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3 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए वोटिंग जारी, बिहार की बांकीपुर समेत 3 राज्यों में आज हो रहा मतदान

anjali kumari जुलाई 30, 2026 0
Election 2026
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नई दिल्ली, एजेंसियां। देश के तीन राज्यों की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए आज मतदान हो रहा है। इनमें बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट, मध्य प्रदेश की दतिया सीट और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट शामिल हैं। इन सीटों पर हो रहे उपचुनाव को आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

 

बांकीपुर सीट पर हाई प्रोफाइल मुकाबला

 

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर मुकाबला खासा दिलचस्प बना हुआ है। इस सीट से कई उम्मीदवार मैदान में हैं और यहां का चुनाव राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासन ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

 

दतिया और मांजलपुर में भी सियासी जंग

 

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर भी मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन दोनों सीटों के नतीजे राज्य की राजनीति में दलों की स्थिति और जनसमर्थन का संकेत देंगे।

 

3 अगस्त को होगी मतगणना

 

उपचुनाव के नतीजे 3 अगस्त 2026 को घोषित किए जाएंगे। राजनीतिक दलों की नजर इन सीटों के परिणामों पर टिकी हुई है, क्योंकि छोटे चुनाव भी कई बार बड़े राजनीतिक संदेश देते हैं।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

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करीब 11 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के समन आदेश को किया रद्द   नई दिल्ली, एजेंसियां। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़े कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया है और निचली अदालत द्वारा जारी किए गए समन आदेश को रद्द कर दिया।   हिंदाल्को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में आया फैसला   यह मामला हिंदाल्को कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा था। आरोप था कि कोयला ब्लॉक आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई थीं। सीबीआई ने जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसे लेकर कानूनी विवाद चल रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर संज्ञान लेने का पर्याप्त आधार नहीं था।   मनमोहन सिंह को मिली क्लीन चिट   सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ इस मामले में कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं चलेगी। यह मामला उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल (2004-2014) के दौरान हुए कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा था और लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में था।   करीब दो साल बाद आया अंतिम फैसला   डॉ. मनमोहन सिंह का निधन दिसंबर 2024 में 92 वर्ष की उम्र में हुआ था। उनके निधन के बाद भी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। अब अदालत के फैसले से इस लंबे कानूनी विवाद का अंत हो गया है।  

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कांवड़ यात्रा का आगाज़, हरिद्वार से गूंजे ‘बम-बम भोले’ के जयकारे; लाखों शिवभक्तों की उमड़ी भीड़

हरिद्वार, एजेंसियां। सावन महीने के शुभारंभ के साथ ही देश की प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है। उत्तराखंड के हरिद्वार, ऋषिकेश और गंगोत्री धाम समेत कई गंगा घाटों पर शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालु गंगाजल लेकर अपने-अपने शिवालयों की ओर रवाना हो रहे हैं और पूरे मार्ग पर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारे गूंज रहे हैं।   हरिद्वार में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना   कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं। भक्त गंगा जल भरकर पैदल यात्रा करते हुए अपने क्षेत्रों के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में कांवड़ियों के आने को देखते हुए प्रशासन ने घाटों और प्रमुख मार्गों पर व्यवस्थाएं बढ़ाई हैं।   सुरक्षा के लिए प्रशासन अलर्ट   कांवड़ यात्रा को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। प्रमुख रास्तों पर सीसीटीवी निगरानी, ट्रैफिक डायवर्जन, मेडिकल कैंप और सहायता केंद्र बनाए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह विश्राम स्थल और भोजन-पानी की व्यवस्था भी की गई है।   धार्मिक आस्था का बड़ा पर्व   कांवड़ यात्रा भगवान शिव की भक्ति से जुड़ा प्रमुख धार्मिक आयोजन है। मान्यता है कि कांवड़िये गंगा जल से भगवान शिव का अभिषेक कर मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। सावन के अंतिम दिनों में शिवालयों में जल चढ़ाने के साथ इस यात्रा का समापन होता है।   देशभर के शिवालयों में बढ़ेगी भीड़   सावन के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर, महाकालेश्वर मंदिर, देवघर बाबा बैद्यनाथ धाम समेत देश के प्रमुख शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। प्रशासन ने भक्तों से यात्रा के दौरान नियमों का पालन करने और शांतिपूर्ण तरीके से दर्शन करने की अपील की है।

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PoK Protest: पाक रक्षामंत्री ने प्रदर्शनकारियों को बताया 'भारत जैसा दुश्मन', बातचीत से किया इनकार

PoK Protest: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को "भारत की तरह दुश्मन" बताते हुए कहा कि सरकार उनके साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं करेगी। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी संगठन ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का दावा है कि सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में अब तक 20 कार्यकर्ताओं की मौत हो चुकी है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रदर्शनकारियों से बातचीत से किया इनकार पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ कोई वार्ता नहीं करेगी। उन्होंने कहा, "मैं उन्हें भारत की ही श्रेणी में मानता हूं और उन्हें पाकिस्तान का दुश्मन समझता हूं।" उनके इस बयान से PoK में पहले से जारी तनाव और बढ़ गया है। वहीं, कानून प्रवर्तन एजेंसियों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की, जबकि प्रदर्शनकारी संगठन इन आरोपों से इनकार कर रहा है। सलाहकार बोले- प्रदर्शनकारी कब्जे की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा कि JAAC ने पहले सरकार के साथ बैठक कर 38 मांगें रखी थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद और मीरपुर पर बलपूर्वक कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। सनाउल्लाह ने दावा किया कि उनकी गतिविधियां भारत जैसी रणनीति से प्रेरित हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में किसी की मौत नहीं हुई, जो JAAC के दावों से अलग है। JAAC का दावा- 20 कार्यकर्ताओं की मौत प्रतिबंधित संगठन ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने दावा किया है कि सोमवार से सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में उसके कम से कम 20 कार्यकर्ता मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। संगठन का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया। इस बीच, बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के अनुसार, मीरपुर में विरोध के चलते बाजार और दुकानें बंद रहीं और कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। चुनाव के बीच बढ़ा विवाद PoK की तथाकथित विधानसभा की 13 सीटों के लिए पहले चरण का मतदान सोमवार को हुआ, जिसमें पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने नौ सीटों पर जीत दर्ज की। शेष 32 सीटों के लिए दूसरे और तीसरे चरण का मतदान क्रमशः 2 अगस्त और 10 अगस्त को होना है। मुख्य मुकाबला PML-N और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के बीच माना जा रहा है, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने चुनाव का बहिष्कार किया है। 12 सीटों को लेकर आंदोलन JAAC पिछले महीने से विधानसभा की 12 विवादित सीटों को लेकर प्रदर्शन कर रही है। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तान का सत्ता प्रतिष्ठान इन सीटों के जरिए अपनी पसंद की सरकार बनवाने के लिए चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहा है। भारत ने चुनावों पर जताई आपत्ति भारत ने भी PoK में कराए जा रहे चुनावों पर कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान इन चुनावों के जरिए अपने अवैध कब्जे और क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघनों को छिपाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा केंद्र शासित प्रदेश, जिसमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि PoK पर उसका रुख पहले की तरह स्पष्ट और अपरिवर्तित है।  

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