सरकार ने अचानक बदली निर्यात नीति
भारत सरकार ने घरेलू आपूर्ति और महंगाई नियंत्रण को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। अब देश से चीनी का निर्यात सितंबर 2026 तक रोक दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
यह फैसला पहले की उस नीति से बिल्कुल अलग है, जिसमें सीमित मात्रा में चीनी निर्यात की अनुमति दी गई थी। अब इसे “restricted” से बदलकर पूरी तरह “prohibited” कर दिया गया है।
नए आदेश के अनुसार कच्ची चीनी, सफेद चीनी और रिफाइंड चीनी–तीनों के निर्यात पर रोक रहेगी। यह आदेश वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले डीजीएफटी (Directorate General of Foreign Trade) द्वारा जारी किया गया है।
हालांकि, यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका को कुछ मौजूदा समझौतों के तहत सीमित निर्यात की अनुमति दी गई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में चीनी उत्पादन 2025-26 सत्र में लगभग 275 लाख टन रहने का अनुमान है। शुरुआती स्टॉक जोड़ने के बाद कुल आपूर्ति लगभग 325 लाख टन हो जाएगी।
वहीं घरेलू मांग करीब 280 लाख टन रहने की संभावना है। इसके बाद स्टॉक केवल 45 लाख टन रह जाएगा, जो पिछले कई वर्षों में सबसे कम स्तर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि 2026-27 में उत्पादन और घट सकता है। इसका कारण कमजोर मानसून और एल-नीनो की संभावना बताई जा रही है। साथ ही मध्य पूर्व में चल रहे तनाव से उर्वरक आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका है।
अचानक लिए गए इस फैसले से चीनी उद्योग और व्यापारियों पर असर पड़ सकता है। कई कंपनियों ने पहले ही निर्यात के सौदे कर लिए थे, जिन पर अब अनिश्चितता बन गई है।
भारत के इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी देखा गया। न्यूयॉर्क में कच्ची चीनी की कीमतों में 2% से अधिक की बढ़ोतरी हुई, जबकि लंदन में सफेद चीनी के भाव लगभग 3% तक बढ़ गए।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है और वैश्विक आपूर्ति में इसकी अहम भूमिका है। ऐसे में निर्यात प्रतिबंध से वैश्विक बाजार में भी दबाव बढ़ सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
लखनऊ में नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई Prateek Yadav की अंतिम यात्रा गुरुवार को लखनऊ में भारी भीड़ और गमगीन माहौल के बीच निकाली गई। पूर्व मुख्यमंत्री Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर को बैकुंठधाम श्मशान घाट के लिए रवाना किया गया। अंतिम यात्रा में हजारों समर्थक, समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता और कई बड़े राजनीतिक नेता शामिल हुए। शव वाहन पर लगी थी पेट्स के साथ तस्वीर प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा के दौरान शव वाहन को फूलों से सजाया गया था। वाहन पर उनके पालतू जानवरों के साथ की तस्वीर भी लगाई गई थी, जिसने लोगों को भावुक कर दिया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग सुबह से ही उनके आवास पर जुटे रहे। कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि Dimple Yadav ने प्रतीक यादव को अंतिम श्रद्धांजलि दी। वहीं उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम Keshav Prasad Maurya, मंत्री Om Prakash Rajbhar और भाजपा नेता प्रदीप सिंह समेत कई नेताओं ने अपर्णा यादव के आवास पहुंचकर शोक व्यक्त किया। बुधवार को मुख्यमंत्री Yogi Adityanath भी अपर्णा यादव के घर पहुंचे थे और परिवार को सांत्वना दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई ये बात जानकारी के अनुसार, प्रतीक यादव का बुधवार सुबह निधन हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फेफड़ों की नसों में खून का थक्का जमने यानी पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण कार्डियक अरेस्ट से मौत होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में शरीर और सिर पर कुछ चोटों के निशान भी मिलने की जानकारी दी गई है। इनमें कुछ चोटें पुरानी बताई जा रही हैं, जबकि कुछ हाल की थीं। आगे की जांच के लिए विसरा और अन्य नमूनों को सुरक्षित रखा गया है। राजनीति से दूर रखते थे खुद को प्रतीक यादव ने ब्रिटेन की Leeds University से पढ़ाई की थी। यादव परिवार से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने राजनीति से दूरी बनाए रखी। वे रियल एस्टेट और फिटनेस बिजनेस से जुड़े थे और लग्जरी कारों के शौकीन माने जाते थे। उनके निधन के बाद समाजवादी पार्टी समर्थकों और यादव परिवार में शोक की लहर है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में दो तरह का मौसम देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज-अयोध्या समेत 30 जिलों में आंधी-तूफान के कारण 98 लोगों की मौत हो गई। सबसे ज्यादा 21 मौतें प्रयागराज और 17 मौतें भदोही में हुईं। आंधी में युवक उड़ गया यहां 80 KMPH की रफ्तार से आंधी चली, बरेली में एक युवक टीनशेड समेत हवा में उड़ गया। राज्य के बांदा शहर में तापमान 45.4°C रहा। गुरुवार को 51 जिलों में तेज आंधी-बारिश का अलर्ट है। राजस्थान में हीटवेव राजस्थान में भी तेज गर्मी और हीटवेव का असर है। लगातार चौथे दिन राज्य का जैसलमेर देश का सबसे गर्म शहर रहा, यहां 46.1°C तापमान रहा। मौसम विभाग के मुताबिक आज बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर और बाड़मेर में तेज गर्मी का रेड अलर्ट है। 13 जिलों में हीटवेव की चेतावनी है। झुलस रहा मध्य प्रदेश वहीं, मध्य प्रदेश के 25 से ज्यादा जिलों में हीटवेव चल रही है, जो 18 मई तक जारी रह सकती है। बुधवार को खजुराहो में तापमान 45.4°C रहा। आज इंदौर, उज्जैन, धार और रतलाम में हीटवेव का ऑरेंज अलर्ट है। इन जिलों में वार्म नाइट का भी अलर्ट है। हरियाणा में भी बढ़ा तापमान इधर, हरियाणा के अधिकतम तापमान में पिछले 24 घंटे में 1.1°C बढ़ोतरी हुई। राज्य के 5 शहरों में 40°C से ज्यादा रहा, इनमें नारनौल 42.5°C रहा। राज्य में 17 मई से हीटवेव का यलो अलर्ट है। बिहार के 7 जिलों में बारिश का अलर्ट बिहार के पूर्णिया-कटिहार समेत 7 जिलों में आज तेज बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में आज बारिश का यलो अलर्ट है।
तिरुवंतपुरम, एजेंसियां। केरल विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद लंबे मंथन के पश्चात कांग्रेस ने आखिरकार वरिष्ठ नेता वीडी सतीशन को राज्य का नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया है। गुरुवार को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं मुकुल वासनिक, दीपा दास मुंशी और अजय माकनने उनके नाम की औपचारिक घोषणा की। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सतीशन का मुकाबला कांग्रेस संगठन महासचिव KC Venugopal से माना जा रहा था। करीब 10 दिनों तक चली चर्चा और रणनीतिक बैठकों के बाद पार्टी नेतृत्व ने सतीशन पर भरोसा जताया। कौन है वीडी सतीशन? कोच्चि के पास नेत्तूर में जन्मे वीडी सतीशन का परिवार लंबे समय से कांग्रेस से जुड़ा रहा है। पेशे से वकील और सामाजिक कार्यकर्ता रहे सतीशन ने छात्र राजनीति के जरिए अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वे केरल छात्र संघ से जुड़े और धीरे-धीरे कांग्रेस में मजबूत पहचान बनाई। सतीशन अपनी प्रभावशाली वक्तृत्व शैली और जुझारू राजनीति के लिए जाने जाते हैं। वह वर्ष 2001 से लगातार परवूर विधानसभा सीट से विधायक चुने जाते रहे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में कांग्रेस केरल में नई राजनीतिक दिशा और मजबूती हासिल करेगी।