नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 के दौरान मैदान पर रोमांचक मुकाबलों के बीच खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियों के सामने कई चुनौतियां आईं। एक रिपोर्ट में पुलिस डोजियर के हवाले से दावा किया गया है कि अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी को कथित तौर पर बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। रिपोर्ट के अनुसार, टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों, अधिकारियों और उनके परिवारों को निशाना बनाने वाली कई धमकियां सामने आई थीं। इनमें मेसी के खिलाफ मिली धमकियों को गंभीर बताया गया है। मेसी को निशाना बनाने की कथित धमकी पुलिस डोजियर के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अधिकारियों को फोन कर दावा किया था कि वह दो अन्य लोगों के साथ डलास के एक स्टेडियम की ओर जा रहा है। उसके पास कथित तौर पर घरेलू विस्फोटक और AR-15 राइफल होने की बात कही गई थी। उस व्यक्ति ने पुलिस अधिकारियों और दोनों टीमों के खिलाड़ियों को निशाना बनाने की बात कही और कथित तौर पर विशेष रूप से मेसी का नाम लिया। सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बढ़ी सुरक्षा मेसी को लेकर एक अन्य कथित धमकी अर्जेंटीना और मिस्र के बीच 7 जुलाई को खेले गए मुकाबले से जुड़ी बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में स्टेडियम में घुसकर मेसी को निशाना बनाने की धमकी दी गई थी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं। स्टेडियम में विस्फोटक विशेषज्ञों, डॉग हैंडलर्स और K-9 यूनिट की मदद से तलाशी अभियान चलाया गया। एक अन्य कॉल में स्टेडियम के कूड़ेदानों में विस्फोटक रखे होने का दावा भी किया गया था। रोनाल्डो की सुरक्षा को लेकर भी घटनाएं विश्व कप के दौरान सिर्फ मेसी ही नहीं, पुर्तगाल के स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो को लेकर भी सुरक्षा संबंधी घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट के मुताबिक, 14 जून को फीफा के एक कर्मचारी ने अधिकारियों को सूचना दी थी कि एक व्यक्ति रोनाल्डो के ठिकाने की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद ह्यूस्टन पुलिस ने उस होटल से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जहां रोनाल्डो और पुर्तगाल की टीम ठहरी थी। टोरंटो में भी एक व्यक्ति को रोनाल्डो के साथ लिफ्ट में जाने की कोशिश के बाद हिरासत में लिया गया। उसने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वह सिर्फ रोनाल्डो के साथ सेल्फी लेना चाहता था। रेफरी को मिले हजारों धमकी भरे संदेश विश्व कप के दौरान फ्रांस के रेफरी फ्रांस्वा लेटेक्सियर को भी कथित तौर पर 6,000 से अधिक धमकी भरे WhatsApp संदेश मिले। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए एफबीआई और इंटरनेशनल पुलिस को-ऑपरेशन से जुड़े संयुक्त नेटवर्क ने काम किया। सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद संबंधी अलर्ट, खिलाड़ियों की स्टॉकिंग और हिंसा की धमकियों पर नजर रख रही थीं। इन घटनाओं ने एक बार फिर दिखाया कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन में खिलाड़ियों और अधिकारियों की सुरक्षा मैदान के बाहर भी बड़ी चुनौती बनी रहती है।
सिएटल, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ-16 में बेल्जियम ने मेजबान अमेरिका को 4-1 से हराकर शानदार अंदाज में क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। इस हार के साथ अमेरिका का 2002 के बाद पहली बार वर्ल्ड कप के अंतिम आठ में पहुंचने का सपना टूट गया। साथ ही कनाडा और मेक्सिको के बाद अमेरिका भी टूर्नामेंट से बाहर होने वाला आखिरी सह-मेजबान देश बन गया। डी केटेलेरे ने चमकाया बेल्जियम का खेल बेल्जियम की जीत के नायक चार्ल्स डी केटेलेरे रहे, जिन्होंने दो गोल दागे। इसके अलावा हंस वनाकेन और स्थानापन्न खिलाड़ी रोमेलु लुकाकू ने एक-एक गोल कर टीम की जीत सुनिश्चित की। बेल्जियम ने पूरे मैच में आक्रामक खेल दिखाते हुए अमेरिका को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। शानदार फॉर्म में बेल्जियम बेल्जियम की टीम 20 मार्च 2025 के बाद से अजेय बनी हुई है। इस दौरान उसने फीफा विश्व कप, विश्व कप क्वालिफायर, यूईएफए नेशंस लीग प्ले-ऑफ और अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैचों सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में 12 जीत और छह ड्रॉ दर्ज किए हैं। इस अवधि में टीम का गोल अंतर भी +40 रहा है, जो उसकी बेहतरीन फॉर्म को दर्शाता है। अब स्पेन से होगी भिड़ंत क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम का मुकाबला स्पेन से होगा। स्पेन ने राउंड ऑफ-16 में पुर्तगाल को 1-0 से हराकर अंतिम आठ में जगह बनाई। दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला 11 जुलाई को लॉस एंजिलिस में खेला जाएगा। मौजूदा फॉर्म को देखते हुए यह मैच टूर्नामेंट के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक माना जा रहा है। अमेरिका का सपना टूटा, रोनाल्डो का भी हुआ विदाई मैच अमेरिका की हार के साथ उसकी क्वार्टर फाइनल में पहुंचने की उम्मीदें खत्म हो गईं। वहीं, स्पेन से हार के बाद पुर्तगाल के दिग्गज खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो का भी फीफा विश्व कप सफर समाप्त हो गया। अब सभी की निगाहें बेल्जियम और स्पेन के बीच होने वाले हाई-वोल्टेज क्वार्टर फाइनल मुकाबले पर टिकी हैं।
स्पेन से हार के बाद भावुक हुए रोनाल्डो, बोले- जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करूंगा Cristiano Ronaldo ने पुष्टि कर दी है कि FIFA World Cup 2026 उनके करियर का आखिरी विश्व कप था। हालांकि, उन्होंने फिलहाल पुर्तगाल की राष्ट्रीय टीम से संन्यास लेने का ऐलान नहीं किया है। 41 वर्षीय दिग्गज फुटबॉलर ने कहा कि वह अपने अंतरराष्ट्रीय भविष्य पर फैसला लेने से पहले परिवार के साथ समय बिताएंगे और शांत मन से सोच-विचार करेंगे। स्पेन के खिलाफ हार के साथ खत्म हुआ विश्व कप सफर Portugal का विश्व कप अभियान प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) में Spain के खिलाफ 1-0 की हार के साथ समाप्त हो गया। मुकाबले में दूसरे हाफ के स्टॉपेज टाइम में Mikel Merino ने निर्णायक गोल कर स्पेन को क्वार्टर फाइनल में पहुंचा दिया। मैच के बाद रोनाल्डो ने कहा कि टीम ने पूरी कोशिश की, लेकिन किस्मत उनके साथ नहीं थी। उन्होंने कहा, "मैं दुखी हूं कि मेरा विश्व कप सफर इस तरह खत्म हुआ। मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और पूरी ईमानदारी से खेला। यह मेरा आखिरी विश्व कप था, लेकिन अभी मैं अपने भविष्य पर कोई जल्दबाजी में फैसला नहीं लूंगा।" विश्व कप खत्म, लेकिन अंतरराष्ट्रीय करियर अभी नहीं रोनाल्डो ने साफ किया कि विश्व कप में उनका सफर जरूर समाप्त हो गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने पुर्तगाल के लिए अपना आखिरी मैच खेल लिया है। उन्होंने कहा कि भावनाओं में बहकर फैसला लेना सही नहीं होगा और वह कुछ समय बाद तय करेंगे कि राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना जारी रखना है या नहीं। 'स्पेन को किस्मत का साथ मिला' हार के बाद रोनाल्डो ने माना कि मुकाबला बेहद करीबी था और दोनों टीमों के जीतने की बराबर संभावना थी। उनके अनुसार, "स्पेन को थोड़ा भाग्य का साथ मिला। यह ऐसा मैच था जो किसी भी तरफ जा सकता था।" छठा विश्व कप, लेकिन अधूरा रहा सबसे बड़ा सपना रोनाल्डो ने अपने करियर में रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए छठा FIFA World Cup खेला। इस टूर्नामेंट में उन्होंने तीन गोल भी किए, लेकिन वह विश्व कप जीतने का अपना सबसे बड़ा सपना पूरा नहीं कर सके। विश्व फुटबॉल के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाने वाले रोनाल्डो के नाम कई व्यक्तिगत और टीम उपलब्धियां हैं, लेकिन विश्व कप ट्रॉफी उनके करियर की सबसे बड़ी अधूरी उपलब्धि बनकर रह गई। याद दिलाई पुर्तगाल की ऐतिहासिक सफलताएं रोनाल्डो ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में पुर्तगाल ने पहली बार बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब जीते। उन्होंने कहा कि टीम ने UEFA Euro 2016 का खिताब जीता और इसके बाद UEFA Nations League में 2019 और 2025 में भी चैंपियन बनी। रोनाल्डो ने कहा, "मैंने पुर्तगाल के लिए तीन बड़े खिताब जीते। मेरे आने से पहले टीम ने कोई बड़ा खिताब नहीं जीता था। मेरे लिए 2016 की यूरोपीय चैम्पियनशिप विश्व कप जितनी ही महत्वपूर्ण है।" अभी बाकी है अंतिम फैसला फिलहाल इतना तय हो गया है कि रोनाल्डो का विश्व कप अध्याय समाप्त हो चुका है। हालांकि, उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत अभी तय नहीं है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि वह जल्दबाजी में संन्यास का फैसला नहीं करेंगे और परिवार के साथ समय बिताने के बाद ही अपने अगले कदम की घोषणा करेंगे।
टोरंटो, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में पुर्तगाल ने रोमांचक मुकाबले में क्रोएशिया को 2-1 से हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) में अपनी जगह पक्की कर ली। मैच के नायक गोंकालो रामोस रहे, जिन्होंने 81वें मिनट में विजयी गोल दागकर पुर्तगाल को यादगार जीत दिलाई। इससे पहले अनुभवी स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने पेनाल्टी पर गोल कर टीम को बराबरी दिलाई थी। अब पुर्तगाल का अगला मुकाबला स्पेन से होगा। रोनाल्डो ने दिखाया अनुभव, रामोस बने जीत के हीरो मैच की शुरुआत दोनों टीमों के बीच कड़े संघर्ष के साथ हुई। क्रोएशिया ने 53वें मिनट में इवान पेरिसिक के गोल की बदौलत बढ़त हासिल की। इसके बाद 68वें मिनट में पुर्तगाल को पेनाल्टी मिली, जिसे क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने शानदार अंदाज में गोल में बदलकर स्कोर 1-1 कर दिया। यह रोनाल्डो का विश्व कप नॉकआउट चरण में पहला गोल भी रहा। इसके बाद 81वें मिनट में गोंकालो रामोस ने निर्णायक गोल कर पुर्तगाल को 2-1 की बढ़त दिला दी, जो अंत तक कायम रही। VAR ने तोड़ी क्रोएशिया की उम्मीद मैच के अंतिम क्षणों में क्रोएशिया ने बराबरी का गोल कर दिया था, लेकिन वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) की जांच में मारियो पासालिक को ऑफसाइड पाया गया और गोल रद्द कर दिया गया। इस फैसले से नाराज क्रोएशियाई प्रशंसकों ने स्टेडियम में विरोध जताया और मैदान की ओर बोतलें भी फेंकी। रोनाल्डो और मोड्रिच की भावुक मुलाकात यह मुकाबला दो दिग्गज खिलाड़ियों क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लुका मोड्रिच के बीच भी खास रहा। रियल मैड्रिड के पूर्व साथी रहे दोनों खिलाड़ियों ने मैच से पहले और बाद में एक-दूसरे को गले लगाकर सम्मान व्यक्त किया। मैच के बाद रोनाल्डो ने कहा कि मोड्रिच आज भी फुटबॉल के महान खिलाड़ियों में से एक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी टीम ने बेहतर खेल दिखाया और जीत की पूरी हकदार थी। पुर्तगाल की इस जीत के साथ अब टीम का लक्ष्य स्पेन को हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाना होगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेले जा रहे FIFA वर्ल्ड कप 2026 का ग्रुप चरण समाप्त हो चुका है। अब टूर्नामेंट का सबसे रोमांचक दौर राउंड ऑफ 32 यानी नॉकआउट स्टेज शुरू होने जा रहा है। इस चरण में जीतने वाली टीमें प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) में प्रवेश करेंगी, जबकि हारने वाली टीमों का विश्व कप अभियान यहीं समाप्त हो जाएगा। 16 टीमें हुईं बाहर, 32 टीमों ने बनाई जगह 48 टीमों वाले इस विश्व कप में ग्रुप स्टेज के बाद 16 टीमें बाहर हो चुकी हैं। इनमें दक्षिण कोरिया, उरुग्वे, ईरान, सऊदी अरब, कतर, स्कॉटलैंड, न्यूजीलैंड, तुर्किये, पनामा और उज्बेकिस्तान जैसी टीमें शामिल हैं। वहीं, 32 टीमों ने नॉकआउट चरण के लिए क्वालिफाई किया है। मेसी और रोनाल्डो के मैच कब हैं? फुटबॉल प्रेमियों की नजरें एक बार फिर लियोनेल मेसी की अर्जेंटीना और क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पुर्तगाल पर टिकी हैं। पुर्तगाल बनाम क्रोएशिया – 3 जुलाई, भारतीय समयानुसार सुबह 4:30 बजे अर्जेंटीना बनाम केप वर्डे – 4 जुलाई, भारतीय समयानुसार सुबह 3:30 बजे दोनों मुकाबले अपने-अपने सुपरस्टार खिलाड़ियों की वजह से सबसे ज्यादा चर्चित माने जा रहे हैं। इन मुकाबलों पर भी रहेंगी निगाहें राउंड ऑफ 32 में कई हाई-वोल्टेज मुकाबले देखने को मिलेंगे। ब्राजील बनाम जापान का मैच तकनीक और आक्रामक फुटबॉल का दिलचस्प मुकाबला माना जा रहा है। वहीं फ्रांस बनाम स्वीडन में मौजूदा दावेदार फ्रांस के सामने स्वीडन की अनुशासित टीम बड़ी चुनौती पेश कर सकती है। इसके अलावा नीदरलैंड बनाम मोरक्को, इंग्लैंड बनाम डीआर कांगो, स्पेन बनाम ऑस्ट्रिया और जर्मनी बनाम पैराग्वे जैसे मुकाबले भी रोमांच बढ़ाएंगे। अब हर मैच 'करो या मरो' का होगा, जहां एक छोटी सी गलती भी किसी टीम के विश्व कप जीतने के सपने को खत्म कर सकती है। ऐसे में नॉकआउट स्टेज में फुटबॉल प्रशंसकों को रोमांच, कड़े मुकाबले और कई यादगार पल देखने को मिलने की उम्मीद है।
रांची। दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल फुटबॉल की बात हो और लियोनेल मेसी तथा क्रिस्टियानो रोनाल्डो का जिक्र न हो, ऐसा शायद ही कभी होता है। एक बार फिर दुनिया की निगाहें इन दोनों महान खिलाड़ियों पर टिकी हैं, क्योंकि FIFA World Cup 2026 का आगाज 11 जून की रात मेक्सिको सिटी के ऐतिहासिक एस्टाडियो एज्टेका स्टेडियम में भव्य उद्घाटन समारोह के साथ हो गया। मेक्सिको, अमेरिका और कनाडा की संयुक्त मेजबानी में आयोजित इस विश्व कप की शुरुआत रंग, रोशनी, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई। समारोह में ग्लोबल पॉप स्टार शकीरा और नाइजीरियाई गायक बर्ना बॉय ने आधिकारिक फीफा गीत "Dai Dai" प्रस्तुत कर दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंचा दिया। इसके अलावा जे बाल्विन, अलेजांद्रो फर्नांडीज़, बेलिंडा और माना सहित कई कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से समारोह को यादगार बना दिया। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने विश्व कप ट्रॉफी के साथ टूर्नामेंट के उद्घाटन की औपचारिक घोषणा की। कई दिग्गज खिलाड़ियों का आखिरी विश्व कप हो सकता है FIFA World Cup 2026 कई मायनों में खास माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यह कई दिग्गज खिलाड़ियों का अंतिम विश्व कप हो सकता है। इस सूची में ब्राजील के नेमार, अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी और पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसे दिग्गज शामिल हैं। ऐसे में फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह टूर्नामेंट भावनात्मक रूप से भी बेहद खास रहने वाला है। मेसी के पास इतिहास रचने का सुनहरा अवसर 38 वर्षीय अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी 2022 में अपनी टीम को विश्व चैंपियन बनाने के बाद एक बार फिर मैदान में उतर रहे हैं। आठ बार बैलन डी'ओर जीत चुके मेसी के पास लगातार दूसरा विश्व कप जीतकर नया इतिहास रचने का मौका है। यदि अर्जेंटीना खिताब बचाने में सफल रहता है, तो वह 1962 के बाद लगातार दो विश्व कप जीतने वाली पहली टीम बन जाएगी। इसलिए यह टूर्नामेंट मेसी के करियर के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक माना जा रहा है। रोनाल्डो के सामने अधूरे सपने को पूरा करने की चुनौती दूसरी ओर, 41 वर्षीय पुर्तगाली स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो के लिए भी यह विश्व कप बेहद अहम है। दो दशक से अधिक लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्होंने लगभग हर बड़ा खिताब अपने नाम किया है, लेकिन विश्व कप ट्रॉफी अब भी उनकी सबसे बड़ी अधूरी उपलब्धि है। ऐसे में यह टूर्नामेंट उनके लिए अपने करियर के सबसे बड़े सपने को पूरा करने का अंतिम अवसर माना जा रहा है। दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसक इस बात को लेकर उत्साहित हैं कि क्या मेसी अपना खिताब बचाने में सफल होंगे या रोनाल्डो पहली बार विश्व कप जीतकर अपने शानदार करियर को ऐतिहासिक विदाई देंगे। भारतीय दर्शक यहां देख सकेंगे लाइव मुकाबले भारत में फुटबॉल प्रशंसक FIFA World Cup 2026 के मुकाबलों का सीधा प्रसारण जी नेटवर्क के टीवी चैनलों और जी5 (ZEE5) पर देख सकेंगे। समय क्षेत्र में अंतर होने के कारण अधिकांश मुकाबले भारतीय समयानुसार देर रात या तड़के सुबह खेले जाएंगे। ऐसे में फुटबॉल प्रेमियों को रोमांचक मुकाबलों का आनंद लेने के लिए देर रात तक जागना पड़ सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।