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ईस्ट जोन की कमान ईशान किशन के हाथ, दलीप ट्रॉफी टीम में झारखंड का दबदबा

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
दलीप ट्रॉफी 2026-27 के लिए ईस्ट जोन टीम के कप्तान बने ईशान किशन
Ishan Kishan Named East Zone Captain Duleep Trophy

रांची। झारखंड क्रिकेट के लिए गर्व की खबर है। भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन को दलीप ट्रॉफी 2026-27 के लिए ईस्ट जोन टीम का कप्तान बनाया गया है। 15 सदस्यीय टीम में झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन (JSCA) के पांच खिलाड़ियों को जगह मिली है, जो राज्य के घरेलू क्रिकेट की मजबूत मौजूदगी को दर्शाता है।

 

वैभव सूर्यवंशी बने उपकप्तान

 

बिहार के 15 वर्षीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को ईस्ट जोन टीम का उपकप्तान नियुक्त किया गया है। कम उम्र में मिली यह जिम्मेदारी उनके शानदार प्रदर्शन का सम्मान मानी जा रही है। अब उन्हें नेतृत्व क्षमता दिखाने का भी बड़ा मौका मिलेगा।

 

झारखंड के खिलाड़ियों का दबदबा

 

ईस्ट जोन की टीम में कप्तान ईशान किशन के अलावा विकेटकीपर-बल्लेबाज कुमार कुशाग्र, ऑलराउंडर अनुकूल रॉय, बल्लेबाज विराट सिंह और युवा ओपनर शिखर मोहन को भी शामिल किया गया है। वहीं, शरनदीप सिंह को स्टैंडबाय खिलाड़ी बनाया गया है। टीम के कोच रतन कुमार और फिजियो रंचल चौधरी भी झारखंड से हैं, जिससे टीम में राज्य की भागीदारी और मजबूत हुई है।

 

झारखंड क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि

 

ईशान किशन को कप्तानी मिलना सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि झारखंड क्रिकेट के लिए भी बड़ी सफलता माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य के खिलाड़ियों ने घरेलू क्रिकेट में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जिसका असर अब राष्ट्रीय स्तर पर टीम चयन में भी साफ दिखाई दे रहा है।

 

शानदार प्रदर्शन का मिला इनाम

 

युवा बल्लेबाज शिखर मोहन ने पिछले रणजी ट्रॉफी सत्र में 613 रन बनाकर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा था। वहीं, कुमार कुशाग्र ने अपनी विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी से प्रभावित किया। अनुकूल रॉय और विराट सिंह भी लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। अब इन खिलाड़ियों को मोहम्मद शमी और मुकेश कुमार जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिलेगा, जिससे उनके खेल को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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38 साल की उम्र में लिया फैसला, ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट जीत के कप्तान रहाणे ने कहा- अब आगे बढ़ने का सही समय   नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है। रहाणे ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से आगे बढ़ने का समय आ गया है। उनके संन्यास के साथ भारतीय क्रिकेट में एक शांत, भरोसेमंद और संघर्षशील खिलाड़ी के करियर का अंत हो गया।   टेस्ट क्रिकेट में बनाई थी खास पहचान   अजिंक्य रहाणे भारतीय टेस्ट टीम के सबसे भरोसेमंद मध्यक्रम बल्लेबाजों में शामिल रहे। उन्होंने 85 टेस्ट मैचों में 5,077 रन बनाए और 12 शतक लगाए। विदेशी पिचों पर उनकी तकनीक, धैर्य और दबाव में खेलने की क्षमता की हमेशा तारीफ हुई।   ऑस्ट्रेलिया में कप्तानी कर रचा इतिहास   रहाणे के करियर का सबसे यादगार पल 2020-21 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी रही, जब विराट कोहली की अनुपस्थिति में उन्होंने भारतीय टीम की कप्तानी संभाली और ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर 2-1 से हराने वाली ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत में अहम भूमिका निभाई।   टीम इंडिया में वापसी की कोशिश रही अधूरी   रहाणे ने लंबे समय तक भारतीय टेस्ट टीम में वापसी की कोशिश की, लेकिन 2023 के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नियमित मौका नहीं मिला। घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन के बावजूद राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं बन पाने के बाद उन्होंने संन्यास का फैसला लिया।   आईपीएल और क्रिकेट से जुड़ाव जारी रहने की संभावना   अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बावजूद रहाणे के आईपीएल या घरेलू क्रिकेट में खेलने को लेकर अभी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है। वह हाल के वर्षों में फ्रेंचाइजी क्रिकेट में भी सक्रिय रहे हैं।   भारतीय क्रिकेट में रहाणे की विरासत   रहाणे को उनके शांत स्वभाव, शानदार स्लिप फील्डिंग और मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभालने की क्षमता के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने अपने करियर में दिखाया कि बिना ज्यादा शोर के भी कोई खिलाड़ी टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

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Commonwealth Games 2026: ग्लास्गो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 8वां दिन भारत के लिए बेहद अहम रहने वाला है। गुरुवार, 30 जुलाई को भारतीय स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा अपने अभियान की शुरुआत करेंगे। वह पुरुषों के जैवलिन थ्रो क्वालिफिकेशन में उतरेंगे। हालांकि, आज नीरज का मेडल इवेंट नहीं है। जैवलिन थ्रो का फाइनल 31 जुलाई को होगा। नीरज चोपड़ा के अलावा भारत की नजरें एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग में होने वाले कई मेडल इवेंट पर रहेंगी। शॉट पुट में तजिंदरपाल सिंह तूर और समरदीप सिंह गिल, महिला 5000 मीटर में पारुल चौधरी और वेटलिफ्टिंग में मार्टिना देवी मैबाम तथा लवप्रीत सिंह पदक के लिए चुनौती पेश करेंगे। नीरज चोपड़ा की होगी एंट्री भारत के लिए दिन का सबसे बड़ा आकर्षण नीरज चोपड़ा, रोहित यादव और यश वीर सिंह का पुरुष जैवलिन थ्रो क्वालिफिकेशन होगा। यह मुकाबला दोपहर 2:55 बजे शुरू होगा। नीरज का आज का लक्ष्य फाइनल में जगह बनाना होगा। जैवलिन थ्रो का मेडल मुकाबला 31 जुलाई को होगा, इसलिए भारतीय प्रशंसकों की नजरें आज उनकी क्वालिफिकेशन पर रहेंगी। एथलेटिक्स में कई बड़े मुकाबले एथलेटिक्स में भारत के कई खिलाड़ी अलग-अलग स्पर्धाओं में उतरेंगे। तेजस्विन शंकर डेकाथलॉन में कई इवेंट में हिस्सा लेंगे। वहीं सेल्वा प्रभु टी और प्रवीण चित्रावेल पुरुष ट्रिपल जंप क्वालिफिकेशन में उतरेंगे। शॉट पुट में समरदीप सिंह गिल और तजिंदरपाल सिंह तूर का फाइनल रात 11:30 बजे होगा। यह भारत के लिए प्रमुख मेडल इवेंट में से एक है। महिला डिस्कस थ्रो फाइनल में निधि रानी और सीमा उतरेंगी, जबकि महिला 5000 मीटर फाइनल में पारुल चौधरी से भी पदक की उम्मीद होगी। वेटलिफ्टिंग में दो मेडल मुकाबले वेटलिफ्टिंग में भारत के लिए दिन खास हो सकता है। मार्टिना देवी मैबाम महिला +86 किग्रा फाइनल में शाम 6:30 बजे उतरेंगी। इसके बाद लवप्रीत सिंह पुरुष +110 किग्रा फाइनल में रात 11 बजे मेडल के लिए जोर लगाएंगे। दोनों मुकाबले मेडल इवेंट हैं। साइक्लिंग में भी पदक की उम्मीद ट्रैक साइक्लिंग में भारत पुरुष टीम स्प्रिंट क्वालिफिकेशन में हिस्सा लेगा। टीम में रोजित सिंह यांगलेम, डेविड बेकहम एलकटोहचूंगो और रोनाल्डो सिंह लैटोनजाम शामिल हैं, जबकि जेम्श सिंह कैथेल्लाकपम रिजर्व हैं। क्वालिफाई करने की स्थिति में टीम रात 10:50 बजे ब्रॉन्ज और 10:55 बजे गोल्ड मेडल मुकाबले में उतर सकती है। पैरा ट्रैक साइक्लिंग में लिशा दास महिला C4-C5 4000 मीटर इंडिविजुअल परसूट में चुनौती पेश करेंगी। क्वालिफिकेशन के बाद उनके लिए ब्रॉन्ज और गोल्ड मेडल रेस का रास्ता खुल सकता है। बाउल्स में भी भारतीय खिलाड़ी एक्शन में बाउल्स में पुरुष पेयर्स सेक्शनल मुकाबले में नवनीत सिंह और दिनेश कुमार की जोड़ी बोत्सवाना के कैजर गेचे और चार्ल्स डिटेको से भिड़ेगी। यह मैच शाम 7:30 बजे होगा। महिला सिंगल्स में नयनमोनी सैकिया का मुकाबला मलेशिया की एम्मा फिरयाना सारोजी से रात 8:55 बजे होगा। भारत का पूरा Day 8 शेड्यूल एथलेटिक्स 2:47 PM — पुरुष डेकाथलॉन 100 मीटर हीट-2: तेजस्विन शंकर 2:55 PM — पुरुष जैवलिन थ्रो क्वालिफिकेशन: नीरज चोपड़ा, रोहित यादव, यश वीर सिंह 3:20 PM — पुरुष डेकाथलॉन लंबी कूद: तेजस्विन शंकर 4:55 PM — पुरुष ट्रिपल जंप क्वालिफिकेशन: सेल्वा प्रभु टी, प्रवीण चित्रावेल 5:10 PM — पुरुष डेकाथलॉन शॉट पुट ग्रुप-A: तेजस्विन शंकर 5:40 PM — पुरुष 400 मीटर सेमीफाइनल-1: विशाल टीके 11:30 PM — पुरुष शॉट पुट फाइनल: समरदीप सिंह गिल, तजिंदरपाल सिंह तूर — मेडल इवेंट 11:38 PM — पुरुष डेकाथलॉन हाई जंप ग्रुप-A: तेजस्विन शंकर 11:43 PM — पुरुष 200 मीटर सेमीफाइनल: अनिमेष कुजूर 1:10 AM, 31 जुलाई — महिला डिस्कस थ्रो फाइनल: निधि रानी, सीमा — मेडल इवेंट 1:38 AM, 31 जुलाई — पुरुष डेकाथलॉन 400 मीटर हीट-2: तेजस्विन शंकर 1:48 AM, 31 जुलाई — महिला 5000 मीटर फाइनल: पारुल चौधरी — मेडल इवेंट बाउल्स 7:30 PM — पुरुष पेयर्स: नवनीत सिंह/दिनेश कुमार बनाम कैजर गेचे/चार्ल्स डिटेको 8:55 PM — महिला सिंगल्स: नयनमोनी सैकिया बनाम एम्मा फिरयाना सारोजी पैरा ट्रैक साइक्लिंग 4:36 PM — महिला C4-C5 4000 मीटर इंडिविजुअल परसूट क्वालिफाइंग: लिशा दास 9:44 PM — ब्रॉन्ज मेडल रेस, यदि क्वालिफाई करती हैं 9:51 PM — गोल्ड मेडल रेस, यदि क्वालिफाई करती हैं ट्रैक साइक्लिंग 5:37 PM — पुरुष टीम स्प्रिंट क्वालिफाइंग: रोजित सिंह यांगलेम, डेविड बेकहम एलकटोहचूंगो, रोनाल्डो सिंह लैटोनजाम; जेम्श सिंह कैथेल्लाकपम रिजर्व 10:50 PM — ब्रॉन्ज मेडल मुकाबला, यदि क्वालिफाई करते हैं 10:55 PM — गोल्ड मेडल मुकाबला, यदि क्वालिफाई करते हैं वेटलिफ्टिंग 6:30 PM — महिला +86 किग्रा फाइनल: मार्टिना देवी मैबाम — मेडल इवेंट 11:00 PM — पुरुष +110 किग्रा फाइनल: लवप्रीत सिंह — मेडल इवेंट भारत के लिए क्यों खास है Day 8? 30 जुलाई का दिन भारतीय खेल प्रशंसकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नीरज चोपड़ा के जैवलिन अभियान के साथ-साथ एथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग और साइक्लिंग में भी पदक के मौके मौजूद हैं। हालांकि नीरज का मेडल मुकाबला आज नहीं है, लेकिन उनकी क्वालिफिकेशन पर पूरे देश की नजर रहेगी। अब देखना होगा कि भारत Day 8 को अपने मेडल टैली में कितनी बढ़ोतरी कर पाता है।  

surbhi जुलाई 30, 2026 0
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इंग्लैंड टेस्ट टीम के मुख्य कोच बनने की दौड़ में स्टीफन फ्लेमिंग सबसे आगे

लंदन, एजेंसियां। इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) के टेस्ट टीम के नए मुख्य कोच की तलाश अंतिम चरण में पहुंच गई है। पूर्व न्यूजीलैंड कप्तान और चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व मुख्य कोच स्टीफन फ्लेमिंग इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इंटरव्यू प्रक्रिया में फ्लेमिंग ने ECB अधिकारियों को प्रभावित किया है और वह नियुक्ति की दौड़ में सबसे आगे हैं।   ब्रेंडन मैकुलम की जगह संभाल सकते हैं जिम्मेदारी   रिपोर्ट के मुताबिक, इंग्लैंड ने टेस्ट और व्हाइट-बॉल क्रिकेट के लिए अलग-अलग कोचिंग संरचना अपनाने का फैसला किया है। ऐसे में ब्रेंडन मैकुलम व्हाइट-बॉल टीम के साथ बने रहेंगे, जबकि टेस्ट टीम की जिम्मेदारी फ्लेमिंग को सौंपी जा सकती है। हालांकि, ECB ने अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की है और अंतिम अनुबंध प्रक्रिया जारी है।   फ्लेमिंग का शानदार कोचिंग रिकॉर्ड   53 वर्षीय स्टीफन फ्लेमिंग दुनिया के सबसे सफल फ्रेंचाइज़ी कोचों में गिने जाते हैं। उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) को कई आईपीएल खिताब दिलाए हैं और उनकी रणनीतिक सोच की क्रिकेट जगत में काफी सराहना होती है। अंतरराष्ट्रीय टीम को कोचिंग देने का यह उनका पहला बड़ा मौका हो सकता है।   जल्द हो सकता है आधिकारिक ऐलान   यदि अनुबंध प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होती है, तो पाकिस्तान के खिलाफ अगस्त में होने वाली टेस्ट सीरीज के लिए मार्कस ट्रेस्कोथिक अंतरिम कोच की भूमिका निभा सकते हैं। वहीं, ECB को उम्मीद है कि फ्लेमिंग दक्षिण अफ्रीका दौरे से पहले टीम की कमान संभाल लेंगे।

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