18 अप्रैल की महत्त्वपूर्ण घटनाएं
1612 – मुगल बादशाह शाहजहां ने मुमताज से निकाह किया।
1738 - मैड्रिड में रियल अकादमी डे ला हिस्टोरिया की स्थापना की गयी ("रॉयल अकादमी ऑफ़ हिस्ट्री") ।
1809 - पहली बार 2000 गिनीज डेक के घोड़े की दौड़ इंग्लैंड में हुई।
1835 - लॉर्ड मेलबर्न सर रॉबर्ट पील के स्थान पर यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री बने।
1846 – आर.ई.हाउस ने द्वारा टेलीग्राफ टिकर का पेटेंट कराया गया।
1848 - पंजाब में दूसरा आंग्ल-सिख युद्ध समाप्त किया गया।
1859 – वर्ष 1857 विद्रोह के नेता तात्यां तोपे को फांसी दी गयी।
1902 – डेनमार्क पहला देश बना जिसने अपराधियों की पहचान के लिए फिंगरप्रिंट तकनीक को अपनाया।
1906 – सेन फ्रांसिस्को में भूकंप और आग से लगभग 4000 लोगों की मौत हुई।
1917 – महात्मा गांधी ने सत्याग्रह के लिए बिहार के चंपारण का चयन किया और वही से सत्याग्रह की शुरुआत की।
1924 – सिमन एंड शूस्टर की पहली क्रॉसवर्ड पजल बुक प्रकाशित हुई।
1930 – क्रांतिकारी मास्टर दा व इंडियन रिपब्लिकन आर्मी ने चिटगांव शास्त्रागार पर धावा बोला।
1948 – नीदरलैंड के हेग में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का गठन हुआ।
1950 – विनोबा भावे ने आंध्र प्रदेश (अब तेलंगाना) के पचमपल्ली गाँव से भूदान आंदोलन की शुरुआत की।
1955 – बांडुंग में अफ़्रीकी-एशियाई सम्मेलन का आयोजन किया गया।
1971 – सम्राट अशोक नामक देश का पहला जंबो जेट विमान 747 मुंबई में उतरा।
1980 – जिंबाब्वे ने ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिलने की घोषणा की।
1991 – केरल भारत का पहला पूर्ण साक्षर राज्य घोषित हुआ।
1994 - वेस्टइंडीज के बल्लेबाज़ ब्रायन लारा ने 375 रन बनाकर टेस्ट मैच की एक पारी में सर्वाधिक रन बनाने का विश्व रिकार्ड बनाया।
1996 – काहिरा में अज्ञात हमलावरों ने ग्रीस के 17 टूरिस्टों और उनके स्थानीय गाइड को गोलियों से भून दिया।
1996 – ज़ायोनी शासन की वायु सेना ने दक्षिणी लेबनान के क़ाना गांव में संयुक्त राष्ट्र संघ की शांति सेना के ठिकाने पर बमबारी की।
2001 - भारतीय सीमा में घुस आई बांग्लादेश की सेना की गोलीबारी से भारत के 16 जवान शहीद।
2002 - 1973 से इटली में निवास कर रहे अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व शासक मोहम्मद जहीर शाह काबुल लौटे।
2005 - भारत मुम्बई स्थित जिन्ना हाउस पाकिस्तान को देने पर सहमत।
2006 - राबिन हुड का शहर नाटिंघम लूटग्रस्त शहर घोषित।
2008 - इंफोसिस टैक्नोलाजी ने विकास एवं मरम्मत सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए अमेरिका की कॉनसेको के साथ पाँच वर्ष के लिए क़रार किया।
2008 - अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने जानलेवा इंजेक्शन के ज़रिये सज़ा-ए-मौत को वैध ठहराया।
2008 – आईपीएल के पहले सीजन का पहला मैच बेंगलुरु में खेला गया था।
2008 - पाकिस्तान ने भारतीय क़ैदी सबरजीत सिंह की फ़ांसी की सज़ा को एक महीने के लिए टाला।
2008 - भारत और मैक्सिको ने नागरिक उड्डयन व ऊर्जा के क्षेत्र में नये समझौते किए।
2013 – इराक की राजधानी बगदाद में बम धमाकों से 27 की मौत हुई और 65 घायल हुए।
2014 – माउंट एवरेस्ट में आए हिमस्खलन से नेपाल के 12 पर्वतारोहियों की मौत हुई।
2019 - भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा से होने वाला व्यापार स्थगित किया।
2019 - बजरंग पूनिया ने कुश्ती के 65 किलोग्राम की फ्री स्टाइल रैंकिंग में फिर पहला स्थान हासिल किया।
2020 - अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआइटीए) खेल मंत्रलय के निर्देश पर आजीवन अध्यक्ष, आजीवन उपाध्यक्ष और आजीवन सलाहकार जैसे मानद पदों को खत्म करने पर सहमत हो गया।
2020 - कोविड-19 के संदर्भ में ग्रामीण डाक सेवक सहित सभी डाक कर्मचारियों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का फैसला किया गया।
2021 - पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा प्रतिबंधित इस्लामी पार्टी तहरीक-ए-लबैक पाकिस्तान पर की गई कार्रवाई में संगठन के तीन कार्यकर्ता मारे गए और कई अन्य जख्मी हुए।
2021 - मिस्र में यात्रियों से भरी ट्रेन पटरी से उतरी , 11 लोगों की मौत व 90 से ज्यादा घायल हुए।
2022 - अमेठी में ट्रक और बोलेरो की टक्कर से छह लोगों की मौत व चार की हालत गंभीर हुई।
2022 - रूसी सेना ने यूक्रेन पर एक के बाद एक कई राकेट दागे , मारियोपोल की सड़कों पर लाशें बिछ गयी।
2022 - पाकिस्तान में श्रीलंकाई नागरिक की हत्या के मामले में 6 को मौत की सजा, 7 को उम्रकैद व शेष 67 अन्य संदिग्धों को दो-दो साल की सजा सुनाई।
18 अप्रैल को जन्मे व्यक्ति👉
1621 - गुरु तेग बहादुर, सिखों के नवें गुरु थे(21 अप्रैल 1621 का भी वर्णन इसलिए कन्फर्म कर लें)।
1858 - धोंडो केशव कर्वे - आधुनिक भारत का सबसे बड़ा समाज सुधारक और उद्धारक माना जाता है।
1901 - चन्देश्वर प्रसाद नारायण सिंह, भारत के राजनीतिज्ञ थे।
1916 -ललिता पवार, हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री।
1928 - दुलारी - भारतीय सिनेमा की जानीमानी अभिनेत्री थीं।
1961 - पूनम ढिल्लों - बालीवुड अभिनेत्री ।
18 अप्रैल को हुए निधन👉
1859 - तात्या टोपे - वीर पुरुष और 'प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम' में भाग लेने वाले प्रमुख व्यक्ति।
1898 - दामोदर हरी चापेकर - भारत के क्रांतिकारी अमर शहीदों में से एक थे।
1916 - जी. सुब्रह्मण्यम अय्यर - भारत के जानेमाने पत्रकार तथा प्रमुख बुद्धिजीवी थे।
1955 - बांडुंग में अफ़्रीकी - एशियाई सम्मेलन; प्रसिद्ध वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टाइन का देहावसान।
1959 - बारीन्द्र कुमार घोष - भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी तथा पत्रकार थे।
1972 - पांडुरंग वामन काणे - महान् भारतीय संस्कृतज्ञ और विद्वान् पंडित।
1978 – प्रख्यात लेखक खुशवंत सिंह के पिता शोभा सिंह का निधन हुआ।
1999 - ब्रिटेन की प्रमुख उपन्यासकार, जीवनीकार और सम्पादक मैरी बुलिंस (90) का निधन हुआ।
2003 - सुधाकर पाण्डेय - हिन्दी साहित्य की प्रमुख विधाओं के उत्कृष्ठ लेखक और सुधारक।
2014 - गुरु धनपाल - एक भारतीय फ़िल्म निर्देशक थे जो तमिल सिनेमा के लिए काम करते थे।
2021 - कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में अंपायरिंग कर चुकीं पूर्व महिला अंपायर अनुपमा पंचीमांडा का निधन हुआ।
2021 - असम के पूर्व मुख्यमंत्री भूमिधर बर्मन का लगभग 91 वर्ष की उम्र में निधन हुआ।
2021 - कर्नाटक में जाने-माने कन्नड़ लेखक एवं समालोचक प्रोफेसर गंजम वेंकटसुबैया (107) का निधन हुआ।
2021 - पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री बच्ची सिंह रावत का ऋषिकेश एम्स में उपचार के दौरान निधन हो गया।
18 अप्रैल के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव👉
🔅 श्री तात्या टोपे शहीदी दिवस।
🔅 विश्व पुरातत्व ( विरासत /धरोहर ) दिवस।
कृपया ध्यान दें जी👉
यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 18 अप्रैल को रात के 8.30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। इसे लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि वे कुछ चौकाने वाली घोषणाएं कर सकते हैं। कुछ लोगों कयास लगा रहे हैं कि पीएम मोदी लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास नहीं होने पर कुछ खासे कहना चाहते हैं।
पूर्व डिप्टी CM ने लगाया ‘पुलिस गुंडागर्दी’ का आरोप हरियाणा के हिसार में बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। Dushyant Chautala, जो पूर्व उपमुख्यमंत्री और जननायक जनता पार्टी (JJP) के नेता हैं, ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी कार को रोका गया, उन्हें कुचलने की कोशिश की गई और उन पर पिस्टल तान दी गई। SP से मिलने जा रहे थे, रास्ते में हुआ विवाद दुष्यंत चौटाला के मुताबिक, वह हिसार के पुलिस अधीक्षक से मिलने जा रहे थे। यह मुलाकात गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान JJP से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी के मुद्दे पर थी। इसी दौरान रास्ते में क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (CIA) की टीम ने उनकी गाड़ी को रोक लिया। ‘गाड़ी से कुचलने की कोशिश, पिस्टल दिखाई’ चौटाला ने आरोप लगाया कि पुलिस वाहन ने उनकी गाड़ी को रोककर टक्कर मारने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन पर पिस्टल तान दी। हालांकि, वह बाद में SP से मिले और पूरे मामले की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। CCTV फुटेज का दावा, सोशल मीडिया पर वीडियो साझा चौटाला ने दावा किया कि यह पूरी घटना CCTV कैमरे में कैद हुई है। उन्होंने कथित वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सरकार और पुलिस पर निशाना साधा। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि “जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो सिस्टम पर सवाल उठना जरूरी है।” BJP पर साधा निशाना JJP नेता ने इस घटना को “पुलिस की गुंडागर्दी” बताते हुए राज्य की BJP सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह “नया हरियाणा” है, जहां पुलिस वर्दी में गुंडे काम कर रहे हैं। क्या है पूरा मामला? गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में छात्रों से बातचीत को लेकर हुए विवाद के बाद JJP कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई थी। इसी के विरोध में चौटाला हिसार पहुंचे थे और गिरफ्तारी को “गलत” बताते हुए रिहाई की मांग कर रहे थे। इस पूरे मामले ने हरियाणा की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब पुलिस प्रशासन और सरकार की ओर से क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर टिकी हुई है।
हेयरपिन मोड़ पर चालक का संतुलन बिगड़ा, हादसे में कई घायल तमिलनाडु के सेलम जिले में एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। कोयंबटूर-सेलम राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक सरकारी बस के नियंत्रण खोने से हुए हादसे में केरल के 9 शिक्षकों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। कैसे हुआ हादसा? जानकारी के मुताबिक, यह हादसा उस समय हुआ जब बस 13वें हेयरपिन मोड़ पर मुड़ रही थी। इसी दौरान चालक अचानक नियंत्रण खो बैठा। अनियंत्रित बस पहले एक दोपहिया वाहन और फिर एक ऑटो रिक्शा से टकराई, जिसमें करीब 10 लोग सवार थे। टक्कर के बाद बस नीचे की ओर 9वें हेयरपिन मोड़ तक जा गिरी। बस में केरल के पेरिंथलमन्ना से आए 13 पर्यटक सवार थे, जो पेशे से शिक्षक थे। मृतकों और घायलों की स्थिति हादसे में 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल एक अन्य व्यक्ति ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। घायलों में बस चालक, 17-18 साल के दो युवक और दो महिलाएं शामिल हैं। सभी को तुरंत बचाव दल ने निकालकर पोलाची के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। राहत और बचाव कार्य तेज घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंच गईं। वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद राहत और बचाव कार्य की निगरानी की। घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। प्रधानमंत्री और नेताओं ने जताया दुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी घटना पर दुख जताते हुए अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त किया। स्कूल में फैला मातम इस हादसे के बाद केरल के मलप्पुरम स्थित पांग-पल्लिपरंबा गवर्नमेंट एलपी स्कूल में शोक की लहर है, जहां सभी मृतक शिक्षक कार्यरत थे। पूरे इलाके में मातम का माहौल बना हुआ है।