OpenAI के CEO Sam Altman ने हाल ही में बच्चों और टेक्नोलॉजी को लेकर अपनी सोच साझा करते हुए एक अहम संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि वह अपने बच्चे को कम उम्र में मोबाइल या iPad जैसे डिवाइस देने के बजाय वास्तविक दुनिया में खेलने के लिए प्रेरित करेंगे।
Sam Altman ने स्वीकार किया कि पहले वह बच्चों के लिए टेक्नोलॉजी को सामान्य मानते थे, लेकिन पिता बनने के बाद उनकी सोच में बड़ा बदलाव आया।
अब उनका मानना है कि:
Altman के अनुसार, बच्चों के लिए आउटडोर गतिविधियां बेहद जरूरी हैं।
उन्होंने खास तौर पर कहा कि “मिट्टी में खेलना” और प्रकृति के बीच समय बिताना बच्चों के समग्र विकास के लिए बेहद फायदेमंद है।
Altman ने यह भी स्पष्ट किया कि वह टेक्नोलॉजी के विरोधी नहीं हैं।
उनका मानना है कि:
आज कई विशेषज्ञ भी मानते हैं कि ज्यादा स्क्रीन टाइम से:
इसलिए माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखना चाहिए।
Sam Altman का यह बयान डिजिटल युग में पैरेंटिंग के बदलते नजरिए को दर्शाता है।
जहां एक तरफ टेक्नोलॉजी जरूरी है, वहीं दूसरी ओर बच्चों को असली दुनिया से जोड़ना भी उतना ही अहम है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
OpenAI के CEO Sam Altman ने हाल ही में बच्चों और टेक्नोलॉजी को लेकर अपनी सोच साझा करते हुए एक अहम संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि वह अपने बच्चे को कम उम्र में मोबाइल या iPad जैसे डिवाइस देने के बजाय वास्तविक दुनिया में खेलने के लिए प्रेरित करेंगे। पैरेंट बनने के बाद बदली सोच Sam Altman ने स्वीकार किया कि पहले वह बच्चों के लिए टेक्नोलॉजी को सामान्य मानते थे, लेकिन पिता बनने के बाद उनकी सोच में बड़ा बदलाव आया। अब उनका मानना है कि: छोटे बच्चों को ज्यादा स्क्रीन से दूर रखना चाहिए डिजिटल डिवाइस का सीमित उपयोग ही बेहतर है बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर स्क्रीन का असर पड़ता है “मिट्टी में खेलना ज्यादा जरूरी” Altman के अनुसार, बच्चों के लिए आउटडोर गतिविधियां बेहद जरूरी हैं। खुले में खेलना जिज्ञासा बढ़ाता है मोटर स्किल्स और शारीरिक विकास बेहतर होता है सामाजिक कौशल (सोशल इंटरैक्शन) मजबूत होते हैं उन्होंने खास तौर पर कहा कि “मिट्टी में खेलना” और प्रकृति के बीच समय बिताना बच्चों के समग्र विकास के लिए बेहद फायदेमंद है। टेक्नोलॉजी के खिलाफ नहीं, लेकिन संतुलन जरूरी Altman ने यह भी स्पष्ट किया कि वह टेक्नोलॉजी के विरोधी नहीं हैं। उनका मानना है कि: टेक्नोलॉजी उपयोगी है, लेकिन सीमित होना चाहिए बच्चों को iPad या मोबाइल पर निर्भर नहीं बनाना चाहिए बैलेंस्ड लाइफस्टाइल सबसे जरूरी है एक्सपर्ट्स भी दे रहे यही सलाह आज कई विशेषज्ञ भी मानते हैं कि ज्यादा स्क्रीन टाइम से: नींद पर असर पड़ता है व्यवहार में बदलाव आता है ध्यान और सीखने की क्षमता प्रभावित होती है इसलिए माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखना चाहिए। बदलती डिजिटल पेरेंटिंग का संकेत Sam Altman का यह बयान डिजिटल युग में पैरेंटिंग के बदलते नजरिए को दर्शाता है। जहां एक तरफ टेक्नोलॉजी जरूरी है, वहीं दूसरी ओर बच्चों को असली दुनिया से जोड़ना भी उतना ही अहम है।
टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि Apple अब फोल्डेबल स्मार्टफोन मार्केट में एंट्री की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी का पहला फोल्डेबल डिवाइस-iPhone Fold-एक खास 3D प्रिंटेड हिंज टेक्नोलॉजी के साथ आ सकता है, जो स्क्रीन पर दिखने वाली क्रीज़ को काफी हद तक कम कर देगा। 3D प्रिंटेड हिंज: क्या है खास? लीक्स के अनुसार, Apple अपने फोल्डेबल iPhone में 3D प्रिंटेड मटेरियल से बना हिंज इस्तेमाल कर सकता है। इससे डिस्प्ले पर बनने वाली क्रीज़ (fold line) कम दिखेगी फोन को ज्यादा स्मूद फोल्डिंग अनुभव मिलेगा डिवाइस की मजबूती और टिकाऊपन भी बढ़ेगा Apple पहले से ही 3D प्रिंटिंग का उपयोग Apple Watch के केस और iPhone Air के USB Type-C पोर्ट में कर चुका है, जिससे कंपनी की इस टेक्नोलॉजी में पकड़ साफ नजर आती है। Samsung Fold सीरीज को मिलेगी टक्कर फोल्डेबल मार्केट में फिलहाल Samsung Galaxy Z Fold series का दबदबा है। ऐसे में Apple का यह कदम सीधे तौर पर Samsung को चुनौती देगा। एडवांस डिस्प्ले टेक्नोलॉजी रिपोर्ट्स के मुताबिक, iPhone Fold में ड्यूल-लेयर ग्लास डिजाइन दिया जा सकता है- UTG (Ultra Thin Glass) + UFG (Ultra Flexible Glass) डिस्प्ले को दो पतली ग्लास लेयर के बीच रखा जाएगा इससे स्क्रीन पर दबाव कम होगा और क्रीज़ घटेगी Samsung Display से बड़े ऑर्डर खबर है कि Apple करीब 20 मिलियन फोल्डेबल डिस्प्ले पैनल Samsung Display से ऑर्डर कर सकता है। यह इशारा करता है कि कंपनी इस सेगमेंट में बड़े स्तर पर एंट्री की तैयारी कर रही है। कब हो सकता है लॉन्च? iPhone Fold को 2026 के अंत तक लॉन्च किए जाने की संभावना जताई जा रही है, संभव है कि इसे iPhone 18 Pro सीरीज के साथ पेश किया जाए। क्या बदल जाएगा स्मार्टफोन मार्केट? अगर Apple अपने फोल्डेबल डिवाइस के साथ क्रीज़ और ड्यूरेबिलिटी जैसी समस्याओं को हल करने में सफल रहता है, तो यह पूरे स्मार्टफोन मार्केट के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
टेक दिग्गज Apple ने अपने 50वें एनिवर्सरी सेलिब्रेशन के मौके पर ग्राहकों को बड़ा तोहफा दिया है। इस खास सेल के तहत कंपनी के प्रीमियम प्रोडक्ट्स-iPhone, iPad और Apple Watch-पर आकर्षक ऑफर्स दिए जा रहे हैं। खास बात यह है कि फ्लैगशिप iPhone 17 Pro Max अब भारी डिस्काउंट के साथ काफी कम कीमत में उपलब्ध हो गया है। iPhone 17 Pro Max पर जबरदस्त ऑफर 256GB स्टोरेज वाले iPhone 17 Pro Max की मूल कीमत ₹1,49,900 है, लेकिन ऑफर्स के बाद इसकी प्रभावी कीमत घटकर ₹1,02,900 रह गई है। इस कीमत में इंस्टेंट डिस्काउंट, बैंक कैशबैक और एक्सचेंज बोनस शामिल हैं। इसके अलावा iPhone 17 Pro भी ऑफर में शामिल है, जिसकी कीमत घटकर ₹89,900 तक आ गई है। iPhone 17 और iPhone Air पर भी बड़ी कटौती iPhone 17 के 256GB वेरिएंट की कीमत ऑफर्स के बाद ₹37,900 तक पहुंच गई है, जबकि 512GB मॉडल ₹57,900 में मिल रहा है। वहीं iPhone Air का 256GB वेरिएंट ₹56,900 और 512GB वेरिएंट ₹76,900 में उपलब्ध है। iPad और Apple Watch पर भी छूट Apple iPad (2025) के Wi-Fi वेरिएंट की कीमत ₹31,900 तक कम हो गई है। वहीं Apple Watch Series 11 ₹43,400 में और Apple Watch Ultra 3 ₹84,400 में मिल रही है। EMI और अन्य फायदे ग्राहकों को 24 महीने तक का नो-कॉस्ट EMI विकल्प भी दिया जा रहा है, जिसकी शुरुआत ₹3,413 प्रति माह से होती है। सीमित समय के लिए ऑफर यह सभी ऑफर्स सीमित अवधि के लिए उपलब्ध हैं और अधिकतम लाभ पाने के लिए एक्सचेंज और बैंक ऑफर्स का सही संयोजन जरूरी है।