राजनीति

'मित्रों से हेलो फ्रेंड्स तक...', लोकसभा में ओवैसी का पीएम मोदी पर तंज, भाषण को लेकर छिड़ी चर्चा

ranjan kumar tiwari जुलाई 29, 2026 0
लोकसभा में असदुद्दीन ओवैसी का पीएम नरेंद्र मोदी पर तंज
Asaduddin Owaisi PM Narendra Modi Lok Sabha Speech

संसद में ओवैसी ने साधा निशाना

 

नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों और संबोधन के अंदाज को लेकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पहले अपने भाषणों की शुरुआत "मित्रों" कहकर करते थे, लेकिन अब उनका अंदाज बदलकर "हेलो फ्रेंड्स" तक पहुंच गया है। ओवैसी की इस टिप्पणी के बाद सदन में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।

 

पीएम मोदी के संबोधन अंदाज पर टिप्पणी

 

ओवैसी ने लोकसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी के पुराने और नए भाषणों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समय के साथ प्रधानमंत्री के संबोधन का तरीका बदला है और इसी बदलाव को लेकर उन्होंने व्यंग्य किया। उनके बयान पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं।

 

संसद में जारी है राजनीतिक बहस

 

मानसून सत्र के दौरान विपक्ष कई मुद्दों को लेकर सरकार पर हमलावर है। ओवैसी लगातार संसद में सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाते रहे हैं। वहीं, भाजपा नेताओं की ओर से भी विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया जा रहा है।

 

सोशल मीडिया पर बयान की चर्चा

 

ओवैसी के इस बयान का वीडियो और क्लिप सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है। कुछ यूजर्स ने इसे राजनीतिक व्यंग्य बताया, जबकि कुछ ने इसे विपक्ष की रणनीति का हिस्सा कहा। संसद में नेताओं के बीच तीखी बहस और बयानबाजी लगातार जारी है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर जोरदार हंगामा हुआ। राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग की अनुमति देने का आरोप लगाया, जिसके बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और बयान पर आपत्ति दर्ज कराई।   राहुल गांधी ने लगाए गंभीर आरोप   चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई के आदेश गृह मंत्री स्तर से दिए गए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे फैसले या तो गृह मंत्री या प्रधानमंत्री स्तर पर लिए जाते हैं। साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका को लेकर भी सरकार की आलोचना की।   सत्ता पक्ष ने किया विरोध   राहुल गांधी के आरोपों पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने तत्काल विरोध जताया। संसदीय कार्य मंत्री ने बिना तथ्यों के गंभीर आरोप लगाने पर आपत्ति दर्ज कराते हुए राहुल गांधी से माफी की मांग की।   स्पीकर ओम बिरला ने दी नसीहत   लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सदन में दिए जाने वाले बयानों के पीछे तथ्य होने चाहिए, क्योंकि संसदीय रिकॉर्ड लंबे समय तक सुरक्षित रहता है। उन्होंने विपक्ष के नेता से विधेयक और तथ्यों के आधार पर चर्चा करने की सलाह दी। स्पीकर ने यह भी कहा कि यदि वे चर्चा जारी नहीं रखना चाहते, तो अगले वक्ता को अवसर दिया जाएगा।   चर्चा के दौरान बढ़ा राजनीतिक तनाव   हालांकि स्पीकर की टिप्पणी के बाद भी राहुल गांधी ने अपने आरोप दोहराए और सरकार की शिक्षा नीति तथा आरएसएस की भूमिका पर सवाल उठाए। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिससे सदन का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया।  

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संसद में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सियासत तेज   नई दिल्ली, एजेंसियां। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख और लोकसभा सांसद अखिलेश यादव ने पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की परेशानियों को समझना होगा और उनकी आवाज सुननी होगी। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।   छात्रों के भविष्य का मुद्दा उठाया   अखिलेश यादव ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि परीक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए ताकि मेहनत करने वाले छात्रों के साथ अन्याय न हो। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं युवाओं के भरोसे को कमजोर करती हैं।   सरकार ला रही है सख्त व्यवस्था   केंद्र सरकार की ओर से पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त प्रावधानों वाले कानून और नियमों पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है।   विपक्ष लगातार उठा रहा है मुद्दा   मानसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार नीट, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला कर रहा है। विपक्ष का कहना है कि छात्रों की समस्याओं पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।   युवाओं के मुद्दे पर बढ़ी राजनीतिक गर्मी   पेपर लीक का मामला पिछले कुछ समय से देशभर में बड़ा मुद्दा बना हुआ है। छात्र संगठन और विपक्ष लगातार परीक्षा सुधारों की मांग कर रहे हैं, वहीं सरकार ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।    

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NDA संसदीय दल की बैठक में लिया हिस्सा, संसद की रणनीति पर हुई चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NDA संसदीय दल की बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार की रणनीति, आगामी विधायी कार्यों और विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक में NDA के वरिष्ठ नेताओं और सांसदों ने हिस्सा लिया।   बैठक का मुख्य उद्देश्य संसद में सरकार के एजेंडे को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाना और विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए रणनीति तैयार करना रहा। इस दौरान सांसदों को सदन में सरकार की उपलब्धियों और नीतियों को मजबूती से रखने के निर्देश दिए गए।   संसद में सरकार की प्राथमिकताओं पर चर्चा   NDA संसदीय दल की बैठक में केंद्र सरकार के आगामी विधायी कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। सरकार की कोशिश है कि मानसून सत्र में महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन से मंजूरी दिलाई जाए और संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चले।   बैठक में परीक्षा सुधार, आर्थिक नीतियों, विकास योजनाओं और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सरकार का पक्ष मजबूती से रखने को लेकर भी चर्चा हुई। हाल के दिनों में NEET विवाद और अन्य मुद्दों को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है।   विपक्ष के हमलों का जवाब देने की तैयारी   संसद में विपक्ष कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। इनमें परीक्षा व्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी और अन्य जनहित से जुड़े विषय शामिल हैं।   NDA नेताओं ने बैठक में इस बात पर जोर दिया कि सांसद तथ्यों के साथ विपक्ष के सवालों का जवाब दें और सरकार की योजनाओं एवं उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाएं।   प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को दिए दिशा-निर्देश   बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NDA सांसदों से सदन में सक्रिय भूमिका निभाने और जनता से जुड़े मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाने की अपील की। उन्होंने सांसदों को अपने क्षेत्रों के विकास कार्यों और सरकार की योजनाओं को लेकर जनता के बीच संवाद बढ़ाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने संसद की गरिमा बनाए रखने और सकारात्मक चर्चा को बढ़ावा देने की बात भी कही।   मानसून सत्र में कई मुद्दों पर टकराव के आसार   मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर बहस होने की संभावना है। विपक्ष जहां सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं NDA सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

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