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FIFA World Cup 2026 Broadcast Faces Uncertainty in India

FIFA World Cup 2026 पर संकट? भारत में अभी तक नहीं बिके ब्रॉडकास्ट राइट्स, फैंस के सामने लाइव टेलीकास्ट का सवाल

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
FIFA World Cup 2026 stadium scene with broadcast uncertainty news concept and football fans watching globally
FIFA World Cup 2026 Broadcast Rights Issue India

दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट FIFA World Cup 2026 को लेकर भारत में अनिश्चितता बढ़ गई है। टूर्नामेंट शुरू होने में महज दो महीने बचे हैं, लेकिन अभी तक भारत में इसके मीडिया ब्रॉडकास्ट राइट्स नहीं बिके हैं। ऐसे में भारतीय फुटबॉल फैंस के सामने लाइव मैच देखने को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

क्यों नहीं मिल रहे खरीदार?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, FIFA ने शुरुआत में 2026 और 2030 वर्ल्ड कप के लिए संयुक्त मीडिया राइट्स की कीमत करीब 100 मिलियन डॉलर रखी थी। बाद में इसे घटाकर 35 मिलियन डॉलर तक किया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई बड़ा ब्रॉडकास्टर आगे नहीं आया।

क्रिकेट का दबदबा बना बड़ी वजह

भारत में खेल प्रसारण बाजार में Board of Control for Cricket in India (BCCI) और International Cricket Council (ICC) के क्रिकेट इवेंट्स का दबदबा है।
ब्रॉडकास्टर्स पहले ही क्रिकेट के राइट्स पर भारी निवेश कर चुके हैं, जिससे उनके पास फुटबॉल जैसे महंगे टूर्नामेंट खरीदने के लिए बजट सीमित हो गया है।

कमाई का गणित भी बना अड़चन

क्रिकेट के मुकाबले फुटबॉल मैचों में विज्ञापन के लिए कम ब्रेक मिलते हैं, जिससे ब्रॉडकास्टर्स को कम रेवेन्यू मिलता है। यही वजह है कि कंपनियां इस डील को फायदे का सौदा नहीं मान रही हैं।

टाइमिंग भी बड़ा फैक्टर

इस बार वर्ल्ड कप अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में खेला जाएगा। ऐसे में भारत में मैच देर रात या सुबह तड़के प्रसारित होंगे, जिससे टीवी व्यूअरशिप और एड रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है।

मार्केट में कम हुआ कॉम्पिटिशन

Viacom18 और Star India के मर्जर के बाद JioStar के रूप में बाजार में खिलाड़ियों की संख्या कम हो गई है।
Sony Sports, Eurosport और Fan Code जैसे प्लेटफॉर्म भी इस महंगे सौदे से दूरी बनाए हुए हैं।

क्या भारत में नहीं दिखेगा वर्ल्ड कप?

फिलहाल स्थिति साफ नहीं है, लेकिन अगर जल्द कोई डील नहीं होती, तो भारत में FIFA World Cup 2026 का लाइव टेलीकास्ट मुश्किल हो सकता है। हालांकि, टूर्नामेंट के नजदीक आते-आते आखिरी समय में कोई समझौता हो सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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IND vs AFG: बारिश ने बिगाड़ा पहले वनडे का शेड्यूल, धर्मशाला में टॉस टला

धर्मशाला, एजेंसियां। भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला शनिवार को धर्मशाला के एचपीसीए स्टेडियम में खेला जाना था, लेकिन मौसम ने शुरुआत में ही खलल डाल दिया। लगातार हो रही बारिश के कारण निर्धारित समय पर टॉस नहीं हो सका और मैच की शुरुआत में देरी हुई। पिच को पूरी तरह कवर्स से ढक दिया गया, जबकि दोनों टीमों के खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम में ही इंतजार करते रहे। मौसम विभाग की ओर से क्षेत्र में बारिश और गरज-चमक की संभावना पहले ही जताई गई थी।   बारिश ने बढ़ाई खिलाड़ियों और प्रशंसकों की चिंता धर्मशाला में पहले हल्की बारिश हुई, लेकिन दोपहर तक बारिश तेज हो गई, जिससे मुकाबला शुरू होने की उम्मीदों को झटका लगा। स्टेडियम में मौजूद दर्शक और करोड़ों क्रिकेट प्रशंसक मौसम साफ होने का इंतजार करते रहे। यदि बारिश लंबे समय तक जारी रहती है तो मैच के ओवरों में कटौती या मुकाबला रद्द होने की स्थिति भी बन सकती है। फिलहाल मैच अधिकारियों की नजर लगातार मौसम की स्थिति पर बनी हुई है।   वनडे विश्व कप 2027 की तैयारी के लिहाज से अहम सीरीज यह तीन मैचों की वनडे सीरीज भारत के लिए 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कप्तान शुभमन गिल की अगुआई में टीम इंडिया नए संयोजन के साथ मैदान पर उतरने की तैयारी में है। विराट कोहली की अनुपस्थिति में बल्लेबाजी क्रम में बदलाव की संभावना जताई जा रही है, जबकि तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी के प्रदर्शन पर भी चयनकर्ताओं की विशेष नजर रहेगी। उनसे बल्ले के साथ-साथ 10 ओवर की प्रभावी गेंदबाजी की भी उम्मीद की जा रही है।   मौसम साफ होने का इंतजार फिलहाल सभी की निगाहें धर्मशाला के मौसम पर टिकी हैं। जैसे ही बारिश थमेगी और मैदान खेलने योग्य होगा, अंपायर निरीक्षण के बाद टॉस और मैच शुरू करने का फैसला लेंगे। क्रिकेट प्रेमियों को उम्मीद है कि मौसम जल्द साफ होगा और भारत-अफगानिस्तान के बीच रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा।

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मेसी और रोनाल्डो का मुकाबला देखने को दुनिया है उत्सुक

रांची। दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल फुटबॉल की बात हो और लियोनेल मेसी तथा क्रिस्टियानो रोनाल्डो का जिक्र न हो, ऐसा शायद ही कभी होता है। एक बार फिर दुनिया की निगाहें इन दोनों महान खिलाड़ियों पर टिकी हैं, क्योंकि FIFA World Cup 2026 का आगाज 11 जून की रात मेक्सिको सिटी के ऐतिहासिक एस्टाडियो एज्टेका स्टेडियम में भव्य उद्घाटन समारोह के साथ हो गया। मेक्सिको, अमेरिका और कनाडा की संयुक्त मेजबानी में आयोजित इस विश्व कप की शुरुआत रंग, रोशनी, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई। समारोह में ग्लोबल पॉप स्टार शकीरा और नाइजीरियाई गायक बर्ना बॉय ने आधिकारिक फीफा गीत "Dai Dai" प्रस्तुत कर दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंचा दिया। इसके अलावा जे बाल्विन, अलेजांद्रो फर्नांडीज़, बेलिंडा और माना सहित कई कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से समारोह को यादगार बना दिया। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने विश्व कप ट्रॉफी के साथ टूर्नामेंट के उद्घाटन की औपचारिक घोषणा की। कई दिग्गज खिलाड़ियों का आखिरी विश्व कप हो सकता है FIFA World Cup 2026 कई मायनों में खास माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यह कई दिग्गज खिलाड़ियों का अंतिम विश्व कप हो सकता है। इस सूची में ब्राजील के नेमार, अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी और पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसे दिग्गज शामिल हैं। ऐसे में फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह टूर्नामेंट भावनात्मक रूप से भी बेहद खास रहने वाला है।   मेसी के पास इतिहास रचने का सुनहरा अवसर 38 वर्षीय अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी 2022 में अपनी टीम को विश्व चैंपियन बनाने के बाद एक बार फिर मैदान में उतर रहे हैं। आठ बार बैलन डी'ओर जीत चुके मेसी के पास लगातार दूसरा विश्व कप जीतकर नया इतिहास रचने का मौका है। यदि अर्जेंटीना खिताब बचाने में सफल रहता है, तो वह 1962 के बाद लगातार दो विश्व कप जीतने वाली पहली टीम बन जाएगी। इसलिए यह टूर्नामेंट मेसी के करियर के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक माना जा रहा है।   रोनाल्डो के सामने अधूरे सपने को पूरा करने की चुनौती दूसरी ओर, 41 वर्षीय पुर्तगाली स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो के लिए भी यह विश्व कप बेहद अहम है। दो दशक से अधिक लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्होंने लगभग हर बड़ा खिताब अपने नाम किया है, लेकिन विश्व कप ट्रॉफी अब भी उनकी सबसे बड़ी अधूरी उपलब्धि है। ऐसे में यह टूर्नामेंट उनके लिए अपने करियर के सबसे बड़े सपने को पूरा करने का अंतिम अवसर माना जा रहा है। दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसक इस बात को लेकर उत्साहित हैं कि क्या मेसी अपना खिताब बचाने में सफल होंगे या रोनाल्डो पहली बार विश्व कप जीतकर अपने शानदार करियर को ऐतिहासिक विदाई देंगे।   भारतीय दर्शक यहां देख सकेंगे लाइव मुकाबले भारत में फुटबॉल प्रशंसक FIFA World Cup 2026 के मुकाबलों का सीधा प्रसारण जी नेटवर्क के टीवी चैनलों और जी5 (ZEE5) पर देख सकेंगे। समय क्षेत्र में अंतर होने के कारण अधिकांश मुकाबले भारतीय समयानुसार देर रात या तड़के सुबह खेले जाएंगे। ऐसे में फुटबॉल प्रेमियों को रोमांचक मुकाबलों का आनंद लेने के लिए देर रात तक जागना पड़ सकता है।

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नई दिल्ली: फीफा विश्व कप 2026 के शुरू होने में अब 24 घंटे से भी कम समय बचा है। इस बार 48 टीमें टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही हैं। खास बात यह है कि विश्व कप में कुल सात भाइयों की जोड़ियां मैदान पर नजर आएंगी। इनमें से तीन जोड़ियां एक ही देश के लिए खेलेंगी, जबकि चार ऐसी जोड़ियां हैं जिनके सदस्य अलग-अलग देशों का प्रतिनिधित्व करेंगे। एक ही देश के लिए खेलने वाले भाई फ्रांस के लिए थियो हर्नांडेज और लुकास हर्नांडेज कुराकाओ के लिए जुनिन्हो बाकुना और लिएंड्रो बाकुना काबो वर्डे के लिए डेरॉय डुआर्टे और लारोस डुआर्टे वहीं नीदरलैंड्स के जुड़वां भाई ज्यूरिएन टिम्बर और क्विंटन टिम्बर भी साथ खेल सकते थे, लेकिन चोट के कारण ज्यूरिएन टिम्बर टूर्नामेंट से बाहर हो गए। अलग-अलग देशों के लिए खेलने वाली 4 भाइयों की जोड़ियां ब्रायन ब्रॉबी और डेरिक लुकासेन 24 वर्षीय स्ट्राइकर ब्रायन ब्रॉबी नीदरलैंड्स का प्रतिनिधित्व करेंगे, जबकि उनके बड़े भाई और 30 वर्षीय डिफेंडर डेरिक लुकासेन घाना की टीम का हिस्सा हैं। दोनों के माता-पिता मूल रूप से घाना से हैं। जॉन साउटार और हैरी साउटार दोनों भाइयों का जन्म स्कॉटलैंड में हुआ, लेकिन उनकी मां ऑस्ट्रेलिया से थीं। जॉन साउटार स्कॉटलैंड के लिए खेलेंगे, जबकि हैरी साउटार ऑस्ट्रेलिया की टीम का हिस्सा हैं। निको विलियम्स और इनाकी विलियम्स स्पेन के स्टार विंगर निको विलियम्स विश्व कप में स्पेन का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनके बड़े भाई इनाकी विलियम्स पहले स्पेन के लिए खेल चुके हैं, लेकिन 2022 से वह घाना की राष्ट्रीय टीम के लिए खेल रहे हैं। दोनों भाई क्लब स्तर पर एथलेटिक बिलबाओ के लिए खेलते हैं। डेसिरे डौए और गुएला डौए फ्रांस के युवा स्टार डेसिरे डौए को विश्व कप टीम में जगह मिली है। उनके बड़े भाई गुएला डौए आइवरी कोस्ट का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनके पिता आइवरी कोस्ट से और मां फ्रांस से हैं, जिसके कारण दोनों भाइयों के पास दोनों देशों की नागरिकता है। फीफा विश्व कप 2026 में इन भाइयों की मौजूदगी टूर्नामेंट को और भी खास बनाने वाली है। फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि पारिवारिक रिश्तों के बावजूद ये खिलाड़ी अलग-अलग देशों के लिए किस तरह प्रदर्शन करते हैं।  

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