भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय वैज्ञानिकों ने छठी पीढ़ी (6th Generation) के फाइटर जेट की डिजाइन से जुड़ी एक अहम तकनीक विकसित कर ली है। यह तकनीक भविष्य में भारत के पांचवीं और छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
दुनिया में अभी तक किसी भी देश के पास पूरी तरह से विकसित छठी पीढ़ी का फाइटर जेट नहीं है। अमेरिका, चीन, जापान और यूरोप के कुछ देश इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल इस दौड़ में सबसे गंभीर रूप से अमेरिका और चीन ही आगे माने जाते हैं। ऐसे समय में भारत की यह तकनीकी सफलता रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
भारत इस समय 4.5 जेनरेशन और 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। 4.5 जेनरेशन तकनीक के तहत तेजस मार्क-2 के प्रोटोटाइप पर काम जारी है। इसके अलावा भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट प्रोजेक्ट AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) भी विकास के चरण में है।
इसी बीच भारत ने 4.5+ जेनरेशन के राफेल लड़ाकू विमानों को भी अपने बेड़े में शामिल करने की योजना बनाई है और भविष्य में भारतीय वायुसेना में 114 और राफेल विमानों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स भविष्य की युद्ध तकनीक का अहम हिस्सा माने जा रहे हैं। इन विमानों में अत्याधुनिक स्टेल्थ तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन के साथ समन्वित ऑपरेशन जैसी क्षमताएं होंगी।
ये फाइटर जेट केवल अकेले युद्ध नहीं करेंगे, बल्कि ड्रोन और अन्य लड़ाकू विमानों के साथ एक टीम की तरह काम करेंगे। इन्हें भविष्य के “फ्लाइंग कमांड सेंटर” के रूप में भी देखा जा रहा है।
भारत में फाइटर जेट्स के विकास का काम एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) कर रही है। इस संस्था के वैज्ञानिकों ने स्टेल्थ फाइटर जेट्स के लिए एयर इनटेक सिस्टम के एयरोडायनामिक डिजाइन में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।
फरवरी 2026 में ‘जर्नल ऑफ एयरोस्पेस साइंसेज एंड टेक्नोलॉजीज’ में प्रकाशित इस शोध में बताया गया है कि कैसे हाई इंजन परफॉर्मेंस को बनाए रखते हुए विमान की स्टेल्थ क्षमता को सुरक्षित रखा जा सकता है। यह तकनीक भारत के AMCA प्रोजेक्ट और भविष्य के छठी पीढ़ी के टेललेस एयरक्राफ्ट के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार स्टेल्थ फाइटर जेट्स की सबसे बड़ी चुनौती इंजन के कंप्रेसर ब्लेड्स को दुश्मन के रडार से छिपाना होती है। ये ब्लेड रडार तरंगों को तेज़ी से परावर्तित करते हैं, जिससे विमान की पहचान हो सकती है।
इस समस्या के समाधान के लिए डिजाइनर ‘S-Duct’ या सर्पाकार एयर इनटेक का उपयोग करते हैं। यह डिजाइन हवा को घुमावदार रास्ते से इंजन तक पहुंचाता है, जिससे इंजन सीधे रडार की नजर में नहीं आता।
हालांकि इस तरह के घुमावदार रास्ते से गुजरते समय हवा का प्रवाह अस्थिर हो सकता है, जिससे इंजन की क्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता है।
ADA के इंजीनियर आर. अबिलाशनिनी और विल्लिआम्माई सोमासुंदरम ने विंड टनल परीक्षण और कंप्यूटेशनल फ्लूइड डायनामिक्स तकनीक का उपयोग करके एक नई एयर इनटेक ज्योमेट्री विकसित की है।
इस तकनीक के परिणाम बेहद प्रभावशाली बताए जा रहे हैं। इससे इंजन की परफॉर्मेंस बनाए रखते हुए स्टेल्थ क्षमता को सुरक्षित रखने का रास्ता साफ हुआ है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीकी उपलब्धि भारत के AMCA प्रोजेक्ट के लिए एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है। इसके साथ ही भविष्य में छठी पीढ़ी के फाइटर जेट विकसित करने की दिशा में भी भारत को मजबूत आधार मिलेगा।
यदि इस तकनीक को सफलतापूर्वक लागू किया गया, तो भारत आने वाले वर्षों में उन्नत लड़ाकू विमान तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ा वैश्विक खिलाड़ी बनकर उभर सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रायपुर, एजेंसियां। पद्म विभूषण से सम्मानित और पंडवानी लोकगायन की विश्वप्रसिद्ध कलाकार तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर स्थित एम्स में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं और पिछले कई सप्ताह से उपचाराधीन थीं। उनके निधन से देशभर के कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई। पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को अपनी दमदार शैली, अभिनय और गायन के माध्यम से प्रस्तुत कर उन्होंने इस लोककला को नई पहचान दिलाई। उन्होंने भारत के साथ-साथ यूरोप, एशिया और कई अन्य देशों में भी अपनी प्रस्तुतियां देकर भारतीय लोक संस्कृति का गौरव बढ़ाया। पद्म विभूषण सहित कई बड़े सम्मान अपने लंबे कलात्मक जीवन में तीजन बाई को पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और अनेक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। कम उम्र में सामाजिक विरोध का सामना करने के बावजूद उन्होंने पंडवानी की परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और महिला कलाकारों के लिए नई राह बनाई। प्रधानमंत्री मोदी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे "कला और संस्कृति जगत की अपूरणीय क्षति" बताया। विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थानों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और भारतीय लोककला में उनके योगदान को हमेशा याद रखने की बात कही।
बालोतरा, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के बालोतरा में एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन के दौरान कहा कि दुनिया के कई देश अपनी रिफाइनिंग क्षमता घटा रहे हैं, लेकिन भारत इसके विपरीत लगातार नई रिफाइनरियां स्थापित कर रहा है और मौजूदा क्षमता का विस्तार कर रहा है। उन्होंने कहा कि यही रणनीति हाल के वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान भारत की सबसे बड़ी ताकत साबित हुई। ऊर्जा संकट के बीच भारत ने दिखाई मजबूती प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण दुनिया के कई देशों को ईंधन आपूर्ति और कीमतों की गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ा, लेकिन भारत ने समय रहते रणनीतिक फैसले लिए। सरकार ने कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता लाई, घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाया और ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखा, जिससे देश में बड़े ईंधन संकट की स्थिति नहीं बनने दी। नई रिफाइनरी से बढ़ेगी ऊर्जा सुरक्षा प्रधानमंत्री ने कहा कि राजस्थान में शुरू हुई एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। करीब 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष क्षमता वाली यह देश की पहली ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-पेट्रोकेमिकल परियोजना है, जिससे पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन के साथ-साथ हजारों लोगों को रोजगार और क्षेत्र में औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। 300 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष से अधिक क्षमता का लक्ष्य प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आने वाले वर्षों में अपनी कुल रिफाइनिंग क्षमता को 300 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष से अधिक तक ले जाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती रिफाइनिंग क्षमता न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों के प्रमुख निर्यातक के रूप में भी स्थापित करेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्र सरकार की सिफारिश पर लोकसभा और राज्यसभा की बैठकें बुलाने को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा कि राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद संसद के दोनों सदनों का मानसून सत्र निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किया जाएगा। संसदीय परंपरा के अनुसार संसदीय परंपरा के अनुसार मानसून सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी। इसके बाद लोकसभा और राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा कराई जाएगी। करीब तीन सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने और उन्हें पारित कराने का प्रयास करेगी। इसके साथ ही विभिन्न राष्ट्रीय और जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों सदनों में विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अपने बयान में कहा कि मानसून सत्र लोकतांत्रिक विमर्श का महत्वपूर्ण मंच होगा, जहां राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सार्थक बहस, चर्चा और निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी राजनीतिक दल सकारात्मक सहयोग के साथ संसद की कार्यवाही को सफल बनाने में योगदान देंगे। इस बार के मानसून सत्र पर राजनीतिक दृष्टि इस बार के मानसून सत्र पर राजनीतिक दृष्टि से भी खास नजर रहेगी। विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, कृषि, आर्थिक स्थिति, कानून-व्यवस्था और अन्य समसामयिक मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के साथ विभिन्न नीतिगत फैसलों पर सदन की सहमति हासिल करने की कोशिश करेगी। संसद का यह सत्र कई महत्वपूर्ण विधेयकों, नीति संबंधी चर्चाओं और सरकार-विपक्ष के बीच होने वाली बहस के कारण बेहद अहम माना जा रहा है। ऐसे में आगामी तीन सप्ताह तक देश की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र संसद भवन रहेगा।