इस्लामाबाद, एजेंसियां। चिनाब नदी में बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति के बाद पाकिस्तान में चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान ने नदी के बहाव को लेकर भारत पर आरोप लगाए हैं और कहा है कि अचानक पानी छोड़े जाने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा है। हालांकि, भारत की ओर से नदी के जलप्रवाह को लेकर अपनी निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत जानकारी साझा किए जाने की बात कही जाती रही है। चिनाब के किनारे कई इलाकों में बढ़ा खतरा चिनाब नदी के बढ़ते जलस्तर से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है और राहत एवं बचाव तैयारियां तेज कर दी गई हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि नदी में पानी बढ़ने से कृषि भूमि और आबादी वाले क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। पाकिस्तान ने भारत पर उठाए सवाल पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि भारत की ओर से बांधों और जलाशयों से पानी छोड़े जाने की वजह से चिनाब नदी का जलस्तर बढ़ा। इस मुद्दे को लेकर पाकिस्तान ने अपनी चिंता जताई है। वहीं, भारत का पक्ष रहा है कि सिंधु जल संधि के तहत दोनों देशों के बीच नदी जल से जुड़ी सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है और जल प्रवाह प्राकृतिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। सिंधु जल संधि को लेकर फिर चर्चा तेज चिनाब नदी का मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है। चिनाब, सिंधु नदी प्रणाली की प्रमुख नदियों में से एक है और दोनों देशों के लिए इसका रणनीतिक महत्व है। सीमा पार जल प्रबंधन पर नजर बाढ़ की स्थिति के बीच दोनों देशों की निगाह नदी के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में आपसी सूचना साझा करना और जल प्रबंधन बेहद जरूरी होता है।
इस्लामाबाद, एजेंसियां। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक संयुक्त पुलिस-सुरक्षा चौकी पर हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई। मारे गए लोगों में सेना के जवान और पुलिसकर्मी शामिल हैं। यह हमला टैंक (Tank) जिले में देर रात हुआ, जिसके बाद पूरे इलाके में सुरक्षा अभियान तेज कर दिया गया। विस्फोटकों से भरे वाहन से चौकी पर हमला प्रारंभिक जांच के अनुसार, हमलावरों ने पहले विस्फोटकों से भरे वाहन को सुरक्षा चौकी के बाहरी हिस्से से टकराकर विस्फोट किया। धमाके के तुरंत बाद भारी हथियारों से लैस आतंकियों ने चौकी में घुसने की कोशिश की और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। विस्फोट से चौकी का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में कई आतंकियों को मार गिराया पाकिस्तानी सेना और पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने 12 आतंकियों को मार गिराया और इलाके में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। आसपास के क्षेत्रों की घेराबंदी कर संदिग्धों की तलाश जारी है। TTP पर लगाया गया हमले का आरोप पाकिस्तानी सेना ने इस हमले के लिए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को जिम्मेदार ठहराया है। पिछले कुछ महीनों में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों पर हमलों में लगातार वृद्धि देखी गई है, जिससे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। सरकार ने शहीद सुरक्षाकर्मियों को दी श्रद्धांजलि प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व ने हमले की निंदा करते हुए शहीद सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि दी है। सरकार ने कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा तथा दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
नागोया, एजेंसियां। एशियन गेम्स 2026 के क्रिकेट मुकाबलों का आधिकारिक ड्रॉ जारी कर दिया गया है। ड्रॉ के अनुसार भारत और पाकिस्तान को अलग-अलग हिस्सों में रखा गया है, जिससे दोनों टीमों के बीच मुकाबला केवल फाइनल में ही संभव होगा। दोनों टीमें अपने-अपने हिस्से से जीतकर फाइनल में पहुंचती हैं, तभी क्रिकेट प्रेमियों को बहुप्रतीक्षित भारत-पाकिस्तान मुकाबला देखने को मिलेगा। भारत और पाकिस्तान को मिला सीधा क्वार्टर फाइनल प्रवेश टी20 रैंकिंग के आधार पर भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और मेजबान जापान को पुरुष क्रिकेट प्रतियोगिता में सीधा क्वार्टर फाइनल खेलने का मौका मिला है। वहीं बाकी टीमें प्रारंभिक दौर के मुकाबले खेलकर नॉकआउट में जगह बनाएंगी। भारत मौजूदा एशियन गेम्स का डिफेंडिंग चैंपियन है और एक बार फिर स्वर्ण पदक बचाने के इरादे से उतरेगा। फाइनल में हो सकती है हाई-वोल्टेज भिड़ंत ड्रॉ के बाद अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या दोनों टीमें अपने-अपने नॉकआउट मुकाबले जीतकर फाइनल तक पहुंच पाती हैं। यदि ऐसा होता है, तो एशियन गेम्स 2026 का स्वर्ण पदक मुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जा सकता है। आयोजन समिति के अनुसार क्रिकेट प्रतियोगिता 17 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच जापान के आइची-नागोया में आयोजित होगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत सरकार ने पाकिस्तान की हिरासत में बंद 188 भारतीय मछुआरों और अन्य नागरिक कैदियों की जल्द रिहाई तथा सुरक्षित स्वदेश वापसी की मांग एक बार फिर दोहराई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मानवीय आधार पर इन नागरिकों को बिना किसी देरी के रिहा किया जाना चाहिए। कैदियों की सूची का किया आदान-प्रदान भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय समझौते के तहत दोनों देशों ने अपनी-अपनी हिरासत में बंद नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूची का आदान-प्रदान किया। इस दौरान भारत ने पाकिस्तान को अपनी हिरासत में मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों की जानकारी सौंपी, जबकि पाकिस्तान ने भी भारतीय नागरिकों की सूची साझा की। मानवीय आधार पर रिहाई की अपील विदेश मंत्रालय ने कहा कि कई भारतीय मछुआरे अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, लेकिन दस्तावेजी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण अब भी पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं। भारत ने पाकिस्तान से सभी औपचारिकताएं जल्द पूरी कर उनकी रिहाई सुनिश्चित करने की अपील की है। समुद्री सीमा पार करने पर होती है गिरफ्तारी अरब सागर में स्पष्ट समुद्री सीमा का अभाव होने के कारण दोनों देशों के मछुआरे अनजाने में एक-दूसरे की समुद्री सीमा में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे मामलों में उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक जेल में रहना पड़ता है। मानवीय मुद्दों पर सहयोग की उम्मीद भारत ने कहा कि दोनों देशों के बीच मानवीय मुद्दों को राजनीतिक विवादों से अलग रखा जाना चाहिए। सरकार ने उम्मीद जताई कि पाकिस्तान मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए भारतीय नागरिकों की शीघ्र रिहाई और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी तनावपूर्ण संबंधों के बीच दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों ने शांति और संवाद की नई पहल की है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif को लिखे संयुक्त पत्र में दोनों देशों से टकराव की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने और द्विपक्षीय रिश्तों को सामान्य बनाने की अपील की गई है। पत्र पर भारत की 61 और पाकिस्तान की 56 हस्तियों के हस्ताक्षर हैं। पूर्व नेताओं और सामाजिक हस्तियों ने की पहल पत्र पर भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah, Mehbooba Mufti, राज्यसभा सांसद Manoj Jha सहित कई पूर्व अधिकारी, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हस्ताक्षर किए हैं। पाकिस्तान की ओर से पूर्व विदेश मंत्री Khurshid Mahmud Kasuri समेत कई प्रमुख हस्तियां इस पहल का हिस्सा बनी हैं। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती शत्रुता से दोनों देशों के विकास, क्षेत्रीय स्थिरता और आम नागरिकों के हित प्रभावित हो रहे हैं। 11 प्रमुख मांगें रखीं संयुक्त पत्र में दोनों सरकारों के सामने 11 प्रमुख सुझाव रखे गए हैं। इनमें द्विपक्षीय वार्ता दोबारा शुरू करना, जम्मू-कश्मीर सहित सभी विवादित मुद्दों पर बातचीत, सीमा पर सैन्य तनाव कम करना, लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना, सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान बहाल करना, क्रिकेट और अन्य खेलों की द्विपक्षीय श्रृंखला शुरू करना, सीधी हवाई सेवाएं बहाल करना, वीजा प्रक्रिया सरल बनाना, दोनों देशों में हाई कमिश्नर की नियुक्ति, बस सेवाओं और सीमा पार आवाजाही को फिर से शुरू करना तथा व्यापारिक संबंधों को बहाल करने जैसी मांगें शामिल हैं। तनाव के बीच शांति की अपील यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब हाल के वर्षों में आतंकवादी घटनाओं, सीमावर्ती तनाव और कूटनीतिक मतभेदों के कारण दोनों देशों के संबंध लगातार प्रभावित रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि संवाद ही सभी समस्याओं का स्थायी समाधान है और दोनों देशों को शांति, सहयोग तथा विकास के साझा लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि, इस पहल पर दोनों सरकारों की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत ने अफगानिस्तान के भीतर पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे "आक्रामक कार्रवाई" और अफगानिस्तान की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा हमला बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई में महिलाओं और बच्चों सहित कई निर्दोष नागरिकों के हताहत होने की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। भारत ने कहा कि आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के नाम पर किसी दूसरे देश की सीमा का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है। भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना समर्थन दोहराया है। अफगानिस्तान ने भी जताया विरोध अफगान अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के हवाई हमलों में कम से कम 36 नागरिकों की मौत और 160 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है। हमलों के बाद अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के वरिष्ठ राजनयिक को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। बढ़ा क्षेत्रीय तनाव भारत ने कहा कि दक्षिण एशिया में शांति बनाए रखने के लिए सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून और एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम से आने वाले दिनों में भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अफगानिस्तान के हिंदूकुश (Hindu Kush) क्षेत्र में शनिवार शाम 6.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसके झटके भारत के दिल्ली-एनसीआर, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में महसूस किए गए। भूकंप के बाद कई स्थानों पर लोग एहतियात के तौर पर घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए। शाम 7:04 बजे आया भूकंप राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप शाम करीब 7:04 बजे (IST) आया। इसका केंद्र अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में था और इसकी गहराई लगभग 215 किलोमीटर दर्ज की गई। अधिक गहराई होने के कारण इसके झटके दूर-दूर तक महसूस किए गए। दिल्ली-एनसीआर में लोगों में दहशत दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद सहित एनसीआर के कई इलाकों में लोगों ने कुछ सेकंड तक कंपन महसूस किया। कई लोग घबराकर इमारतों से बाहर निकल आए। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने भूकंप के झटकों की जानकारी साझा की। पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर में भी महसूस हुए झटके भूकंप का असर पाकिस्तान के कई शहरों और जम्मू-कश्मीर में भी देखा गया। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार भारत में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। संबंधित एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। हिंदूकुश क्षेत्र क्यों है संवेदनशील? हिंदूकुश क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक माना जाता है। यहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण अक्सर मध्यम और तेज तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। इसी वजह से यहां आने वाले भूकंपों के झटके भारत और पाकिस्तान के कई हिस्सों तक महसूस होते हैं। प्रशासन ने की सतर्क रहने की अपील भूकंप के बाद अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक फ्रांसीसी महिला और उसके पांच बच्चे कथित तौर पर लगभग एक दशक तक अलग-थलग और कैद जैसी परिस्थितियों में रहने को मजबूर रहे। परिवार को तब राहत मिली, जब महिला के एक बेटे ने किसी तरह घर से बाहर निकलकर पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूरे परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला खैबर पख्तूनख्वा के पहाड़ी क्षेत्र बारा का है। अधिकारियों का कहना है कि परिवार को लंबे समय तक बाहरी दुनिया से काटकर रखा गया था और महिला के पति पर शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं। बेटे ने पुलिस तक पहुंचाई जानकारी अधिकारियों के मुताबिक, परिवार के एक बच्चे ने साहस दिखाते हुए घर से बाहर निकलकर पुलिस को अपनी स्थिति के बारे में बताया। सूचना मिलने के बाद 18 जून को पुलिस ने संबंधित घर पर छापा मारा। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो 54 वर्षीय फ्रांसीसी नागरिक सिल्वी यास्मीना और उनके पांच बच्चे एक छोटे और जर्जर कमरे में रह रहे थे। पुलिस ने बताया कि परिवार की हालत बेहद खराब थी और कुछ सदस्यों के शरीर पर चोट के निशान भी पाए गए। रेस्क्यू के बाद सभी को तत्काल पेशावर स्थित महिला आश्रय गृह में भेजा गया, जहां उन्हें चिकित्सा और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। महिला ने लगाए गंभीर आरोप जांच के दौरान सिल्वी यास्मीना ने अपने पति पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उन्हें और उनके बच्चों को वर्षों तक स्वतंत्र रूप से जीवन जीने का अधिकार नहीं मिला। महिला के अनुसार, परिवार को लगातार भय और दबाव में रखा गया तथा पति द्वारा नियमित रूप से शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी जाती थी। उन्होंने जांचकर्ताओं को बताया कि उन्हें लगने लगा था कि उनका और उनके बच्चों का भविष्य पूरी तरह अंधकारमय हो चुका है। महिला ने कहा कि परिवार को बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग कर दिया गया था। बच्चों की पढ़ाई भी हुई प्रभावित पुलिस अधिकारियों के अनुसार, परिवार के सदस्यों को अन्य लोगों से मिलने-जुलने की अनुमति नहीं थी। महिला ने बताया कि 2014 में ऑस्ट्रेलिया से पाकिस्तान आने के बाद परिवार पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए थे। जानकारी के मुताबिक, परिवार के दो बड़े बच्चों की शिक्षा बीच में ही छूट गई, जबकि पाकिस्तान में जन्मे तीन छोटे बच्चों का कभी किसी स्कूल में दाखिला नहीं कराया गया। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के सामाजिक और शैक्षणिक विकास पर इसका गंभीर असर पड़ा है। ऑस्ट्रेलिया में हुई थी शादी पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, सिल्वी यास्मीना और उनके पति की मुलाकात ऑस्ट्रेलिया में हुई थी। दोनों ने वर्ष 2003 में विवाह किया था और कुछ वर्षों तक वहीं रहे। बाद में 2014 में परिवार अपने दो बड़े बच्चों के साथ पाकिस्तान आ गया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि पाकिस्तान आने के बाद परिवार किन परिस्थितियों में रह रहा था और कथित उत्पीड़न कब से शुरू हुआ। पति हिरासत में, जांच जारी पुलिस ने महिला के पति को हिरासत में ले लिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न सबूत जुटाए जा रहे हैं तथा मामले से जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। इस बीच, फ्रांसीसी दूतावास को भी मामले की जानकारी दे दी गई है। महिला और उनके बच्चों ने फ्रांस लौटने की इच्छा जताई है। संबंधित अधिकारियों के बीच उनकी वापसी को लेकर प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। मानवाधिकारों को लेकर उठे सवाल इस घटना ने पाकिस्तान में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा तथा मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह लंबे समय तक घरेलू हिंसा और सामाजिक अलगाव का एक गंभीर मामला माना जाएगा। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आरोपों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का पाकिस्तान दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान पाकिस्तान ने ईरानी राष्ट्रपति का विशेष स्वागत किया और उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। इसके बाद क्षेत्रीय राजनीति और दोनों देशों के संबंधों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश करते ही मिला विशेष सैन्य सम्मान राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के विशेष विमान के पाकिस्तान की वायुसीमा में प्रवेश करते ही पाकिस्तानी वायुसेना के JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों ने उसे एस्कॉर्ट किया। इस्लामाबाद पहुंचने पर उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई और औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी प्रदान किया गया। विश्लेषकों का मानना है कि यह स्वागत दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों का संकेत माना जा सकता है। पाकिस्तान ने प्रदान की मानद डॉक्टरेट की उपाधि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय में आयोजित एक विशेष समारोह में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। कराची स्थित कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स पाकिस्तान (CPSP) की ओर से यह सम्मान दिया गया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्वयं उन्हें यह उपाधि प्रदान की। पेजेश्कियान पेशे से हृदय रोग विशेषज्ञ और कार्डियक सर्जन रहे हैं तथा राजनीति में आने से पहले चिकित्सा क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। पहले भी ईरानी राष्ट्रपति को मिल चुका है सम्मान यह पहला अवसर नहीं है जब पाकिस्तान ने किसी ईरानी राष्ट्रपति को इस प्रकार का सम्मान दिया हो। इससे पहले दिवंगत ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को भी पाकिस्तान की ओर से मानद उपाधि प्रदान की गई थी। इससे संकेत मिलता है कि इस्लामाबाद और तेहरान के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतीकात्मक और कूटनीतिक कदम लगातार उठाए जाते रहे हैं। क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर हुई चर्चा यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, सीमा सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा सहयोग तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया की स्थिति, ईरान-अमेरिका वार्ता और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े विषय भी बातचीत का हिस्सा रहे। अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच बढ़ा दौरे का महत्व यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियां तेज हुई हैं। स्विट्जरलैंड में हुई वार्ताओं के बाद दोनों देशों के बीच संभावित समझौते को लेकर कई दौर की चर्चाएं जारी हैं। ऐसे में पाकिस्तान की भूमिका और ईरान के साथ उसके बढ़ते संपर्कों को क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति पेजेश्कियान को दिया गया सम्मान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास और सहयोग को मजबूत करने का संदेश भी है। ऊर्जा, व्यापार, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान और ईरान लंबे समय से सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में यह दौरा भविष्य में दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित प्रसिद्ध सूफी संत बाबा फरीद गंज शकर की दरगाह पर उर्स समारोह के दौरान भगदड़ मचने से कम से कम 80 लोग घायल हो गए। यह हादसा संत बाबा फरीद की 784वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे थे। घटना के बाद दरगाह परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू किया गया। 30 श्रद्धालुओं को अस्पताल में भर्ती कराया गयान पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हादसे में घायल हुए लोगों में से 30 श्रद्धालुओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि अन्य को मौके पर ही प्राथमिक उपचार देकर घर भेज दिया गया। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, घायलों में दो लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है। दरवाजा खुलते ही बेकाबू हुई भीड़ प्रारंभिक जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अधिकारियों ने बताया कि दरगाह का एक प्रवेश द्वार वाहनों के एक काफिले को अंदर जाने देने के लिए खोला गया था। जैसे ही गेट खुला, हजारों श्रद्धालु एक साथ आगे बढ़ने लगे। अचानक बढ़े दबाव और भीड़ के कारण लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। भीड़ नियंत्रित करने में पुलिस को हुई मुश्किल स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की। अधिकारियों के अनुसार, हालात बिगड़ने पर लाठीचार्ज भी किया गया, लेकिन भारी भीड़ के कारण व्यवस्था तुरंत बहाल नहीं हो सकी। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकीं, मोटरसाइकिल से पहुंचाए गए घायल पंजाब इमरजेंसी सर्विस के अधिकारियों ने बताया कि दरगाह के आसपास अत्यधिक भीड़ और यातायात जाम के कारण एम्बुलेंस समय पर घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकीं। ऐसे में कई घायलों को स्थानीय लोगों और राहतकर्मियों की मदद से मोटरसाइकिलों पर अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों ने माना कि भीड़ और जाम ने राहत कार्य को प्रभावित किया। गर्मी और घुटन से कई श्रद्धालु बेहोश अधिकारियों के मुताबिक, भारी भीड़, उमस और भीषण गर्मी के कारण करीब दो दर्जन श्रद्धालु बेहोश हो गए। मेडिकल टीमों ने मौके पर ही कई लोगों को प्राथमिक उपचार दिया। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि अधिकांश लोगों को सांस लेने में परेशानी, चक्कर आने और भीड़ में दबने के कारण चोटें आई हैं। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के निर्देश हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए उर्स और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। बाबा फरीद गंज शकर की दरगाह पाकिस्तान के सबसे प्रमुख सूफी धार्मिक स्थलों में से एक मानी जाती है, जहां हर वर्ष उर्स के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
पाकिस्तान की एक विशेष अदालत ने चर्चित बलोच मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलोच और उनके दो सहयोगियों को हत्या तथा आतंकवाद से जुड़े मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। क्वेटा स्थित एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने यह फैसला सुनाते हुए महरंग बलोच, सिबगतुल्लाह और बलाच कादिर को दोषी माना। अदालत के फैसले के बाद पाकिस्तान में मानवाधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। भीड़ को उकसाने का आरोप जांच एजेंसियों के अनुसार, तीनों आरोपियों ने कथित रूप से एक भीड़ को उकसाया था, जिसने अर्धसैनिक बल के जवान शब्बीर अहमद पर हमला कर उनकी हत्या कर दी थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दावा किया कि घटना के दौरान हिंसा फैलाने और सुरक्षा बलों के खिलाफ माहौल बनाने में आरोपियों की भूमिका थी। इन्हीं आरोपों के आधार पर अदालत ने उन्हें हत्या और आतंकवाद से संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया। कौन हैं महरंग बलोच? 33 वर्षीय महरंग बलोच बलूचिस्तान की प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में गिनी जाती हैं। वह बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) की प्रमुख हैं और लंबे समय से बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी, मानवाधिकार उल्लंघन और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाती रही हैं। महरंग बलोच को पिछले वर्ष मार्च में कई अन्य कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद देश और विदेश में कई मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई थी। मानवाधिकार आयोग ने उठाए सवाल फैसले के बाद पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने मामले की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है। आयोग का कहना है कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ अपनाया जा रहा रवैया चिंता का विषय है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो। आयोग ने कहा कि मानवाधिकारों की वकालत करने वाले लोगों के साथ चरमपंथियों जैसा व्यवहार किए जाने की धारणा लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। BYC ने फैसले को बताया राजनीतिक बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) ने अदालत के फैसले की कड़ी आलोचना की है। संगठन का आरोप है कि यह फैसला बलोच समुदाय की आवाज दबाने और मानवाधिकार आंदोलनों को कमजोर करने की कोशिश है। संगठन ने कहा कि महरंग बलोच लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपने समुदाय के अधिकारों के लिए आवाज उठाती रही हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई को राजनीतिक दृष्टि से देखा जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता Greta Thunberg ने भी इस फैसले की आलोचना की है। उन्होंने मुकदमे को न्याय का मजाक बताते हुए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए। इसके अलावा कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी मामले पर चिंता व्यक्त की है और पाकिस्तान सरकार से निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने की अपील की है। मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ी बहस महरंग बलोच को सजा सुनाए जाने के बाद पाकिस्तान में मानवाधिकारों, नागरिक स्वतंत्रताओं और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर सरकार और जांच एजेंसियां इसे कानून के अनुसार हुई कार्रवाई बता रही हैं, वहीं मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि असहमति की आवाजों को दबाने की धारणा लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए चुनौती बन सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले का प्रभाव केवल बलूचिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पाकिस्तान में मानवाधिकार और राजनीतिक स्वतंत्रता को लेकर चल रही व्यापक बहस को भी प्रभावित करेगा।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान मंगलवार को एक दिवसीय आधिकारिक दौरे पर पाकिस्तान रवाना हुए। वह एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ विशेष विमान ‘मिनाब 168’ से इस्लामाबाद पहुंचेंगे। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने स्वयं सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर अपने पाकिस्तान दौरे की जानकारी साझा की। पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व से करेंगे मुलाकात अपने दौरे के दौरान ईरानी राष्ट्रपति पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार, सीनेट के चेयरमैन तथा नेशनल असेंबली के स्पीकर के साथ भी उनकी बैठकें प्रस्तावित हैं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा, सीमा प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। समझौता ज्ञापनों के क्रियान्वयन पर रहेगा फोकस ईरानी राष्ट्रपति ने कहा है कि इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापनों (MoUs) के प्रभावी क्रियान्वयन को आगे बढ़ाना है। उनके अनुसार, आपसी समझौतों का सफल कार्यान्वयन क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में पहले से हुई सहमतियों को धरातल पर उतारना दोनों देशों की साझा प्राथमिकता है। ‘दायित्वों का पालन ही सफलता की कसौटी’ पाकिस्तान रवाना होने से पहले राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने सोशल मीडिया पर कहा कि किसी भी वार्ता या समझौते की सफलता केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि उसके ईमानदार क्रियान्वयन से तय होती है। उन्होंने कहा कि प्रगति का मूल्यांकन व्यावहारिक परिणामों और किए गए वादों के पालन के आधार पर किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, दायित्वों का सम्मान और प्रतिबद्धताओं का पालन ही किसी भी समझौते की वास्तविक सफलता का पैमाना है। ईरान-अमेरिका वार्ता के बाद अहम मानी जा रही यात्रा ईरानी राष्ट्रपति का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब हाल ही में स्विट्जरलैंड में ईरान और अमेरिका के बीच उच्चस्तरीय वार्ता हुई है। दोनों देशों ने कथित तौर पर अगले 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। ऐसे में माना जा रहा है कि पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के साथ होने वाली बैठकों में पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रमों पर भी विस्तार से चर्चा हो सकती है। द्विपक्षीय संबंधों को मिल सकती है नई गति विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा ईरान और पाकिस्तान के बीच आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा दे सकता है। दोनों देश पहले से ऊर्जा, सीमा सुरक्षा, क्षेत्रीय संपर्क और व्यापार विस्तार जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों बल्कि क्षेत्रीय कूटनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर बढ़े तनाव के बीच पाकिस्तान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दावों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिंधु घाटी सभ्यता, मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसी प्राचीन विरासतों को प्रमुखता से सामने रख रहा है। राजनीतिक और रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रयास केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि सिंधु नदी और उससे जुड़े संसाधनों पर अपने दावों को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। सिंधु जल समझौते के बाद बढ़ी सक्रियता पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के फैसले ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया। भारत ने स्पष्ट किया कि सीमा पार आतंकवाद और द्विपक्षीय सहयोग साथ-साथ नहीं चल सकते। इसके बाद पाकिस्तान ने जल सुरक्षा और ऐतिहासिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिया। इसी दौरान मोहनजोदड़ो जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर नए शोध और खुदाई गतिविधियों को लेकर भी चर्चा तेज हुई। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा को बनाया जा रहा प्रमुख पहचान का हिस्सा सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन शहरी सभ्यताओं में से एक मानी जाती है, जिसके प्रमुख केंद्र आज के पाकिस्तान में स्थित मोहनजोदड़ो और हड़प्पा हैं। हाल के वर्षों में पाकिस्तान इन स्थलों को अपनी राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीकों के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्राचीन स्थलों को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रमुखता देकर पाकिस्तान अपनी ऐतिहासिक जड़ों को इस क्षेत्र की प्राचीन सभ्यताओं से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। बिलावल भुट्टो के बयान से बढ़ी चर्चा पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिंधु घाटी सभ्यता और सिंधु नदी के संबंध का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान की भूमिका को प्रमुखता से रखा। उनके बयानों के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आया। इतिहासकारों का कहना है कि सिंधु घाटी सभ्यता एक साझा दक्षिण एशियाई विरासत है, जिसका प्रभाव वर्तमान भारत, पाकिस्तान और आसपास के क्षेत्रों तक फैला हुआ था। इसलिए इसे किसी एक आधुनिक राष्ट्र-राज्य की विशिष्ट विरासत के रूप में देखना ऐतिहासिक दृष्टि से जटिल विषय है। तक्षशिला और गांधार विरासत पर भी जोर सिंधु घाटी सभ्यता के अलावा पाकिस्तान तक्षशिला और गांधार जैसी प्राचीन बौद्ध एवं हिंदू विरासतों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से प्रस्तुत कर रहा है। इन ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन, सांस्कृतिक कूटनीति और राष्ट्रीय पहचान के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि इस्लाम-पूर्व इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को अधिक महत्व देने की यह रणनीति पाकिस्तान की वैश्विक छवि को व्यापक ऐतिहासिक संदर्भ में प्रस्तुत करने का प्रयास भी हो सकती है। जल विवाद और इतिहास की राजनीति भारत और पाकिस्तान के बीच जल संसाधनों को लेकर जारी विवाद के बीच इतिहास, संस्कृति और सभ्यताओं से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु नदी से जुड़े अधिकारों और दावों का निर्धारण आधुनिक अंतरराष्ट्रीय समझौतों, भौगोलिक वास्तविकताओं और कानूनी व्यवस्थाओं के आधार पर होता है, न कि केवल ऐतिहासिक या सभ्यतागत दावों के आधार पर। ऐसे में सिंधु घाटी सभ्यता को लेकर उभर रहा नया विमर्श आने वाले समय में दक्षिण एशिया की राजनीति, कूटनीति और जल विवादों की चर्चा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वॉशिंगटन: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पाकिस्तान के प्रति नरम रुख और "हम पाकिस्तान से प्यार करते हैं" वाले बयान ने अमेरिका की घरेलू राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। वेंस के बयान के बाद दो रिपब्लिकन सीनेटरों ने पाकिस्तान और कतर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दोनों देशों पर आतंकवादियों को पनाह देने और चरमपंथी संगठनों को समर्थन देने के आरोप लगाए हैं। रिक स्कॉट बोले- पाकिस्तान और कतर का आतंकियों को शरण देने का इतिहास Rick Scott ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दुनिया को अब यह समझ जाना चाहिए कि अमेरिका के असली सहयोगी कौन हैं। उन्होंने लिखा, "कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह देने का लंबा इतिहास रहा है। दोनों देश सार्थक शांति स्थापित करने के बजाय ईरान के दशकों पुराने आतंकी नेटवर्क को बढ़ावा देने में अधिक रुचि रखते हैं।" स्कॉट ने यह भी कहा कि ईरान के साथ ऐसा समझौता संभव है जो सभी पक्षों के हित में हो, लेकिन किसी भी स्थिति में तेहरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। जेडी वेंस के बयान से बढ़ा विवाद विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब JD Vance ने स्विट्जरलैंड में अमेरिका, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दौरान कहा था कि "हम पाकिस्तान से प्यार करते हैं।" वेंस उस समय ईरान के साथ संभावित शांति समझौते की तकनीकी और कूटनीतिक बारीकियों पर चर्चा कर रहे थे। उनके इस बयान के बाद रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही पाकिस्तान को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। टिम शीही ने दिलाई ओसामा बिन लादेन की याद Tim Sheehy ने भी पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका को उसके अतीत को नहीं भूलना चाहिए। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "हमें यह याद रखना चाहिए कि पाकिस्तान ने एक दशक तक ओसामा बिन लादेन को अपने यहां छिपाकर रखा था।" शीही ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अतीत में ऐसे तत्वों को समर्थन दिया, जिन्होंने अमेरिकी हितों के खिलाफ काम किया। UAE, इजरायल और सऊदी अरब को बातचीत में शामिल करने की मांग सीनेटर शीही ने कहा कि यदि पाकिस्तान और कतर को मध्यस्थ की भूमिका दी जा रही है, तो अमेरिका को अपने पारंपरिक सहयोगियों को भी वार्ता प्रक्रिया में शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा, "संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल और सऊदी अरब मध्य पूर्व में अमेरिका के सबसे विश्वसनीय सहयोगी हैं। किसी भी शांति प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।" कतर पर भी लगाए गंभीर आरोप शीही ने कतर पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह वर्षों से विभिन्न चरमपंथी संगठनों के लिए वित्तीय नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा, "यह मान लेना कि पाकिस्तान और कतर पूरी तरह निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे, वास्तविकता से दूर है।" अमेरिका में पाकिस्तान की भूमिका पर फिर छिड़ी बहस रिपब्लिकन सांसदों के बयानों से साफ है कि अमेरिका में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर पुराने सवाल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। जेडी वेंस के हालिया बयान के बाद वॉशिंगटन में यह बहस तेज हो गई है कि मध्य पूर्व की नई कूटनीतिक पहल में पाकिस्तान और कतर की भूमिका कितनी प्रभावी और निष्पक्ष मानी जा सकती है।
Donald Trump Iran Warning: मध्य पूर्व में शांति बहाली की कोशिशों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन इसी दौरान ट्रंप ने ईरान को सीधे सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देकर तनाव बढ़ा दिया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर दी धमकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक सख्त पोस्ट साझा करते हुए कहा कि ईरान को लेबनान में सक्रिय अपने समर्थित सशस्त्र गुटों और प्रॉक्सी संगठनों को तुरंत हिंसक गतिविधियां रोकने के लिए कहना चाहिए। ट्रंप ने लिखा, "यदि ईरान ने अपने भारी भुगतान पाने वाले प्रॉक्सी संगठनों को तबाही मचाने से नहीं रोका, तो अमेरिका फिर से बड़ा हमला करेगा। यह हमला पिछले सप्ताह की कार्रवाई से भी कहीं अधिक भीषण होगा।" शांति वार्ता के बीच बढ़ा कूटनीतिक दबाव ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए महत्वपूर्ण वार्ता चल रही है। इस बैठक में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा तथा आर्थिक प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। ट्रंप की नई चेतावनी ने इस शांति प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ईरान पर अतिरिक्त कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। लेबनान में ईरान समर्थित गुटों को लेकर अमेरिका चिंतित अमेरिका लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि ईरान लेबनान में सक्रिय अपने समर्थित संगठनों, विशेष रूप से हिज्बुल्लाह, के जरिए क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करता है। वॉशिंगटन का मानना है कि इन संगठनों की गतिविधियां न केवल इजरायल बल्कि पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए चुनौती हैं। ट्रंप ने अपने संदेश में स्पष्ट संकेत दिया कि यदि ईरान ने इन समूहों पर नियंत्रण नहीं किया, तो अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। वार्ता पर पड़ सकता है असर विश्लेषकों का कहना है कि एक तरफ शांति वार्ता और दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई की खुली चेतावनी, दोनों मिलकर अमेरिका-ईरान संबंधों को और जटिल बना सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ईरान ट्रंप की चेतावनी पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या स्विट्जरलैंड में जारी वार्ता किसी ठोस समझौते तक पहुंच पाती है। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच ट्रंप का यह बयान एक बार फिर इस क्षेत्र की नाजुक स्थिति को उजागर करता है।
बर्गेनस्टॉक (स्विट्जरलैंड): मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में स्थायी शांति बहाल करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका और ईरान के बीच अहम शांति वार्ता शुरू हो गई है। इस बातचीत में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव, परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। बैठक के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता को "ऐतिहासिक अवसर" करार देते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका, ईरान के साथ अपने संबंधों को नई और सकारात्मक दिशा देने के लिए तैयार है। ईरान के सामने अमेरिका की बड़ी शर्त जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका, ईरान के साथ संबंध सामान्य करने और दोस्ती का नया अध्याय शुरू करने को तैयार है, लेकिन इसके लिए तेहरान को दो महत्वपूर्ण शर्तों को स्थायी रूप से स्वीकार करना होगा— क्षेत्र में अस्थिरता और संघर्ष फैलाने वाली नीतियों का त्याग। परमाणु हथियार हासिल करने की महत्वाकांक्षा को हमेशा के लिए छोड़ना। वेंस ने कहा कि यदि ईरान इन दोनों मुद्दों पर सकारात्मक और स्थायी कदम उठाता है, तो वाशिंगटन उसके साथ रिश्तों को पूरी तरह बदलने के लिए तैयार है। होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु मुद्दे पर प्रगति का दावा अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने जैसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक लक्ष्यों की दिशा में पहले ही महत्वपूर्ण प्रगति हो चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह वार्ता मध्य पूर्व में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए नए रास्ते खोलेगी। पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना जेडी वेंस ने इस शांति वार्ता को संभव बनाने में पाकिस्तान की भूमिका की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की कूटनीतिक कोशिशों ने अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज तक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वेंस ने आसिम मुनीर को "एक महान सैन्य नेता और कुशल राजनयिक" बताया। भारतीय पत्नी और पाकिस्तानी जनरल का किया जिक्र हल्के-फुल्के अंदाज में जेडी वेंस ने कहा कि उनकी जिंदगी में दो बेहद महत्वपूर्ण लोग हैं—एक उनकी भारतीय मूल की पत्नी उषा वेंस और दूसरे पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर। उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों में उनकी जनरल मुनीर के साथ लगातार बातचीत हुई है और क्षेत्रीय शांति स्थापित करने के प्रयासों में उनका सहयोग महत्वपूर्ण रहा है। मिडिल ईस्ट में शांति और ऊर्जा सुरक्षा पर नजर वेंस ने उम्मीद जताई कि स्विट्जरलैंड में जारी यह वार्ता मध्य पूर्व में तनाव कम करने, तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह वार्ता सफल रहती है, तो न केवल क्षेत्रीय संघर्ष कम हो सकते हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
इस्लामाबाद/नई दिल्ली: सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पानी के मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए भारत के खिलाफ युद्ध की चेतावनी दी है। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि सिंधु जल संधि को निलंबित रखने के अपने फैसले में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। पानी के लिए युद्ध की चेतावनी पाकिस्तानी न्यूज चैनल ARY से बातचीत में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि यदि पाकिस्तान की जल सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ तो देश भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर विचार कर सकता है। उन्होंने कहा, "पानी हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है। अगर हमें लगा कि भारत हमारी जल आपूर्ति को रोकने या प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, तो हम युद्ध का रास्ता भी अपना सकते हैं।" ख्वाजा आसिफ ने यह भी दावा किया कि यदि इस्लामाबाद को ऐसे प्रमाण मिलते हैं कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने की दिशा में कदम उठा रहा है, तो पाकिस्तान उचित जवाब देने के लिए तैयार रहेगा। भारत ने सिंधु जल संधि निलंबित रखने का फैसला बरकरार रखा भारत ने वर्ष 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित रखने के अपने फैसले पर सख्त रुख कायम रखा है। नई दिल्ली का कहना है कि अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी, के बाद यह कदम उठाया गया। भारत ने स्पष्ट किया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के ढांचे को खत्म करने के लिए ठोस, विश्वसनीय और स्थायी कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि की बहाली पर विचार नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था के लिए अहम है सिंधु जल संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता में 1960 में हुई सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को सिंधु नदी प्रणाली के लगभग 80 प्रतिशत जल के उपयोग का अधिकार प्राप्त है। यह पानी पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि देश की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। कई जल विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में मौजूदा जल संकट केवल बाहरी कारणों का परिणाम नहीं है। खराब जल प्रबंधन, जल संरक्षण की कमी, पुरानी सिंचाई व्यवस्था और नीतिगत कमजोरियां भी संकट को गंभीर बनाने के लिए जिम्मेदार हैं। पाकिस्तान में गहराता जल संकट पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट, आर्थिक चुनौतियों और आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश के कई कृषि क्षेत्रों में जल संसाधनों का समुचित प्रबंधन नहीं होने के कारण पानी की उपलब्धता लगातार घट रही है। ऐसे में ख्वाजा आसिफ का बयान भारत-पाक संबंधों में नई तल्खी पैदा कर सकता है और सिंधु जल संधि को लेकर कूटनीतिक विवाद को और गहरा सकता है।
बर्गेनस्टॉक (स्विट्जरलैंड): अमेरिका और ईरान के बीच रविवार (21 जून) को स्विट्जरलैंड में शुरू हुई बहुप्रतीक्षित वार्ता की शुरुआत ही तनावपूर्ण माहौल में हुई। बातचीत शुरू होने से पहले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित संयुक्त फोटो सेशन और हाथ मिलाने के कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके कुछ देर बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य कार्रवाई की नई चेतावनी पर नाराजगी जताते हुए ईरानी प्रतिनिधिमंडल बैठक स्थल से बाहर निकल गया। इस घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी चर्चा तेज हो गई है। बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में हुई पहली बैठक अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का पहला दौर स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में आयोजित किया गया। बैठक में अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए। पाकिस्तान और कतर इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। यह वार्ता हाल ही में हुए 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' (MoU) के तहत शुरू हुई है, जिसके अनुसार अगले 60 दिनों तक दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत होगी। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की जानी है। हाथ मिलाने और फोटो सेशन से ईरान का इनकार ईरानी समाचार एजेंसी के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और आयोजकों ने बातचीत शुरू होने से पहले दोनों पक्षों के नेताओं के बीच हाथ मिलाने और संयुक्त फोटो सेशन की व्यवस्था की थी। ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ तथा विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसमें हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। दोनों नेता निर्धारित फोटो सेशन से पहले ही बैठक कक्ष से बाहर निकल गए। कैमरे में कैद हुआ पूरा घटनाक्रम सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कमरे से बाहर निकलने से ठीक पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से संक्षिप्त बातचीत की। इसके बाद वह अचानक मुड़े और पूरे ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कक्ष से बाहर चले गए। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हो गया, जिससे वार्ता की शुरुआत में ही दोनों पक्षों के बीच मौजूद अविश्वास और तनाव उजागर हो गया। ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी नाराजगी सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य कार्रवाई संबंधी हालिया बयान ने ईरानी पक्ष की नाराजगी बढ़ा दी। ईरान का मानना है कि कूटनीतिक बातचीत के दौरान इस तरह की सार्वजनिक चेतावनियां वार्ता के माहौल को प्रभावित करती हैं और आपसी भरोसे को कमजोर करती हैं। आगे की बातचीत पर दुनिया की नजर शुरुआती तनाव के बावजूद दोनों पक्षों के बीच वार्ता प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं हुई है। मध्यस्थ देशों पाकिस्तान और कतर की कोशिश है कि बातचीत का अगला दौर सकारात्मक माहौल में आगे बढ़े। विशेषज्ञों का मानना है कि स्विट्जरलैंड में शुरू हुई यह वार्ता पश्चिम एशिया की राजनीति, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजारों के भविष्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
नई दिल्ली: महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली हार ने भारतीय टीम की सेमीफाइनल की राह मुश्किल कर दी है। पाकिस्तान और नीदरलैंड्स को हराकर शानदार शुरुआत करने वाली टीम इंडिया तीसरे मुकाबले में प्रोटियाज टीम के सामने टिक नहीं सकी। अब सिर्फ एक हार ने ग्रुप-1 के समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। ग्रुप-1 में कैसी है स्थिति? ग्रुप-1 में ऑस्ट्रेलिया लगातार तीन जीत के साथ शीर्ष पर है। भारत ने तीन मैचों में दो जीत हासिल की हैं और फिलहाल दूसरे स्थान पर मौजूद है। दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश के अंक समान हैं, लेकिन बेहतर नेट रन रेट के कारण अफ्रीकी टीम को बढ़त हासिल है। वहीं पाकिस्तान और नीदरलैंड्स की लगातार तीन हार के बाद उनकी नॉकआउट की उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी हैं। भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता? आईसीसी के नियमों के अनुसार प्रत्येक ग्रुप से सिर्फ दो टीमें ही नॉकआउट चरण में पहुंचेंगी। भारत को अब अपने बचे हुए मुकाबले बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने हैं। अगर भारतीय टीम बांग्लादेश को हराने में सफल रहती है लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार जाती है, तो उसके कुल 6 अंक होंगे। दूसरी ओर दक्षिण अफ्रीका के सामने बांग्लादेश और नीदरलैंड्स जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीमें हैं। यदि प्रोटियाज टीम दोनों मुकाबले जीत लेती है, तो वह 8 अंकों के साथ सेमीफाइनल में जगह बना सकती है और भारत बाहर हो सकता है। हालांकि अगर ऑस्ट्रेलिया अपने आगामी मैचों में हारती है या अन्य परिणाम भारत के पक्ष में जाते हैं, तो टीम इंडिया के लिए उम्मीदें बनी रह सकती हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच का हाल भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 159 रन का लक्ष्य रखा था। जवाब में दक्षिण अफ्रीका ने अनुभवी बल्लेबाज मारिजाम काप की शानदार 81 रन की पारी की बदौलत लक्ष्य को 5 गेंद शेष रहते और 6 विकेट से हासिल कर लिया। मैच के दौरान राधा यादव ने मारिजाम काप के दो अहम कैच छोड़े, जब वह 27 और 66 रन के निजी स्कोर पर थीं। यही चूक अंत में भारतीय टीम पर भारी पड़ गई। अब टीम इंडिया के लिए हर मुकाबला करो या मरो जैसा बन गया है और सेमीफाइनल की उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए अगले मैचों में जीत बेहद जरूरी होगी।
इस्लामाबाद, एजेंसियां। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सिंधु जल संधि स्थगित रहने को लेकर भारत को धमकी दी है। पाकिस्तानी चैनल ARY न्यूज से बातचीत में आसिफ ने कहा कि अगर पाकिस्तान को लगा कि उसकी जल सुरक्षा खतरे में है, तो वह भारत के खिलाफ जंग छेड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह में दखल दे रहा है और रणनीतिक हथियार के तौर पर इसका इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले एक साल में इस मामले में क्या नए घटनाक्रम हुए हैं, इसकी उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित किया है बता दें कि अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं की जाएगी। गंभीर जल संकट का सामना कर रहा पाकिस्तान रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। खासकर सिंध और बलूचिस्तान में पानी की कमी लगातार बढ़ रही है। सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक- नॉर्थ वेस्ट कैनाल में 64.1% पानी की कमी है। राइस कैनाल में 38% की कमी दर्ज की गई है। दादू कैनाल में 82% तक पानी की कमी है। पाकिस्तान की सिंचाई व्यवस्था के अहम हिस्से सुक्कुर बैराज को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। पानी का स्तर लगातार घटने से कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। भारत-पाकिस्तान के बीच का सिंधु जल समझौता क्या है? सिंधु नदी प्रणाली में कुल 6 नदियां हैं- सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज। इनके किनारे का इलाका करीब 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें 47% जमीन पाकिस्तान, 39% जमीन भारत, 8% जमीन चीन और 6% जमीन अफगानिस्तान में है। इन सभी देशों के करीब 30 करोड़ लोग इन इलाकों में रहते हैं। बंटवारे के पहले से पानी को लेकर झगड़ा 1947 में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के पहले से ही भारत के पंजाब और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच नदियों के पानी के बंटवारे का झगड़ा शुरू हो गया था। 1947 में भारत और पाक के इंजीनियरों के बीच 'स्टैंडस्टिल समझौता' हुआ। इसके तहत दो मुख्य नहरों से पाकिस्तान को पानी मिलता रहा। ये समझौता 31 मार्च 1948 तक चला। 1 अप्रैल 1948 को जब समझौता लागू नहीं रहा तो भारत ने दोनों नहरों का पानी रोक दिया। इससे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की 17 लाख एकड़ जमीन पर खेती बर्बाद हो गई। दोबारा हुए समझौते में भारत पानी देने को राजी हो गया। इसके बाद 1951 से लेकर 1960 तक वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में भारत पाकिस्तान में पानी के बंटवारे को लेकर बातचीत चली और आखिरकार 19 सितंबर 1960 को कराची में भारत के PM नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच दस्तखत हुए। इसे इंडस वाटर ट्रीटी या सिंधु जल संधि कहा जाता है।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच दो दिनों तक चली उच्चस्तरीय वार्ता का पहला दौर सकारात्मक माहौल में संपन्न हुआ। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुई इस बैठक में दोनों देशों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दों के बीच हुई इस बैठक को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन अहम मुद्दों पर बनी सहमति वार्ता में दोनों पक्षों ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का फैसला लिया, जो पूरे समझौता प्रक्रिया की निगरानी करेगी। साथ ही परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों, निगरानी तंत्र और विवाद समाधान जैसे विषयों पर अलग-अलग कार्य समूह बनाए जाएंगे। तकनीकी स्तर की वार्ता तुरंत शुरू करने पर भी सहमति बनी है, जो पूरे सप्ताह स्विट्जरलैंड में जारी रहेगी। होर्मुज और तेल आपूर्ति पर विशेष चर्चा बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की गलतफहमी या सैन्य टकराव से बचने के लिए सीधी संचार व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति जताई। इसके अलावा वैश्विक तेल आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहे प्रभाव पर भी विस्तार से चर्चा हुई। लेबनान में संघर्षविराम बनाए रखने पर जोर लेबनान में युद्धविराम को प्रभावी बनाए रखने के लिए ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाने का निर्णय लिया गया। इस तंत्र में लेबनान के साथ कतर और पाकिस्तान भी समन्वयक की भूमिका निभाएंगे। हालांकि इस्राइल और हिजबुल्ला इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं। कूटनीतिक समाधान की दिशा में बढ़े कदम वार्ता में शामिल सभी पक्षों ने विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीतिक संवाद जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले 60 दिनों में तय रोडमैप के अनुसार प्रगति होती है, तो परमाणु समझौते, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंधों जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।