्या करें?  ऐसे मतदाता जिनका नाम मतदाता सूची में दो बार दर्ज है, वे अपने सामान्य निवास स्थान पर प्राप्त इन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर कर बीएलओ को सौंपें। दूसरी जगह से प्राप्त फॉर्म को बिना हस्ताक्षर किए, उचित कारण बताते हुए बीएलओ को वापस कर दें, ताकि उनका पंजीकरण एक ही स्थान पर रह सके। दूसरे राज्य में नाम होने पर नियम यदि किसी मतदाता का नाम झारखंड के साथ-साथ किसी अन्य राज्य में भी दर्ज है और वह झारखंड में ही अपना नाम रखना चाहता है, तो वह झारखंड में इन्यूमरेशन फॉर्म भरकर जमा करे तथा दूसरे राज्य में फॉर्म 7 भरकर अपना नाम वहां से हटवा ले।

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