राजनीति

₹99 लाख की सब्सिडी पर घिरे केंद्रीय मंत्री, सरकारी योजना के लाभ को लेकर उठे सवाल

abhishek singh जून 27, 2026 0
Bhagirath Choudhary
Bhagirath Choudhary Subsidy Controversy

नई दिल्ली, एजेंसियां। मोदी सरकार के एक मंत्री को सरकारी योजना के तहत करीब ₹99 लाख की सब्सिडी मिलने का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। यह मामला केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी से जुड़ा है, जिन्होंने राजस्थान में खीरे (ककड़ी) की खेती से संबंधित एक परियोजना के लिए सब्सिडी प्राप्त की। रिपोर्ट के सामने आने के बाद हितों के टकराव (Conflict of Interest) और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

 

क्या है पूरा मामला?

 

रिपोर्ट के अनुसार, भागीरथ चौधरी की कृषि परियोजना को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (National Horticulture Board) की एक योजना के तहत लगभग ₹99 लाख की सब्सिडी मंजूर की गई। मंत्री कृषि राज्य मंत्री होने के नाते उस बोर्ड के पदेन (Ex-officio) उपाध्यक्ष भी हैं, जिसने इस योजना की मंजूरी दी थी। इसी वजह से विपक्ष ने हितों के टकराव का मुद्दा उठाया है।

 

मंत्री पक्ष की क्या सफाई?

 

मंत्री के सहयोगियों का कहना है कि परियोजना और सब्सिडी से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारियां सरकार को उपलब्ध कराई जाएंगी। उनका दावा है कि योजना के नियमों का पालन किया गया है और किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है।

 

विपक्ष ने उठाए सवाल

 

विपक्षी दलों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि कोई मंत्री उसी मंत्रालय की योजना का लाभ लेता है, तो पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि इससे सरकारी योजनाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

 

सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

 

फिलहाल इस मामले पर सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार है। यदि जांच या स्पष्टीकरण आता है, तो यह मामला आने वाले दिनों में और राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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राहुल गांधी ने कांग्रेस नेताओं से 'छात्रों की गूंज' अभियान तेज करने की अपील, युवाओं के मुद्दों को गांव-गांव तक ले जाने का आह्वान

नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, प्रदेश इकाइयों, भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) से 'छात्रों की गूंज' अभियान को देशभर में और तेज करने की अपील की है। राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवा शिक्षा, रोजगार, भर्ती में देरी और परीक्षा प्रणाली से जुड़े गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं, इसलिए उनकी आवाज़ को हर जिले और हर राज्य तक पहुंचाना जरूरी है।   नेताओं को लिखा पत्र   राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं को लिखे पत्र में कहा कि 'छात्रों की गूंज' केवल एक अभियान नहीं, बल्कि देश के छात्रों और युवाओं की आवाज़ को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने और अधिक से अधिक छात्रों को इससे जोड़ने का आग्रह किया।   किन मुद्दों पर फोकस?   कांग्रेस के इस अभियान में मुख्य रूप से इन मुद्दों को उठाया जा रहा है: प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक भर्ती परीक्षाओं में देरी बढ़ती शिक्षा फीस युवाओं में बेरोजगारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग पार्टी का कहना है कि इन मुद्दों से लाखों छात्र प्रभावित हो रहे हैं और उनकी समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाना चाहिए।   40 दिन तक चलेगा अभियान   कांग्रेस ने 'छात्रों की गूंज' अभियान को 40 दिनों के राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के रूप में शुरू किया है। इसके तहत विभिन्न राज्यों में छात्र सम्मेलन, संवाद कार्यक्रम, हस्ताक्षर अभियान और जनसंपर्क अभियान आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का लक्ष्य छात्रों और युवाओं की मांगों को व्यापक जनसमर्थन दिलाना है।   पहले भी उठा चुके हैं छात्र मुद्दे   राहुल गांधी इससे पहले भी राजस्थान के कोटा सहित कई स्थानों पर छात्रों से संवाद कर चुके हैं। उन्होंने परीक्षा में अनियमितता, पेपर लीक और रोजगार के मुद्दों को लगातार उठाया है। अब पार्टी इस अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की मूड में है।

abhishek singh जून 28, 2026 0
Union Minister Bhagirath Choudhary at his horticulture project that reportedly received an NHB subsidy under the Agriculture Ministry scheme.

मंत्री भी, लाभार्थी भी! कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को अपने ही मंत्रालय की योजना से मिली 99.60 लाख रुपये की सब्सिडी

Bhagirath Choudhary

₹99 लाख की सब्सिडी पर घिरे केंद्रीय मंत्री, सरकारी योजना के लाभ को लेकर उठे सवाल

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पासपोर्ट को लेकर JMM का केंद्र पर हमला, पूछा- नागरिकता का प्रमाण नहीं तो SIR में पहला दस्तावेज क्यों?

West Bengal Assembly expected to discuss a Uniform Civil Code (UCC) bill during a special legislative session.
पश्चिम बंगाल में लागू होगा यूनिफॉर्म सिविल कोड? विधानसभा के मौजूदा सत्र में आ सकता है UCC विधेयक

  कोलकाता: उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की तैयारी तेज होती दिखाई दे रही है। विधानसभा और राज्य प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार अगले सप्ताह विधानसभा के विशेष सत्र में यूसीसी से संबंधित विधेयक पेश कर सकती है। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो पश्चिम बंगाल समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का चौथा भाजपा शासित राज्य बन जाएगा। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन संबंधों जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। साथ ही महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार ने बताई यूसीसी की जरूरत विधानसभा और प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, सरकार का मानना है कि अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान नागरिक कानून लागू होने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। सरकार का दावा है कि इससे कानूनी विवादों में एकरूपता आएगी और सभी नागरिकों को समान अधिकार सुनिश्चित किए जा सकेंगे। असम मॉडल पर आगे बढ़ सकती है सरकार सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार यूसीसी लागू करने के लिए असम मॉडल का अध्ययन कर रही है। हाल ही में असम विधानसभा ने लंबी बहस के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया था। उस कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन संबंधों के पंजीकरण और बहुविवाह पर रोक जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। असम सरकार ने इसे संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों के अनुरूप बताया था और कहा था कि इसका उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना है। जनजातीय समुदायों को मिल सकती है छूट सूत्रों के मुताबिक, असम की तरह पश्चिम बंगाल में भी कुछ जनजातीय समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने पर विचार किया जा रहा है। दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र और जंगलमहल के कुछ आदिवासी समुदायों की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं।  इस संबंध में अंतिम फैसला विधेयक पेश होने के बाद ही स्पष्ट होगा। राजनीतिक मुद्दा बनने की संभावना राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम बंगाल विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश होता है तो यह राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है। भाजपा इसे महिलाओं के अधिकार, समान कानून और सुशासन से जोड़कर पेश कर सकती है, जबकि विपक्ष धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के आधार पर इसका विरोध कर सकता है। सरकार का कहना है कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करने का संवैधानिक प्रयास है। वहीं विपक्षी दल पहले ही इस प्रस्तावित कानून को लेकर विरोध के संकेत दे चुके हैं। विधेयक पर रहेगी सबकी नजर अब सभी की नजर विधानसभा के आगामी विशेष सत्र पर टिकी है, जहां सरकार यूसीसी विधेयक पेश कर सकती है। विधेयक के अंतिम स्वरूप, उसमें शामिल प्रावधानों और संभावित छूटों को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
Punjab Chief Minister Bhagwant Mann faces political controversy over an alleged viral video as BJP demands an FIR and an independent investigation.

सीएम भगवंत मान के कथित वीडियो पर सियासत तेज, राघव चड्ढा ने FIR और इस्तीफे की मांग की

India's Ministry of External Affairs clarifies that a passport is a travel document and not conclusive proof of citizenship, triggering political controversy.

पासपोर्ट विवाद: विपक्ष का सरकार पर हमला, पूछा—आखिर भारतीय नागरिकता का प्रमाण क्या है?

Former IAS officer Sujatha Raut Karthikeyan joins Biju Janata Dal in the presence of Naveen Patnaik

वीके पांडियन की पत्नी सुजाता राउत कार्तिकेयन बीजू जनता दल में शामिल

Imran Pratapgarhi
"देश की शिक्षा व्यवस्था ICU में है" — इमरान प्रतापगढ़ी ने रांची में केंद्र सरकार पर साधा निशाना

रांची। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी बुधवार को रांची पहुंचे। रांची प्रेस क्लब में "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों और पेपर लीक मामलों पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पूरे देश में शिक्षा के चौपट होते भविष्य को बचाने के लिए एक बड़े आंदोलन की शुरुआत की जा रही है।   23 लाख छात्र मानसिक तनाव में, कई ने गंवाई जान NEET परीक्षा का जिक्र करते हुए इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि पेपर लीक के कारण करीब 23 लाख छात्र भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों में कई छात्रों ने इस भ्रष्ट व्यवस्था से निराश होकर अपनी जान गंवा ली। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा — "तुझको कितनों का लहू चाहिए ऐ अर्ज-ए-वतन, कितनी आहों से कलेजा तेरा ठंडा होगा।" उन्होंने इन मौतों का जिम्मेदार सीधे तौर पर लचर सिस्टम को ठहराया।   थर्मामीटर बदलने से बुखार नहीं उतरता सरकार द्वारा एयरफोर्स के विमानों से परीक्षा केंद्रों तक पेपर पहुंचाने के फैसले पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि गठरी बदलने से सामान नहीं बदलता और थर्मामीटर बदलने से बुखार नहीं उतरता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए सेना का इस्तेमाल कर रही है और यदि एक पेपर सुरक्षित करवाने के लिए भी सेना की मदद लेनी पड़े तो शिक्षा मंत्रालय को ही बर्खास्त कर देना चाहिए।   सरकार के अंदर बैठे हैं बड़े मगरमच्छ इमरान प्रतापगढ़ी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक करने वाले लोग सरकारी सिस्टम के अंदर से ही काम कर रहे हैं। सरकार केवल छोटी मछलियों को पकड़कर खानापूर्ति कर रही है जबकि बड़ी कुर्सियों पर बैठे मगरमच्छों को बचाया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे हर साल "परीक्षा पर चर्चा" का इवेंट करते हैं लेकिन 23 लाख छात्रों का भविष्य अधर में लटकने पर एक शब्द भी नहीं बोला।   कांग्रेस की तीन बड़ी मांगें सांसद ने बताया कि कांग्रेस देश के 28 प्रमुख शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तीन मांगें उठा रही है — पेपर लीक मुक्त पारदर्शी परीक्षा, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा और हर प्रतियोगी परीक्षा का वार्षिक कैलेंडर जारी करना।   9 अगस्त को दिल्ली चलो का आह्वान इमरान प्रतापगढ़ी ने बताया कि राहुल गांधी पटना, इलाहाबाद, बेंगलुरु और दिल्ली में छात्रों से लगातार मिल रहे हैं। 9 अगस्त को देशभर के छात्रों को दिल्ली बुलाया गया है जहां वे संसद का घेराव कर सरकार को कड़ा संदेश देंगे।

abhishek singh जून 25, 2026 0
West Bengal government prepares to introduce a strict anti-corruption law in a special Assembly session.

पश्चिम बंगाल विधानसभा का विशेष आपात सत्र 29 जून को, भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कानून की तैयारी

SIM Swap Fraud

SIM Swap Fraud: सिर्फ एक SIM बदलकर खाली हो सकता है बैंकअकाउंट!

West Bengal Chief Minister Shubhendu Adhikari addresses Assembly on anti-corruption measures and asset seizure law.

भ्रष्टाचार पर बंगाल सरकार का बड़ा संदेश, अवैध संपत्तियां जब्त कर भूमिहीनों को बसाने का संकेत

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