मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और Israel, Iran तथा United States के बीच जारी संघर्ष को लेकर भारत सरकार ने स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने सोमवार को Rajya Sabha में बयान देते हुए कहा कि भारत इस संकट का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कभी भी युद्ध का समर्थन नहीं करता और सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील करता है।
जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और सरकार वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि Narendra Modi स्वयं स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और सरकार की विभिन्न एजेंसियां हालात पर निगरानी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि संघर्ष के कारण आम जनजीवन और कारोबार दोनों प्रभावित हो रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर भी चिंताएं बढ़ी हैं।
विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि ईरान में फंसे भारतीयों की मदद के लिए Embassy of India, Tehran लगातार काम कर रहा है और जरूरत पड़ने पर भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने की तैयारी भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है।
ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दे पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर पूरी तरह सतर्क है और इस विषय पर सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने बताया कि खाड़ी क्षेत्र के देश भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं, लेकिन मौजूदा संघर्ष की वजह से व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है।
जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत लगातार खाड़ी देशों के संपर्क में है और क्षेत्र में शांति बहाल करने की अपील कर रहा है। उन्होंने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान के नेतृत्व से संपर्क करना आसान नहीं है, फिर भी उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से बातचीत कर स्थिति पर चर्चा की है।
विदेश मंत्री के अनुसार भारत की नीति हमेशा स्पष्ट रही है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान युद्ध से नहीं बल्कि संवाद, संयम और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। भारत का मानना है कि तनाव कम करना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना इस समय सबसे जरूरी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Unique Identification Authority of India यानी UIDAI ने आधार यूजर्स के लिए बड़ा बदलाव करते हुए साफ कर दिया है कि मौजूदा mAadhaar ऐप को जल्द बंद कर दिया जाएगा। इसकी जगह अब नया “Aadhaar App” लॉन्च किया गया है, जिसे पहले से ज्यादा सुरक्षित, स्मार्ट और यूजर फ्रेंडली बनाया गया है। नए ऐप का मुख्य उद्देश्य लोगों की निजी जानकारी को सुरक्षित रखना और जरूरत के हिसाब से सीमित डेटा शेयरिंग की सुविधा देना है। पुराने ऐप में थी डेटा प्राइवेसी की चुनौती mAadhaar ऐप लंबे समय से आधार कार्ड के डिजिटल वॉलेट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। हालांकि, कई बार होटल, अस्पताल या सरकारी कार्यालयों में आधार दिखाने पर यूजर की पूरी जानकारी सामने आ जाती थी। इससे डेटा प्राइवेसी को लेकर चिंता बढ़ रही थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए UIDAI ने नया Aadhaar App तैयार किया है, जो भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट यानी DPDP Act को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। नए ऐप में मिलेंगे स्मार्ट और सुरक्षित फीचर्स नए Aadhaar App में फेस ऑथेंटिकेशन, QR कोड वेरिफिकेशन और जरूरत के अनुसार सीमित जानकारी साझा करने जैसे कई आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं। उदाहरण के तौर पर यदि किसी संस्था को सिर्फ आपकी उम्र की पुष्टि करनी है, तो आप केवल उम्र से जुड़ी जानकारी साझा कर सकते हैं। पूरा आधार नंबर, पता या अन्य निजी जानकारी देने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा ऐप में फिंगरप्रिंट, फेस और आईरिस लॉक करने का फीचर भी मिलेगा, जिससे यूजर्स अपने बायोमेट्रिक डेटा को और अधिक सुरक्षित रख सकेंगे। खास बात यह है कि एक मोबाइल फोन में परिवार के पांच सदस्यों तक के आधार प्रोफाइल जोड़े जा सकेंगे। ऐसे डाउनलोड और रजिस्टर करें नया Aadhaar App UIDAI ने लोगों को केवल ऑफिशियल ऐप डाउनलोड करने की सलाह दी है। इसके लिए यूजर्स को Google Play Store या Apple App Store पर जाकर “Aadhaar” नाम से ऐप सर्च करना होगा। वहां Pehchaan लोगो वाला आधिकारिक ऐप दिखाई देगा। ऐप डाउनलोड करने के बाद यूजर अपनी पसंद की भाषा चुन सकते हैं। इसके बाद आधार से लिंक मोबाइल नंबर दर्ज कर OTP वेरिफिकेशन करना होगा। सुरक्षा के लिए फेस स्कैन भी कराया जा सकता है। फिर सिक्योरिटी PIN सेट कर 12 अंकों का आधार नंबर डालकर प्रोफाइल लिंक करनी होगी। पुराने ऐप का डेटा अपने आप ट्रांसफर नहीं होगा UIDAI ने स्पष्ट किया है कि पुराने mAadhaar ऐप का डेटा नए ऐप में ऑटोमैटिक ट्रांसफर नहीं होगा। यानी यूजर्स को अपने आधार PDF, QR कोड और फैमिली प्रोफाइल दोबारा जोड़ने होंगे।
कोलकाता, एजेंसियां। कोलकाता के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज दुष्कर्म और हत्या मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने मामले के मुख्य घटनास्थल को दोबारा सुरक्षित तरीके से सील करने का आदेश दिया है। यह निर्देश पीड़िता के परिवार द्वारा दायर नई याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। करीब दो वर्ष पहले हुए इस सनसनीखेज मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। मामले के मुख्य आरोपी संजय रॉय को पहले ही आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन पीड़िता के परिवार ने जांच के कुछ पहलुओं पर सवाल उठाते हुए आगे की जांच की मांग की है। अदालत ने सीबीआई से पूछे तीखे सवाल मंगलवार को जस्टिस शंपा सरकार और जस्टिस तीर्थंकर घोष की विशेष डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। अदालत ने शुरुआत से ही जांच एजेंसी के रवैये पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने सीबीआई से पूछा कि जब एजेंसी ने जांच अपने हाथ में ली थी, तब अस्पताल के किन-किन हिस्सों को सील किया गया था। सीबीआई की ओर से बताया गया कि केवल सेमिनार हॉल को सील किया गया था। इस जवाब पर अदालत ने नाराजगी जताई और पूछा कि क्या अन्य संभावित स्थानों को सुरक्षित करने की जरूरत नहीं समझी गई। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि क्या जांच के दौरान किसी समय उस सील को खोला गया था। सबूतों की सुरक्षा पर हाईकोर्ट की चिंता मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में सबूतों से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया कि सेमिनार रूम को तुरंत दोबारा सील किया जाए और यदि जांच के लिहाज से अन्य स्थान महत्वपूर्ण हों, तो उन्हें भी सुरक्षित किया जाए। 21 मई को होगी अगली सुनवाई पीड़िता के माता-पिता का दावा है कि इस अपराध में एक से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। इसी आधार पर उन्होंने आगे की जांच की मांग की है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 21 मई को निर्धारित की है, जहां सीबीआई और पीड़ित परिवार दोनों की दलीलें सुनी जाएंगी।
Indian Railway Catering and Tourism Corporation और Indian Railways से जुड़ी खानपान सेवाओं को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। ईरान-इजरायल तनाव के बाद बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों के बीच अब ट्रेन में मिलने वाला खाना भी महंगा हो सकता है। रेलवे कैटरर्स के संगठन ने खाने-पीने की चीजों के रेट बढ़ाने की मांग की है। रेलवे कैटरर्स ने IRCTC को लिखा पत्र ट्रेनों में खानपान सेवा देने वाले ठेकेदारों के संगठन Indian Railway Mobile Caterers Association ने IRCTC को पत्र लिखकर तत्काल टैरिफ रिवीजन की मांग की है। संगठन के अध्यक्ष शरण बिहारी अग्रवाल ने अपने पत्र में कहा है कि: पेंट्री कार में बिकने वाले खाने-पीने के दाम आखिरी बार 2019 में तय हुए थे तब से खाद्य सामग्री, गैस और ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है कर्मचारियों का वेतन भी बढ़ा है मौजूदा रेट पर क्वालिटी बनाए रखना मुश्किल हो रहा है कैटरर्स का दावा है कि कई वस्तुओं की लागत में 250% तक बढ़ोतरी हो चुकी है। किन ट्रेनों पर पड़ सकता है असर? रेलवे में खानपान सेवाएं मुख्य रूप से दो तरह की होती हैं: 1. प्री-पेड कैटरिंग इनमें यात्री टिकट बुकिंग के दौरान ही खाने का पैसा दे देते हैं। यह सुविधा मुख्य रूप से: Rajdhani Express Shatabdi Express Vande Bharat Express जैसी प्रीमियम ट्रेनों में मिलती है। 2. पोस्ट-पेड कैटरिंग इन ट्रेनों में यात्री खाना खरीदने के बाद भुगतान करते हैं। कैटरर्स संगठन ने दोनों कैटेगरी में कीमतें बढ़ाने की मांग की है। क्या तुरंत बढ़ सकते हैं खाने के दाम? रेलवे से जुड़े जानकारों के अनुसार, पेंट्री कार सेवाओं के टेंडर “फिक्स रेट सप्लाई” मॉडल पर दिए जाते हैं। इसका मतलब है कि: टेंडर अवधि के दौरान तय कीमतें नहीं बदली जा सकतीं पुराने कॉन्ट्रैक्ट में बीच में रेट बढ़ाने का प्रावधान नहीं होता नई कीमतें केवल भविष्य के टेंडर पर लागू हो सकती हैं यानी फिलहाल यात्रियों को तुरंत महंगे खाने का सामना शायद न करना पड़े। अगर घाटा हो रहा है तो क्या करेंगे कैटरर्स? रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हर टेंडर में “एग्जिट क्लॉज” मौजूद होता है। यदि किसी ठेकेदार को तय दरों पर काम करना घाटे का सौदा लग रहा है, तो वह कॉन्ट्रैक्ट छोड़ सकता है। अधिकारियों के मुताबिक रेलवे किसी ठेकेदार पर पुराने रेट पर काम जारी रखने का दबाव नहीं बनाता। महंगाई का असर रेलवे सेवाओं तक पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब रेलवे कैटरिंग तक पहुंचता दिख रहा है। अगर भविष्य में नए टेंडर्स में कीमतें बढ़ाई जाती हैं, तो यात्रियों को ट्रेन में चाय, नाश्ता और भोजन के लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। हालांकि रेलवे फिलहाल पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स के नियमों के तहत ही सेवाएं जारी रखे हुए है।