आईपीएल 2026 का रोमांच अपने चरम पर पहुंच चुका है। लीग स्टेज के 63वें मुकाबले में Sunrisers Hyderabad ने Chennai Super Kings को 5 विकेट से हराकर प्लेऑफ में अपनी जगह पक्की कर ली। इस जीत के साथ अब प्लेऑफ की तस्वीर लगभग साफ हो गई है और तीन टीमें आधिकारिक तौर पर क्वालीफाई कर चुकी हैं।
Royal Challengers Bengaluru पहले ही अंतिम चार में पहुंच चुकी थी, जबकि अब Gujarat Titans और सनराइजर्स हैदराबाद ने भी प्लेऑफ का टिकट हासिल कर लिया है। हालांकि चौथे स्थान की जंग अभी बेहद दिलचस्प बनी हुई है, जहां पांच टीमें अब भी रेस में बनी हुई हैं।
13 मैचों में 9 जीत और 18 अंकों के साथ आरसीबी अंक तालिका में शीर्ष पर कायम है। गुजरात टाइटंस और सनराइजर्स हैदराबाद दोनों के 16-16 अंक हैं, लेकिन बेहतर नेट रन रेट के चलते गुजरात दूसरे स्थान पर है।
चौथे स्थान के लिए सबसे मजबूत दावेदारी फिलहाल Punjab Kings की नजर आ रही है, जिनके 13 अंक हैं। वहीं Rajasthan Royals, चेन्नई सुपर किंग्स, Delhi Capitals और Kolkata Knight Riders भी प्लेऑफ की उम्मीदें बनाए हुए हैं।
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चेन्नई सुपर किंग्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट पर 180 रन बनाए। टीम के लिए Dewald Brevis ने सबसे ज्यादा 44 रन बनाए। इसके अलावा कार्तिक शर्मा ने 32, Sanju Samson ने 27 और Shivam Dube ने 26 रनों का योगदान दिया।
हैदराबाद की ओर से Pat Cummins ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट झटके, जबकि साकिब हुसैन ने 2 विकेट हासिल किए।
181 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी सनराइजर्स हैदराबाद ने 19 ओवर में 5 विकेट गंवाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। Ishan Kishan ने 70 रनों की बेहतरीन पारी खेली, जबकि Heinrich Klaasen ने 47 और Abhishek Sharma ने 26 रन बनाए।
चेन्नई के लिए मुकेश चौधरी ने 2 विकेट लिए, लेकिन वह टीम को हार से नहीं बचा सके।
अब आईपीएल 2026 का अंतिम लीग चरण बेहद रोमांचक हो गया है, जहां चौथे प्लेऑफ स्थान के लिए हर मुकाबला करो या मरो जैसा होने वाला है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। रांची एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजन का केंद्र बनने जा रहा है। 39वीं राष्ट्रीय अंडर-9 ओपन एवं गर्ल्स शतरंज चैंपियनशिप-2026 का आयोजन 6 से 12 जुलाई तक सरला बिरला विश्वविद्यालय, महिलौंग परिसर में किया जाएगा। सात दिनों तक चलने वाली इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देशभर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 438 बाल शतरंज खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। आयोजन को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और खिलाड़ियों के स्वागत के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन ऑल झारखंड चेस एसोसिएशन द्वारा रांची जिला चेस एसोसिएशन के सहयोग से तथा ऑल इंडिया चेस फेडरेशन (AICF) के तत्वावधान में किया जा रहा है। प्रतियोगिता को विश्व शतरंज महासंघ (FIDE) की मान्यता प्राप्त है। लगभग आठ वर्षों के अंतराल के बाद रांची को इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता की मेजबानी का अवसर मिला है। प्रतियोगिता में कुल पांच लाख रुपये की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अभिभावकों आयोजन स्थल पर खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अभिभावकों के लिए आवास, भोजन, चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा और आधुनिक प्रतियोगिता हॉल सहित सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। आयोजकों का उद्देश्य प्रतिभागियों को राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि वे पूरी एकाग्रता के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकें। आयोजन समिति का मानना है आयोजन समिति का मानना है कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले कई खिलाड़ी भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। यह आयोजन न केवल युवा खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा, बल्कि झारखंड में शतरंज जैसे बौद्धिक खेलों को भी नई पहचान देगा। प्रतियोगिता को सीसीएल, एनटीपीसी और बीसीसीएल का सहयोग प्राप्त है। ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी नवजोत अलंग ने कहा कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और निष्पक्ष व सफल आयोजन सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर विशेष व्यवस्था की गई है।
मैनचेस्टर, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे बेबी बॉस के नाम से मशहूर वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यादगार डेब्यू किया। महज 15 साल की उम्र में भारतीय टीम की जर्सी पहनने वाले वैभव ने अपने पहले ही मैच में बेखौफ बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। हालांकि भारत को इस मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन युवा बल्लेबाज की पारी चर्चा का केंद्र रही। डेब्यू मैच में दिखाई आक्रामक बल्लेबाजी भारत की पारी के दौरान वैभव सूर्यवंशी ने 10 गेंदों में 14 रन बनाए। अपनी छोटी लेकिन प्रभावशाली पारी में उन्होंने 2 शानदार छक्के लगाए और शुरुआत से ही इंग्लैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की। उनके आत्मविश्वास और शॉट चयन की क्रिकेट विशेषज्ञों ने जमकर तारीफ की। सबसे कम उम्र में भारत के लिए T20I खेलने वालों में शामिल वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय टी20 खेलने वाले खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं। घरेलू क्रिकेट और जूनियर स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में मौका मिला और उन्होंने अपने पहले ही मैच में सकारात्मक संकेत दिए। भविष्य के स्टार के रूप में देख रहे विशेषज्ञ पूर्व क्रिकेटरों और विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी में लंबे समय तक भारतीय टीम के लिए खेलने की क्षमता है। हालांकि डेब्यू मैच में वह बड़ी पारी नहीं खेल सके, लेकिन उनके आत्मविश्वास, आक्रामक अंदाज और दबाव में खेलने की क्षमता ने यह संकेत दिया कि भारतीय क्रिकेट को एक नया प्रतिभाशाली बल्लेबाज मिल सकता है। अब सभी की नजर सीरीज के अगले मुकाबलों में उनके प्रदर्शन पर रहेगी।
मैनचेस्टर, एजेंसियां । भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला आज (4 जुलाई) मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेला जाएगा। पहले टी20 मुकाबले के बारिश की वजह से रद्द होने के बाद अब दोनों टीमें सीरीज में पहली जीत दर्ज करने के इरादे से मैदान पर उतरेंगी। मुकाबला भारतीय समयानुसार शाम 7:00 बजे शुरू होगा। बारिश बन सकती है सबसे बड़ी चुनौती पहले मैच की तरह दूसरे टी20 पर भी मौसम का साया बना हुआ है। मौसम विभाग ने मैनचेस्टर में रुक-रुक कर बारिश की संभावना जताई है। यदि मौसम साफ रहा तो दोनों टीमों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। इंग्लैंड ने प्लेइंग इलेवन में किए दो बड़े बदलाव इंग्लैंड ने दूसरे टी20 के लिए अपनी प्लेइंग इलेवन में दो अहम बदलाव किए हैं। तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर की टीम में वापसी हुई है, जबकि जॉश टंग टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करेंगे। दूसरी ओर भारतीय टीम अपनी पिछली संयोजन के साथ उतर सकती है और बल्लेबाजों से बड़ी पारी की उम्मीद होगी। सीरीज में बढ़त बनाने का सुनहरा मौका पहला मुकाबला बेनतीजा रहने के कारण फिलहाल सीरीज 0-0 से बराबरी पर है। ऐसे में आज का मैच जीतने वाली टीम पांच मैचों की सीरीज में महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर लेगी। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें भारत के शीर्ष बल्लेबाजों और इंग्लैंड की मजबूत गेंदबाजी पर टिकी हैं।