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Flag Row: Complaint Against Hardik Pandya

Hardik Pandya पर तिरंगे के अपमान का आरोप, Pune में दर्ज हुई शिकायत

surbhi मार्च 12, 2026 0
Indian cricketer Hardik Pandya during T20 World Cup celebrations after India defeated New Zealand at Narendra Modi Stadium.
Complaint Filed Against Hardik Pandya Over Flag Row

 

पुणे: Hardik Pandya के खिलाफ राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत Pune के Shivajinagar Police Station में की गई है, जहां पुलिस मामले की जांच कर रही है।

मामला ICC Men's T20 World Cup 2026 की जीत के बाद हुए जश्न से जुड़ा बताया जा रहा है। भारतीय टीम ने अहमदाबाद के Narendra Modi Stadium में खेले गए मुकाबले में New Zealand national cricket team को 96 रन से हराकर तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया था। इस जीत के साथ भारत ऐसी पहली टीम बन गया जिसने अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया।

 

जश्न के दौरान लगा आरोप

टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत के बाद खिलाड़ी जश्न में डूबे नजर आए। कई खिलाड़ियों ने तिरंगा ओढ़कर मैदान पर जश्न मनाया। इसी दौरान Hardik Pandya भी तिरंगा ओढ़े दिखाई दिए।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जश्न के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज को अपने शरीर पर लपेटकर कथित तौर पर अमर्यादित व्यवहार किया, जो राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत अपराध माना जा सकता है।

 

वकील ने दर्ज कराई शिकायत

यह शिकायत वकील वाजेद खान की ओर से दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से मांग की है कि मामले की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल पुलिस आरोपों की जांच कर रही है और तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।

 

टूर्नामेंट में पांड्या का प्रदर्शन

Hardik Pandya ने ICC Men's T20 World Cup 2026 में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने टूर्नामेंट के 9 मैचों में 217 रन बनाए और 9 विकेट भी लिए

खिताब जीतने के बाद पांड्या ने कहा,

“मुझमें अभी 10 साल का क्रिकेट बाकी है और मैं 10 और ICC खिताब जीतना चाहता हूं।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में वर्ल्ड कप जीतना उनके लिए बेहद भावुक पल है और टीम ने इसके लिए कड़ी मेहनत की है।

 

2024 की याद भी आई

पांड्या ICC Men's T20 World Cup 2024 जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा थे। उस फाइनल में उन्होंने अंतिम ओवर फेंककर टीम को जीत दिलाई थी।

उन्होंने बताया कि इंग्लैंड के खिलाफ मैच के दौरान 19वां ओवर डालते समय उनके दिमाग में 2024 विश्व कप फाइनल की यादें भी ताजा हो गई थीं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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हारकर भी बेंगलुरु टॉप पर, गुजरात के खिलाफ क्वालिफायर-1 खेलेगी, हैदराबाद 55 रन से जीती

हैदराबाद, एजेंसियां। IPL में शुक्रवार को सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को 55 रन से हरा दिया। राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में हैदराबाद ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग की। उसने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 255 रन बनाए। जवाब में बेंगलुरु 4 विकेट खोकर 200 रन ही बना सकी। इस हार के बावजूद बेंगलुरु लीग स्टेज में टॉप बनी रही। वहीं, हैदराबाद जीत के साथ तीसरे स्थान पर है। अब IPL 2026 का पहला क्वालिफायर बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस के बीच खेला जाएगा। पाटीदार ने 56 रन की पारी खेली 256 रन के टारगेट का पीछा करते हुए ओपनर वेंकटेश अय्यर ने 19 गेंदों में 44 रन बनाए। इसके बाद कप्तान रजत पाटीदार ने 39 गेंदों में 56 रन बनाकर पारी को संभालने की कोशिश की, जबकि देवदत्त पडिक्कल ने 21 रन का योगदान दिया। विराट कोहली इस बार बड़ी पारी नहीं खेल सके और 15 रन बनाकर आउट हो गए। अंत में कुणाल पंड्या 41 और टिम डेविड 15 रन बनाकर नाबाद लौटे, लेकिन टीम 20 ओवर में 200/4 तक ही पहुंच सकी। सनराइजर्स के लिए ईशान मलिंगा सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने 2 विकेट लिए, जबकि साकिब हुसैन और ट्रैविस हेड को 1-1 विकेट मिला। हैदराबाद के तीन बल्लेबाजों ने अर्धशतक लगाए हैदराबाद के लिए अभिषेक शर्मा ने 22 गेंदों में 56 रन की पारी खेलकर टीम को तेज शुरुआत दिलाई, जबकि ईशान किशन ने 46 गेंदों में 79 रन बनाकर पारी को संभाला। हेनरिक क्लासन ने भी 24 गेंदों में 51 रन की पारी खेली। आखिर में नितीश कुमार रेड्डी ने 12 गेंदों में नाबाद 29 रन जोड़कर टीम को 250 के पार पहुंचाया। बेंगलुरु के गेंदबाज पूरी तरह संघर्ष करते नजर आए, जहां रसिख सलाम ने 2 विकेट लिए, जबकि सुयश शर्मा और क्रुणाल पंड्या को 1-1 सफलता मिली।

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वैभव सूर्यवंशी की तुलना सचिन तेंदुलकर से न करें, दिनेश कार्तिक ने दी बड़ी सलाह

आईपीएल 2026 में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से सुर्खियां बटोर रहे युवा बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi को लेकर भारत के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज Dinesh Karthik ने बड़ा बयान दिया है। कार्तिक ने कहा कि इतनी कम उम्र में शानदार प्रदर्शन कर रहे वैभव की तुलना महान बल्लेबाज Sachin Tendulkar से करना सही नहीं होगा। ‘अगला सचिन’ कहना ठीक नहीं एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान Dinesh Karthik ने कहा कि वैभव जो कर रहे हैं वह बेहद खास है, लेकिन लोगों को उन्हें “अगला सचिन” कहना शुरू नहीं करना चाहिए। कार्तिक ने कहा कि: “वैभव अभी सिर्फ 15 साल के हैं और इस उम्र में उनका प्रदर्शन शानदार है। लेकिन सचिन ने जो हासिल किया था, वह असाधारण था। वैभव के सामने आने वाली चुनौतियां अलग होंगी।” उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ियों पर जरूरत से ज्यादा उम्मीदों का दबाव डालना सही नहीं है। मैदान से ज्यादा बाहर की चुनौतियां Dinesh Karthik का मानना है कि आज के दौर में युवा खिलाड़ियों के सामने सोशल मीडिया, लोकप्रियता और मानसिक दबाव जैसी चुनौतियां ज्यादा हैं। उन्होंने कहा: “सचिन के सामने मैदान के अंदर और बाहर दोनों तरह की चुनौतियां थीं। लेकिन वैभव को खेल के बाहर की चीजों को संभालना सीखना होगा।” कार्तिक ने साफ कहा कि वैभव के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन करियर को लंबे समय तक सफल बनाए रखने के लिए मानसिक मजबूती भी बेहद जरूरी होगी। आईपीएल ने बदल दी क्रिकेट की तस्वीर Indian Premier League को लेकर भी कार्तिक ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि 2008 से लेकर अब तक आईपीएल पूरी तरह बदल चुका है और यह दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ने वाले खेल टूर्नामेंट्स में शामिल हो गया है। उनके मुताबिक: आईपीएल ने युवा खिलाड़ियों को बड़ा मंच दिया है क्रिकेट अब एक मजबूत करियर विकल्प बन चुका है इस लीग ने कई खिलाड़ियों की जिंदगी बदल दी है शानदार फॉर्म में चल रहे हैं वैभव Vaibhav Suryavanshi इस सीजन में शानदार फॉर्म में हैं। Rajasthan Royals की ओर से खेलते हुए उन्होंने 13 मैचों में 579 रन बनाए हैं। इस दौरान: 1 शतक 3 अर्धशतक भी उनके बल्ले से निकले हैं। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने क्रिकेट फैंस और एक्सपर्ट्स दोनों को प्रभावित किया है। क्या सचिन जैसी उम्मीदें बनेंगी दबाव? क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि किसी युवा खिलाड़ी की तुलना जल्दी किसी दिग्गज से करना उसके करियर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इसलिए वैभव को अपनी अलग पहचान बनाने का समय देना जरूरी है।  

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FIFA World Cup
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में बन सकता है इतिहास, मेसी-रोनाल्डो समेत ये 3 खिलाड़ी खेलेंगे छठा विश्व कप

दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट FIFA World Cup 2026 की शुरुआत 11 जून 2026 से होने जा रही है। इस बार टूर्नामेंट सिर्फ मुकाबलों के लिए ही नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड के लिए भी चर्चा में है। फुटबॉल के तीन दिग्गज खिलाड़ी — Cristiano Ronaldo, Lionel Messi और Guillermo Ochoa — इतिहास में पहली बार छह फीफा वर्ल्ड कप खेलने वाले खिलाड़ी बन सकते हैं। इस बार वर्ल्ड कप का आयोजन United States, Canada और Mexico में संयुक्त रूप से किया जाएगा। साथ ही पहली बार 48 टीमें इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगी, जिससे यह अब तक का सबसे बड़ा फीफा वर्ल्ड कप बनने जा रहा है। अब तक कोई खिलाड़ी नहीं खेल पाया 6 वर्ल्ड कप फुटबॉल इतिहास में अब तक किसी भी खिलाड़ी ने छह फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं लिया है। सबसे ज्यादा पांच वर्ल्ड कप खेलने का रिकॉर्ड फिलहाल छह खिलाड़ियों के नाम दर्ज है। इस सूची में: Lionel Messi Cristiano Ronaldo Lothar Matthäus Antonio Carbajal Andrés Guardado Rafael Márquez शामिल हैं। अब 2026 में मेसी, रोनाल्डो और ओचोआ के पास इस रिकॉर्ड को नई ऊंचाई तक ले जाने का मौका होगा। 2006 से शुरू हुआ मेसी और रोनाल्डो का सफर Cristiano Ronaldo ने अपना पहला वर्ल्ड कप 2006 में जर्मनी में खेला था। इसके बाद वह 2010, 2014, 2018 और 2022 वर्ल्ड कप में भी पुर्तगाल का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। रोनाल्डो अब तक वर्ल्ड कप में 22 मुकाबले खेल चुके हैं, जिनमें उन्होंने 8 गोल और 2 असिस्ट दर्ज किए हैं। हालांकि वह अभी तक पुर्तगाल को विश्व कप ट्रॉफी नहीं दिला सके हैं। वहीं Lionel Messi ने भी 2006 में वर्ल्ड कप डेब्यू किया था। उन्होंने 2010, 2014, 2018 और 2022 में अर्जेंटीना के लिए खेला। मेसी ने 2022 में अर्जेंटीना को विश्व कप जिताकर अपने करियर का सबसे बड़ा सपना पूरा किया। उन्होंने अब तक वर्ल्ड कप में 26 मैचों में 13 गोल और 8 असिस्ट दर्ज किए हैं। ओचोआ भी रच सकते हैं इतिहास Guillermo Ochoa भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बेहद करीब हैं। मैक्सिको के अनुभवी गोलकीपर ने 2006, 2010, 2014, 2018 और 2022 वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया है। 2026 में वह छठा वर्ल्ड कप खेलकर फुटबॉल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। ओचोआ अब तक 152 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुके हैं और उन्हें मैक्सिको के सबसे भरोसेमंद गोलकीपर्स में गिना जाता है। क्यों खास होगा FIFA World Cup 2026? FIFA World Cup 2026 कई वजहों से ऐतिहासिक माना जा रहा है। पहली बार: 48 टीमें हिस्सा लेंगी तीन देशों में टूर्नामेंट आयोजित होगा और संभवतः पहली बार खिलाड़ी छह वर्ल्ड कप खेलते नजर आएंगे ऐसे में दुनियाभर के फुटबॉल फैंस की नजरें इन दिग्गज खिलाड़ियों पर टिकी रहेंगी।  

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आरसीबी के लिए खुशखबरी, फिल सॉल्ट की IPL में वापसी तय

Vaibhav Suryavanshi touches Sanjiv Goenka’s wife’s feet after explosive IPL innings for Rajasthan Royals

विस्फोटक पारी के बाद वैभव सूर्यवंशी ने जीता दिल, संजीव गोयनका की पत्नी के पैर छूकर लिया आशीर्वाद

Kolkata Knight Riders and Mumbai Indians players ahead of crucial IPL 2026 playoff clash at Eden Gardens

प्लेऑफ की उम्मीद बचाने उतरेगी केकेआर, आज मुंबई से करो या मरो की भिड़ंत

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