नई रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple इस बार अपने पारंपरिक iPhone लॉन्च प्लान में बड़ा बदलाव कर सकती है। दावा किया जा रहा है कि कंपनी इस साल रेगुलर iPhone 18 लॉन्च नहीं करेगी। इसके बजाय यूजर्स को बेस मॉडल के लिए 2027 तक इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max तय समय पर सितंबर में लॉन्च किए जा सकते हैं।
टेक इंडस्ट्री में चर्चा है कि कंपनी अब चरणबद्ध लॉन्च रणनीति पर काम कर रही है, ताकि पुराने मॉडल्स की बिक्री लंबे समय तक मजबूत बनी रहे और नए फोल्डेबल iPhone को भी बेहतर मार्केट स्पेस मिल सके।
रिपोर्ट्स के अनुसार रेगुलर iPhone 18 अब स्प्रिंग 2027 में लॉन्च हो सकता है। इसे कथित तौर पर iPhone 18e और iPhone Air 2 के साथ पेश किया जा सकता है।
टिप्स्टर “Fixed Focus Digital” के मुताबिक यह Apple की नई मार्केट स्ट्रैटेजी का हिस्सा हो सकता है। कंपनी चाहती है कि iPhone 17 सीरीज ज्यादा समय तक बाजार में चर्चा में बनी रहे। इससे कंपनी को प्रोडक्शन कॉस्ट कंट्रोल करने और मार्केट शेयर मजबूत रखने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Apple इस साल अपना पहला फोल्डेबल iPhone लॉन्च कर सकती है, जिसे फिलहाल iPhone Ultra नाम से जोड़ा जा रहा है।
अगर कंपनी फोल्डेबल डिवाइस लॉन्च करती है, तो उसका फोकस उसी पर ज्यादा रह सकता है। ऐसे में Apple एक साथ बहुत ज्यादा मॉडल लॉन्च कर यूजर्स को कन्फ्यूज नहीं करना चाहती। माना जा रहा है कि इसी वजह से बेस iPhone 18 को बाद में लॉन्च करने की तैयारी की जा रही है।
कुछ रिपोर्ट्स में ग्लोबल सप्लाई चेन को भी इस फैसले की अहम वजह बताया गया है। कहा जा रहा है कि Apple iPhone 17 की प्रोडक्शन लाइफ बढ़ाना चाहती है ताकि मिड और प्रीमियम सेगमेंट में इसकी बिक्री लंबे समय तक मजबूत बनी रहे।
टेक वेबसाइट्स के मुताबिक कंपनी इस अतिरिक्त समय का इस्तेमाल बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क और मार्केट पकड़ मजबूत करने में कर सकती है। हालांकि कुछ लीक्स में यह भी कहा गया है कि बेस iPhone 18 में कुछ कम प्रीमियम कंपोनेंट्स देखने को मिल सकते हैं।
रिसर्च फर्म्स की रिपोर्ट्स के अनुसार iPhone 17 2026 की पहली तिमाही में दुनिया के सबसे ज्यादा बिकने वाले स्मार्टफोन्स में शामिल रहा। वहीं iPhone 17 Pro और iPhone 17 Pro Max की बिक्री भी काफी मजबूत रही।
ऐसे में माना जा रहा है कि Apple फिलहाल iPhone 17 सीरीज की लोकप्रियता का पूरा फायदा उठाना चाहती है और नए बेस मॉडल को जल्दी लॉन्च करने के बजाय मौजूदा डिवाइसेज की बिक्री को और समय देना चाहती है।
अगर ये रिपोर्ट्स सही साबित होती हैं, तो यह पहली बार होगा जब Apple अपने पारंपरिक सितंबर लॉन्च साइकल को तोड़ेगी। इससे पूरी स्मार्टफोन इंडस्ट्री पर असर पड़ सकता है। भविष्य में दूसरी कंपनियां भी फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स को अलग-अलग चरणों में लॉन्च करने की रणनीति अपना सकती हैं।
हालांकि फिलहाल Apple ने इन रिपोर्ट्स पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन लगातार सामने आ रही लीक्स और रिपोर्ट्स ने टेक जगत में चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। Google अपने बड़े हार्डवेयर इवेंट में Pixel 11 सीरीज के साथ Pixel Watch 5 भी पेश करने की तैयारी में है। कंपनी का ‘Made by Google’ इवेंट 12 अगस्त 2026 को आयोजित होगा, जिसमें नए स्मार्टफोन और वियरेबल डिवाइस पेश किए जाने की उम्मीद है। Pixel Watch 5 को लेकर लॉन्च से पहले कई जानकारियां सामने आ चुकी हैं। दो साइज में आ सकती है Pixel Watch 5 रिपोर्टों के मुताबिक Pixel Watch 5 को 41mm और 45mm के दो आकारों में पेश किया जा सकता है। इससे यूजर्स को अपनी कलाई और पसंद के हिसाब से मॉडल चुनने का विकल्प मिलेगा। डिजाइन के मामले में पिछली पीढ़ी की तुलना में बड़े बदलाव की उम्मीद कम है, लेकिन Google नए रंगों और कुछ हार्डवेयर सुधारों के साथ इसे पेश कर सकता है। Gemini AI पर रहेगा खास फोकस Pixel Watch 5 में Gemini AI के बेहतर एकीकरण की उम्मीद की जा रही है। इससे स्मार्टवॉच पर वॉयस कमांड, सवालों के जवाब और रोजमर्रा के कामों में AI की उपयोगिता बढ़ सकती है। Google अपनी Pixel डिवाइस रणनीति में AI को प्रमुखता दे रहा है और Watch 5 में भी Gemini को ज्यादा उपयोगी बनाने की तैयारी की खबरें हैं। हालांकि, लॉन्च से पहले सामने आई इन जानकारियों में से सभी फीचर्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 64GB स्टोरेज और नए स्मार्ट फीचर्स की चर्चा लीक्स के अनुसार Pixel Watch 5 में 64GB स्टोरेज मिलने की उम्मीद है। स्मार्टवॉच में Wear OS आधारित नए फीचर्स के साथ Google के AI और स्वास्थ्य संबंधी फीचर्स का बेहतर इस्तेमाल देखने को मिल सकता है। बैटरी क्षमता में बहुत बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है, लेकिन सॉफ्टवेयर और पावर मैनेजमेंट में सुधार के जरिए बैटरी बैकअप को बेहतर बनाने की कोशिश की जा सकती है। Pixel 11 सीरीज के साथ होगी बड़ी लॉन्चिंग Pixel Watch 5 की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसकी घोषणा Pixel 11, Pixel 11 Pro, Pixel 11 Pro XL और Pixel 11 Pro Fold के साथ होने की उम्मीद है। Google के 12 अगस्त के इवेंट में स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच और अन्य नए एक्सेसरीज पेश किए जा सकते हैं। फिलहाल Pixel Watch 5 की भारतीय कीमत, बिक्री की तारीख और सभी फीचर्स की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। 12 अगस्त के लॉन्च इवेंट के बाद इन जानकारियों की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।
बीजिंग, एजेंसियां। Xiaomi के सब-ब्रांड Redmi का नया फ्लैगशिप स्मार्टफोन Redmi K100 Pro Max आज यानी 11 अगस्त 2026 को चीन में लॉन्च होने जा रहा है। लॉन्च से पहले कंपनी ने फोन के डिजाइन और कई प्रमुख फीचर्स की जानकारी साझा कर दी है। फोन में बड़ा हाई-रिफ्रेश-रेट OLED डिस्प्ले, 200MP कैमरा और बड़ी बैटरी जैसे फीचर्स मिलने वाले हैं। 185Hz OLED डिस्प्ले से लैस होगा फोन Redmi K100 Pro Max में 6.9 इंच का OLED डिस्प्ले मिलने की जानकारी सामने आई है। डिस्प्ले का रिफ्रेश रेट 185Hz बताया गया है, जिससे गेमिंग और स्क्रॉलिंग के दौरान काफी स्मूद अनुभव मिलने की उम्मीद है। फोन को प्रीमियम डिजाइन और अलग-अलग कलर ऑप्शन के साथ पेश किया जा रहा है। 200MP कैमरा और दमदार प्रोसेसर फोटोग्राफी के लिए स्मार्टफोन में 200MP का मुख्य कैमरा दिया जाएगा। इसके साथ 5x पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा मिलने की जानकारी भी सामने आई है। परफॉर्मेंस के लिए फोन में Qualcomm का Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर दिया जाएगा। 9,070mAh की बड़ी बैटरी Redmi K100 Pro Max की सबसे बड़ी खासियतों में इसकी बैटरी भी शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार फोन में 9,070mAh की बैटरी मिलेगी। इसके साथ 100W वायर्ड और 50W वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट दिया जाएगा। इतनी बड़ी बैटरी फ्लैगशिप फोन में लंबे बैकअप की उम्मीद बढ़ाती है। आज चीन में लॉन्च, भारत की तारीख का इंतजार Redmi K100 Pro Max का आधिकारिक लॉन्च 11 अगस्त को चीन में होगा। फिलहाल भारत में इसकी लॉन्चिंग को लेकर कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक तारीख सामने नहीं आई है। इसलिए भारतीय ग्राहकों को अभी इस फोन के भारत आने का इंतजार करना होगा। लॉन्च इवेंट के बाद फोन की कीमत, रैम-स्टोरेज वेरिएंट और बिक्री की तारीख से जुड़ी पूरी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
हैदराबाद, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Cloudflare ने AI एजेंट्स के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया नया क्लाउड-होस्टेड ब्राउजर Kitesurf लॉन्च किया है। कंपनी के मुताबिक, यह पारंपरिक ब्राउजर से अलग तरीके से काम करता है और AI एजेंट्स को कम संसाधनों में वेब पर काम करने में मदद करता है। इंसानों के लिए नहीं, AI एजेंट्स के लिए बनाया गया ब्राउजर Chrome और Firefox जैसे पारंपरिक ब्राउजर मुख्य रूप से इंसानी यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं। इनमें टैब, थीम और एक्सटेंशन जैसी सुविधाएं होती हैं। इसके विपरीत Kitesurf को ऐसे AI एजेंट्स के लिए तैयार किया गया है, जो यूजर की ओर से वेबसाइट खोलने, जानकारी जुटाने और ऑनलाइन टास्क पूरा करने जैसे काम खुद कर सकते हैं। Cloudflare के अनुसार, AI एजेंट्स के लिए ब्राउजर में कॉन्टेक्स्ट विंडो मैनेजमेंट, कम टोकन कॉस्ट, बेहतर स्केलिंग और सुरक्षा जैसी क्षमताएं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। ऐसे सिस्टम को प्रॉम्प्ट इंजेक्शन जैसे AI-केंद्रित सुरक्षा खतरों से भी निपटना पड़ता है। Chromium के मुकाबले कम CPU और मेमोरी का दावा Cloudflare के अपने टेस्ट के मुताबिक, Kitesurf ने Chromium की तुलना में 3.1 से 3.8 गुना कम CPU और 4.7 से 7 गुना कम मेमोरी का इस्तेमाल किया। कंपनी का दावा है कि इससे बड़े स्तर पर AI एजेंट्स को चलाने की लागत कम हो सकती है। हालांकि, कम संसाधन इस्तेमाल करने के बदले इसकी स्पीड थोड़ी कम है। कंपनी के परीक्षण में Kitesurf को टास्क पूरा करने में Chromium की तुलना में करीब 1.7 से 1.8 गुना अधिक समय लगा। 12 हफ्तों में तैयार किया गया Kitesurf Cloudflare के मुताबिक, Kitesurf को महज 12 हफ्तों में विकसित किया गया है। यह कंपनी के Serverless प्लेटफॉर्म Workers पर चलता है और V8 Isolates के भीतर काम करता है। फिलहाल यह Browser Run के जरिए बीटा वर्जन में उपलब्ध है। डेवलपर्स इसके जरिए हेडलेस ब्राउजर इंस्टेंस को नियंत्रित कर सकते हैं। कई ओपन-सोर्स टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल Kitesurf को तैयार करने में कई अलग-अलग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। इसमें Blitz का रेंडरिंग इंजन, Firefox का Stylo CSS पार्सर और Rust में लिखा Boa JavaScript इंजन शामिल हैं। Cloudflare ने ओपन-सोर्स हेडलेस इंजन Obscura को भी इसके शुरुआती प्रोटोटाइप के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया है। 2.15 लाख से ज्यादा वेब टेस्ट पास कंपनी के अनुसार, Kitesurf अब तक 2,15,000 से ज्यादा वेब प्लेटफॉर्म टेस्ट पास कर चुका है। यह Wikipedia, Hacker News और Cloudflare के अपने डैशबोर्ड जैसे वेब पेजों को सही तरीके से लोड करने में सक्षम है। Kitesurf को Cloudflare के AI एजेंट इकोसिस्टम का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें Agents SDK और AI Search जैसे टूल भी शामिल हैं।