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जेडी वेंस ने पीएम मोदी को किया फोन, भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा

abhishek singh अगस्त 9, 2026 0
JD Vance PM Modi
JD Vance PM Modi Talk

नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

 

व्यापार और रक्षा सहयोग पर हुई चर्चा

 

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी और जेडी वेंस ने दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, महत्वपूर्ण एवं उभरती तकनीकों, ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

 

क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी बातचीत

 

फोन कॉल के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों पर भी विचार साझा किए। भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग को हिंद-प्रशांत क्षेत्र सहित व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है।

 

पीएम मोदी ने जेडी वेंस को दी बधाई

 

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जेडी वेंस और उनकी पत्नी उषा वेंस को हाल ही में बेटे के जन्म पर बधाई दी और परिवार के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए जारी उच्चस्तरीय संपर्क का हिस्सा है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

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अमरनाथ यात्रा 9 अगस्त से स्थगित, बारिश से क्षतिग्रस्त ट्रैक की होगी मरम्मत

श्रीनगर, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर में चल रही श्री अमरनाथ जी यात्रा 2026 को 9 अगस्त से अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया गया है। यात्रा बालटाल और नुनवान-पहलगाम दोनों मार्गों पर रोकी जाएगी। हाल की बारिश के कारण यात्रा मार्गों को हुए नुकसान और ट्रैक की मरम्मत की जरूरत को देखते हुए प्रशासन ने यह निर्णय लिया है।   दोनों मार्गों पर यात्रा रहेगी बंद   अधिकारियों के अनुसार 9 अगस्त से अमरनाथ गुफा की ओर जाने वाले बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर तीर्थयात्रियों की आवाजाही रोक दी जाएगी। यात्रा मार्गों की स्थिति की समीक्षा और आवश्यक मरम्मत के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।   बारिश से ट्रैक को नुकसान   हाल में हुई बारिश के चलते पहाड़ी यात्रा मार्गों के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में आने वाले दिनों में खराब मौसम और भारी बारिश की संभावना को देखते हुए यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।   ट्रैक की बहाली का काम शुरू   यात्रा मार्गों को दोबारा सुरक्षित बनाने के लिए संबंधित एजेंसियां ट्रैक की मरम्मत और बहाली का काम करेंगी। प्रशासन की ओर से मार्गों की सुरक्षा स्थिति का आकलन किया जा रहा है। यात्रा दोबारा कब शुरू होगी, इस संबंध में अभी कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। श्रद्धालुओं को प्रशासन की अगली सूचना का इंतजार करने की सलाह दी गई है।

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पीएम मोदी ने भारत छोड़ो आंदोलन के स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन, देशवासियों से प्रेरणा लेने की अपील

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर भारत छोड़ो आंदोलन के स्वतंत्रता सेनानियों और देश की आजादी के लिए अपना योगदान देने वाले वीरों को नमन किया। उन्होंने देशवासियों से स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के त्याग, साहस और संकल्प से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।   9 अगस्त 1942 को शुरू हुआ था आंदोलन   भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत 9 अगस्त 1942 को हुई थी। महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संघर्ष को निर्णायक दिशा दी। इसी वजह से 9 अगस्त को अगस्त क्रांति दिवस के रूप में याद किया जाता है। आंदोलन का उद्देश्य भारत से ब्रिटिश शासन को समाप्त कर देश को स्वतंत्र कराना था। इसमें बड़ी संख्या में आम नागरिकों, युवाओं और स्वतंत्रता सेनानियों ने हिस्सा लिया।   स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को किया याद   प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश के लिए संघर्ष करने वाले लोगों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का साहस और त्याग आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के उन महत्वपूर्ण पड़ावों में शामिल है, जिसने देश की आजादी के संकल्प को और मजबूत किया।   देशवासियों से संकल्प लेने की अपील   अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को याद करते हुए देशवासियों से राष्ट्रहित में योगदान देने और देश के विकास के लिए मिलकर काम करने की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया। आजादी के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने उनके आदर्शों और संकल्प से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

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आरजी कर कांड के दो साल पूरे, पश्चिम बंगाल में आज दो मिनट का मौन रखा जाएगा

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ हुई घटना के दो साल पूरे होने पर आज, 9 अगस्त को राज्यभर में दो मिनट का मौन रखा जाएगा। राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संबंध में स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश जारी किए गए हैं। इस दौरान डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य कर्मचारियों से घटना की पीड़िता की स्मृति में मौन रखने की अपील की गई है।   स्वास्थ्य संस्थानों में रखा जाएगा मौन   आरजी कर मामले की दूसरी बरसी के अवसर पर राज्य के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में दो मिनट का मौन रखा जाएगा। विभाग की ओर से संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित हो। कोलकाता स्थित आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल इस पूरे मामले का केंद्र रहा है। घटना के बाद देशभर में डॉक्टरों और आम लोगों के बीच व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे।   दो साल बाद भी मामला चर्चा में   9 अगस्त 2024 को आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर का शव मिलने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था। घटना को लेकर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन किया। मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंपी गई थी। घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था, डॉक्टरों की सुरक्षा और अस्पतालों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी देशभर में सवाल उठे थे।   न्याय और सुरक्षा को लेकर उठती रही आवाज   आरजी कर मामले के बाद पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन कर स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए बेहतर व्यवस्था की मांग की थी। प्रदर्शनकारियों ने मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग लगातार उठाई।   दो साल पूरे होने के मौके पर एक बार फिर घटना की याद और पीड़िता के लिए न्याय की मांग सार्वजनिक चर्चा में है। राज्य में विभिन्न संगठनों और स्वास्थ्यकर्मियों की ओर से भी इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है।   दूसरी बरसी पर सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर   आरजी कर मामले की दूसरी बरसी के मद्देनजर कोलकाता समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में होने वाले कार्यक्रमों पर प्रशासन की नजर है। संवेदनशील स्थानों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य संस्थानों से दो मिनट का मौन शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करने और कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा है।

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