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राघव चड्ढा ने AAP छोड़ BJP में शामिल होने पर दी सफाई

Anjali Kumari अप्रैल 27, 2026 0
Raghav Chadha
Raghav Chadha

नई दिल्ली, एजेंसियां। हाल ही में राघव चड्डा ने आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भाजपा (BJP) में शामिल होने के अपने फैसले पर विस्तृत सफाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में कहा कि पार्टी का मौजूदा स्वरूप पहले जैसा नहीं रहा और उसका आंतरिक माहौल “टॉक्सिक” हो गया है।

 

‘पार्टी कुछ भ्रष्ट लोगों के हाथ में सिमट गई’


राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि AAP में अब काम करने और अपनी बात रखने की आज़ादी नहीं रह गई थी। उनके अनुसार, पार्टी कुछ “भ्रष्ट और समझौता करने वाले लोगों” के नियंत्रण में आ गई है। उन्होंने यह भी कहा कि सांसदों को संसद में बोलने से रोका जाता था और सक्रिय योगदान देने में बाधाएं डाली जाती थीं।

 

तीन विकल्पों में से चुना नया रास्ता


चड्ढा ने बताया कि उनके सामने तीन विकल्प थे राजनीति छोड़ना, पार्टी के भीतर रहकर सुधार की कोशिश करना, या किसी नए मंच के साथ आगे बढ़ना। उन्होंने तीसरा विकल्प चुना। उनका कहना है कि कई वर्षों से उन्हें महसूस हो रहा था कि “सही व्यक्ति गलत पार्टी में है।”

 

सात सांसदों के फैसले का हवाला


उन्होंने कहा कि केवल उन्होंने ही नहीं, बल्कि छह अन्य सांसदों ने भी पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया। चड्ढा ने तर्क दिया कि “एक या दो लोग गलत हो सकते हैं, लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते,” जिससे यह संकेत मिलता है कि असंतोष व्यापक था।

 

जनता से किया वादा


राघव चड्ढा ने जनता को आश्वासन दिया कि पार्टी बदलने के बावजूद वे लोगों के मुद्दे पहले की तरह उठाते रहेंगे, बल्कि अब उन्हें समाधान तक पहुंचाने की बेहतर स्थिति में होंगे। उन्होंने अपने निर्णय की तुलना एक “टॉक्सिक कार्यस्थल” छोड़ने से की, जहां काम करना मुश्किल हो जाता है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Sanjay Kapoor case: सोना ग्रुप में विरासत की जंग को लेकर कोर्ट ने दिखाया शांतिपूर्ण का रास्ता

नई दिल्ली, एजेंसियां।  भारत के प्रमुख कॉर्पोरेट घरानों में चल रहे पारिवारिक विवादों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। Supreme Court of India ने सोना ग्रुप से जुड़े संपत्ति विवाद में लंबी कानूनी लड़ाई के बजाय मध्यस्थता (मेडिएशन) का रास्ता अपनाने की सलाह दी है।   रानी कपूर और प्रिया कपूर के बीच विवाद ऑटो सेक्टर की प्रमुख कंपनी सोना ग्रुप के भीतर 80 वर्षीय रानी कपूर और उनकी बहू प्रिया सचदेवा कपूर के बीच संपत्ति और नियंत्रण को लेकर विवाद चल रहा है। रानी कपूर ने आरोप लगाया है कि “रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट” का गठन धोखाधड़ी से किया गया और उनकी बीमारी का फायदा उठाकर उनसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए।   कोर्ट की टिप्पणी: ‘यह उम्र लड़ने की नहीं सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट कहा कि 80 वर्ष की उम्र में कोर्ट में लंबी लड़ाई उचित नहीं है। अदालत ने दोनों पक्षों को सलाह दी कि वे आपसी सहमति से विवाद सुलझाएं। जजों ने कहा कि मुकदमेबाजी समय और संसाधनों की बर्बादी है, जबकि मध्यस्थता से सभी पक्षों को राहत मिल सकती है।   विवाद की जड़: विरासत और नियंत्रण पिछले वर्ष संजय कपूर के निधन के बाद यह विवाद और गहरा गया। रानी कपूर का दावा है कि उन्हें कंपनी और संपत्ति से बेदखल कर दिया गया है, जबकि दूसरी ओर प्रिया कपूर का पक्ष भी खुद को वंचित बताता है। मामला फिलहाल Delhi High Court में भी विचाराधीन है।   गॉडफ्रे फिलिप्स मामले में सुलह इसी बीच Godfrey Phillips India से जुड़े मोदी परिवार के विवाद में राहत की खबर आई है। समीर मोदी और बीना मोदी के बीच चल रहा विवाद आपसी समझौते से सुलझ गया है, जिसके बाद अदालत ने मामला समाप्त कर दिया।

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“4 मई के बाद फिर बंगाल आऊंगा” – पीएम मोदी का बड़ा दावा

कोलकाता, एजेंसियां। नरेंद्र मोदी ने बैरकपुर  में आयोजित चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत का भरोसा जताया। दूसरे चरण के मतदान से पहले हुई इस रैली में उन्होंने कहा कि यह उनका अंतिम चुनावी दौरा है और जनता का रुझान स्पष्ट रूप से बदलाव की ओर है।   “शपथ ग्रहण में शामिल होने फिर लौटूंगा” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वे पूरे विश्वास के साथ लौट रहे हैं कि 4 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद उन्हें BJP के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए फिर से बंगाल आना पड़ेगा। उन्होंने इसे राज्य में राजनीतिक परिवर्तन का संकेत बताया।   बैरकपुर के ऐतिहासिक महत्व का जिक्र पीएम ने बैरकपुर के ऐतिहासिक महत्व को याद करते हुए कहा कि यह वही भूमि है जिसने Indian Rebellion of 1857 को शक्ति दी थी। उन्होंने कहा कि अब यही क्षेत्र बंगाल में बदलाव का नेतृत्व करेगा।   TMC सरकार पर तीखा हमला प्रधानमंत्री ने All India Trinamool Congress (TMC) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में उद्योग बंद हो रहे हैं, जबकि अवैध गतिविधियां बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि TMC के पास विकास के लिए कोई स्पष्ट दृष्टि नहीं है और राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है।   रोजगार और विकास का वादा मोदी ने कहा कि पूर्वी भारत का विकास देश की प्रगति के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने युवाओं को रोजगार देने और राज्य को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने का वादा किया। साथ ही Syama Prasad Mukherjee के सपनों को पूरा करने की बात कही।

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नेपाल के प्रधानमंत्री Balen Shah के प्रस्तावित भारत दौरे से पहले कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। काठमांडू और नई दिल्ली के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत की तैयारियां जारी हैं, वहीं इस बीच United States और China की बढ़ती मौजूदगी ने क्षेत्रीय समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है। ‘औपचारिक नहीं, परिणाम वाला दौरा’ – बालेन शाह बालेन शाह ने स्पष्ट संकेत दिया है कि उनका दिल्ली दौरा सिर्फ औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि ठोस नतीजों पर आधारित होगा। उन्होंने साफ किया है कि वे पुराने पैटर्न को नहीं दोहराना चाहते और भारत यात्रा के दौरान वास्तविक मुद्दों पर प्रगति चाहते हैं। भारतीय विदेश सचिव का काठमांडू दौरा इसी कड़ी में भारत के विदेश सचिव Vikram Misri 11-12 मई को काठमांडू का दौरा कर सकते हैं। उन्हें नेपाल की ओर से औपचारिक निमंत्रण भी भेजा जा चुका है। इस दौरे का मकसद नेपाल सरकार की प्राथमिकताओं को समझना और बालेन शाह की अपेक्षाओं के अनुसार एजेंडा तय करना है। बताया जा रहा है कि S. Jaishankar और नेपाल के विदेश मंत्री Shishir Khanal के बीच पहले ही इस दौरे को लेकर बातचीत हो चुकी है। काठमांडू में बढ़ी वैश्विक सक्रियता इस बीच काठमांडू में अमेरिका और चीन दोनों की कूटनीतिक सक्रियता बढ़ गई है। अमेरिकी और चीनी अधिकारी हाल ही में नेपाल का दौरा कर चुके हैं, जिससे साफ है कि नेपाल अब एक अहम रणनीतिक केंद्र बनता जा रहा है। एजेंडा तय करने पर जोर भारतीय विदेश सचिव का दौरा मुख्य रूप से बालेन शाह की भारत यात्रा के एजेंडे को अंतिम रूप देने पर केंद्रित होगा। इसमें भारत द्वारा नेपाल में चल रही परियोजनाओं की समीक्षा, नई साझेदारियों की संभावनाएं और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा शामिल हो सकती है। प्रोटोकॉल और कूटनीतिक संकेत दिलचस्प बात यह है कि बालेन शाह फिलहाल एक अलग कूटनीतिक रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। वे केवल शीर्ष स्तर के नेताओं—राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री—से ही मुलाकात कर रहे हैं और निचले स्तर के अधिकारियों से दूरी बनाए हुए हैं। यह उनके नए ‘स्टैंडर्ड’ सेट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।  

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