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Owaisi Slams Bhojshala Verdict

भोजशाला फैसले पर ओवैसी ने उठाए सवाल, बोले- ‘यह बाबरी मस्जिद केस जैसा फैसला’

surbhi मई 16, 2026 0
Asaduddin Owaisi reacts to Bhojshala High Court verdict comparing it with Babri Masjid case
Owaisi-On-Bhojshala-Verdict

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर हाईकोर्ट के फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। Asaduddin Owaisi ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसकी तुलना बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद से की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला भारत के संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है और इससे भविष्य में नए धार्मिक विवाद पैदा हो सकते हैं।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने 15 मई को भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया था। अदालत ने परिसर को राजा भोज से जुड़ा स्थल भी माना है।

‘एक धर्म को प्राथमिकता दी गई’

हैदराबाद में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ओवैसी ने कहा कि भोजशाला पर आया फैसला बाबरी मस्जिद मामले में दिए गए निर्णय की तरह दिखाई देता है।

उन्होंने कहा,
“यह फैसला संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद में भी एक धर्म को प्राथमिकता दी गई थी, जबकि दूसरे समुदाय के पूजा के अधिकार कमजोर कर दिए गए थे।”

ओवैसी ने आगे कहा कि ऐसे फैसलों से भविष्य में किसी भी धार्मिक स्थल की पवित्रता को चुनौती देने का रास्ता खुल सकता है।

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट का किया जिक्र

ओवैसी ने न्यायपालिका के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) से जोड़ चुका है, लेकिन अब उसी सिद्धांत को नजरअंदाज किया जा रहा है।

उन्होंने कहा,
“प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट का मजाक बना दिया गया है।”

‘बाबरी मस्जिद केस जैसा साबित हुआ फैसला’

ओवैसी ने कहा कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर मामले का फैसला भविष्य में ऐसे कई विवादों का आधार बन सकता है।

उन्होंने कहा,
“मैंने पहले भी कहा था कि बाबरी मस्जिद पर फैसला केवल आस्था के आधार पर दिया गया था। उस समय मैंने कहा था कि इससे आगे कई विवाद खड़े होंगे और आज वही हो रहा है।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष लंबे समय से वहां नमाज अदा करता रहा है।

मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने के दिए संकेत

इस बीच Khalid Rashid Firangi Mahli ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से मुस्लिम समुदाय में निराशा जरूर है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष के पास ऐतिहासिक दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं और उन्हें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भोजशाला विवाद को बाबरी मस्जिद मामले से अलग तरीके से देखा जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष को दिया पूजा का अधिकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार दिया है। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 2003 के उस आदेश को भी आंशिक रूप से निरस्त कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति दी गई थी।

हिंदू पक्ष के वकील Vishnu Shankar Jain ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अब परिसर में केवल हिंदू पूजा होगी और स्थल के प्रबंधन की जिम्मेदारी सरकार के पास रहेगी।

क्या है भोजशाला विवाद?

धार स्थित भोजशाला परिसर को हिंदू पक्ष मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। वर्षों से यह मामला अदालत में लंबित था।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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जानिए बारिश के मौसम में AC चलाने का सही तरीका,वरना गलत मोड से बढ़ सकता है बिजली बिल

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी के बीच होने वाली बारिश जहां तापमान को कम करती है, वहीं घरों में नमी और उमस की परेशानी बढ़ा देती है। ऐसे मौसम में लोग राहत पाने के लिए एयर कंडीशनर यानी AC का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन कई बार सही मोड की जानकारी न होने के कारण AC पूरी तरह आराम नहीं दे पाता। विशेषज्ञों के अनुसार बरसात के मौसम में AC को गलत मोड पर चलाने से न सिर्फ बिजली की खपत बढ़ती है, बल्कि मशीन पर अतिरिक्त दबाव भी पड़ता है।   बरसात में कौन-सा मोड सबसे बेहतर?   बरसात के मौसम में AC को सामान्य “Cool Mode” की बजाय “Dry Mode” पर चलाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। यह मोड कमरे की हवा में मौजूद अतिरिक्त नमी को कम करता है और वातावरण को आरामदायक बनाता है। अक्सर बारिश के दिनों में तापमान बहुत ज्यादा नहीं होता, लेकिन हवा में नमी बढ़ जाने से चिपचिपाहट महसूस होती है। Dry Mode इसी समस्या को दूर करने में मदद करता है। इस मोड में AC कंप्रेसर लगातार नहीं चलता, बल्कि जरूरत के हिसाब से काम करता है। इससे बिजली की खपत कम होती है और कमरे में संतुलित ठंडक बनी रहती है। खासकर उन इलाकों में जहां लगातार बारिश होती है, वहां यह फीचर काफी उपयोगी साबित होता है।   बिजली बचाने के साथ बढ़ती है AC की लाइफ विशेषज्ञों का कहना है कि सही मोड पर AC चलाने से मशीन की कार्यक्षमता बेहतर रहती है। Dry Mode AC पर अतिरिक्त लोड नहीं पड़ने देता, जिससे उसकी लाइफ बढ़ सकती है। कई आधुनिक AC में “Auto Mode” भी दिया जाता है, जो कमरे के तापमान और नमी के हिसाब से खुद सेटिंग बदल लेता है। अगर मौसम ज्यादा उमस भरा हो, तो Auto Mode भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि बारिश के दौरान Dry Mode को सबसे प्रभावी माना जाता है।   कम तापमान पर AC चलाना हो सकता है नुकसानदायक कई लोग तेज ठंडक पाने के लिए AC को बहुत कम तापमान पर चला देते हैं, लेकिन ऐसा करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे सर्दी-जुकाम, शरीर दर्द और गले में संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञ 24 से 26 डिग्री सेल्सियस तापमान को सबसे उपयुक्त मानते हैं।   फिल्टर की सफाई भी है जरूरी बरसात के मौसम में AC फिल्टर जल्दी गंदे हो सकते हैं। इसलिए नियमित अंतराल पर फिल्टर की सफाई और समय-समय पर सर्विसिंग करवाना जरूरी है। साफ फिल्टर न सिर्फ स्वच्छ हवा देते हैं, बल्कि AC की कूलिंग क्षमता भी बेहतर बनाए रखते हैं। सही तरीके से इस्तेमाल किया गया AC न केवल आराम देता है, बल्कि बिजली और रखरखाव दोनों में बचत भी करता है।

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Abhishek Banerjee
अभिषेक बनर्जी पर नफरत फैलाने और अशांति भड़काने का आरोप, FIR दर्ज

कोलकाता, एजेंसियां। अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान कथित भड़काऊ भाषण देने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। बिधाननगर कमिश्नरेट की साइबर क्राइम पुलिस ने कई गंभीर और गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। यह पहला मौका बताया जा रहा है जब तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई हुई है।   सोशल एक्टिविस्ट की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला पुलिस सूत्रों के अनुसार चुनाव परिणाम आने के अगले दिन सोशल एक्टिविस्ट राजीव सरकार की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी ने कई सार्वजनिक रैलियों में भड़काऊ बयान दिए, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच तनाव और वैमनस्य फैल सकता है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को भाषणों के वीडियो लिंक और संबंधित सामग्री भी सौंपी।   कई गैर-जमानती धाराएं लगाई गईं बिधाननगर साइबर क्राइम थाना ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। सेक्शन 192 के तहत अशांति फैलाने का आरोप लगाया गया है। वहीं सेक्शन 196 के तहत विभिन्न समूहों के बीच नफरत फैलाने का मामला दर्ज हुआ है, जो गैर-जमानती धारा है। इसके अलावा सेक्शन 351(2) के तहत डराने-धमकाने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने तथा सेक्शन 353(1)(c) के तहत झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप भी लगाए गए हैं।   जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत भी कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता के अलावा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(2) और 125 भी अभिषेक बनर्जी पर लगाई गई हैं। शिकायत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ दिए गए कुछ बयानों का भी उल्लेख किया गया है।   राजनीतिक हलकों में तेज हुई बहस इस मामले के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। विपक्षी दल इसे चुनाव प्रचार में मर्यादा उल्लंघन का परिणाम बता रहे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। फिलहाल अभिषेक बनर्जी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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