राजनीति

TMC Leader Arrested in Bengal Election Controversy

बंगाल चुनाव: वोटरों को धमकाने के आरोप में TMC का पूर्व पार्षद गिरफ्तार, 10 दिन की न्यायिक हिरासत

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Police escorting former TMC councillor Nirmal Dutta to Bidhannagar court after arrest in voter intimidation case
TMC Leader Nirmal Dutta Arrested

 

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व पार्षद निर्मल दत्त को वोटरों को कथित रूप से धमकाने और चुनाव को प्रभावित करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। बुधवार को उन्हें विधाननगर कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 10 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

शिकायत के बाद हुई कार्रवाई

मामले की शुरुआत मंगलवार को हुई, जब भाजपा प्रत्याशी शरदबत मुखर्जी ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्मल दत्त वोटरों को डराकर मतदान को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने विधाननगर पुलिस कमिश्नर से भी मुलाकात की थी।

शिकायत के आधार पर विधाननगर दक्षिण थाने की पुलिस ने दत्ताबाद इलाके से निर्मल दत्त को गिरफ्तार किया।

सुजीत बोस के करीबी बताए जाते हैं

निर्मल दत्त को राज्य मंत्री सुजीत बोस का करीबी माना जाता है, जो विधाननगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। दत्त की पत्नी भी विधाननगर नगर निगम के वार्ड संख्या 38 से तृणमूल कांग्रेस की पार्षद हैं।

वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में इस्लामपुर में एक रैली के दौरान चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यदि तृणमूल के एक नेता को गिरफ्तार किया जाता है, तो उनकी जगह सौ अन्य नेता खड़े हो जाएंगे।

वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद

बताया जा रहा है कि 13 अप्रैल को सॉल्टलेक में हुई एक बैठक का वीडियो वायरल होने के बाद मामला गरमा गया। इस वीडियो में निर्मल दत्त कथित तौर पर यह कहते नजर आ रहे हैं कि अगर किसी ने तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ वोट दिया, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि एक मोबाइल ऐप के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि किसने किसे वोट दिया है। इस बयान के सामने आने के बाद भाजपा प्रत्याशी ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की।

पहले भी लग चुके हैं आरोप

यह पहली बार नहीं है जब निर्मल दत्त विवादों में आए हैं। इससे पहले भी उन पर सॉल्टलेक के दत्ताबाद इलाके में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लग चुका है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आगे की कार्रवाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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झारखंड में SIR की समय सीमा बढ़ाने की मांग, कांग्रेस ने चुनाव आयोग को सौंपा ज्ञापन

रांची। झारखंड में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस ने SIR फॉर्म भरने की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग को लेकर मंगलवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने सावन महीने में लोगों की व्यस्तता और कई जिलों में चल रहे धार्मिक आयोजनों का हवाला देते हुए समय बढ़ाने की मांग की।   कांग्रेस शिष्टमंडल ने चुनाव आयोग के सामने रखी मांग   प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार से मिला। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संथाल समेत कई जिलों में सावन मेले और अन्य गतिविधियों के कारण लोगों को गणना प्रपत्र भरने में परेशानी हो रही है। कांग्रेस ने मांग की कि मतदाताओं को पर्याप्त समय देने के लिए SIR फॉर्म जमा करने की समय सीमा बढ़ाई जाए।   40 लाख नामों को लेकर कांग्रेस ने जताई चिंता   प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि ASDD सूची में करीब 40 लाख नाम शामिल होना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों को प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि कोई भी योग्य मतदाता सूची से बाहर न हो।   चुनाव आयोग ने समय बढ़ाने से किया इनकार   मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कांग्रेस की मांग पर स्पष्ट किया कि SIR गणना प्रपत्र भरने की अंतिम तारीख में बदलाव संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 29 जुलाई तक फॉर्म जमा किए जाएंगे और 5 अगस्त को मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने बताया कि मतदाता सूची जारी होने के बाद आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।   देवघर और दुमका के लिए अलग प्रस्ताव   सीईओ के रवि कुमार ने कहा कि श्रावणी मेले को देखते हुए देवघर और दुमका जिलों से प्रस्ताव मिलने के बाद इसे चुनाव आयोग के पास भेजा जाएगा। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे जल्द से जल्द अपना गणना प्रपत्र भरकर संबंधित बीएलओ को जमा करें।   वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने की अपील   चुनाव आयोग ने कहा है कि समय पर फॉर्म जमा करने से मतदाता सूची के प्रारूप में नाम शामिल किया जा सकेगा। वहीं, कांग्रेस लगातार मांग कर रही है कि प्रक्रिया को लेकर लोगों को अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि किसी भी मतदाता को परेशानी का सामना न करना पड़े।

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मानसून सत्र 2026: लोकसभा में आज पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल पर चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मॉनसून सत्र का मंगलवार को सातवां दिन कई अहम विधेयकों और विपक्ष के तीखे तेवरों के बीच शुरू होगा। लोकसभा में आज पब्लिक एग्जामिनेशन (गलत तरीकों से बचाव) अमेंडमेंट बिल, 2026 पर चर्चा कर उसे पारित कराने की कोशिश की जाएगी। वहीं, राज्यसभा में माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) डेवलपमेंट अमेंडमेंट बिल, 2026 और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान से बचाव (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पेश किए जाएंगे।   पेपर लीक कानून में संशोधन पर होगी चर्चा   लोकसभा की कार्यसूची के अनुसार, केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह पब्लिक एग्जामिनेशन (गलत तरीकों से बचाव) अमेंडमेंट बिल, 2026 को सदन में विचार और पारित करने के लिए पेश करेंगे। यह विधेयक वर्ष 2024 के कानून में संशोधन का प्रस्ताव करता है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर और प्रभावी अंकुश लगाना है।   प्रश्नकाल के बाद सदन में रखे जाएंगे अहम दस्तावेज   लोकसभा की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू होगी। इसके बाद केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, राम नाथ ठाकुर, नित्यानंद राय, एसपी सिंह बघेल, बीएल वर्मा, बंदी संजय कुमार और पवित्रा मार्गेरिटा विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े दस्तावेज सदन के पटल पर रखेंगे। इसके अलावा सांसद कनिमोझी करुणानिधि और राव राजेंद्र सिंह उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण संबंधी संसदीय समिति की रिपोर्ट भी पेश करेंगे।   पेलेट गन के इस्तेमाल पर चर्चा की मांग   कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल के मुद्दे पर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उनका आरोप है कि इस कार्रवाई में 80 से अधिक छात्र घायल हुए थे और इस पूरे मामले पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।   पेपर लीक और पुलिस कार्रवाई पर सरकार को घेरेगा विपक्ष   कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्ष दोनों सदनों की रणनीति तय करने के बाद सरकार को पेपर लीक के मुद्दे पर जवाबदेह ठहराएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा लीक रोकने में विफल रही है और छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई, पेलेट गन तथा कथित AK-47 के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर भी गृह मंत्री से जवाब मांगा जाएगा।   राज्यसभा में भी कई अहम विधेयक होंगे पेश   राज्यसभा में मंगलवार को MSME डेवलपमेंट (अमेंडमेंट) बिल, 2026 और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान से बचाव (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पेश किए जाएंगे। इन विधेयकों पर भी सदन में चर्चा होने की संभावना है।

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पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि तेज प्रताप यादव, गिरफ्तार विपक्षी नेताओं और छात्र आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही उनके खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे भी वापस लिए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सोमवार तक सरकार ने यह कदम नहीं उठाया तो राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पूरे बिहार में बड़ा जनआंदोलन शुरू करेगा।   तेज प्रताप की गिरफ्तारी को बताया राजनीतिक कार्रवाई   तेजस्वी यादव ने कहा कि उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव को छात्र आंदोलन का समर्थन करने के कारण गिरफ्तार किया गया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए विपक्षी नेताओं और छात्रों पर कार्रवाई कर रही है।   छात्रों पर दर्ज केस वापस लेने की मांग   तेजस्वी यादव ने कहा कि NEET आंदोलन के दौरान जिन छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई है, उन्हें तत्काल वापस लिया जाए। उनका कहना है कि छात्र अपने भविष्य और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी आवाज सुनने के बजाय पुलिस कार्रवाई की।   चेतावनी: मांगें नहीं मानी गईं तो होगा राज्यव्यापी आंदोलन   आरजेडी नेता ने स्पष्ट कहा कि यदि तेज प्रताप यादव, अन्य गिरफ्तार नेताओं और छात्रों की रिहाई तथा मुकदमे वापस लेने की मांग 24 घंटे के भीतर पूरी नहीं हुई, तो पार्टी पूरे बिहार में व्यापक आंदोलन करेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भी आंदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।

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kalpana जुलाई 23, 2026 0

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अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?