भीषण गर्मी और हीटवेव के इस दौर में जहां घर से बाहर निकलना ही चुनौती बन गया है, वहीं कार से सफर करना भी अब पहले जैसा आसान नहीं रहा। तेज धूप में ड्राइविंग के दौरान न सिर्फ आपकी सेहत पर असर पड़ता है, बल्कि आपकी कार के अहम हिस्सों पर भी भारी दबाव पड़ता है। कार का केबिन मिनटों में तपने लगता है, इंजन ओवरहीट हो सकता है और टायर के फटने तक का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
गर्मियों में कार के भीतर का तापमान बेहद तेजी से बढ़ता है। पार्क की गई गाड़ी कुछ ही मिनटों में ओवन जैसी गर्म हो सकती है। इससे एसी सिस्टम पर अतिरिक्त लोड पड़ता है, इंजन ज्यादा मेहनत करता है और टायर में हवा फैलने से ब्लोआउट का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हीटवेव के दौरान ड्राइविंग को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है।
1. समझदारी से करें पार्किंग
जहां तक संभव हो, अपनी कार को छांव या कवर पार्किंग में रखें। विंडशील्ड सनशेड का उपयोग केबिन को ठंडा रखने में मदद करता है।
2. AC चालू करने से पहले करें वेंटिलेशन
कार स्टार्ट करने के बाद तुरंत एसी ऑन न करें। पहले खिड़कियां खोलकर गर्म हवा को बाहर निकलने दें।
3. AC का सही इस्तेमाल करें
एकदम से एसी को फुल कूलिंग पर सेट करने के बजाय धीरे-धीरे तापमान कम करें, इससे सिस्टम पर दबाव कम पड़ेगा।
4. इंजन के तापमान पर रखें नजर
कूलेंट लेवल नियमित रूप से चेक करें और तापमान गेज पर नजर बनाए रखें। ओवरहीटिंग के संकेत मिलते ही गाड़ी रोक दें।
5. टायर प्रेशर रखें संतुलित
गर्मी में हवा फैलने से टायर प्रेशर बढ़ सकता है। नियमित जांच से ब्लोआउट जैसी घटनाओं से बचा जा सकता है।
6. हमेशा पानी साथ रखें
डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ड्राइविंग के दौरान पर्याप्त पानी साथ रखें, खासकर लंबी यात्रा में।
7. बच्चों या पालतू जानवरों को कार में न छोड़ें
बंद कार में तापमान बहुत तेजी से बढ़ता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
8. कार के इंटीरियर को सुरक्षित रखें
लेदर सीट, डैशबोर्ड और स्टीयरिंग को कवर या सनशेड से बचाएं ताकि वे अधिक गर्म न हों।
9. चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज न करें
अगर कोई अजीब आवाज, गंध या वार्निंग लाइट दिखे तो तुरंत जांच कराएं।
10. सही समय पर करें यात्रा
सुबह या शाम के समय यात्रा करना ज्यादा सुरक्षित होता है। दोपहर में ड्राइविंग से बचें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
आज के डिजिटल दौर में WhatsApp हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग अलर्ट से लेकर निजी बातचीत तक, लगभग हर जरूरी जानकारी इसी प्लेटफॉर्म पर मौजूद रहती है। ऐसे में अगर आपका WhatsApp अकाउंट हैक हो जाए, तो यह बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। इसी को देखते हुए दिल्ली पुलिस की IFSO (Intelligence Fusion and Strategic Operations) यूनिट के जॉइंट सीपी रजनीश गुप्ता ने एक वीडियो के जरिए हैक हुए WhatsApp अकाउंट को वापस पाने का तरीका बताया है। क्यों जरूरी है ##21# कोड? दिल्ली पुलिस के अनुसार, अगर किसी हैकर ने कॉल या मैसेज फॉरवर्डिंग के जरिए आपके OTP अपने डिवाइस पर प्राप्त करने की व्यवस्था कर रखी है, तो सबसे पहले उस फॉरवर्डिंग को बंद करना जरूरी है। इसके लिए अपने फोन में: ##21# डायल करने की सलाह दी गई है। यह USSD कोड कई मामलों में सक्रिय कॉल फॉरवर्डिंग सेटिंग्स को बंद करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि अलग-अलग ऑपरेटर और डिवाइस के अनुसार इसका प्रभाव अलग हो सकता है। इसलिए इसे सुरक्षा के अतिरिक्त कदम के रूप में देखा जाना चाहिए। WhatsApp अकाउंट वापस पाने के लिए अपनाएं ये स्टेप्स 1. सबसे पहले ##21# डायल करें इससे संभावित कॉल या मैसेज फॉरवर्डिंग बंद हो सकती है और OTP गलत व्यक्ति तक पहुंचने का खतरा कम हो सकता है। 2. Meta के शिकायत फॉर्म पर जाएं WhatsApp सपोर्ट फॉर्म खोलें। 3. "Are you a law enforcement officer?" पर "No" चुनें 4. अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें देश के कोड के साथ अपना WhatsApp नंबर दो बार भरें। 5. "My account has been hacked" विकल्प चुनें 6. समस्या का विवरण लिखें बताएं कि आपका अकाउंट हैक हो गया है और आप लॉगिन नहीं कर पा रहे हैं। 7. अपना नाम और ईमेल आईडी भरें 8. Electronic Signature में अपना नाम दर्ज कर फॉर्म सबमिट करें इसके बाद क्या होगा? फॉर्म सबमिट करने के बाद Meta आपकी शिकायत की समीक्षा करेगा। सत्यापन पूरा होने पर हैकर के डिवाइस से आपका WhatsApp अकाउंट लॉगआउट किया जा सकता है। इसके बाद आप OTP की मदद से दोबारा अपने अकाउंट में लॉगिन कर सकेंगे। Facebook और Instagram के लिए भी उपलब्ध है सुविधा अगर आपका Facebook या Instagram अकाउंट हैक हो गया है, तो Meta इन प्लेटफॉर्म्स के लिए भी अलग रिकवरी फॉर्म उपलब्ध कराता है। सुरक्षा के लिए इन बातों का रखें ध्यान WhatsApp में टू-स्टेप वेरिफिकेशन जरूर ऑन करें। किसी के साथ OTP साझा न करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। संदिग्ध कॉल या मैसेज मिलने पर तुरंत सतर्क हो जाएं। अपने ईमेल अकाउंट की सुरक्षा भी मजबूत रखें।
स्पेसएक्स IPO के बाद एलन मस्क की संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर के पार दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति और टेक उद्यमी Elon Musk ने एक नया इतिहास रच दिया है। स्पेसएक्स के बहुचर्चित आईपीओ (IPO) के बाद उनकी कुल संपत्ति लगभग 1.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे वे दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने की ओर बढ़ गए हैं। हालांकि अपनी रिकॉर्ड संपत्ति को लेकर चर्चा के बीच मस्क का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने दावा किया है कि भविष्य में ऐसा समय आ सकता है जब पैसे की मौजूदा अहमियत खत्म हो जाएगी। AI और रोबोट बदल देंगे दुनिया की अर्थव्यवस्था 2026 एबंडेंस समिट के दौरान बातचीत में मस्क ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत रोबोटिक्स मानव समाज को एक ऐसे दौर में ले जा सकते हैं, जहां वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन इतना अधिक होगा कि पारंपरिक आर्थिक मॉडल बदल जाएंगे। मस्क के अनुसार, AI आधारित मशीनें इतनी बड़ी मात्रा में काम कर सकेंगी कि इंसानों के लिए पारंपरिक नौकरियों की जरूरत कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में लोगों को केवल न्यूनतम आय नहीं, बल्कि "यूनिवर्सल हाई इनकम" (UHI) जैसी व्यवस्था मिल सकती है। “पैसे की प्रासंगिकता खत्म हो जाएगी” बातचीत के दौरान मस्क ने कहा कि भविष्य में पैसे का महत्व धीरे-धीरे कम हो सकता है। उनका मानना है कि जब AI और रोबोट लगभग हर वस्तु और सेवा को सस्ती और आसानी से उपलब्ध करा देंगे, तब लोगों की जीवनशैली बेहतर होगी और आर्थिक संसाधनों का वितरण अलग तरीके से होगा। मस्क के इस बयान पर मंच पर मौजूद उद्यमी Peter Diamandis ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि जैसे ही आप ट्रिलियनेयर बन रहे हैं, उसी समय पैसा कम महत्वपूर्ण हो रहा है? इस पर मस्क ने हंसते हुए जवाब दिया, "हां, लगभग ऐसा ही है।" यूनिवर्सल हाई इनकम क्या है? मस्क ने यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) से आगे बढ़कर यूनिवर्सल हाई इनकम (UHI) की अवधारणा पेश की। उनका कहना है कि AI के कारण उत्पादन लागत बेहद कम हो जाएगी और लोगों को केवल बुनियादी जरूरतें पूरी करने के बजाय उच्च जीवन स्तर का लाभ मिल सकेगा। इस मॉडल में स्वास्थ्य सेवाएं, आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं पहले की तुलना में अधिक सुलभ और सस्ती हो सकती हैं। भविष्य में सबसे मूल्यवान क्या होगा? मस्क के अनुसार भविष्य की अर्थव्यवस्था में केवल मुद्रा नहीं, बल्कि ऊर्जा और भौतिक संसाधन सबसे महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक AI सिस्टम डॉलर या अन्य मुद्राओं की परवाह नहीं करेंगे। उनके लिए असली महत्व बिजली, कंप्यूटिंग क्षमता, फैक्ट्रियों और कच्चे माल जैसे संसाधनों का होगा। सरल शब्दों में कहें तो भविष्य में आर्थिक ताकत का निर्धारण बैंक बैलेंस से ज्यादा ऊर्जा उत्पादन, तकनीकी क्षमता और संसाधनों पर नियंत्रण से हो सकता है। विशेषज्ञों के बीच बहस तेज मस्क के इस दृष्टिकोण को लेकर विशेषज्ञों के बीच बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे तकनीकी प्रगति की स्वाभाविक दिशा मानते हैं, जबकि कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पूरी तरह से "पैसारहित" अर्थव्यवस्था की कल्पना अभी काफी दूर की बात है। फिलहाल इतना तय है कि AI और रोबोटिक्स के बढ़ते प्रभाव ने भविष्य की नौकरियों, आय और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
भारतीय स्मार्टफोन बाजार में मोटोरोला और वीवो के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही है। ₹45,000 से ₹50,000 के प्रीमियम सेगमेंट में अब Motorola Edge 70 Pro+ और Vivo V70 एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। दोनों स्मार्टफोन बड़ी बैटरी, 90W फास्ट चार्जिंग और 50MP कैमरा जैसे आकर्षक फीचर्स के साथ आते हैं। हालांकि, दोनों की खूबियां अलग-अलग हैं। अगर आप इस बजट में नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि कौन सा फोन आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। डिस्प्ले और डिजाइन: Motorola का बड़ा फायदा Motorola Edge 70 Pro+ में 6.8 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट और 5,200 निट्स की पीक ब्राइटनेस के साथ आता है। दूसरी तरफ Vivo V70 में 6.59 इंच का AMOLED पैनल मिलता है, जिसमें 120Hz रिफ्रेश रेट और 5,000 निट्स ब्राइटनेस दी गई है। अगर आप गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और आउटडोर विजिबिलिटी को महत्व देते हैं, तो Motorola का डिस्प्ले ज्यादा प्रभावशाली साबित हो सकता है। वहीं, Vivo V70 का कॉम्पैक्ट डिजाइन उन यूजर्स को पसंद आएगा जो हल्का और आसानी से पकड़ में आने वाला फोन चाहते हैं। कैमरा: ZEISS बनाम पेरिस्कोप जूम Motorola Edge 70 Pro+ में 50MP Sony LYT-710 प्राइमरी कैमरा के साथ 50MP पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस मिलता है, जो 3.5x ऑप्टिकल जूम और 50x डिजिटल जूम सपोर्ट करता है। इसके अलावा सभी कैमरों से 4K 60fps वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। वहीं, Vivo V70 में ZEISS ट्यूनिंग वाला 50MP कैमरा सिस्टम दिया गया है, जो प्राकृतिक रंगों और शानदार पोर्ट्रेट फोटोग्राफी के लिए जाना जाता है। जूम फोटोग्राफी पसंद है? Motorola बेहतर विकल्प। पोर्ट्रेट और कलर साइंस महत्वपूर्ण है? Vivo V70 मजबूत दावेदार। परफॉर्मेंस और गेमिंग: Motorola को बढ़त Motorola Edge 70 Pro+ में MediaTek Dimensity 8500 Extreme प्रोसेसर और बड़ा वेपर कूलिंग सिस्टम दिया गया है, जिससे हैवी गेमिंग और मल्टीटास्किंग के दौरान बेहतर प्रदर्शन मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर Vivo V70 में Snapdragon 7 Gen 4 चिपसेट मिलता है, जो सामान्य उपयोग और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पर्याप्त है। रॉ परफॉर्मेंस के मामले में Motorola Edge 70 Pro+ थोड़ा आगे दिखाई देता है। बैटरी और चार्जिंग दोनों स्मार्टफोन में: 6,500mAh बैटरी 90W फास्ट चार्जिंग की सुविधा मिलती है। हालांकि Motorola Edge 70 Pro+ में अतिरिक्त 15W वायरलेस चार्जिंग भी दी गई है, जो इसे एक अतिरिक्त बढ़त देती है। सॉफ्टवेयर अपडेट: Vivo का फायदा Vivo V70: 4 बड़े Android अपडेट Motorola Edge 70 Pro+: 3 बड़े Android अपडेट अगर आप फोन को लंबे समय तक इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो Vivo V70 का लंबा सॉफ्टवेयर सपोर्ट आपके लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है। कौन सा फोन खरीदना चाहिए? Motorola Edge 70 Pro+ चुनें अगर: आपको बेहतर डिस्प्ले चाहिए हैवी गेमिंग करते हैं वायरलेस चार्जिंग चाहते हैं जूम कैमरा आपके लिए महत्वपूर्ण है Vivo V70 चुनें अगर: ZEISS कैमरा एक्सपीरियंस पसंद है बेहतर पोर्ट्रेट फोटोग्राफी चाहते हैं लंबा सॉफ्टवेयर सपोर्ट प्राथमिकता है कॉम्पैक्ट डिजाइन पसंद करते हैं