ऑनलाइन डेटिंग की दुनिया में बड़ा बदलाव लाने वाला लोकप्रिय ऐप Tinder अब युवा यूज़र्स, खासकर Gen Z को वापस आकर्षित करने के लिए नए फीचर्स पर बड़ा दांव लगा रहा है। कंपनी ने वीडियो स्पीड डेटिंग, इन-पर्सन इवेंट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कई नए टूल्स पेश किए हैं, जिनका उद्देश्य यूज़र्स की भागीदारी बढ़ाना और डेटिंग ऐप्स पर भरोसा मजबूत करना है।
कैलिफोर्निया के वेस्ट हॉलीवुड स्थित कंपनी ने अपने पहले “Sparks” इवेंट में इन नई योजनाओं की घोषणा की। इस दौरान Spencer Rascoff ने कहा कि भले ही हाल के समय में डेटिंग ऐप्स को लेकर थकान और आलोचनाओं की चर्चा हुई हो, लेकिन लोगों के बीच वास्तविक जुड़ाव की जरूरत पहले से ज्यादा मजबूत है।
नए फीचर्स के तहत “Video Speed Dating” नाम का विकल्प टेस्ट किया जा रहा है। इसमें फोटो-वेरिफाइड यूज़र्स तय समय पर वर्चुअल इवेंट में शामिल होकर तीन मिनट की वीडियो चैट के जरिए एक-दूसरे से बात कर सकेंगे।
इसके अलावा “Events” टैब भी शुरू किया जा रहा है, जिसके जरिए यूज़र्स पॉटरी क्लास, ट्रिविया नाइट या पिकलबॉल जैसे ऑफलाइन डेटिंग इवेंट्स से जुड़ सकेंगे। फिलहाल इसका परीक्षण लॉस एंजेलिस में किया जा रहा है।
युवा यूज़र्स की रुचि को ध्यान में रखते हुए ऐप में म्यूजिक और ज्योतिष आधारित विशेष स्वाइपिंग मोड भी जोड़े गए हैं। शुरुआती परीक्षण में पाया गया कि 22 साल से कम उम्र के हर 10 में से एक यूज़र ने म्यूजिक मोड अपनाया है, जबकि ज्योतिष प्रोफाइल्स पर महिलाओं द्वारा भेजे जाने वाले लाइक्स में करीब 20% की बढ़ोतरी हुई है।
कंपनी ने यूज़र्स की सुरक्षा और भरोसे को मजबूत करने के लिए भी नए अपडेट किए हैं। “Are You Sure?” और “Does This Bother You?” जैसे फीचर्स को अपग्रेड किया गया है, जो अपमानजनक या हानिकारक संदेशों को पहचानकर चेतावनी देते हैं। साथ ही एक नया ऑटो-ब्लर फीचर भी जोड़ा गया है, जो असम्मानजनक कंटेंट को छिपा देता है।
AI आधारित “Chemistry” फीचर यूज़र्स की रुचियों और व्यक्तित्व को समझकर बेहतर मैच सुझाने में मदद करेगा। यह फीचर सवालों के जरिए जानकारी लेता है और अनुमति मिलने पर फोन के कैमरा रोल से भी रुचियों का अंदाजा लगा सकता है। पहले इसे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में टेस्ट किया गया था, अब इसे अमेरिका और कनाडा में भी शुरू किया जा रहा है।
एक दशक पहले ऑनलाइन डेटिंग को लोकप्रिय बनाने वाला Tinder आज कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। Bumble, Hinge, Grindr और OkCupid जैसे प्लेटफॉर्म तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, जबकि कई युवा अब पारंपरिक स्वाइप-आधारित डेटिंग से अलग वास्तविक मुलाकातों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
करीब 5 करोड़ मासिक सक्रिय यूज़र्स वाले Tinder के लिए सबसे बड़ी चुनौती Gen Z को फिर से आकर्षित करना है। इसी वजह से कंपनी AI, ऑफलाइन इवेंट्स और नए इंटरएक्टिव फीचर्स के जरिए डेटिंग अनुभव को अधिक वास्तविक और दिलचस्प बनाने की कोशिश कर रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
टेक दिग्गज Google ने अपने लोकप्रिय ब्राउज़र Google Chrome में यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए दो नए फीचर्स पेश किए हैं। इस अपडेट के साथ अब Chrome यूजर्स को Vertical Tabs और बेहतर Reading Mode का विकल्प मिलेगा, जो खासतौर पर मल्टीटास्किंग और पढ़ने के अनुभव को आसान बनाएगा। Vertical Tabs से आसान होगी मल्टीटास्किंग Chrome में अब पारंपरिक ऊपर की बजाय साइड में टैब्स देखने का विकल्प मिलेगा। इस नए Vertical Tabs फीचर को यूजर्स ब्राउज़र विंडो पर राइट-क्लिक करके “Show Tabs Vertically” चुनकर एक्टिवेट कर सकते हैं। इस फीचर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यूजर्स अब टैब्स के पूरे नाम आसानी से देख पाएंगे, खासकर तब जब कई टैब्स एक साथ खुले हों। इससे टैब मैनेजमेंट आसान होगा और काम की स्पीड भी बढ़ेगी। यह फीचर Microsoft Edge और Mozilla Firefox जैसे ब्राउज़र्स की तरह काम करता है। Reading Mode हुआ और बेहतर Chrome के Reading Mode को भी अपग्रेड किया गया है। अब यूजर्स किसी भी वेबपेज को “Open in reading mode” विकल्प से फुल-पेज रीडिंग इंटरफेस में बदल सकते हैं। यह फीचर वेबपेज से सभी डिस्ट्रैक्शन हटाकर केवल टेक्स्ट पर फोकस करता है, जिससे आर्टिकल पढ़ना ज्यादा आसान और आरामदायक हो जाता है। लगातार अपडेट से Chrome हो रहा स्मार्ट हाल के महीनों में Google Chrome में कई नए फीचर्स जोड़ रहा है। हाल ही में भारत में Gemini साइड पैनल और Split View जैसे फीचर्स भी पेश किए गए थे। इन अपडेट्स का मकसद यूजर्स को ज्यादा स्मार्ट और प्रोडक्टिव ब्राउज़िंग अनुभव देना है। कुल मिलाकर, Chrome का यह नया अपडेट खासतौर पर उन यूजर्स के लिए फायदेमंद साबित होगा, जो एक साथ कई टैब्स के साथ काम करते हैं या लंबे आर्टिकल पढ़ना पसंद करते हैं।
चीन की दिग्गज टेक कंपनी Xiaomi ने भारत में Xiaomi Fan Festival 2026 की शुरुआत कर दी है। यह सेल 6 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक चलेगी, जिसमें ग्राहकों को स्मार्टफोन, टैबलेट और स्मार्ट टीवी पर शानदार डिस्काउंट का फायदा मिलेगा। इस फेस्टिवल में कंपनी अपने फ्लैगशिप और बजट दोनों सेगमेंट के प्रोडक्ट्स पर आकर्षक ऑफर्स दे रही है। फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स पर बड़ा डिस्काउंट इस सेल का सबसे बड़ा आकर्षण है: Xiaomi 17 Ultra – ₹1,29,999 (बड़ी कीमत कटौती के साथ) Xiaomi 17 – ₹10,000 तक की छूट इन स्मार्टफोन्स में लेटेस्ट Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर और प्रीमियम कैमरा सेटअप दिया गया है। Redmi सीरीज पर भी जबरदस्त ऑफर्स Redmi Note 15 5G – ₹22,999 Redmi Note 15 Pro 5G – ₹26,999 Redmi Note 15 Pro+ 5G – ₹34,999 बजट सेगमेंट में भी डील्स: Redmi A5 – ₹7,999 Redmi A4 5G – ₹9,299 Redmi 15C 5G – ₹13,999 टैबलेट्स और Smart TVs पर भी छूट टैबलेट्स में: Redmi Pad 2 – ₹1,000 तक की छूट Xiaomi Pad 8 – ऑफर प्राइस उपलब्ध Smart TVs में: 32 इंच से 65 इंच तक के मॉडल्स QLED और 4K विकल्प ₹11,999 से शुरू कीमत क्या है खास इस फेस्टिवल में? फ्लैगशिप से लेकर बजट तक हर कैटेगरी में ऑफर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सीमित समय के लिए बड़ी बचत का मौका खरीदने से पहले क्या सोचें? अगर आप नया स्मार्टफोन, टैबलेट या Smart TV खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह समय आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, खरीदारी से पहले अपने बजट और जरूरतों के हिसाब से विकल्प चुनना जरूरी है।
भीषण गर्मी के बीच एसी मार्केट में एक नई तकनीकी क्रांति देखने को मिल रही है। Haier ने भारत में अपना नया Desert Rose Super Heavy Duty AC लॉन्च किया है, जो न सिर्फ तेज कूलिंग का दावा करता है बल्कि एडवांस AI फीचर्स के साथ स्मार्ट एक्सपीरियंस भी देता है। 10 सेकंड में कूलिंग का दावा Haier के इस नए AC की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुपरसोनिक कूलिंग टेक्नोलॉजी है। कंपनी के मुताबिक, यह AC सिर्फ 10 सेकंड में कूलिंग शुरू कर देता है, जिससे तेज गर्मी में तुरंत राहत मिलती है। AI-AtmoX टेक्नोलॉजी: स्मार्ट कूलिंग का नया अनुभव इस AC में AI-AtmoX टेक्नोलॉजी दी गई है, जो तीन मुख्य पहलुओं पर काम करती है- Comfort: कमरे के तापमान के हिसाब से कूलिंग एडजस्ट Savings: बिजली की खपत को कम करना Service: बेहतर मेंटेनेंस और परफॉर्मेंस यह सिस्टम यूजर की आदतों और बाहरी मौसम को समझकर अपने आप कूलिंग सेटिंग्स बदल देता है। एडवांस AI फीचर्स AI Climate Control 2.0 AI प्री-कूलिंग (Geo-fencing के साथ) AI टारगेट कूलिंग ह्यूमन डिटेक्शन टेक्नोलॉजी ये सभी फीचर्स मिलकर कूलिंग को ज्यादा पर्सनल और एफिशिएंट बनाते हैं। बिजली की बचत पर खास फोकस Haier ने इस AC को सिर्फ पावरफुल ही नहीं बल्कि एनर्जी एफिशिएंट भी बनाया है- AI Eco Mode पावर मैनेजर (रियल-टाइम डेटा के साथ) इन फीचर्स की मदद से यूजर अपनी बिजली खपत को कंट्रोल कर सकता है। आसान मेंटेनेंस और हाई परफॉर्मेंस AI Frost Self-Clean ODU Cyclone Clean ये फीचर्स AC को साफ रखने और लंबे समय तक बेहतर परफॉर्मेंस देने में मदद करते हैं। कीमत और उपलब्धता इस प्रीमियम AC की शुरुआती कीमत ₹55,990 रखी गई है। इसे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्लेटफॉर्म से खरीदा जा सकता है। किसके लिए है यह AC? अगर आप तेज कूलिंग, स्मार्ट AI फीचर्स और बिजली की बचत-तीनों का कॉम्बिनेशन चाहते हैं, तो Haier का Desert Rose AC एक दमदार विकल्प बन सकता है।