648 – यूक्रेन में खमेलनत्सकी विद्रोह के दौरान चमीलनीक हत्याकांड में 10,000 यहूदियों की हत्या की गई।
1678 – छत्रपति शिवाजी महाराज ने वेल्लोर का किला जीता।
1702 – ईस्ट इंडिया कंपनी ओल्ड और न्यू ने मिलकर एक कंपनी इंडिया यूनाइटेड कंपनी ऑफ ट्रेडिेग का गठन किया।
1706 - स्कॉटलैंड और इंग्लैंड की संधि ने राष्ट्रीय विधायिकाओं द्वारा अनुसमर्थन के लिए लंदन में सहमत की।
1729 - ब्राजील के एक मिनास गेराज में हीरे पाए गए।
1731 - स्पेन ने विएना की संधि पर हस्ताक्षर किये।
1775 – जॉर्ज वॉशिंगटन ने अमेरिकी सेना की कमान संभाली। जार्ज वाशिंगटन अमेरिका के पहले राष्ट्रपति थे।
1802 - जीए लांग ने वियतनाम के अपने एकीकरण को पूरा करने के लिए हनोई पर कब्जा किया।
1808 - फ्रेंच जनरल ड्यूपॉन्ट बेलेन की लड़ाई के बाद स्पेनिश अनियमित ताकतों को आत्मसमर्पण कर दिया।
1873 - सर बेंजामिन पाइन नताल के कॉलोनी के लेफ्टिनेंट - गवर्नर बनाये गए।
1905 - टाफ़्ट-कत्सुरु गुप्त समझौता हुआ।
1918 – अमेरिका के उताह राष्ट्रीय उद्यान में बिजली गिरने से 504 भेड़ों की माैत।
1947 - भारत का राष्ट्रीय ध्वज 22 जुलाई, 1947 को भारत के संविधान द्वारा अपनाया गया था।
1981 – भारत के पहले भू स्थिर उपग्रह ‘एप्पल’ ने काम करना शुरु किया।
1999 - अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा समान कार्य के लिए समान पारिश्रमिक की कार्य योजना लागू।
2000 – एरिजोना विश्वविद्यालय के खलोलविदों ने बृहस्पति के 17वें प्राकृतिक उपग्रह की खोज की।
2001 - शेर बहादुर देउबा नेपाल के नये प्रधानमंत्री बने।
2001- समूह-आठ देशों का जिनेवा में सम्मेलन सम्पन्न।
2003 – इराक में हवाई हमले में तानाशाह सद्दाम हुसैन के दो बेटे मारे गए थे।
2004 - शांति के लिए 1976 में नोबेल पुरस्कार जीतने वाली बैटी बिलियम्स मैक्सिको में गिरफ़्तार।
2005 - आतंकवादी होने के सन्देह में लंदन पुलिस ने निर्दोष ब्राजीली नागरिक जीन चार्ल्स डे-मेंसेज को मार गिराया।
2008 - पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर ख़ान ने एक अदालत में अपने ख़िलाफ़ लगे प्रतिबन्धों हेतु पुनर्विचार याचिका दायर की।
2009 - 22 जुलाई 2009 का सूर्यग्रहण 21वीं सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्यग्रहण भारत में दिखाई दिया था।
2010 – दुनिया के महानतम गेंदबाज श्रीलंका के मुथैया मुरलीघरन ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया। इनके नाम इस फॉमेंट में सबसे ज्यादा 800 विकेट का रिकोर्ड है।
2011 – नॉर्वे पर अचानक हुए दो हमलों में 77 लोगों की जान चली गई। पहला हमला आम लोगों और सरकार पर हुआ तो दूसरा वर्कर्स यूथ लीग के समर कैंप में।
2012 – प्रणव मुखर्जी भारत के 13वें राष्ट्रपति बने।
2013 – चीन के गांसु प्रांत में भूकंप से 89 लोग मरे।
2013 – ब्रिटेन के राजकुमार विलियम और केट मिडिलटन के पहले बच्चे प्रिंस जॉर्ज का जन्म हुआ।
2014 – एक रिपोर्ट में 9/11 हमले को सरकारी संस्थाओं की नाकामी करार दिया गया।
2019 - भारत के भूसमकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) एमकेIII-एम1 ने 3840 किलोग्राम भार वाले #चन्द्रयान-2 अंतरिक्षयान को पृथ्वी की एक कक्षा में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया।
2019 - शिवा थापा प्रेसिडेंट्स कप में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय बॉक्सर बने ।
2020 - दक्षिण कोरिया का पहला सैन्य संचार उपग्रह निजी ऑपरेटर ‘स्पेसएक्स’ द्वारा सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।
2020 - निकारागुआ अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) फ्रेमवर्क समझौते में शामिल होने वाला 87 वाँ देश बन गया ।
2020 - विश्व व्यापार संगठन (WTO) जनरल काउंसिल ने मध्य एशियाई देश तुर्कमेनिस्तान को 'ऑब्जर्वर' का दर्जा दिए जाने की घोषणा की ।
2020 - ओडिशा के बालेश्वर जिले में इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आइटीआर) में पिछले 15, 16 जुलाई को ध्रुवास्त्र एंटी टैंक मिसाइल का परीक्षण किया गया, जिसका वीडियो 22 जुलाई को साझा किया।
2021 - ट्यूनिशिया में भूमध्य सागर तट के पास एक जहाज में सवार 17 अप्रवासी बांग्लादेशी डूब गए जबकि 380 को बचा लिया गया।
2021 - मध्य चीन में अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या 33 हुईऔर आठ लोग लापता।
2022 - रूस-यूक्रेन ने अनाज की सप्लाई को लेकर 'ब्लैक सी ग्रेन इनिशिएटिव' समझौते पर दस्तखत किए।
2022 - ईडी ने हांगकांग में नीरव मोदी की 253 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की।
2022 - मध्य प्रदेश का बुरहानपुर जिला देश का पहला 'हर घर जल' प्रमाणित जिला बना।
2023 - अरुणाचल प्रदेश के तवांग में रिक्टर पैमाने पर 3.3 तीव्रता का भूकंप आया।
2023 - 32 साल की शानदार सेवा पूरी करने के बाद भारतीय नौसेना जहाज कृपाण को सेवामुक्त कर दिया गया व उपहार स्वरुप वियतनाम को सौंपा गया।
2023 - आंध्र प्रदेश में बस और ट्रॉली के बीच टक्कर से 6 यात्रियों की मौत हुई व 20 घायल हुए।
2023 - प्रधानमंत्री ने जी20 ऊर्जा मंत्रियों की बैठक को संबोधित किया।
2024 - भागलपुर में स्नान करने के दौरान 11 बच्चे नदी में डूबे, 4 की मौत हुई।
2024 - नेवी का युद्धपोत INS ब्रह्मपुत्र एक तरफ झुका, आग की चपेट में आने से हुआ क्षतिग्रस्त , एक नाविक भी लापता हुआ।
1894 - सरदार तेजा सिंह अकरपुरी - पहली लोकसभा के सदस्य।
1898 - विनायकराव पटवर्धन - प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत गायक।
1923 - मुकेश, प्रसिद्ध पार्श्व गायक ।
1930 - श्रीराम शंकर अभयंकर बीजगणितीय ज्यामिति में उनके योगदान के लिए विख्यात भारतीय गणितज्ञ।
1933 - हिम्मत शाह - भारत के प्रसिद्ध मूर्तिकार।
1949 - रीता बहुगुणा जोशी - पूर्व विधायिका उत्तर प्रदेश, पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय एच. एन. बहुगुणा की बेटी व संसद सदस्य लोकसभा 2019।
1953 - मज़हर ख़ान हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता ।
1959 - अनंत कुमार - भारतीय जनता पार्टी के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ।
1965 - संदीप पांडेय - 'रेमन मैगसेसे पुरस्कार' से सम्मानित प्रसिद्ध भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता।
1970 - देवेन्द्र फडणवीस, महाराष्ट्र के 18वें मुख्यमंत्री।
1918 – भारत के पहले प्रवीण पायलट इन्द्रलाल राय प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान लंदन में जर्मनी के साथ हवाई लड़ाई में मारे गए।
1933 - यतीन्द्र मोहन सेन गुप्त - भारतीय स्वाधीनता संग्राम के प्रमुख नायकों में से एक।
1968 - मुत्तू लक्ष्मी रेड्डी - भारत की प्रसिद्ध महिला चिकित्सक, सामाजिक कार्यकर्ता और पद्म भूषण प्राप्तकर्ता थीं।
2013 - चंद्रिका प्रसाद श्रीवास्तव को प्रशासकीय सेवा के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन १९७२ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
2022 - प्रसिद्ध वरिष्ठ मराठी लेखक अनंत यशवंत खरे उर्फ नंदा खरे (76) का लंबी बीमारी के चलते पुणे में निधन हुआ।
2023 - विंसेंट हिल एक अंग्रेजी पारंपरिक पॉप गायक (89) का निधन हुआ।
2023 - जर्मन फुटबॉल खिलाड़ी गुंथर हरमन (83) का निधन हुआ।
2024 - ब्रिटिश ब्लूज़ संगीतकार जॉन मेयाल का 90 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
मेला शरीक भवानी (काश्मीर)।
श्री देवेन्द्र फडणवीस जन्म दिवस।
महान गायक श्री मुकेश जयन्ती।
राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण दिवस।
विश्व मस्तिष्क दिवस (World Brain Day)।
राष्ट्रीय आम दिवस ( National Mango Day)।
पाई सन्निकटन दिवस (Pi Approximation Day)।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। जर्मनी की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी वोक्सवैगन एजी (Volkswagen AG) भारत में अपने कारोबार को लेकर बड़ा रणनीतिक कदम उठाने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी JSW Group के साथ अपनी भारतीय इकाई में हिस्सेदारी बेचने को लेकर अंतिम चरण की बातचीत कर रही है। यदि यह सौदा पूरा होता है, तो भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में यह हाल के वर्षों के सबसे बड़े निवेश सौदों में से एक हो सकता है। भारत में कारोबार मजबूत करने पर फोकस रिपोर्ट के मुताबिक, इस संभावित साझेदारी का उद्देश्य वोक्सवैगन के भारतीय कारोबार का विस्तार करना और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) समेत नए सेगमेंट में निवेश को गति देना है। JSW Group पहले से ही ऑटो और ईवी सेक्टर में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है, ऐसे में दोनों कंपनियों की साझेदारी भारतीय बाजार में नई संभावनाएं खोल सकती है। दोनों कंपनियों ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की हालांकि, अब तक वोक्सवैगन और JSW Group की ओर से इस संभावित सौदे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार, बातचीत अंतिम चरण में है और दोनों पक्ष सौदे की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं। समझौता होने के बाद ही हिस्सेदारी और निवेश से जुड़े अंतिम विवरण सार्वजनिक किए जाएंगे। ऑटो सेक्टर की नजर इस सौदे पर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है, तो भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। साथ ही वोक्सवैगन को स्थानीय उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई तकनीकों में निवेश करने और इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। निवेशकों और उद्योग जगत की नजर फिलहाल इस संभावित डील की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई है।
NEET पेपर लीक और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। कांग्रेस के प्रदर्शन और प्रधानमंत्री आवास के पास धरने के बाद केंद्र सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी पर वादा तोड़ने का आरोप लगाया, वहीं कांग्रेस ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने और संसद में चर्चा से बचने का आरोप लगाया है। जितेंद्र सिंह ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ धरने पर बैठे थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने बातचीत के लिए उन्हें और गृह सचिव गोविंद मोहन को भेजा था। जितेंद्र सिंह के मुताबिक, सरकार ने राहुल गांधी से अनुरोध किया कि निर्धारित स्थान के अलावा कहीं और धरना देने से आम लोगों को परेशानी हो रही है। सरकार का दावा- चर्चा की मांग मान ली थी केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी ने पहले शर्त रखी थी कि यदि सरकार NEET पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने के लिए तैयार हो जाए, तो वह धरना समाप्त कर देंगे। सरकार का दावा है कि इस मांग को तत्काल स्वीकार कर लिया गया और संसद में चर्चा के लिए सहमति भी दे दी गई। 'फिर बदल दी मांग' जितेंद्र सिंह का आरोप है कि सरकार की सहमति मिलने के बाद राहुल गांधी ने अपनी मांग बदल दी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की नई शर्त जोड़ दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने राहुल गांधी को याद दिलाया कि पहले केवल चर्चा की मांग की गई थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी मांग बदल दी। मंत्री ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया। राहुल गांधी का पलटवार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्रों पर की गई कार्रवाई हर भारतीय परिवार पर हमला है। राहुल गांधी ने लोगों से कांग्रेस के आंदोलन का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों को न्याय मिलने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी। कांग्रेस का आरोप कांग्रेस का कहना है कि सरकार संसद में NEET पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे पर चर्चा से बच रही है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, पिछले कई सप्ताह से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और संसद में चर्चा की मांग की जा रही थी, लेकिन जब सदन में बहस का मौका नहीं मिला तो विपक्ष को सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। संसद से सड़क तक पहुंचा विवाद NEET पेपर लीक और छात्रों के विरोध प्रदर्शन का मुद्दा अब संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है। सरकार और विपक्ष दोनों एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक मूल्यों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना रह सकता है।
वॉशिंगटन/तेहरान, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि उसने लगातार 11वीं रात ईरान से जुड़े कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन अभियानों का उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिकी बलों और सहयोगी देशों पर बढ़ते खतरों को रोकना है। CENTCOM ने जारी किया आधिकारिक बयान CENTCOM ने कहा कि हालिया कार्रवाई में रणनीतिक सैन्य ठिकानों और हथियार भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि अभियान पूर्व निर्धारित सैन्य लक्ष्यों तक सीमित था और इसका मकसद क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ईरान ने दी जवाबी चेतावनी ईरान ने अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। तेहरान ने कहा कि यदि सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो उसका जवाब भी उसी स्तर पर दिया जाएगा। ईरानी अधिकारियों ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पर भी सवाल उठाए हैं। मध्य पूर्व में बढ़ी चिंता लगातार सैन्य कार्रवाई के कारण पूरे मध्य पूर्व में तनाव का माहौल बना हुआ है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आशंका है कि संघर्ष और बढ़ने पर इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र की नजर स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र और कई प्रमुख देशों ने दोनों पक्षों से तत्काल तनाव कम करने की अपील की है। कूटनीतिक प्रयासों के जरिए हालात सामान्य करने की कोशिशें जारी हैं, जबकि क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।