लाहौर, एजेंसियां। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को माइकल स्मिथ को पाकिस्तान पुरुष क्रिकेट टीम का नया बैटिंग कोच नियुक्त किया है। दक्षिण अफ्रीका के पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर और कोच स्मिथ अब पाकिस्तान के बल्लेबाजों को अपनी सेवाएं देंगे। दक्षिण अफ्रीका से है क्रिकेट का अनुभव माइकल स्मिथ दक्षिण अफ्रीका के पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर रहे हैं। क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग के क्षेत्र में कदम रखा और बल्लेबाजी के विकास पर काम किया। अब पाकिस्तान टीम के साथ उनकी नई जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बल्लेबाजों को बेहतर बनाने की होगी। बल्लेबाजी में सुधार पर होगी नजर पाकिस्तान टीम हाल के समय में बल्लेबाजी के स्तर पर निरंतरता की समस्या से जूझती रही है। ऐसे में स्मिथ की नियुक्ति को टीम की बल्लेबाजी को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। उनका मुख्य काम बल्लेबाजों की तकनीक, शॉट चयन और दबाव की परिस्थितियों में प्रदर्शन को बेहतर करना होगा। पाकिस्तान के कोचिंग स्टाफ में एक और बदलाव माइकल स्मिथ की नियुक्ति पाकिस्तान के कोचिंग ढांचे में किए जा रहे बदलावों का हिस्सा है। PCB अलग-अलग प्रारूपों के लिए विशेषज्ञ कोचिंग व्यवस्था पर जोर दे रहा है। अब स्मिथ के सामने पाकिस्तान के बल्लेबाजी क्रम को मजबूत करने और टीम के प्रदर्शन में निरंतरता लाने की बड़ी चुनौती होगी।
दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया मिलकर करेंगे मेजबानी; ICC ने जारी की मेजबान शहरों की सूची दुबई, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने ICC पुरुष वनडे विश्व कप 2027 के लिए 12 आधिकारिक वेन्यू का ऐलान कर दिया है। यह टूर्नामेंट दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। 2003 के बाद पहली बार वनडे विश्व कप अफ्रीका लौट रहा है, जबकि नामीबिया पहली बार इस टूर्नामेंट की सह-मेजबानी करेगा। इन 12 स्टेडियमों में खेले जाएंगे मुकाबले दक्षिण अफ्रीका (8 वेन्यू): जोहान्सबर्ग – Wanderers Stadium केपटाउन – Newlands डरबन – Kingsmead सेंचुरियन – SuperSport Park ग्केबरहा – St George's Park ब्लोमफोंटेन – Mangaung Oval ईस्ट लंदन – Buffalo Park पार्ल – Boland Park जिम्बाब्वे (3 वेन्यू): हरारे – Harare Sports Club बुलावायो – Queens Sports Club विक्टोरिया फॉल्स – Fale Mosi-oa-Tunya International Cricket Stadium नामीबिया (1 वेन्यू): विंडहोक – Namibia Cricket Ground 24 साल बाद अफ्रीका में लौटेगा विश्व कप ICC ने बताया कि 2027 विश्व कप की थीम "Ubuntu" होगी, जो अफ्रीकी एकता, सहयोग और मेहमाननवाज़ी का प्रतीक है। टूर्नामेंट अक्टूबर-नवंबर 2027 में आयोजित होगा और इसमें 14 टीमें हिस्सा लेंगी। इस संस्करण में नया प्रारूप अपनाया जाएगा, जिसमें ग्रुप स्टेज, सुपर सिक्स और नॉकआउट मुकाबले शामिल होंगे। क्रिकेट प्रशंसकों में उत्साह वेन्यू घोषित होने के साथ ही विश्व कप की तैयारियां तेज हो गई हैं। क्रिकेट प्रेमियों की नजर अब टूर्नामेंट के विस्तृत कार्यक्रम, उद्घाटन मुकाबले और फाइनल के आयोजन स्थल पर टिकी है, जिसकी घोषणा बाद में की जाएगी।
ग्लासगो, एजेंसियां। दक्षिण अफ्रीका के स्टार तैराक चाड ले क्लोस ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया है। उन्होंने पुरुष वर्ग में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाले एथलीट बनकर नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। ले क्लोस ने यह उपलब्धि पुरुषों की 4x100 मीटर फ्रीस्टाइल रिले स्पर्धा में दक्षिण अफ्रीका को कांस्य पदक दिलाने के बाद हासिल की। 19वां कॉमनवेल्थ पदक जीतकर बनाया रिकॉर्ड 34 वर्षीय चाड ले क्लोस ने कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना 19वां पदक जीतते हुए पुरुष वर्ग में सबसे सफल एथलीट बनने का गौरव हासिल किया। इससे पहले वह 18 पदकों के साथ संयुक्त रूप से रिकॉर्ड पर थे। अब वह इस रिकॉर्ड को अकेले अपने नाम कर चुके हैं। लंबे समय से बना रहे हैं दबदबा चाड ले क्लोस पिछले एक दशक से कॉमनवेल्थ गेम्स में दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े सितारों में शामिल रहे हैं। उन्होंने 2014, 2018 और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक जीते थे। तैराकी की बटरफ्लाई स्पर्धाओं में उनका दबदबा लंबे समय तक रहा है। रिले मुकाबले में मिली ऐतिहासिक उपलब्धि ग्लासगो 2026 में पुरुषों की 4x100 मीटर फ्रीस्टाइल रिले में दक्षिण अफ्रीका की टीम ने कांस्य पदक जीता। इस पदक के साथ ही चाड ले क्लोस ने कॉमनवेल्थ इतिहास में अपना नाम सबसे सफल पुरुष एथलीटों की सूची में सबसे ऊपर दर्ज करा लिया। ओलंपिक चैंपियन भी रह चुके हैं ले क्लोस चाड ले क्लोस का करियर बेहद शानदार रहा है। उन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में 200 मीटर बटरफ्लाई में स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा वह कई विश्व चैंपियनशिप और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी पदक जीत चुके हैं। कॉमनवेल्थ इतिहास में दर्ज हुआ नाम ले क्लोस की यह उपलब्धि उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के महानतम खिलाड़ियों की सूची में शामिल करती है। उनके लगातार प्रदर्शन और लंबे करियर ने उन्हें तैराकी जगत में एक अलग पहचान दिलाई है। आगे भी जारी रखना चाहते हैं सफर रिकॉर्ड बनाने के बाद भी चाड ले क्लोस का लक्ष्य खेल में बने रहना और दक्षिण अफ्रीका के लिए और पदक जीतना है। उनकी उपलब्धि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा मानी जा रही है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका ने इतिहास रचते हुए पहली बार टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण में जगह बना ली है। ग्रुप ए के अहम मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने दक्षिण कोरिया को 1-0 से हराकर राउंड ऑफ 32 का टिकट हासिल किया। इससे पहले दक्षिण अफ्रीका 1998, 2002 और 2010 के विश्व कप में हिस्सा ले चुका था, लेकिन कभी नॉकआउट दौर तक नहीं पहुंच पाया था। मासेको के गोल ने दिलाई ऐतिहासिक जीत मैच का पहला हाफ गोलरहित रहा, जहां दोनों टीमों ने कई अवसर बनाए लेकिन कोई भी टीम बढ़त हासिल नहीं कर सकी। दूसरे हाफ में दक्षिण अफ्रीका ने आक्रामक खेल दिखाया और 63वें मिनट में थापेलो मासेको ने शानदार गोल कर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। यही गोल अंत तक निर्णायक साबित हुआ और दक्षिण अफ्रीका ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली। 22 वर्ष 225 दिन की उम्र में मासेको फीफा विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका के लिए गोल करने वाले दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी बन गए। उनके इस प्रदर्शन के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' भी चुना गया। ग्रुप में दूसरे स्थान पर रहा दक्षिण अफ्रीका दक्षिण अफ्रीका ने ग्रुप चरण में एक जीत, एक ड्रॉ और एक हार के साथ कुल चार अंक हासिल किए और ग्रुप ए में दूसरे स्थान पर रहते हुए नॉकआउट में प्रवेश किया। वहीं, दक्षिण कोरिया की आगे बढ़ने की उम्मीदें अब अन्य ग्रुपों के परिणामों पर निर्भर हैं। अब कनाडा से होगी भिड़ंत मैच के बाद थापेलो मासेको ने कहा कि यह जीत किसी सपने के सच होने जैसी है। उन्होंने टीम पर भरोसा जताने वाले प्रशंसकों का धन्यवाद किया और कहा कि कठिन समय के बावजूद टीम ने अपनी क्षमता साबित की है। अब दक्षिण अफ्रीका का सामना राउंड ऑफ 32 में ग्रुप बी की उपविजेता कनाडा से होगा। दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला 29 जून को भारतीय समयानुसार रात 12:30 बजे लॉस एंजिल्स में खेला जाएगा। ऐतिहासिक जीत के बाद दक्षिण अफ्रीकी टीम का आत्मविश्वास ऊंचा है और वह नॉकआउट में भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद के साथ उतरेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में लगातार दो जीत के साथ शानदार शुरुआत करने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम को तीसरे मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के हाथों छह विकेट से हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने न सिर्फ भारत की जीत की लय तोड़ी, बल्कि सेमीफाइनल की दौड़ को भी बेहद रोमांचक बना दिया है। अब भारतीय टीम के लिए आगे का हर मुकाबला ‘करो या मरो’ जैसा हो गया है। ग्रुप-ए में कांटे की टक्कर भारत ने अपने पहले दो मुकाबलों में पाकिस्तान और नीदरलैंड्स को हराकर चार अंक जुटाए थे। हालांकि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली हार के बाद टीम तीन मैचों में दो जीत और एक हार के साथ चार अंकों पर दूसरे स्थान पर है। ग्रुप-ए में ऑस्ट्रेलिया तीन मैचों में तीन जीत के साथ छह अंकों पर शीर्ष पर बना हुआ है। वहीं दक्षिण अफ्रीका भी चार अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है, लेकिन उसका नेट रन रेट भारत से कम है। बांग्लादेश भी दो जीत और एक हार के साथ चार अंक लेकर चौथे स्थान पर मौजूद है, जबकि पाकिस्तान और नीदरलैंड्स सेमीफाइनल की दौड़ से लगभग बाहर हो चुके हैं। भारत के लिए क्या हैं सेमीफाइनल के समीकरण? भारतीय टीम को अब अपने बाकी दो मुकाबले ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के खिलाफ खेलने हैं। सेमीफाइनल की उम्मीदों को मजबूत बनाए रखने के लिए भारत को दोनों मैच जीतना बेहद जरूरी होगा। यदि भारत दोनों मुकाबले जीतता है तो अंतिम चार में जगह लगभग सुनिश्चित हो सकती है। अगर भारत, दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश में से प्रत्येक टीम एक-एक मैच जीतती और एक-एक हारती है, तो फैसला नेट रन रेट के आधार पर होगा। ऐसे में भारत के लिए सिर्फ जीत ही नहीं, बल्कि बड़े अंतर से जीत भी अहम होगी। ऑस्ट्रेलिया पर भी रहेगा दबाव हालांकि ऑस्ट्रेलिया फिलहाल शीर्ष पर है, लेकिन यदि वह अपने शेष दोनों मैच हार जाता है तो ग्रुप की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। ऐसे में ग्रुप-ए में सेमीफाइनल की जंग आखिरी लीग मुकाबलों तक रोमांचक बनी रहने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।