राजनीति

Abhishek Banerjee’s Pakistan Remark

अभिषेक बनर्जी का तीखा बयान: “हम घर में घुसकर मारेंगे”

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Abhishek Banerjee addressing a rally in Siliguri with strong remarks on Pakistan
Abhishek Banerjee Pakistan Statement Rally

पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पाकिस्तान को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है। सिलीगुड़ी में एक चुनावी रैली के दौरान उन्होंने कहा-

“जिस दिन ममता बनर्जी और INDI गठबंधन की सरकार बनेगी, हम पाकिस्तान को उनके घर में घुसकर मारेंगे।”

क्या है पूरा मामला?

  • हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बयान दिया था कि
    अगर भारत कोई कदम उठाता है, तो लड़ाई को कोलकाता तक ले जाया जा सकता है
  • इस बयान के जवाब में अभिषेक बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी

अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा?

  • “मैंने ख्वाजा आसिफ का नाम अपनी लिस्ट में लिख लिया है”
  • “सरकार बनने पर हम उन्हें उनके घर में घुसकर जवाब देंगे”

उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए

केंद्र सरकार पर निशाना

अभिषेक बनर्जी ने कहा-

  • “अमित शाह और राजनाथ सिंह चुप हैं”
  • “जब पाकिस्तान कोलकाता को धमकी देता है, तब कोई जवाब क्यों नहीं?”

पाकिस्तान का बयान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था-

  • भारत “फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन” की योजना बना सकता है
  • अगर ऐसा हुआ तो “लड़ाई को कोलकाता तक ले जाया जाएगा”

भारत की प्रतिक्रिया (पहले)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि पाकिस्तान की किसी भी हरकत का जवाब “अभूतपूर्व और निर्णायक” होगा

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Anti Paper Leak Amendment Bill
राज्यसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पेश, परीक्षा में धांधली रोकने के लिए सख्त प्रावधानों पर जोर

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया है। इस विधेयक का उद्देश्य देश में होने वाली प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और संगठित परीक्षा धांधली पर रोक लगाना है। सरकार ने इसे परीक्षा व्यवस्था को मजबूत और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया है।   पेपर लीक गिरोहों पर कसेगा शिकंजा   विधेयक में पेपर लीक कराने वाले संगठित गिरोहों, परीक्षा माफिया और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे उन छात्रों के हितों की रक्षा होगी जो मेहनत के आधार पर परीक्षा में सफलता हासिल करना चाहते हैं।   परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही पर भी चर्चा   राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए। विपक्ष ने कहा कि केवल सख्त कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी है।   छात्रों के भरोसे को बहाल करने पर सरकार का फोकस   केंद्र सरकार ने कहा कि हाल के वर्षों में पेपर लीक की घटनाओं से छात्रों में चिंता बढ़ी है। नया संशोधन कानून परीक्षा प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने, दोषियों पर तेजी से कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए लाया गया है।   संसद की मंजूरी के बाद लागू होगा कानून   विधेयक को राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद यह कानून के रूप में लागू हो सकेगा और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर कार्रवाई का आधार बनेगा।

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लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पास, परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार का बड़ा कदम

लोकसभा में राहुल गांधी के बयान पर हंगामा और गृह मंत्री पर आरोप

लोकसभा में राहुल गांधी के बयान पर हंगामा, गृह मंत्री पर आरोपों को लेकर सत्ता पक्ष का विरोध

Congress MP Gaurav Gogoi speaking in the Lok Sabha during the debate on the Anti Paper Leak Bill
संसद में गौरव गोगोई का सरकार पर हमला, बोले- "21 छात्रों की मौत के लिए केंद्र जिम्मेदार"

लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की खामियों के कारण हुई 21 छात्रों की मौत के लिए सरकार जिम्मेदार है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि सरकार शिक्षा सुधार को लेकर गंभीर नहीं है। "पुराने कानून से भी नहीं बदली स्थिति" एएनआई के मुताबिक, गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार दो वर्ष पहले भी पेपर लीक रोकने के लिए कानून लेकर आई थी, लेकिन उससे कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार और पेपर लीक की घटनाएं लगातार सामने आती रहीं, जबकि सरकार प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही। NEET पेपर लीक मामले का किया जिक्र गोगोई ने NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले का हवाला देते हुए कहा कि आरोपपत्र में शामिल 45 आरोपियों में से 44 को जमानत मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि इससे जांच और सरकारी कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होते हैं। "21 छात्रों की मौत पर जवाब दे सरकार" कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों और बढ़ते मानसिक दबाव के कारण 21 छात्रों ने आत्महत्या की। उन्होंने कहा कि जिस मंत्री के कार्यकाल में यह सब हुआ, उनके इस्तीफे के बाद सदन में उनका स्वागत किया गया, जो सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। "शिक्षा सुधार नहीं, इंस्टाग्राम पर ज्यादा ध्यान" गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को कैबिनेट बैठकों में पेपर लीक माफिया पर कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों की समस्याओं पर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान शिक्षा सुधार की बजाय सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम जैसे मुद्दों पर अधिक दिखाई देता है। असम के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग अपने भाषण के दौरान गोगोई ने असम में आई भीषण बाढ़ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में बाढ़ से करीब 70 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से असम के लिए विशेष आर्थिक राहत पैकेज देने और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने की मांग की। सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा माफिया, पेपर लीक गिरोह और परीक्षा केंद्रों में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक भी शिक्षा व्यवस्था की मूल समस्याओं का समाधान नहीं कर पाएगा, जब तक परीक्षा प्रणाली में व्यापक और पारदर्शी सुधार नहीं किए जाते।  

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संसद में एंटी पेपर लीक बिल पर प्रियंका गांधी का हमला, बोलीं- 'प्रधानमंत्री को कैमरे का नहीं, दिल का एंगल बदलना होगा'

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प्रियंका गांधी और प्रह्लाद जोशी के बीच लोकसभा में तीखी बहस, शिक्षा मंत्री पर बयान को लेकर हंगामा

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लोकसभा में असदुद्दीन ओवैसी का पीएम नरेंद्र मोदी पर तंज
'मित्रों से हेलो फ्रेंड्स तक...', लोकसभा में ओवैसी का पीएम मोदी पर तंज, भाषण को लेकर छिड़ी चर्चा

संसद में ओवैसी ने साधा निशाना   नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों और संबोधन के अंदाज को लेकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पहले अपने भाषणों की शुरुआत "मित्रों" कहकर करते थे, लेकिन अब उनका अंदाज बदलकर "हेलो फ्रेंड्स" तक पहुंच गया है। ओवैसी की इस टिप्पणी के बाद सदन में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।   पीएम मोदी के संबोधन अंदाज पर टिप्पणी   ओवैसी ने लोकसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी के पुराने और नए भाषणों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समय के साथ प्रधानमंत्री के संबोधन का तरीका बदला है और इसी बदलाव को लेकर उन्होंने व्यंग्य किया। उनके बयान पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं।   संसद में जारी है राजनीतिक बहस   मानसून सत्र के दौरान विपक्ष कई मुद्दों को लेकर सरकार पर हमलावर है। ओवैसी लगातार संसद में सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाते रहे हैं। वहीं, भाजपा नेताओं की ओर से भी विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया जा रहा है।   सोशल मीडिया पर बयान की चर्चा   ओवैसी के इस बयान का वीडियो और क्लिप सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है। कुछ यूजर्स ने इसे राजनीतिक व्यंग्य बताया, जबकि कुछ ने इसे विपक्ष की रणनीति का हिस्सा कहा। संसद में नेताओं के बीच तीखी बहस और बयानबाजी लगातार जारी है।  

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