108 एंबुलेंस सेवा भी सीमित, मरीजों को समय पर वाहन नहीं मिलने की शिकायत; सिविल सर्जन ने मुख्यालय को भेजने की बात कही जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 27 लाख की आबादी वाले जिले में मात्र 25 सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध होने की बात सामने आई है। वहीं, 108 एंबुलेंस सेवा की कई गाड़ियां भी सीमित संख्या में ही चालू हालत में हैं, जिससे मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में परेशानी हो रही है। मरीजों को समय पर नहीं मिल रही एंबुलेंस रिपोर्ट के अनुसार, जिले में सरकारी एंबुलेंस के अलावा 108 सेवा की 16 एंबुलेंस चालू स्थिति में बताई गई हैं। इसके अलावा प्रसव और छोटे बच्चों के लिए अलग से ममता वाहन उपलब्ध हैं, लेकिन सामान्य आपातकालीन मामलों में मरीजों को काफी इंतजार करना पड़ रहा है। एंबुलेंस नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी कई मामलों में मरीजों के परिजनों ने शिकायत की है कि फोन करने के बाद भी समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाई। कुछ मरीजों को मजबूरी में निजी वाहन या अन्य साधनों से अस्पताल ले जाना पड़ा। ऐसी घटनाओं के बाद स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। सिविल सर्जन ने जांच और कार्रवाई की बात कही जमशेदपुर के सिविल सर्जन ने एंबुलेंस व्यवस्था में सुधार को लेकर रिपोर्ट तैयार करने और खराब पड़ी एंबुलेंस की स्थिति की जानकारी लेने की बात कही है। उन्होंने मामले को स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय तक पहुंचाने और आवश्यक कार्रवाई की मांग करने की बात कही। सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने की तैयारी झारखंड सरकार ने राज्य में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नई हाईटेक एंबुलेंस खरीदने की योजना भी बनाई है। इसका उद्देश्य दूरदराज के इलाकों तक समय पर एंबुलेंस सेवा पहुंचाना है।
रांची। झारखंड सरकार राज्य में मोटे अनाज (मिलेट्स/श्रीअन्न) को बढ़ावा देने के लिए बड़ी पहल करने जा रही है। कृषि विभाग रांची, जमशेदपुर और देवघर में प्रीमियम मिलेट्स कैफेटेरिया खोलेगा, जहां मड़ुआ समेत विभिन्न मोटे अनाज से बने पौष्टिक और स्वादिष्ट व्यंजन उपलब्ध होंगे। सरकार का उद्देश्य लोगों में मिलेट्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। सरकार देगी ₹1 करोड़ तक की वित्तीय सहायता कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने बताया कि प्रत्येक प्रीमियम मिलेट्स कैफेटेरिया के लिए सरकार पहले वर्ष में अधिकतम ₹1 करोड़ तक की वित्तीय सहायता देगी। इसके लिए जल्द ही एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया जाएगा। इसके अलावा अन्य जिलों में छोटे मिलेट्स आउटलेट भी खोले जाएंगे, जिनके लिए प्रति आउटलेट ₹50 हजार तक की सहायता का प्रावधान किया गया है। मिलेट्स से बने मिलेंगे कई स्वादिष्ट व्यंजन प्रीमियम मिलेट्स कैफेटेरिया में इडली, डोसा, धुस्का, पिज्जा, रोटी, हलवा, मिठाइयों सहित कई तरह के व्यंजन मिलेट्स से तैयार किए जाएंगे। कृषि विभाग का मानना है कि स्वाद और पोषण का यह संयोजन लोगों को स्वस्थ खानपान अपनाने के लिए प्रेरित करेगा और मिलेट्स की मांग बढ़ाएगा। किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार और बढ़ेगी खेती सरकार का लक्ष्य झारखंड को मिलेट्स उत्पादन में अग्रणी राज्य बनाना है। मांग बढ़ने से किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा और मड़ुआ जैसी पारंपरिक फसलों की खेती को प्रोत्साहन मिलेगा। वर्तमान में सरकार मड़ुआ की खेती पर प्रति एकड़ ₹3,000 की सहायता (अधिकतम 5 एकड़ तक ₹15,000) और बीज पर 50 प्रतिशत सब्सिडी भी दे रही है। पोषण और जलवायु दोनों के लिए लाभकारी कृषि विशेषज्ञों और चिकित्सकों के अनुसार, मड़ुआ कैल्शियम, आयरन, फाइबर और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर सुपरफूड है। कम पानी में होने वाली इसकी खेती जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी कारगर मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिलेट्स का बढ़ता उपयोग कुपोषण, मोटापा और मधुमेह जैसी समस्याओं से निपटने में भी मददगार साबित हो सकता है।
रांची। जमशेदपुर के चर्चित हिमांशु सिंह हत्याकांड को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक शिष्टमंडल प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के नेतृत्व में राजभवन पहुंचा और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। भाजपा नेताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच केवल केंद्रीय एजेंसी से ही संभव है। पुलिस की कार्यशैली पर भाजपा ने उठाए गंभीर सवाल भाजपा ने अपने ज्ञापन में दावा किया कि 27 जून 2026 को जमशेदपुर के आदित्यपुर क्षेत्र में करणी सेना से जुड़े हिमांशु सिंह की पुलिस की मौजूदगी में हत्या कर दी गई। आरोप है कि हमलावरों ने पुलिस वैन से हिमांशु को बाहर खींचकर धारदार हथियार से हमला किया, जबकि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सकी। इस घटना में घायल प्रत्युष सिंह का इलाज कोलकाता में चल रहा है। भाजपा का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी में इस तरह की वारदात राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पार्टी ने आरोप लगाया कि अपराधियों में कानून का भय समाप्त हो चुका है और कई मामलों में पुलिस जांच की दिशा बदलने का प्रयास करती रही है। निष्पक्ष जांच की उठाई मांग ज्ञापन में भाजपा ने कहा कि पुलिस द्वारा जिन तथ्यों को सामने लाया जा रहा है, उनकी भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि जिस कारोबारी का नाम इस मामले में जोड़ा जा रहा है, उसके संबंध में सामने आए तथ्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। भाजपा का दावा है कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने और दोषियों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए सीबीआई जांच जरूरी है। भाजपा नेताओं ने राज्यपाल से आग्रह किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र हस्तक्षेप किया जाए ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और राज्य में कानून-व्यवस्था पर जनता का विश्वास कायम रहे। अब इस मामले में राज्यपाल के स्तर पर होने वाली कार्रवाई और सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।
रांची। झारखंड के लोगों को जल्द ही डाक सेवाओं में बड़ी सुविधा मिलने वाली है। डाक विभाग राज्य के चार प्रमुख शहरों रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो में नई प्रीमियम डाक डिलीवरी सेवा शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए विभाग ने डाक निदेशालय को प्रस्ताव भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही इन शहरों में ग्राहकों को पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और समयबद्ध डिलीवरी सेवा उपलब्ध होगी। देश के छह महानगरों में मिल चुकी है सफलता डाक विभाग ने इस प्रीमियम सेवा की शुरुआत मार्च 2026 में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे छह महानगरों में की थी। विभाग के अनुसार, वहां इस सेवा को लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इसी सफलता को देखते हुए अब इसे झारखंड सहित अन्य राज्यों के प्रमुख शहरों तक विस्तार देने की योजना बनाई गई है। रियल टाइम ट्रैकिंग और SMS अलर्ट की सुविधा नई प्रीमियम डाक सेवा को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। इसके तहत ग्राहक पार्सल या महत्वपूर्ण दस्तावेज की बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक हर चरण की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्हें एसएमएस अलर्ट, ऑनलाइन ट्रैकिंग और रियल टाइम स्टेटस अपडेट जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इससे ग्राहक अपने पार्सल की मौजूदा स्थिति पर लगातार नजर रख सकेंगे और डिलीवरी की सटीक जानकारी हासिल कर पाएंगे। समयबद्ध और सुरक्षित डिलीवरी पर रहेगा जोर डाक विभाग का कहना है कि इस नई सेवा का मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों और जरूरी पार्सलों की तेज, सुरक्षित और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करना है। नई व्यवस्था से डाक वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी, जिससे ग्राहकों का अनुभव भी बेहतर होगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो में इस सेवा की शुरुआत कर दी जाएगी। इसके बाद इन शहरों के लोग आधुनिक तकनीक से लैस प्रीमियम डाक डिलीवरी सेवा का लाभ उठा सकेंगे।
गिरिडीह। झारखंड में कानून व्यवस्था को लेकर नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला है। गुरुवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात एक सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) व्यवस्था पर प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पुलिस महकमे के वरिष्ठ अधिकारी भी उनके सामने बेबस नजर आते हैं। जमशेदपुर हत्याकांड को लेकर सरकार पर निशाना बाबूलाल मरांडी ने हाल ही में जमशेदपुर में हुई करणी सेना के एक नेता की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि यह घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई। उनके अनुसार, मामले में सिर्फ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) का तबादला कर देना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस की मौजूदगी में हत्या होती है तो जवाबदेही भी पुलिस की तय होनी चाहिए। एफआईआर और जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल मरांडी ने आरोप लगाया कि घटना के बाद होटल संचालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, जबकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। उनका कहना था कि केवल प्रशासनिक बदलाव से कानून व्यवस्था में सुधार नहीं होगा। सरकार से जवाबदेही की मांग नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की है। उन्होंने सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पुलिस की जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। गौरतलब है कि हाल ही में जमशेदपुर में एक बार के बाहर चाकूबाजी की घटना में घायल हुए हिमांशु की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस घटना के बाद राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) में बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार के बाहर करणी सेना के नेता हिमांशु सिंह की चाकू से गोदकर हत्या के बाद माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मंगलवार देर रात टीएमएच से शव को एमजीएम अस्पताल पहुंचाया, जहां रात करीब 3 बजे पोस्टमार्टम किया गया। हालांकि, प्रशासन द्वारा सूचना दिए जाने के बावजूद परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है। घटना के बाद शहर के कई प्रमुख इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए धालभूम के एसडीएम ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। यह आदेश साकची, बिष्टुपुर, सोनारी, कदमा, एमजीएम और मानगो थाना क्षेत्रों में लागू है। इसके तहत किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन, जुलूस, घेराव और हथियार लेकर चलने पर रोक लगा दी गई है। सीसीटीवी में कैद हुई वारदात, बार परिसर सील पुलिस जांच में सामने आए सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि घायल हिमांशु सड़क पर बैठा हुआ है, जबकि उसका साथी पास में पड़ा हुआ है। घटना के बाद प्रशासन ने डबल डाउन बार को सील कर दिया है और मामले की जांच तेज कर दी गई है। परिजनों का आक्रोश, एनकाउंटर की मांग मृतक के पिता ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि उनके बेटे की नृशंस हत्या की गई है और अपराधियों का एनकाउंटर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमांशु सामाजिक कार्यों से जुड़े थे और उनकी किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी। पिता ने न्याय की मांग करते हुए कहा कि जब तक मुख्य आरोपी पकड़े या मारे नहीं जाते, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी परिजनों से मुलाकात कर सरकार से त्वरित कार्रवाई और पीड़ित परिवार को नौकरी देने की मांग की है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
जमशेदपुर। जमशेदपुर में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत से वाहन चालक परेशान हैं। शहर के अधिकांश पेट्रोल पंप ड्राई हो चुके हैं और कई प्रमुख पंपों पर ताले लटक गए हैं। दिनभर शहर के अलग-अलग इलाकों में ईंधन को लेकर अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही। कहां क्या रही स्थिति सिदगोड़ा स्थित पेट्रोल पंप पर पेट्रोल पूरी तरह खत्म हो गया, केवल डीजल उपलब्ध था। बिष्टुपुर के तिवारी बेचर पेट्रोल पंप पर दोनों ईंधन मिलने से भारी भीड़ उमड़ पड़ी और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बिष्टुपुर गोल चक्कर, कदमा और बर्मा माइंस स्थित पंपों पर ईंधन न होने से सन्नाटा पसरा रहा। इथेनॉल ब्लेंडिंग पंप में खराबी असली वजह प्रशासन और पंप संचालकों के अनुसार यह संकट तेल की कमी से नहीं, बल्कि बोकारो डिपो के इथेनॉल ब्लेंडिंग पंप में आई तकनीकी खराबी से उत्पन्न हुआ है। सरकारी नियमों के तहत पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाया जाता है, लेकिन मिक्सिंग पंप खराब होने से इथेनॉल और पेट्रोल अलग-अलग हो गए। नमी के संपर्क में आने पर इथेनॉल पानी के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया कर टंकी में नीचे बैठ गया, जिसे लोग पेट्रोल में पानी समझने लगे। गुणवत्ता जांच तक सप्लाई बंद पेट्रोल पंप डीलरों और ट्रांसपोर्टर्स ने कड़ा रुख अपनाते हुए गुणवत्ता जांच पूरी होने तक डिपो से तेल लेने से इनकार कर दिया है। इससे सप्लाई चेन में दो दिनों का गैप आ गया है। हालांकि पंप संचालकों को उम्मीद है कि डिपो का मिक्सिंग पंप ठीक होते ही एक से दो दिनों में सप्लाई पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।
सोनारी मारपीट कांड जमशेदपुर। जमशेदपुर की कुख्यात लेडी डॉन चटनी एक बार फिर पुलिस के हत्थे चढ़ गई है। जमशेदपुर के सोनारी थाना क्षेत्र में हुई मारपीट के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात अपराधी प्रिया सिंह उर्फ चटनी डॉन को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने गुप्त सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उसे दबोचा। SSP पीयूष पांडेय के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने उसे गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 15 जून को दर्ज सोनारी थाना कांड संख्या-49/2026 में शिकायतकर्ता पूजा देवी ने आरोप लगाया था कि उनके पति ओम प्रकाश सिंह घर के बाहर बैठे थे। इसी दौरान एक तेज रफ्तार स्विफ्ट डिजायर कार सड़क किनारे खेल रहे बच्चे के बेहद करीब से गुजरी। इस पर आपत्ति जताने को लेकर कार चालक पवन यादव और ओम प्रकाश सिंह के बीच कहासुनी हो गयी। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर कार में मौजूद प्रिया सिंह उर्फ ‘चटनी डॉन’ ने अपने साथियों को बुला लिया। कुछ ही देर में हथियारों से लैस कई लोग मौके पर पहुंच गये और शिकायतकर्ता पक्ष पर हमला कर दिया। रंगदारी वसूलने के आरोप हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गये। घटना के बाद इलाके में भय और तनाव का माहौल बन गया था। जांच के दौरान पुलिस को मिले साक्ष्यों और तकनीकी इनपुट में प्रिया सिंह उर्फ चटनी डॉन की भूमिका सामने आई, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी की गई। पुलिस का दावा है कि वह सोनारी समेत आसपास के इलाकों में लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रही है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, प्रिया सिंह उर्फ चटनी डॉन के खिलाफ मारपीट, लूट, छिनतई, रंगदारी, हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट और एससी-एसटी एक्ट समेत कुल 15 मामले दर्ज हैं। उस पर व्यवसायियों और ठेकेदारों से रंगदारी वसूलने के आरोप भी लगते रहे हैं। जिला बदर भी की जा चुकी है उसके आपराधिक इतिहास को देखते हुए जिला प्रशासन ने पहले उसे झारखंड अपराध नियंत्रण अधिनियम, 2002 के तहत एक वर्ष के लिए जिला बदर भी किया था। पुलिस फिलहाल इस मामले में फरार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जायेगा।
रांची। झारखंड में आजसू पार्टी ने धनबाद में अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया है। बोकारो में आयोजित पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक में 22 जून को धनबाद में आक्रोश मार्च निकालने का निर्णय लिया गया। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन पुलिस बर्बरता और कार्यकर्ताओं के साथ हुए कथित अन्याय के खिलाफ होगा। केंद्रीय नेतृत्व ने बनाई आगे की रणनीति बैठक में सुदेश महतो , चंद्र प्रकाश चौधरी सहित पार्टी के केंद्रीय और जिला स्तरीय पदाधिकारी शामिल हुए। इस दौरान संगठन को मजबूत करने, राज्य के समसामयिक राजनीतिक मुद्दों और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। पार्टी नेतृत्व ने आगामी कार्यक्रमों और संगठन विस्तार की रणनीति पर भी मंथन किया। 22 जून को होगा आक्रोश मार्च आजसू पार्टी के मुख्य प्रवक्ता डॉ। देवशरण भगत ने बताया कि धनबाद की घटना को लेकर कार्यकर्ताओं और आम लोगों में नाराजगी है। इसी के मद्देनजर पार्टी स्थापना दिवस और बलिदान दिवस के अवसर पर 22 जून को धनबाद में आक्रोश मार्च आयोजित करेगी। पार्टी का दावा है कि इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल होंगे। महिला और युवा सम्मेलन पर भी जोर संगठन विस्तार को गति देने के लिए पार्टी ने आगामी महीनों में दो बड़े कार्यक्रमों की घोषणा की है। 5 जुलाई को रांची में महिला सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जबकि 7 और 8 अगस्त को जमशेदपुर में युवा सम्मेलन होगा। पार्टी का मानना है कि इन आयोजनों से महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें नेतृत्व की मुख्यधारा में आने का अवसर मिलेगा। सड़क से सदन तक संघर्ष का दावा सुदेश महतो ने आरोप लगाया कि धनबाद की घटना में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय हुआ है, जिससे लोगों में असंतोष है। उन्होंने कहा कि आजसू जनसरोकार के मुद्दों को लेकर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी। पार्टी का लक्ष्य आगामी कार्यक्रमों के माध्यम से संगठन को और मजबूत करना तथा राज्यभर में कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना है।
जमशेदपुर। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते युद्ध तनाव के बीच झारखंड के जमशेदपुर के सेकंड इंजीनियर अंश त्रिपाठी ने साहस और जिम्मेदारी की मिसाल पेश की है। शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के जहाज ‘शिवालिक’ तैनात अंश त्रिपाठी 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर खतरनाक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर सुरक्षित भारत लौट रहे हैं। सोमवार 16 मार्च को उनका जहाज गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचने वाला है। उनकी सुरक्षित वापसी की खबर से परिवार और शहर में खुशी का माहौल है। दरअसल, अंश त्रिपाठी ने 26 नवंबर 2025 को ‘शिवालिक’ जहाज पर अपनी ड्यूटी जॉइन की थी। इस दौरान खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच जहाज को दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना पड़ा। 13 मार्च को जहाज ने इस खतरनाक रास्ते को सुरक्षित पार किया, जिसके बाद परिवार और परिचितों ने राहत की सांस ली। परिवार ने दुआओं में बिताए कई दिन जमशेदपुर के पारडीह स्थित आशियाना वुडलैंड में रहने वाले अंश त्रिपाठी के परिवार के लिए पिछले कुछ दिन बेहद चिंताजनक रहे। उनके पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी, जो यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) जादूगोड़ा से सेवानिवृत्त उप-प्रबंधक हैं, ने बताया कि बीते एक सप्ताह से परिवार की नींद उड़ गई थी। जैसे ही यह खबर मिली कि जहाज सुरक्षित होर्मुज पार कर गया है, मानो सीने से भारी बोझ उतर गया। अंश की मां चंदा त्रिपाठी ने कहा कि हर पल अनहोनी का डर बना हुआ था। मीडिया में खतरे की खबरें सुनकर दिल घबराने लगता था, लेकिन अब बेटे के सुरक्षित लौटने की खबर से घर में खुशी लौट आई है। पत्नी और बेटे को भी था बेसब्री से इंतजार अंश की पत्नी चंदा मिश्रा त्रिपाठी, जो टाटा स्टील में चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, कई दिनों से पति की सुरक्षित वापसी की दुआ कर रही थीं। उनका दो वर्षीय बेटा तनय भी पिता के लौटने का इंतजार कर रहा है। परिवार के मुताबिक, जहाज के सुरक्षित पहुंचने की खबर मिलते ही घर में रिश्तेदारों और परिचितों का जमावड़ा लग गया और लगातार फोन कॉल आने लगे। अंश त्रिपाठी का करियर अंश त्रिपाठी ने अपनी स्कूली शिक्षा मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल और एईसीएस नरवा व जादूगोड़ा माइंस से पूरी की। इसके बाद उन्होंने बीआईटी से 2012 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग और 2015 में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, केरल से मरीन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। दिसंबर 2014 में उन्होंने शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया जॉइन किया था।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।