सरकार ने जारी की नई अधिसूचना
पश्चिम बंगाल में पशु वध को लेकर नए और कड़े नियम लागू किए गए हैं। नई अधिसूचना के अनुसार अब किसी भी पशु का वध बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के नहीं किया जा सकेगा। यह नियम गाय, बैल, बछड़ा और भैंस समेत कई पशुओं पर लागू होगा।
नए नियमों के मुताबिक, किसी भी पशु का वध तभी किया जा सकेगा जब उसे अधिकृत अधिकारी और सरकारी पशु चिकित्सक द्वारा “फिट फॉर स्लॉटर” घोषित किया जाएगा। प्रमाणपत्र में यह भी दर्ज होना जरूरी है कि पशु की उम्र 14 वर्ष से अधिक हो या वह किसी बीमारी, चोट या अक्षमता के कारण काम या प्रजनन के योग्य न हो।
यह प्रमाणपत्र नगरपालिका अध्यक्ष या पंचायत समिति प्रमुख और सरकारी पशु चिकित्सक द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाएगा।
अधिसूचना में यह भी साफ किया गया है कि जिन पशुओं को वध के लिए मंजूरी मिलेगी, उनका वध केवल नगरपालिकाओं द्वारा तय किए गए स्लॉटर हाउस या अधिकृत स्थानों पर ही किया जा सकेगा। सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी परिसर की जांच में बाधा डालना कानूनन अपराध माना जाएगा। प्रशासन और पशु चिकित्सा अधिकारी किसी भी समय निरीक्षण कर सकते हैं और इसमें सहयोग करना अनिवार्य होगा।
नए नियमों के उल्लंघन पर अधिकतम 6 महीने की जेल या ₹1,000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसके अलावा इन मामलों को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है, यानी पुलिस सीधे कार्रवाई कर सकेगी।
यह आदेश ऐसे समय आया है जब राज्य की राजनीति पहले से ही गरम है। हाल ही में विधानसभा चुनावों में राजनीतिक बदलाव के बाद इस तरह के प्रशासनिक फैसलों को लेकर बहस तेज हो गई है।
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा लागू किए गए ये नए नियम पशु वध प्रक्रिया को अधिक नियंत्रित और कानूनी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, इसके सख्त प्रावधानों को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा और तेज होने की संभावना है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रिकॉर्ड संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु, धाम में दिख रहा आस्था का सैलाब Kedarnath Temple की यात्रा इस वर्ष नए रिकॉर्ड बना रही है। यात्रा शुरू होने के महज 22 दिनों के भीतर 5 लाख 23 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं। लगातार बढ़ रही भक्तों की संख्या से पूरे केदारघाटी क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल बना हुआ है। 22 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ केदारनाथ धाम पहुंच रही है। बुधवार को अकेले 32,427 श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए। अब तक कुल 5,23,582 भक्त पवित्र धाम में माथा टेक चुके हैं। यात्रा मार्ग पर बेहतर सुविधाएं प्रशासन की ओर से यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पैदल मार्ग पर जगह-जगह विश्राम स्थल, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। धाम क्षेत्र में स्वच्छता, आवास और आपातकालीन सेवाओं को भी प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार समन्वय के साथ काम कर रही हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। श्रद्धालुओं ने की व्यवस्थाओं की सराहना देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालु प्रशासनिक व्यवस्थाओं की खुलकर तारीफ कर रहे हैं। पंजाब के रोपड़ से आए दिवाकर ने बताया कि दर्शन व्यवस्था बेहद सरल और सुगम रही। वहीं अहमदाबाद से आई श्रद्धालु माही ने कहा कि उन्हें उम्मीद से कहीं बेहतर सुविधाएं मिलीं। पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी मिल रहा लाभ केदारनाथ यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से स्थानीय व्यापार, होटल व्यवसाय और पर्यटन गतिविधियों को भी बड़ा फायदा मिल रहा है। यात्रा सीजन के शुरुआती दौर में ही इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का पहुंचना उत्तराखंड पर्यटन के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
नौ वर्षों की उपलब्धियों पर बोले मुख्यमंत्री योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने ‘UP को बदलने के 9वें वर्ष’ कार्यक्रम में राज्य के विकास मॉडल और सुशासन की उपलब्धियों को विस्तार से सामने रखा। लखनऊ में आयोजित कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश ने बुनियादी ढांचे, परिवहन, कृषि और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य अब तेजी से विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है और उसकी पहचान राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मजबूत हुई है। सात शहरों में मेट्रो, रैपिड रेल बनी नई ताकत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के सात शहरों में मेट्रो सेवाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। उन्होंने दिल्ली-मेरठ के बीच चल रही देश की पहली नमो भारत रैपिड रेल का जिक्र करते हुए कहा कि यह उत्तर प्रदेश की बढ़ती क्षमता और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि बेहतर कनेक्टिविटी के कारण व्यापार, रोजगार और निवेश के नए अवसर तेजी से बढ़े हैं। किसानों को निशुल्क पानी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लगभग 50 लाख हेक्टेयर भूमि तक किसानों को निशुल्क सिंचाई जल उपलब्ध करा रही है। नहरों के विस्तार और ट्यूबवेल नेटवर्क को मजबूत करने से ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ खेती को अधिक सुविधाजनक और लाभकारी बनाना है। कानून-व्यवस्था में सुधार का भी किया जिक्र मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जो लक्ष्य तय किए गए थे, उनके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पिछले नौ वर्षों में किए गए प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और आने वाले समय में राज्य देश की अर्थव्यवस्था में और बड़ी भूमिका निभाएगा।
देवास, एजेंसियां। मध्य प्रदेश के देवास के टोंक कलां इलाके में गुरुवार सुबह 11.30 बजे एक पटाखा फैक्ट्री में धमाका हो गया। शुरुआती जानकारी है कि हादसे में 8-10 लोगों की मौत हुई है। कलेक्टर ने हादसे में दो लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि आरएमओ ने 3 मौतों की बात कही है। हादसे में एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। 3 महिलाएं लापता ब्लास्ट इतना तेज था कि शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे। हादसे में कई लोग बुरी तरह झुलस गए और तीन महिलाएं अब भी लापता बताई जा रही हैं। फैक्ट्री में करीब 200 से ज्यादा महिलाएं काम करती थीं। घायलों को जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और राहत टीम मौके के लिए रवाना हुई है। ग्रामीणों ने किया कमिश्नर का घेराव घटना के बाद ग्रामीणों ने कमिश्नर का घेराव कर आरोप लगाया कि अवैध फैक्ट्री के खिलाफ पहले कोई कार्रवाई नहीं की गई। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री में करीब 400 से 500 लोग काम करते हैं।