राष्ट्रीय

Hyderabad Seizes 4,000 kg Adulterated Ginger-Garlic Paste

हैदराबाद में फूड सेफ्टी रेड: 4,000 किलो से ज्यादा मिलावटी अदरक-लहसुन पेस्ट जब्त

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Hyderabad food safety officers seizing over 4,000 kg of adulterated ginger-garlic paste.
Hyderabad Food Safety Raid: 4,000 kg Adulterated Paste Seized

हैदराबाद: शहर में फूड सेफ्टी को लेकर मंगलवार को बड़ी कार्रवाई सामने आई है। अधिकारियों ने छापेमारी के दौरान 4,000 किलो से अधिक मिलावटी अदरक-लहसुन पेस्ट जब्त किया, जो रेस्टोरेंट्स और रिटेल दुकानों तक सप्लाई किया जा रहा था। इस मामले ने खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है।

कहां हुई कार्रवाई?

यह रेड हैदराबाद के कत्तेदान इलाके में स्थित SKR फूड प्रोडक्ट्स यूनिट में की गई।
कमिश्नर की टास्क फोर्स (खैरताबाद जोन) और H-Fast टीम ने संयुक्त रूप से यह कार्रवाई की।

क्या-क्या मिला?

जांच के दौरान यूनिट में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं:

  • गंदे और अस्वच्छ हालात में उत्पादन
  • घटिया क्वालिटी के कच्चे माल का इस्तेमाल
  • एसिटिक एसिड और जैंथन गम जैसे एडिटिव्स का उपयोग
  • फूड सेफ्टी मानकों की अनदेखी

कितनी जब्ती हुई?

अधिकारियों ने मौके से:

  • 4,032 किलोग्राम मिलावटी अदरक-लहसुन पेस्ट
  • 6,210 किलोग्राम घटिया कच्चा माल
  • करीब ₹22 लाख का अन्य सामान
    जब्त किया है।

आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने यूनिट के मालिक 55 वर्षीय हसन अली रूपानी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी और जब्त सामान को आगे की जांच के लिए मैलारदेवपल्ली पुलिस स्टेशन को सौंप दिया गया है।

सोशल मीडिया पर दी जानकारी

हैदराबाद सिटी पुलिस ने इस कार्रवाई की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर तस्वीरों के साथ साझा की है।

सेहत पर बड़ा खतरा

अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह का मिलावटी पेस्ट लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता था। समय रहते कार्रवाई होने से एक बड़ी स्वास्थ्य जोखिम को टाल दिया गया है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Congress leader Digvijaya Singh addressing the media over the Ayodhya Ram Mandir Trust meeting and alleged donation irregularities.
राम मंदिर ट्रस्ट बैठक के बाद कांग्रेस का हमला, दिग्विजय सिंह ने VHP-RSS और SIT जांच पर उठाए सवाल

नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की हालिया बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मंदिर में चढ़ावे और चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर कई सवाल उठाए और विशेष जांच दल (SIT) की निष्पक्षता पर भी संदेह जताया। ट्रस्ट की बैठक पर उठाए सवाल पीटीआई के अनुसार, दिग्विजय सिंह ने कहा कि ट्रस्ट की बैठक का परिणाम पहले से तय था। उनके मुताबिक, बैठक में केवल कुछ इस्तीफे स्वीकार किए गए, जबकि पूरे मामले की गंभीरता के अनुरूप कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय होना जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं का भरोसा बना रहे। चंपत राय की भूमिका पर भी उठाए सवाल कांग्रेस नेता ने दावा किया कि चंपत राय विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के करीबी रहे हैं और उन्हें VHP से RSS की भूमिका में लाया गया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान चंपत राय की क्या भूमिका थी। दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर आंदोलन के दौरान गोली लगने वाले कार्यकर्ता संतोष दुबे का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनके योगदान को भुला दिया गया, जबकि कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने वालों की बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। VHP और RSS पर साधा निशाना दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह वैचारिक रूप से VHP और RSS से असहमत हैं। उनका आरोप है कि ये संगठन लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना में विश्वास नहीं करते। उन्होंने कहा कि भारत सभी नागरिकों का देश है और किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं है। SIT जांच की निष्पक्षता पर सवाल कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि मंदिर से जुड़े कथित चंदा गबन का मामला कई वर्षों से सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि जांच के लिए SIT का गठन किया गया है, लेकिन इसमें शामिल अधिकारियों को लेकर निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच हो, ताकि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जांच जारी राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा गबन मामले की जांच फिलहाल SIT कर रही है। ट्रस्ट का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ चल रही है और अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार जारी है।  

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तुलसी की माला और तिलक को लेकर विवाद: छात्रा को टीसी देने का आरोप, स्कूल ने किया इनकार

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कोयला चोरी पर सरकार का बड़ा एक्शन, CISF को मिले नए कानूनी अधिकार; अवैध खनन माफियाओं पर कसेगा शिकंजा

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जनकपुरी के वेस्टएंड मॉल में धूमधाम से मनाया गया गुरुजी का प्राकट्य दिवस, भव्य सत्संग में उमड़े श्रद्धालु

नई दिल्ली: जनकपुरी स्थित वेस्टएंड मॉल मंगलवार को गुरुजी के प्राकट्य दिवस के अवसर पर भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर नजर आया। यहां आयोजित भव्य सत्संग एवं जन्मोत्सव में दिल्ली-एनसीआर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भजन-कीर्तन, सत्संग और सामूहिक प्रार्थना के बीच श्रद्धालुओं ने गुरुजी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। भक्ति और श्रद्धा से गूंजा वेस्टएंड मॉल दिनभर चले इस आयोजन में स्थानीय निवासी, व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और वेस्टएंड मॉल परिवार के सदस्य भी शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान "जय गुरुजी" और "शुकराना गुरुजी" के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, मानव कल्याण, सामाजिक सौहार्द और समृद्धि की कामना की। गुरुजी के संदेश पर दिया विशेष जोर कार्यक्रम का आयोजन समाजसेवी डी. आर. सेठी, सीबीएफसी के विधिक सलाहकार अमित अग्रवाल, समायरा ज्वेलर्स के निदेशक वरुण प्रुथीऔर वेस्टएंड मॉल परिवार के संयुक्त सहयोग से किया गया। आयोजकों ने कहा कि गुरुजी का प्रेम, सेवा, विश्वास और शुकराना का संदेश आज भी लाखों लोगों को सकारात्मक जीवन जीने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने की प्रेरणा देता है। अभिनव अरोड़ा ने किया आध्यात्मिक संबोधन आयोजन का प्रमुख आकर्षण युवा आध्यात्मिक वक्ता एवं बाल कथावाचक अभिनव अरोड़ा रहे। उन्होंने "जय श्री राधे" और "जय गुरुजी" के उद्घोष के साथ श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, सद्भाव और मानवता के व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं को द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् का भावपूर्ण पाठ भी सुनाया, जिसमें पूरी संगत ने श्रद्धापूर्वक सहभागिता की। पुलिस अधिकारियों ने भी की शिरकत कार्यक्रम में एसीपी शरद चंद्र और एसएचओ दिनेश खर्ड भी शामिल हुए। आयोजकों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। अधिकारियों ने सफल आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रम समाज में सकारात्मक वातावरण और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करते हैं। प्रसाद वितरण के साथ हुआ समापन पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई। स्वयंसेवकों ने व्यवस्थाओं का सफल संचालन किया, जिससे बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। समापन पर आयोजकों ने श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और वेस्टएंड मॉल परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी समाज में सेवा, सहयोग, सद्भाव और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।  

Deepshikha जुलाई 8, 2026 0
Indian Oil officials and police respond to a gas leak at an Indian Oil station in Baluhati, Howrah, after a pipeline valve malfunction.

हावड़ा के बालुहाटी में इंडियन ऑयल स्टेशन पर गैस रिसाव, समय रहते काबू; बड़ा हादसा टला

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Student Enrollment Decline
देशभर के सरकारी स्कूलों में दो वर्षों में 86 लाख छात्रों की कमी, नई रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली, एजेंसियां। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी यूडीआईएसई 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में देशभर के सरकारी स्कूलों में छात्रों के नामांकन में करीब 86 लाख की गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या 12.75 करोड़ से घटकर 11.89 करोड़ रह गई, जबकि इसी अवधि में निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में 88 लाख से अधिक नए छात्रों का नामांकन हुआ है।   निजी स्कूलों की ओर बढ़ रहा रुझान   रिपोर्ट के अनुसार, अभिभावकों का रुझान लगातार निजी स्कूलों की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बुनियादी सुविधाएं, अंग्रेज़ी माध्यम में पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बढ़ती अपेक्षाएं इस बदलाव की प्रमुख वजह हैं।   ड्रॉपआउट दर में आई कमी   हालांकि रिपोर्ट में एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है। देश में स्कूल छोड़ने (ड्रॉपआउट) की दर में कमी दर्ज की गई है और शिक्षकों की संख्या बढ़कर 1 करोड़ से अधिक हो गई है। इससे संकेत मिलता है कि स्कूलों में बच्चों को बनाए रखने और शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयासों का असर दिख रहा है।   सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने पर जोर   शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन की प्रवृत्ति को रोकने के लिए शिक्षा की गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं और डिजिटल संसाधनों को और मजबूत करने की आवश्यकता है। रिपोर्ट ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और आकर्षक बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया है।

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