चीनी स्मार्टफोन बाजार में जल्द दस्तक देने जा रहा Redmi K90 Max लॉन्च से पहले ही सुर्खियों में आ गया है। Xiaomi के सब-ब्रांड Redmi का यह आगामी फ्लैगशिप डिवाइस Geekbench बेंचमार्किंग साइट पर स्पॉट हुआ है, जहां इसकी परफॉर्मेंस और प्रमुख स्पेसिफिकेशंस का खुलासा हुआ है।
Geekbench लिस्टिंग के अनुसार, Redmi K90 Max में MediaTek Dimensity 9500 चिपसेट दिया जा सकता है। यह एक ऑक्टा-कोर प्रोसेसर है, जिसमें “All Big Core” आर्किटेक्चर देखने को मिलता है।
इसमें:
जैसी हाई-एंड कॉन्फ़िगरेशन दी गई है, जो इसे प्रीमियम फ्लैगशिप सेगमेंट में मजबूती से खड़ा करती है।
लिस्टिंग से यह भी सामने आया है कि यह फोन करीब 14.88GB RAM के साथ आएगा, जिसे मार्केट में 16GB RAM के रूप में पेश किया जाएगा।
इसके साथ ही यह डिवाइस लेटेस्ट Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करेगा, जिसके ऊपर Xiaomi का नया HyperOS 3 इंटरफेस मिलने की संभावना है।
परफॉर्मेंस के मामले में Redmi K90 Max ने शानदार स्कोर दर्ज किए हैं:
ये आंकड़े बताते हैं कि यह फोन फ्लैगशिप डिवाइसेज के बराबर परफॉर्मेंस देने में सक्षम होगा।
Redmi K90 Max का मुकाबला सीधे Vivo X300 Pro और Oppo Find X9 Pro जैसे हाई-एंड स्मार्टफोन्स से माना जा रहा है, जो इसी चिपसेट के साथ आते हैं।
परफॉर्मेंस आंकड़ों के आधार पर यह साफ है कि Redmi का यह फोन फ्लैगशिप सेगमेंट में मजबूत प्रतिस्पर्धा पेश करेगा।
कंपनी ने पहले ही संकेत दे दिया है कि Redmi K90 Max को चीन में जल्द लॉन्च किया जाएगा। इसके बाद इसे ग्लोबल मार्केट में भी पेश किया जा सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। भारत के मैसेजिंग ऐप मार्केट में अपनी जगह मजबूत करने के लिए Zoho के Arattai ऐप ने पहचान सत्यापन और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए नए फीचर्स पेश किए हैं। कंपनी का फोकस फर्जी अकाउंट और ऑनलाइन धोखाधड़ी को कम करने पर है। Aadhaar आधारित पहचान सत्यापन से बढ़ेगी सुरक्षा Zoho के Arattai ऐप में Aadhaar आधारित पहचान सत्यापन फीचर जोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स की पहचान को अधिक भरोसेमंद बनाना और नकली प्रोफाइल की संख्या कम करना है। Aadhaar वेरिफिकेशन के जरिए यूजर अपनी डिजिटल पहचान को प्रमाणित कर सकेंगे। प्राइवेसी और सिक्योरिटी पर कंपनी का फोकस Arattai ऐप को Zoho ने प्राइवेसी-केंद्रित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया है। ऐप में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, सिक्योर चैट और कॉलिंग जैसे फीचर्स उपलब्ध हैं। कंपनी का कहना है कि यूजर्स की सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी उसकी प्राथमिकता है। फर्जी अकाउंट और साइबर फ्रॉड पर लगेगी रोक मैसेजिंग ऐप्स पर बढ़ते फर्जी अकाउंट, स्कैम और पहचान चोरी के मामलों को देखते हुए पहचान सत्यापन फीचर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Aadhaar आधारित वेरिफिकेशन से सही यूजर की पहचान करने में मदद मिल सकती है और प्लेटफॉर्म पर भरोसा बढ़ सकता है। WhatsApp को टक्कर देने की तैयारी Zoho का Arattai ऐप भारतीय मैसेजिंग मार्केट में WhatsApp जैसे बड़े प्लेटफॉर्म को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है। कंपनी लगातार नए फीचर्स जोड़कर ऐप को ज्यादा सुरक्षित और उपयोगी बनाने पर काम कर रही है।
Indian Railways Solar Coach: भारतीय रेलवे लगातार पर्यावरण के अनुकूल तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में नए प्रयोग कर रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन के बाद अब रेलवे ने सोलर असिस्टेड कोच तैयार किया है। उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल की इस पहल में ट्रेन के डिब्बे की छत पर हाई-एफिशिएंसी सोलर पैनल लगाए गए हैं। खास बात यह है कि ये सोलर पैनल ट्रेन के चलने के दौरान ही नहीं, बल्कि ट्रेन के स्टेशन या यार्ड में खड़े रहने पर भी बिजली पैदा कर सकते हैं। इस बिजली का इस्तेमाल कोच के अंदर पंखे, लाइट और मोबाइल चार्जिंग पॉइंट जैसी सुविधाओं के लिए किया जा सकता है। कैसे काम करता है Solar Coach? इस सोलर कोच की छत पर Photovoltaic यानी PV पैनल लगाए गए हैं। इन पैनलों की कुल क्षमता करीब 7 kWp बताई गई है। सोलर पैनल सूरज की रोशनी से बिजली पैदा करते हैं। इसके बाद यह बिजली कोच में लगे बैटरी बैंक को चार्ज करती है। यही बैटरी यात्रियों के लिए जरूरी बिजली की आपूर्ति करती है। इस व्यवस्था से कोच के: पंखे लाइट मोबाइल चार्जिंग सॉकेट जैसी सुविधाएं संचालित की जा सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सिस्टम ट्रेन के मौजूदा बिजली सिस्टम को पूरी तरह हटाने के बजाय उसके साथ मिलकर काम करता है। सामान्य ट्रेन कोच से कितना अलग है? सामान्य कोच में बिजली उत्पादन की एक व्यवस्था एक्सल-ड्रिवन अल्टरनेटर पर आधारित होती है। ट्रेन के पहिए घूमते हैं तो यह सिस्टम बिजली पैदा करता है। यानी ट्रेन के चलने पर बिजली उत्पादन होता है। सोलर कोच में स्थिति अलग है। यहां छत पर लगे सोलर पैनल सूरज की रोशनी मिलने पर बिजली पैदा करते हैं, चाहे ट्रेन चल रही हो या खड़ी। इसका मतलब है कि स्टेशन, यार्ड या किसी अन्य स्थान पर ट्रेन के खड़े रहने के दौरान भी सोलर पैनल बैटरी को चार्ज करते रह सकते हैं। रेलवे को क्या फायदा होगा? इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा रेलवे के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने की दिशा में हो सकता है। अगर सौर ऊर्जा से कोच की कुछ बिजली जरूरतें पूरी होती हैं, तो पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, ट्रेन के खड़े रहने के दौरान भी बिजली का उत्पादन होने से बैटरी चार्जिंग की निरंतरता बेहतर हो सकती है। क्या देशभर में लगेंगे ऐसे Solar Coach? फिलहाल यह एक ट्रायल और तकनीकी पहल के तौर पर देखा जा रहा है। अगर इसका प्रदर्शन सफल रहता है और तकनीक व्यावहारिक व लागत-कुशल साबित होती है, तो भविष्य में रेलवे के दूसरे कोचों में भी इस तरह के सोलर सिस्टम का विस्तार किया जा सकता है। हालांकि, बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से पहले इसकी बिजली उत्पादन क्षमता, रखरखाव, सुरक्षा, लागत और अलग-अलग मौसम में प्रदर्शन जैसे पहलुओं का मूल्यांकन महत्वपूर्ण होगा। हाइड्रोजन ट्रेन के बाद हरित रेलवे की ओर एक और कदम भारतीय रेलवे पहले से ही ऊर्जा बचत और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई तकनीकों पर काम कर रहा है। ऐसे में सोलर असिस्टेड कोच का प्रयोग रेलवे के हरित परिवहन लक्ष्य की दिशा में एक और पहल है। अगर यह तकनीक सफल होती है, तो भविष्य में ट्रेन की छत केवल यात्रियों को धूप और बारिश से बचाने का काम नहीं करेगी, बल्कि सूरज की रोशनी को यात्रियों के लिए उपयोगी बिजली में बदलने का माध्यम भी बन सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। स्मार्टफोन कंपनी POCO जल्द ही भारतीय बाजार में अपना नया बजट 5G स्मार्टफोन POCO M8 Power 5G लॉन्च करने जा रही है। कंपनी ने फोन के लिए टीजर जारी किया है और Flipkart पर इसकी माइक्रोसाइट भी लाइव हो चुकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फोन को भारत में 4 अगस्त 2026 को लॉन्च किया जा सकता है। 8000mAh तक की बड़ी बैटरी मिलने की उम्मीद POCO M8 Power 5G की सबसे बड़ी खासियत इसकी बैटरी बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें 8000mAh की बड़ी बैटरी दी जा सकती है, जिससे लंबे समय तक वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग और रोजमर्रा के इस्तेमाल में बेहतर बैकअप मिलने की उम्मीद है। AI कैमरा और 5G पर कंपनी का फोकस फोन में 50MP AI कैमरा मिलने की चर्चा है। AI आधारित कैमरा फीचर्स की मदद से फोटो क्वालिटी, पोर्ट्रेट और लो-लाइट फोटोग्राफी को बेहतर बनाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि कैमरा सेटअप की पूरी जानकारी कंपनी ने अभी साझा नहीं की है। Snapdragon प्रोसेसर और तेज चार्जिंग की चर्चा लीक्स के अनुसार, POCO M8 Power 5G में Qualcomm Snapdragon 4 Gen 4 चिपसेट दिया जा सकता है। इसके अलावा फोन में 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट मिलने की संभावना जताई जा रही है। डिस्प्ले और डिजाइन में भी बदलाव रिपोर्ट्स के अनुसार, फोन में बड़ी स्क्रीन और बेहतर रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले मिल सकता है। कंपनी ने एक नए ऑरेंज कलर वेरिएंट की झलक भी दिखाई है, जिससे फोन का डिजाइन युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया लगता है। कीमत को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी नहीं POCO ने अभी तक M8 Power 5G की कीमत का खुलासा नहीं किया है। माना जा रहा है कि कंपनी इसे बजट 5G सेगमेंट में उतारेगी, जहां इसका मुकाबला Redmi, Realme और Vivo जैसे ब्रांड के स्मार्टफोन्स से होगा।