टेक्नोलॉजी

Xiaomi Fan Festival 2026: Huge Discounts on Phones & TVs

Xiaomi Fan Festival 2026 शुरू: फ्लैगशिप स्मार्टफोन से लेकर Smart TV तक भारी छूट, Xiaomi 17 Ultra पर बड़ा ऑफर

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Xiaomi Fan Festival 2026 offers massive discounts on smartphones, tablets, and Smart TVs in India.
Xiaomi Fan Festival 2026 Deals

चीन की दिग्गज टेक कंपनी Xiaomi ने भारत में Xiaomi Fan Festival 2026 की शुरुआत कर दी है। यह सेल 6 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक चलेगी, जिसमें ग्राहकों को स्मार्टफोन, टैबलेट और स्मार्ट टीवी पर शानदार डिस्काउंट का फायदा मिलेगा।

इस फेस्टिवल में कंपनी अपने फ्लैगशिप और बजट दोनों सेगमेंट के प्रोडक्ट्स पर आकर्षक ऑफर्स दे रही है।

फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स पर बड़ा डिस्काउंट

इस सेल का सबसे बड़ा आकर्षण है:

  • Xiaomi 17 Ultra – ₹1,29,999 (बड़ी कीमत कटौती के साथ)
  • Xiaomi 17 – ₹10,000 तक की छूट

इन स्मार्टफोन्स में लेटेस्ट Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर और प्रीमियम कैमरा सेटअप दिया गया है।

Redmi सीरीज पर भी जबरदस्त ऑफर्स

  • Redmi Note 15 5G – ₹22,999
  • Redmi Note 15 Pro 5G – ₹26,999
  • Redmi Note 15 Pro+ 5G – ₹34,999

बजट सेगमेंट में भी डील्स:

  • Redmi A5 – ₹7,999
  • Redmi A4 5G – ₹9,299
  • Redmi 15C 5G – ₹13,999

टैबलेट्स और Smart TVs पर भी छूट

टैबलेट्स में:

  • Redmi Pad 2 – ₹1,000 तक की छूट
  • Xiaomi Pad 8 – ऑफर प्राइस उपलब्ध

Smart TVs में:

  • 32 इंच से 65 इंच तक के मॉडल्स
  • QLED और 4K विकल्प
  • ₹11,999 से शुरू कीमत

क्या है खास इस फेस्टिवल में?

  • फ्लैगशिप से लेकर बजट तक हर कैटेगरी में ऑफर
  • ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध
  • सीमित समय के लिए बड़ी बचत का मौका

खरीदने से पहले क्या सोचें?

अगर आप नया स्मार्टफोन, टैबलेट या Smart TV खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह समय आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।
हालांकि, खरीदारी से पहले अपने बजट और जरूरतों के हिसाब से विकल्प चुनना जरूरी है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

टेक्नोलॉजी

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Smartphone screen showing green privacy indicator dot near camera and microphone usage.
फोन की स्क्रीन पर दिखने वाला हरा डॉट क्या बताता है? जानिए आपकी प्राइवेसी से जुड़ा सच

आज के स्मार्टफोन में यूजर की सुरक्षा और प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए कई खास फीचर्स दिए गए हैं। इन्हीं में से एक है स्क्रीन के ऊपर दिखने वाला छोटा सा हरा डॉट, जिसे कई लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसका मतलब बेहद महत्वपूर्ण होता है। हरा डॉट क्या संकेत देता है? जब भी आपके फोन की स्क्रीन के ऊपर हरे रंग का डॉट दिखाई देता है, तो इसका मतलब होता है कि आपका कैमरा एक्टिव है। यानी कोई ऐप उस समय आपके कैमरे का इस्तेमाल कर रहा है। यह फीचर Android और iOS दोनों में यूजर की प्राइवेसी की सुरक्षा के लिए दिया गया है, ताकि बिना जानकारी के कैमरा इस्तेमाल न हो सके। माइक्रोफोन के लिए क्या होता है? कुछ स्मार्टफोन्स में माइक्रोफोन के उपयोग के लिए अलग संकेत मिलता है। खासकर iPhone में अगर सिर्फ माइक्रोफोन चालू है, तो ऑरेंज डॉट दिखाई देता है। वहीं हरा डॉट कैमरा या कैमरा+माइक्रोफोन दोनों के एक्टिव होने का संकेत देता है। कब हो जाना चाहिए सावधान? अगर आप कैमरा इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, फिर भी हरा डॉट दिख रहा है, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है। इसका मतलब है कि कोई ऐप बैकग्राउंड में आपके कैमरे को एक्सेस कर रहा है। ऐसी स्थिति में तुरंत: हाल ही में इस्तेमाल किए गए ऐप्स चेक करें कैमरा परमिशन देखें संदिग्ध ऐप्स को हटाएं या उनकी एक्सेस बंद करें प्राइवेसी सुरक्षित कैसे रखें? Settings में जाकर Camera और Microphone permissions को कंट्रोल करें केवल भरोसेमंद ऐप्स को ही एक्सेस दें समय-समय पर ऐप परमिशन की समीक्षा करते रहें फोन की स्क्रीन पर दिखने वाला हरा डॉट एक छोटा संकेत जरूर है, लेकिन यह आपकी डिजिटल सुरक्षा का बड़ा हिस्सा है। इसे नजरअंदाज करना आपकी प्राइवेसी के लिए जोखिम भरा हो सकता है।  

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भारतीय स्मार्टफोन बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी का दौर जारी है। अब इस सूची में Motorola का नाम भी जुड़ गया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी ने अपने कई लोकप्रिय स्मार्टफोन्स, खासकर Motorola Edge 60 Fusion, Moto G35 5G और Moto G57 Power की कीमतों में इजाफा कर दिया है। हालांकि, कंपनी की ओर से अभी तक इस बदलाव पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सबसे ज्यादा असर मिड-रेंज सेगमेंट में देखने को मिला है। Motorola Edge 60 Fusion, जिसे अप्रैल 2025 में लॉन्च किया गया था, अब सभी वेरिएंट्स में ₹2,000 तक महंगा हो गया है। इसका बेस वेरिएंट (8GB + 128GB) अब ₹20,999 की जगह ₹22,999 में मिल रहा है। वहीं, 8GB + 256GB मॉडल ₹24,999 और टॉप वेरिएंट 12GB + 256GB अब ₹26,999 तक पहुंच गया है। एंट्री-लेवल सेगमेंट की बात करें तो Moto G35 5G के 4GB + 128GB वेरिएंट की कीमत ₹11,999 से बढ़कर ₹12,499 हो गई है, यानी ₹500 की बढ़ोतरी। वहीं इसका 8GB + 128GB वर्जन अब ₹12,999 से बढ़कर ₹13,999 हो गया है, जो ₹1,000 की वृद्धि को दर्शाता है। इसी तरह Moto G57 Power के 8GB + 128GB वेरिएंट की कीमत भी ₹14,999 से बढ़कर ₹15,999 कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन कंपनियों के लिए लंबे समय तक आक्रामक (कम) कीमत बनाए रखना अब मुश्किल होता जा रहा है। ग्लोबल मार्केट में DRAM और मेमोरी कंपोनेंट्स की कीमतों में बढ़ोतरी, खासकर AI डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग के कारण, कंपनियों की लागत बढ़ा रही है। यही वजह है कि Samsung, OnePlus, Vivo और iQOO जैसे अन्य ब्रांड्स ने भी हाल के दिनों में अपने कई मॉडल्स की कीमतों में संशोधन किया है। फिलहाल, यह साफ नहीं है कि ये कीमतें स्थायी हैं या भविष्य में इनमें और बदलाव देखने को मिल सकता है। लेकिन इतना तय है कि आने वाले समय में स्मार्टफोन खरीदना थोड़ा महंगा जरूर हो सकता है।  

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Stunning Earth photos captured from space using iPhone 17 Pro Max during NASA’s Artemis II mission.
NASA ने अंतरिक्ष से शेयर की धरती की अद्भुत तस्वीरें, iPhone 17 Pro Max से हुई कैप्चर

अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने हाल ही में पृथ्वी की कुछ बेहद शानदार तस्वीरें साझा की हैं, जो अंतरिक्ष से ली गई हैं। खास बात यह है कि ये तस्वीरें किसी हाई-एंड स्पेस कैमरे से नहीं, बल्कि iPhone 17 Pro Max से कैप्चर की गई हैं। ये तस्वीरें Artemis II मिशन के दौरान Orion spacecraft से ली गईं, जब अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की ओर उड़ान पर थे। अंतरिक्ष से पृथ्वी का मनमोहक नजारा NASA द्वारा शेयर की गई तस्वीर में पृथ्वी को Orion कैप्सूल की खिड़की से देखा जा सकता है। यह दृश्य न सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी बेहद खास माना जा रहा है। जब सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने पूछा कि यह तस्वीर कैसे ली गई, तो NASA ने पुष्टि की कि इसे iPhone 17 Pro Max से शूट किया गया है। अंतरिक्ष में iPhone क्यों? कई लोगों के लिए यह हैरानी की बात थी कि NASA ने अपने मिशन में iPhone जैसे स्मार्टफोन को अनुमति दी। NASA के अनुसार: iPhone का उपयोग मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि मिशन डॉक्यूमेंटेशन और खास पलों को कैद करने के लिए किया जा रहा है अंतरिक्ष में इंटरनेट और ब्लूटूथ का इस्तेमाल नहीं होता NASA के प्रशासक जारेड इसाकमैन ने बताया कि यह कदम अंतरिक्ष यात्रियों को उनके अनुभव को दुनिया के साथ साझा करने में मदद करेगा। कड़े परीक्षण के बाद मिली मंजूरी NASA के मिशन में किसी भी डिवाइस को शामिल करना आसान नहीं होता। हार्डवेयर की सख्त जांच संभावित खतरों का आकलन बैकअप और सुरक्षा योजनाएं इसी प्रक्रिया के बाद iPhone को मिशन के लिए मंजूरी दी गई। इससे पहले NASA मुख्य रूप से Nikon D5 और GoPro Hero 11 जैसे कैमरों का उपयोग करता रहा है। iPhone 17 Pro Max कैमरा क्यों खास? iPhone 17 Pro Max की कैमरा टेक्नोलॉजी इसे अंतरिक्ष में भी उपयोगी बनाती है: 48MP ट्रिपल कैमरा सिस्टम 4x और 8x ऑप्टिकल क्वालिटी जूम हाई-रेजोल्यूशन 24MP फोटो एडवांस मैक्रो और टेलीफोटो लेंस यही वजह है कि यह स्मार्टफोन अंतरिक्ष से भी शानदार तस्वीरें लेने में सक्षम साबित हुआ। क्या बदल रही है अंतरिक्ष फोटोग्राफी? NASA का यह कदम दिखाता है कि अब पारंपरिक कैमरों के साथ-साथ आधुनिक स्मार्टफोन भी स्पेस मिशन का हिस्सा बन रहे हैं। यह अंतरिक्ष डॉक्यूमेंटेशन के तरीके में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।  

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