नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत आज 18 अगस्त को नई दिल्ली में 12वीं BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक की मेजबानी कर रहा है। यह बैठक भारत की वर्ष 2026 की BRICS अध्यक्षता के तहत आयोजित हो रही है। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव करेंगे।
बैठक में BRICS देशों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, नीति-निर्माता और विशेषज्ञ पर्यावरण संरक्षण से जुड़े साझा मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच पर्यावरणीय सहयोग को मजबूत करना और साझा चुनौतियों पर सहमति बनाना है।
भारत की BRICS अध्यक्षता 2026 का मुख्य विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा गया है। इसी व्यापक थीम के तहत पर्यावरण और जलवायु से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
भारत ने BRICS पर्यावरण कार्य समूह के तहत चार प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। इनमें सतत जीवनशैली, वनीकरण एवं जंगलों में आग से निपटने और आपदा-रोधी क्षमता को मजबूत करना, चक्रीय अर्थव्यवस्था तथा जलवायु अनुकूलन शामिल हैं।
जलवायु अनुकूलन के क्षेत्र में लोगों और समुदायों की भागीदारी तथा पारंपरिक ज्ञान के इस्तेमाल को भी महत्वपूर्ण माना गया है। बैठक में सदस्य देशों के अनुभव और बेहतर तौर-तरीके साझा किए जाने की उम्मीद है।
मंत्रिस्तरीय बैठक से पहले 17 अगस्त को BRICS पर्यावरण कार्य समूह के वरिष्ठ अधिकारियों और जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास संपर्क समूह की बैठक हुई। इन बैठकों में पर्यावरण कार्य समूह की प्राथमिकताओं और जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
BRICS पर्यावरण कार्य समूह की स्थापना वर्ष 2015 में मॉस्को में हुई पहली BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य पर्यावरणीय प्राथमिकताओं पर सहयोग, अनुभवों का आदान-प्रदान और सामूहिक कार्रवाई को मजबूत करना है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराए में मनमानी बढ़ोतरी और पीक सीजन में अचानक बढ़ने वाले टिकट दामों को लेकर केंद्र सरकार से नए नियम जल्द अंतिम रूप देने को कहा है। केंद्र ने अदालत को बताया कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत हवाई किराए, सर्ज प्राइसिंग और अतिरिक्त सामान शुल्क से जुड़े नए नियमों को तीन सप्ताह के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 को होगी। हवाई किराए और सर्ज प्राइसिंग पर बनेगा नियम केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नए नियमों का प्रारूप तैयार कर लिया गया है और इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रस्तावित नियमों में टिकट किराए, मांग बढ़ने पर किराए में होने वाली वृद्धि, अतिरिक्त सामान शुल्क तथा यात्रियों से जुड़े अन्य शुल्क को शामिल किया गया है। सरकार ने अदालत के समक्ष नियमों का मसौदा सीलबंद लिफाफे में पेश किया। केंद्र की ओर से कहा गया कि कुछ बिंदुओं पर अंतिम चर्चा चल रही है और तीन सप्ताह में नियमों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। नियम नहीं मानने वाली एयरलाइंस पर सख्ती सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उन एयरलाइंस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही, जो हवाई किराए से जुड़े सरकारी निर्देशों का पालन नहीं करती हैं। अदालत ने केंद्र से कहा कि निर्देशों का पालन नहीं करने वाली एयरलाइंस के खिलाफ सख्त कार्रवाई, यहां तक कि उन्हें ग्राउंड करने पर भी विचार किया जाए। अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब यात्रियों की ओर से त्योहारों, छुट्टियों और अधिक मांग वाले समय में टिकटों की कीमत अचानक बढ़ने की शिकायतें सामने आती रही हैं। 7 सितंबर को होगी अगली सुनवाई यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण की याचिका से जुड़ा है, जिसमें हवाई किराए में होने वाले अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव और अतिरिक्त शुल्क को नियंत्रित करने के लिए मजबूत नियामकीय व्यवस्था की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट पहले भी हवाई किराए में अचानक और अत्यधिक बढ़ोतरी को गंभीर चिंता का विषय बता चुका है। अब केंद्र सरकार को नए नियमों को अंतिम रूप देने के लिए तीन सप्ताह का समय मिला है। 7 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट प्रस्तावित नियमों और विमानन क्षेत्र में किराया नियमन की व्यवस्था पर आगे सुनवाई करेगा।
भिंड, एजेंसियां। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात एक भीषण सड़क हादसे में 8 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 32 लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसा भिंड-ग्वालियर नेशनल हाईवे-719 पर छीमका गांव के पास करीब रात 1 बजे हुआ, जहां मजदूरों से भरी पिकअप की सामने से आ रहे डंपर से जोरदार टक्कर हो गई। गायों के झुंड को बचाने के दौरान हादसा प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हाईवे पर गायों का झुंड मौजूद था। उसे बचाने के प्रयास में मजदूरों से भरी पिकअप अनियंत्रित होकर सामने से आ रहे डंपर से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिकअप में सवार कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस मामले की जांच कर रही है। धान की रोपाई के बाद घर लौट रहे थे मजदूर बताया जा रहा है कि पिकअप में सवार मजदूर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के रहने वाले थे। वे मध्य प्रदेश में धान की रोपाई के काम के लिए आए थे। काम पूरा करने के बाद मजदूर अपने घर लौट रहे थे, तभी छीमका गांव के पास यह दर्दनाक हादसा हो गया। घायलों को अस्पताल में कराया गया भर्ती हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से घायलों को तत्काल गोहद अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को इलाज के लिए ग्वालियर रेफर किया गया है। हादसे के बाद पुलिस मृतकों की पहचान और उनके परिजनों से संपर्क करने में जुटी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताया है और मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
अमरावती, एजेंसियां। आंध्र प्रदेश के डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा जिले से समुद्र में मछली पकड़ने गई एक नाव के लापता होने से हड़कंप मच गया है। नाव में सवार आठ मछुआरे तय समय पर वापस नहीं लौटे हैं। नाव 3 अगस्त को ओडलारेवु से रवाना हुई थी और मछुआरों के पास करीब 15 दिनों का डीजल और राशन मौजूद था। उन्हें 13 अगस्त तक वापस लौटना था, लेकिन अब तक उनका कोई पता नहीं चला है। 3 अगस्त को समुद्र में गई थी नाव जानकारी के मुताबिक, कोमारागिरी पटनम गांव निवासी कोपनाटी रामकृष्ण वर्मा नाव के मालिक और चालक हैं। नाव 3 अगस्त को वैनेतेय नदी और समुद्र के संगम के रास्ते मछली पकड़ने के लिए रवाना हुई थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, नाव विशाखापत्तनम से पारादीप के बीच के समुद्री क्षेत्र की ओर गई हो सकती है। मछुआरों के पास करीब 15 दिनों का राशन और डीजल था। हालांकि, नाव में मौजूद मोबाइल फोन और GPS सिस्टम काम नहीं कर रहे हैं, जिससे उनकी लोकेशन का पता लगाने में परेशानी हो रही है। 13 अगस्त तक लौटना था, 4 दिन बाद मिली जानकारी नाव को 13 अगस्त तक वापस लौटना था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी जब मछुआरे नहीं लौटे तो परिवारों की चिंता बढ़ गई। करीब चार दिन बाद नाव मालिक के परिवार ने ओडलारेवु तटीय सुरक्षा पुलिस और जिला प्रशासन को इसकी जानकारी दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोनसीमा के जिलाधिकारी आर. महेश कुमार ने विशाखापत्तनम स्थित भारतीय तटरक्षक बल से मदद मांगी है। तटरक्षक बल की मदद से तलाश शुरू जिलाधिकारी ने मत्स्य विभाग के अधिकारियों को भारतीय तटरक्षक बल के साथ समन्वय कर खोज और बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को नाव की संभावित दिशा, आखिरी संपर्क और समुद्र में उसके संभावित मार्ग से जुड़ी जानकारी जुटाने को कहा गया है। इसके अलावा नाव मालिक, मछुआरों के परिवार और अन्य मछुआरों से भी जरूरी जानकारी लेने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नाव की संभावित लोकेशन का पता लगाया जा सके। परिवारों को अपनों की वापसी का इंतजार फिलहाल नाव और उसमें सवार आठों मछुआरों की सही लोकेशन की जानकारी नहीं मिल सकी है। प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और तटरक्षक बल समेत संबंधित एजेंसियों के साथ संपर्क में है। परिवारों की उम्मीद अब खोज और बचाव अभियान पर टिकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि समुद्र में लापता हुई नाव आखिर कहां है और उसमें सवार आठों मछुआरे सुरक्षित हैं या नहीं।