स्पोर्ट्स

यूपी टी20 लीग 2026 आज से शुरू, पहले मुकाबले में आमने-सामने होंगे काशी रुद्रास और मेरठ मेवरिक्स

abhishek singh अगस्त 14, 2026 0
UP T20 League 2026
UP T20 League 2026 starts today

लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश की घरेलू क्रिकेट लीग यूपी टी20 लीग 2026 का चौथा सीजन आज 14 अगस्त से शुरू हो रहा है। उद्घाटन मुकाबले में काशी रुद्रास और मेरठ मेवरिक्स लखनऊ के भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में आमने-सामने होंगे। टूर्नामेंट का फाइनल 6 सितंबर को कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में खेला जाएगा।

 

छह टीमें लेंगी हिस्सा

 

यूपी टी20 लीग 2026 में कुल छह फ्रेंचाइजी हिस्सा ले रही हैं—गोरखपुर लायंस, मेरठ मेवरिक्स, नोएडा किंग्स, काशी रुद्रास, कानपुर सुपरस्टार्स और लखनऊ फाल्कन्स। इस सीजन में कुल 34 मुकाबले खेले जाएंगे।

 

रिंकू सिंह और भुवनेश्वर कुमार समेत कई सितारे

 

इस सीजन में यूपी के कई चर्चित क्रिकेटरों पर नजर रहेगी। रिंकू सिंह, भुवनेश्वर कुमार, ध्रुव जुरेल, प्रियम गर्ग, समीर रिजवी और विपराज निगम जैसे खिलाड़ी टूर्नामेंट का आकर्षण बढ़ाएंगे। लीग में आईपीएल अनुभव वाले कुल 14 खिलाड़ी शामिल हैं।

 

लखनऊ और कानपुर में होंगे मुकाबले

 

लीग के मैच मुख्य रूप से इकाना क्रिकेट स्टेडियम, लखनऊ और ग्रीन पार्क स्टेडियम, कानपुर में आयोजित किए जाएंगे। लीग चरण के बाद सितंबर की शुरुआत में प्लेऑफ मुकाबले होंगे और 6 सितंबर को ग्रीन पार्क में फाइनल खेला जाएगा।

 

युवा खिलाड़ियों के लिए बड़ा मंच

 

यूपी टी20 लीग का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों को उच्च स्तर के घरेलू क्रिकेट का मंच देना है। यहां अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के लिए आईपीएल फ्रेंचाइजी और राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजर में आने का मौका भी बनता है। इस लिहाज से 2026 सीजन युवा क्रिकेटरों के लिए काफी अहम माना जा रहा है।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

स्पोर्ट्स

View more
Tanzid Hasan
AUS vs BAN 1st Test: बांग्लादेश का दबदबा, 351/6 पर स्टंप्स; ऑस्ट्रेलिया से 153 रन आगे

डार्विन, एजेंसियां। ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच पहले टेस्ट के दूसरे दिन बांग्लादेश ने 6 विकेट पर 351 रन बनाकर दिन का खेल खत्म किया। ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 198 रन पर सिमट गई थी, इसलिए बांग्लादेश को अब 153 रन की मजबूत पहली पारी की बढ़त मिल चुकी है।   Tanzid Hasan ने रचा इतिहास   बांग्लादेश के सलामी बल्लेबाज Tanzid Hasan ने 101 रन की शानदार पारी खेली। यह उनके टेस्ट करियर का पहला शतक है और वह ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर टेस्ट शतक लगाने वाले पहले बांग्लादेशी बल्लेबाज बन गए। उन्होंने 197 गेंदों का सामना किया।   Tanzid को कप्तान Najmul Hossain Shanto का भी अच्छा साथ मिला, जिन्होंने 84 रन बनाए। इसके अलावा Mominul Haque ने 49 रन की उपयोगी पारी खेली। दिन के अंत में Mehidy Hasan Miraz 32 रन बनाकर नाबाद थे।   ऑस्ट्रेलिया पर बढ़ा दबाव   दिन के अंतिम सत्र में ऑस्ट्रेलिया ने कुछ विकेट लेकर वापसी की कोशिश की, लेकिन बांग्लादेश ने फिर पारी को संभाल लिया। अब तीसरे दिन ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी चुनौती बांग्लादेश की बढ़त को ज्यादा बड़ा होने से रोकना होगी। फिलहाल 351/6 का स्कोर और 153 रन की बढ़त बांग्लादेश को मैच में मजबूत स्थिति में रखती है।

abhishek singh अगस्त 14, 2026 0
UP T20 League 2026

यूपी टी20 लीग 2026 आज से शुरू, पहले मुकाबले में आमने-सामने होंगे काशी रुद्रास और मेरठ मेवरिक्स

Shubman Gill

शुभमन गिल की फिटनेस पर बड़ा अपडेट, श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट से पहले पूरी तरह फिट

TTFI

खेल मंत्रालय ने TTFI की मान्यता निलंबित की, प्रशासनिक खामियों पर कड़ी कार्रवाई

Neeraj Chopra
नीरज चोपड़ा और पुलेला गोपीचंद की बड़ी पहल, Indian School of Coaching Excellence की शुरुआत

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय खेलों में कोचिंग के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से ओलंपिक और विश्व चैंपियन भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा और दिग्गज बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद ने मिलकर Indian School of Coaching Excellence (ISCE) की शुरुआत की है। इस पहल का लक्ष्य देश में उच्च गुणवत्ता वाले कोच तैयार करना और खेल प्रतिभाओं के विकास के लिए मजबूत कोचिंग व्यवस्था खड़ी करना है।   कोचिंग को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश   Indian School of Coaching Excellence के जरिए कोचों को आधुनिक प्रशिक्षण तकनीक, खेल विज्ञान, प्रदर्शन विश्लेषण और खिलाड़ियों के मानसिक विकास से जुड़े पहलुओं की जानकारी देने पर जोर रहेगा।   इस पहल को भारत में खेलों के लिए बेहतर कोचिंग इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करना नहीं, बल्कि ऐसे कोच तैयार करना है जो लंबे समय तक प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार कर सकें।   नीरज चोपड़ा का अनुभव आएगा काम   नीरज चोपड़ा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का लंबा अनुभव हासिल किया है। ओलंपिक स्वर्ण पदक और विश्व चैंपियनशिप की सफलता के बाद उनका अनुभव युवा खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के लिए काफी उपयोगी माना जा रहा है। वहीं, पुलेला गोपीचंद भारत के सबसे सफल बैडमिंटन कोचों में शामिल हैं। उनके मार्गदर्शन में भारतीय बैडमिंटन ने विश्व स्तर पर कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।   खेल विज्ञान और आधुनिक तकनीक पर जोर   नई पहल में खेल विज्ञान, डेटा विश्लेषण, प्रदर्शन मूल्यांकन, चोट से बचाव और खिलाड़ी प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को कोचिंग का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जाएगा। इससे भारतीय कोचों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों से जोड़ने और खिलाड़ियों की तैयारी को ज्यादा वैज्ञानिक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।   भारत के खेल भविष्य के लिए अहम कदम   भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षित और आधुनिक सोच वाले कोचों की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही है। ऐसे में नीरज चोपड़ा और गोपीचंद की यह पहल जमीनी स्तर से लेकर एलीट खेलों तक कोचिंग व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

abhishek singh अगस्त 14, 2026 0
Ashleigh Gardner

एश्ले गार्डनर ने विवाद पर तोड़ी चुप्पी, बोलीं- दर्द के लिए माफी, अब निजी मामले पर नहीं करूंगी टिप्पणी

Sri Lanka women’s cricket team captain Chamari Athapaththu during a match ahead of Women’s Asia Cup 2026

महिला एशिया कप 2026: श्रीलंका ने किया टीम का ऐलान, चमारी अटापट्टू संभालेंगी कमान

Vaibhav Suryavanshi

हरभजन सिंह ने वैभव सूर्यवंशी की जमकर तारीफ की, बोले- ऐसा टैलेंट बहुत कम देखने को मिलता है

Galle Test
गॉल टेस्ट में भारत की नई रणनीति, 3 अलग-अलग तरह के लेफ्ट-आर्म स्पिनर्स के साथ उतरने की तैयारी

गॉल, एजेंसियां। भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में होने वाले टेस्ट मुकाबले से पहले भारतीय टीम मैनेजमेंट गेंदबाजी संयोजन को लेकर बड़ा प्रयोग कर सकता है। टीम तीन अलग-अलग तरह के बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाजों को प्लेइंग-11 में शामिल करने के विकल्प पर विचार कर रही है। गॉल की स्पिन मददगार पिच को देखते हुए यह रणनीति श्रीलंकाई बल्लेबाजों के सामने अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकती है।   तीन अलग-अलग शैली के स्पिनर्स पर नजर   भारतीय टीम के पास बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाजों में अलग-अलग कौशल वाले विकल्प मौजूद हैं। इनमें एक गेंदबाज ऑर्थोडॉक्स स्पिन, दूसरा चाइनामैन/लेफ्ट-आर्म रिस्ट स्पिन और तीसरा अलग गति व एंगल से गेंदबाजी करने वाला विकल्प हो सकता है। इस तरह का संयोजन श्रीलंका के बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है, क्योंकि तीनों गेंदबाजों के गेंद छोड़ने का तरीका, टर्न और एंगल अलग होगा।   गॉल की पिच दे सकती है स्पिन को मदद   गॉल का मैदान लंबे समय से स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार माना जाता है। जैसे-जैसे टेस्ट आगे बढ़ता है, पिच पर दरारें और टूट-फूट बढ़ने से स्पिनरों को अतिरिक्त टर्न और उछाल मिल सकता है। भारतीय टीम मैनेजमेंट इसी परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए तेज गेंदबाजों की संख्या कम करके स्पिन विभाग को मजबूत करने पर विचार कर सकता है।   बल्लेबाजों के लिए होगी बड़ी चुनौती   तीन अलग-अलग शैली के बाएं हाथ के स्पिनरों के खिलाफ श्रीलंकाई बल्लेबाजों को लगातार अपनी तकनीक में बदलाव करना पड़ सकता है। खासकर दाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ अलग-अलग कोण से आने वाली गेंदें परेशानी पैदा कर सकती हैं।   हालांकि, अंतिम प्लेइंग-11 का फैसला पिच की स्थिति, मौसम और टीम संयोजन को देखकर किया जाएगा। इसलिए तीनों लेफ्ट-आर्म स्पिनर्स का एक साथ खेलना अभी संभावित रणनीति है, आधिकारिक पुष्टि नहीं।

abhishek singh अगस्त 14, 2026 0
Harbhajan Singh

हरभजन सिंह ने की गौतम गंभीर की तारीफ, बोले- टीम के हित को सबसे ऊपर रखते हैं कोच

Mitchell Starc

मिचेल स्टार्क ने रचा इतिहास, टेस्ट क्रिकेट के सबसे सफल बाएं हाथ के गेंदबाज बने

IND VS AFG T20 Series

भारत-अफगानिस्तान T20 मैच गणेश चतुर्थी पर कराने की तैयारी, ACB ने BCCI से मांगी 14 सितंबर की तारीख

0 Comments

Top week

Government and opposition clash in Parliament over Amit Shah's response to police action during Delhi student protests.
राष्ट्रीय

संसद में फिर आमने-सामने सरकार और विपक्ष, अमित शाह के जवाब को लेकर सियासी घमासान; NDA की 'मंगल मिलन' रणनीति से राहुल गांधी पर निशाना

surbhi अगस्त 11, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?