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GT Bus Hit by Short Circuit After Final Loss

फाइनल हार के बाद गुजरात टाइटंस पर टूटा दोहरा संकट, होटल लौटते समय टीम बस में हुआ शॉर्ट सर्किट

surbhi जून 1, 2026 0
Gujarat Titans team bus suffers short circuit after IPL final defeat in Ahmedabad
Gujarat Titans Bus Short Circuit After IPL Final

आईपीएल फाइनल में हार का दर्द झेल रही Gujarat Titans के लिए 31 मई की रात और भी मुश्किल साबित हुई। अहमदाबाद में खेले गए खिताबी मुकाबले में ट्रॉफी से चूकने के बाद जब टीम होटल लौट रही थी, तभी खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को लेकर जा रही बस में अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया। घटना के बाद कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन राहत की बात यह रही कि सभी खिलाड़ियों और स्टाफ को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

सूत्रों के अनुसार, बस में तकनीकी खराबी के चलते शॉर्ट सर्किट की स्थिति बनी। घटना के तुरंत बाद सुरक्षा और प्रबंधन टीम सक्रिय हो गई और किसी भी बड़े हादसे से पहले बस को खाली करा लिया गया। इस वजह से किसी खिलाड़ी या स्टाफ सदस्य को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।

अहमदाबाद में टूटा गुजरात का चैंपियन बनने का सपना

यह घटना ऐसे समय हुई जब गुजरात टाइटंस पहले ही फाइनल में मिली हार से निराश थी। अहमदाबाद के Narendra Modi Stadium में खेले गए खिताबी मुकाबले में Royal Challengers Bengaluru ने गुजरात को 5 विकेट से हराकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली।

पहले बल्लेबाजी करते हुए गुजरात टाइटंस की पूरी टीम 155 रन ही बना सकी। मध्यक्रम में Washington Sundar ने संघर्षपूर्ण पारी खेलकर टीम को संभालने की कोशिश की, लेकिन अन्य बल्लेबाज बड़ी साझेदारी बनाने में नाकाम रहे। आरसीबी के गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाए रखा, जिसका असर गुजरात की बल्लेबाजी पर साफ दिखाई दिया।

विराट कोहली ने खेली मैच जिताऊ पारी

156 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी आरसीबी की शुरुआत अच्छी नहीं रही, लेकिन अनुभवी बल्लेबाज Virat Kohli ने एक बार फिर बड़े मंच पर अपनी क्लास दिखाई। उन्होंने 42 गेंदों में नाबाद 75 रन बनाए, जिसमें 9 चौके और 3 छक्के शामिल रहे।

कोहली की शानदार पारी की बदौलत आरसीबी ने लक्ष्य हासिल कर लिया और चैंपियन बनने का सपना पूरा किया। दूसरी ओर, गुजरात टाइटंस को अपने घरेलू मैदान पर हार का सामना करना पड़ा, जिससे टीम और उसके प्रशंसकों की निराशा और बढ़ गई।

फाइनल में हार और उसके कुछ ही देर बाद टीम बस में हुए शॉर्ट सर्किट की घटना ने गुजरात टाइटंस के लिए इस रात को बेहद यादगार, लेकिन निराशाजनक बना दिया। हालांकि सबसे बड़ी राहत यही रही कि सभी खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ पूरी तरह सुरक्षित हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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IND vs ZIM 3rd T20: भारत ने जीता टॉस, पहले बल्लेबाजी का फैसला; प्लेइंग XI में दो बड़े बदलाव

हरारे, एजेंसियां। भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज के तीसरे और अंतिम मुकाबले में भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है। पहले दोनों मैच जीतकर सीरीज पर कब्जा जमा चुकी टीम इंडिया अब क्लीन स्वीप के इरादे से मैदान में उतरी है।   टीम इंडिया में दो बदलाव   भारतीय टीम ने तीसरे टी20 के लिए अपनी प्लेइंग इलेवन में दो बदलाव किए हैं। दूसरे टी20 में चोटिल हुए प्रिंस यादव की जगह अशोक शर्मा को मौका दिया गया है। वहीं शिवम दुबे को आराम देते हुए उनकी जगह सूर्यांश शेडगे को अंतिम एकादश में शामिल किया गया है। दोनों खिलाड़ियों के लिए यह मुकाबला अपनी छाप छोड़ने का अच्छा अवसर माना जा रहा है।   क्लीन स्वीप पर भारत की नजर   श्रेयस अय्यर की अगुआई में भारतीय टीम शानदार लय में है। बल्लेबाजी में अभिषेक शर्मा, ईशान किशन और तिलक वर्मा से एक बार फिर बड़ी पारी की उम्मीद होगी, जबकि गेंदबाजी में अशोक शर्मा पर सभी की नजर रहेगी। भारत की कोशिश लगातार तीसरी जीत दर्ज कर सीरीज 3-0 से अपने नाम करने की होगी।   जिम्बाब्वे सम्मान बचाने उतरा मैदान में   सीरीज गंवा चुकी जिम्बाब्वे की टीम अंतिम मुकाबले में जीत दर्ज कर सम्मान बचाने की कोशिश करेगी। कप्तान सिकंदर रज़ा की अगुआई में मेजबान टीम भारत के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन कर सीरीज का समापन जीत के साथ करना चाहेगी।

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भारत-जिम्बाब्वे तीसरा टी20 आज, क्लीन स्वीप के इरादे से उतरेगी टीम इंडिया

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यश ठाकुर ने भारत के लिए किया टी20 अंतरराष्ट्रीय डेब्यू, दूसरे मैच में शानदार गेंदबाजी से छोड़ी छाप

हरारे, एजेंसियां। तेज गेंदबाज यश ठाकुर ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में भारत के लिए अपना टी20 अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। 27 वर्षीय विदर्भ के इस तेज गेंदबाज को भारत की प्लेइंग इलेवन में मौका मिला और उन्होंने अपने पहले ही अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए 4 ओवर में 30 रन देकर 2 विकेट हासिल किए। उनकी गेंदबाजी ने भारत की 90 रन की बड़ी जीत और सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त में अहम भूमिका निभाई।   घरेलू क्रिकेट और IPL में शानदार प्रदर्शन का मिला इनाम   यश ठाकुर लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में विदर्भ और इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान खींच रहे थे। विकेट लेने की उनकी क्षमता और डेथ ओवरों में सटीक गेंदबाजी के कारण उन्हें जिम्बाब्वे दौरे के लिए पहली बार भारतीय टीम में शामिल किया गया था। दूसरे टी20 में डेब्यू कैप मिलने के साथ ही उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का सपना पूरा हो गया।   डेब्यू मैच में दो अहम विकेट   यश ठाकुर ने अपने पहले ही मैच में दबाव के बीच संयमित गेंदबाजी की। उन्होंने 4 ओवर में 30 रन देकर 2 विकेट लिए और जिम्बाब्वे की पारी को समेटने में अहम भूमिका निभाई। कप्तान श्रेयस अय्यर और टीम प्रबंधन ने भी उनके प्रदर्शन की सराहना की। भारत ने इस मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए 219/5 का स्कोर बनाया और फिर जिम्बाब्वे को 129 रन पर समेटकर 90 रन से जीत दर्ज की।   तीसरे टी20 में भी मिलेगी जिम्मेदारी   दूसरे मैच में प्रभावशाली शुरुआत के बाद यश ठाकुर के तीसरे और अंतिम टी20 में भी भारतीय टीम का हिस्सा बने रहने की संभावना है। तेज गेंदबाज प्रिंस यादव की फिटनेस पर संशय के बीच टीम प्रबंधन यश ठाकुर पर भरोसा बनाए रख सकता है। यदि उन्हें लगातार मौके मिलते हैं तो वह भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण में अपनी जगह मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा सकते हैं।

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IND vs ZIM: दूसरे टी20 में जिम्बाब्वे ने जीता टॉस, भारत पहले करेगा बल्लेबाजी

हरारे, एजेंसियां। भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला शनिवार को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जा रहा है। मैच में जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, जिसके बाद भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी के लिए मैदान पर उतरेगी।   सीरीज पर कब्जा जमाने के इरादे से उतरी टीम इंडिया   पहला टी20 मुकाबला जीतकर 1-0 की बढ़त बना चुकी भारतीय टीम के पास आज सीरीज अपने नाम करने का सुनहरा मौका है। कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई में टीम इंडिया जीत की लय बरकरार रखना चाहेगी, जबकि मेजबान जिम्बाब्वे की नजर वापसी कर सीरीज 1-1 से बराबर करने पर है। IND Vटॉस के बाद सिकंदर रजा ने कहा कि शुरुआती ओवरों में पिच से गेंदबाजों को मदद मिलने की उम्मीद है, इसलिए पहले गेंदबाजी का फैसला लिया गया। वहीं श्रेयस अय्यर ने कहा कि टीम किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार है और बड़ा स्कोर खड़ा करने का प्रयास करेगी।   दोनों टीमों के लिए अहम मुकाबला   भारतीय बल्लेबाजों पर अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में बदलने की जिम्मेदारी होगी, जबकि जिम्बाब्वे के गेंदबाज शुरुआती विकेट लेकर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे। यदि भारत यह मुकाबला जीतता है तो तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर लेगा, वहीं जिम्बाब्वे के लिए सीरीज में बने रहने के लिए जीत दर्ज करना बेहद जरूरी होगा। क्रिकेट प्रशंसकों की नजर अब इस रोमांचक मुकाबले पर टिकी है, जहां दोनों टीमें जीत के इरादे से मैदान में उतरी हैं।

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