नालंदा: बिहार के नालंदा जिले से स्कूल के मिड-डे मील को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नूरसराय प्रखंड के परासी मध्य विद्यालय में बच्चों को परोसे गए भोजन में नमक की जगह कथित तौर पर डिटर्जेंट पाउडर मिला दिया गया। खाना खाने के बाद 34 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया गया है, जबकि तीन रसोइयों को काम से हटा दिया गया है। अब जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने का भी निर्देश दिया गया है। तीन रसोइयों को हटाया गया, प्रधानाध्यापक सस्पेंड जांच में प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने के बाद विद्यालय की तीन रसोइयों मंटू देवी, शारदा देवी और निपु देवी को कार्यमुक्त कर दिया गया है। वहीं, विद्यालय के प्रधानाध्यापक शैलेन्द्र कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि बच्चों की सेहत से जुड़ी इस गंभीर लापरवाही को किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। अब दोषियों पर दर्ज होगी FIR मामले को लेकर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया है। यानी कार्रवाई अब विभागीय जांच तक सीमित नहीं रहेगी। जांच के दौरान जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की जांच के बाद यह भी स्पष्ट होगा कि भोजन में डिटर्जेंट कैसे पहुंचा और इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है। बीआरपी और भोजन सप्लाई करने वाली संस्था से जवाब मिड-डे मील की निगरानी से जुड़े प्रखंड साधनसेवी महेश प्रसाद से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके अलावा भोजन की आपूर्ति करने वाली एकता शक्ति फाउंडेशन के परियोजना प्रबंधक से भी जवाब तलब किया गया है। विभाग ने साफ किया है कि जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर संस्था के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर उसका निबंधन रद्द करने की कार्रवाई भी हो सकती है। वहीं, मिड-डे मील के डीपीओ के खिलाफ भी आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। भोजन परोसने से पहले चखना जरूरी, फिर भी कैसे हुई चूक? मिड-डे मील के नियमों के मुताबिक बच्चों को भोजन परोसने से पहले शिक्षक को खाना चखकर उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच करनी होती है। इसके बाद ही बच्चों को भोजन दिया जाना चाहिए। नालंदा की घटना ने इसी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर भोजन की सही तरीके से जांच की गई होती तो डिटर्जेंट जैसी चीज का पता पहले ही चल सकता था। तीन महीने में सामने आईं 22 घटनाएं बिहार में मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर पिछले कुछ समय में कई शिकायतें सामने आई हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, तीन महीनों में 22 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अरवल में 75 स्कूलों के मिड-डे मील में कीड़े मिलने की शिकायत के बाद भोजन वितरण रोकना पड़ा था। मधेपुरा में भोजन में छिपकली मिलने के बाद करीब 70 बच्चों के बीमार होने का मामला सामने आया था। खगड़िया और सहरसा से भी भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। ऐसे में नालंदा की घटना ने स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग ने दिया सख्त कार्रवाई का संकेत नालंदा की घटना के बाद शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि मिड-डे मील में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बच्चों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है। फिलहाल प्रधानाध्यापक के निलंबन, तीन रसोइयों को हटाने और संबंधित अधिकारियों व आपूर्ति संस्था से जवाब मांगने के बाद अब FIR की कार्रवाई पर नजर है। जांच पूरी होने के बाद यह साफ होगा कि इस मामले में और किन लोगों की जिम्मेदारी तय होती है।
सहरसा: सहरसा जिला मुख्यालय से सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल क्षेत्र के हुसैन चौक तक सफर अब पहले के मुकाबले आसान होने की उम्मीद है। भारतीय नगर से हुसैन चौक तक सड़क को चौड़ा और मजबूत करने की योजना पर काम आगे बढ़ गया है। पथ निर्माण विभाग ने इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार कर विभाग को सौंप दी है। फिलहाल यह मार्ग कई हिस्सों में संकरी सड़क के कारण यातायात दबाव झेलता है। खासकर व्यस्त समय में वाहनों की आवाजाही बढ़ने पर जाम की स्थिति बन जाती है। सड़क चौड़ीकरण की योजना पूरी होने के बाद स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के गांवों से आने-जाने वाले यात्रियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। भारतीय नगर से हुसैन चौक तक चौड़ीकरण की तैयारी प्रस्ताव के मुताबिक भारतीय नगर से सिमरी बख्तियारपुर क्षेत्र के हुसैन चौक स्थित दुर्गा मंदिर तक सड़क को चौड़ा किया जाएगा। इस मार्ग का इस्तेमाल बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्थानीय वाहन चालक और दूसरे क्षेत्रों के यात्री करते हैं। स्थानीय लोगों की ओर से लंबे समय से सड़क के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण की मांग की जा रही थी। अब DPR तैयार होने के बाद इस मांग के पूरा होने की उम्मीद बढ़ गई है। कई गांवों की आवाजाही होगी आसान सड़क निर्माण का लाभ केवल सहरसा और सिमरी बख्तियारपुर के यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। सुलिंदाबाद, दिवारी, भरौली, विशुनपुर और सोनवर्षा कचहरी समेत आसपास के कई गांवों की आबादी को बेहतर सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है। सड़क चौड़ी होने से दो वाहनों के एक साथ गुजरने में आसानी होगी। इससे जाम की समस्या कम होने और यात्रा का समय घटने की संभावना है। कुछ हिस्सों में 7 मीटर तक होगी सड़क की चौड़ाई विभागीय जानकारी के अनुसार, भारतीय नगर से सुलिंदाबाद हाई स्कूल तक सड़क की प्रस्तावित चौड़ाई 7 मीटर रखी गई है। दूसरे हिस्सों में करीब 5.50 मीटर चौड़ाई का प्रावधान किया गया है। सड़क के घुमावदार हिस्सों में मौजूदा अलाइनमेंट को बरकरार रखते हुए चौड़ीकरण करने की योजना है। यानी सड़क के वर्तमान मार्ग में बड़े बदलाव के बजाय उसी दिशा में इसे अधिक उपयोगी और सुरक्षित बनाया जाएगा। दीवारी मंदिर के पास पुराने पुल का भी होगा सुधार सड़क चौड़ीकरण योजना में सिर्फ सड़क को मजबूत करने पर ही जोर नहीं दिया गया है। दीवारी मंदिर के पास नहर पर बने पुराने और जर्जर पुल के जीर्णोद्धार को भी परियोजना में शामिल किया गया है। लंबे समय से खराब हालत में पड़े इस पुल से हादसे का खतरा बना रहता था। पुल की मरम्मत और मजबूतीकरण होने के बाद इस हिस्से में आवागमन अधिक सुरक्षित होने की उम्मीद है। DPR के बाद अब स्वीकृति और टेंडर का इंतजार पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण के लिए DPR तैयार कर विभाग को भेज दी गई है। अब विभागीय स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद निर्माण कार्य जमीन पर शुरू होने का रास्ता साफ होगा। यानी फिलहाल परियोजना कागजी प्रक्रिया के चरण में है, लेकिन DPR तैयार होने से काम आगे बढ़ने की उम्मीद मजबूत हुई है। वर्षों पुरानी परेशानी से मिल सकती है राहत भारतीय नगर से हुसैन चौक तक सड़क का चौड़ीकरण स्थानीय लोगों के लिए लंबे समय से उठ रही मांग को पूरा करने वाला कदम माना जा रहा है। सड़क और पुल दोनों के सुधार से इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। अगर परियोजना तय प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ती है, तो सहरसा से सिमरी बख्तियारपुर क्षेत्र के बीच आवागमन को बड़ी सुविधा मिल सकती है और दर्जनों गांवों की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।
पटना: बाबा बैद्यनाथ धाम से पूजा-अर्चना कर लौट रहे श्रद्धालुओं की बस गुरुवार को पटना जिले के फतुहा में हादसे का शिकार हो गई। तेज रफ्तार और अनियंत्रित हाइड्रा ने बस में जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के वक्त बस की छत पर बैठे दो कांवरियों की मौत हो गई। घटना की खबर सारण के अमनौर थाना क्षेत्र स्थित कासिमपुर गांव पहुंचते ही वहां मातम छा गया। शुक्रवार को दोनों मृतकों के शव गांव पहुंचने पर परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। 30 श्रद्धालु बाबाधाम से लौट रहे थे जानकारी के मुताबिक कासिमपुर गांव से करीब 30 श्रद्धालु बस से बाबा बैद्यनाथ धाम गए थे। जलाभिषेक और दर्शन-पूजन के बाद सभी श्रद्धालु बस से वापस अपने गांव लौट रहे थे। गुरुवार, 13 अगस्त को फतुहा के पास बस गुजर रही थी। इसी दौरान एक अनियंत्रित हाइड्रा ने बस में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर के समय कुछ श्रद्धालु बस की छत पर बैठे हुए थे। छत पर बैठे दो कांवरियों ने मौके पर तोड़ा दम हादसा इतना भीषण था कि बस की छत पर बैठे दो श्रद्धालु सीधे इसकी चपेट में आ गए। दोनों को गंभीर चोटें आईं और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान 60 वर्षीय राजदेव भगत और 30 वर्षीय पूजन राय के रूप में हुई है। दोनों कासिमपुर गांव के रहने वाले थे। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचे शव पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों शवों को परिजनों को सौंप दिया। शुक्रवार देर रात शव कासिमपुर गांव पहुंचे। शवों के गांव पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण पीड़ित परिवारों को सांत्वना देने के लिए उनके घर पहुंचे। पूजन राय की मौत से परिवार पर टूटा संकट हादसे में जान गंवाने वाले पूजन राय अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य बताए गए हैं। उनकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिजनों के मुताबिक पूजन राय के पीछे पत्नी शांति देवी, 14 वर्षीय बेटा भोला और 12 वर्षीय बेटी प्रीति कुमारी हैं। परिवार के पास पक्का मकान भी नहीं होने की बात सामने आई है। अचानक हुई इस मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव के लोग भी पीड़ित परिवार की मदद और उन्हें संभालने की कोशिश में जुटे हैं। हादसे के बाद सुरक्षा को लेकर सवाल बाबाधाम से लौट रहे श्रद्धालुओं के साथ हुए इस हादसे ने सड़क सुरक्षा और बसों की छत पर यात्रियों के सफर को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। धार्मिक यात्राओं के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु बसों से यात्रा करते हैं। ऐसे में वाहन क्षमता और यात्रियों की सुरक्षित बैठने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। फतुहा हादसे में दो लोगों की मौत के बाद कासिमपुर गांव में शोक का माहौल है। पुलिस घटना की परिस्थितियों और टक्कर के कारणों की जांच कर रही है।
पटना: पटना मेट्रो के विस्तार को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। खेमनीचक से मीठापुर तक 3.1 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड ट्रैक का निर्माण तेजी से चल रहा है। इस नए रूट पर अधिक यात्रियों को सफर कराने के लिए छह कोच वाली मेट्रो ट्रेनें चलाने की तैयारी है। पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की ओर से तीन नई छह कोच वाली ट्रेन सेट मंगाई जा रही हैं। इन ट्रेनों के दिसंबर 2026 तक पटना पहुंचने की उम्मीद है। नए रूट के शुरू होने से राजधानी के कई प्रमुख इलाकों के यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है। छह कोच वाली मेट्रो में ज्यादा यात्री कर सकेंगे सफर फिलहाल पटना मेट्रो में तीन कोच वाली ट्रेन सेट का परिचालन किया जा रहा है। यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए अब ज्यादा क्षमता वाली ट्रेनें शामिल करने की तैयारी है। इसके लिए पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने पुणे मेट्रो को तीन छह-कोच ट्रेन सेट का ऑर्डर दिया है। इन्हें तीन साल की लीज पर लाने की योजना है। नई ट्रेनों के आने के बाद खासकर व्यस्त समय में यात्रियों को अधिक जगह मिलने की उम्मीद है। इससे मेट्रो की यात्री क्षमता भी बढ़ेगी। मीठापुर-खेमनीचक के बीच बनेंगे चार स्टेशन खेमनीचक और मीठापुर के बीच बन रहे एलिवेटेड कॉरिडोर की लंबाई करीब 3.1 किलोमीटर है। इस हिस्से का सुपर स्ट्रक्चर तैयार होने की जानकारी दी गई है। इस रूट पर कुल चार स्टेशन प्रस्तावित हैं: मीठापुर रामकृष्ण नगर जगनपुरा खेमनीचक इन स्टेशनों पर निर्माण कार्य जारी है। यात्रियों की सुविधा के लिए लिफ्ट, एस्केलेटर और अन्य जरूरी सुविधाओं से जुड़े काम भी किए जा रहे हैं। जून 2027 तक शुरू हो सकता है परिचालन मीठापुर से खेमनीचक के बीच मेट्रो सेवा शुरू करने का लक्ष्य जून 2027 रखा गया है। परियोजना के निर्माण और संचालन से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की ओर से 628.32 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यह कॉरिडोर पटना के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को और मजबूत करेगा। मलाही पकड़ी से पटना जंक्शन तक अंडरग्राउंड लाइन पटना मेट्रो के दूसरे महत्वपूर्ण हिस्से पर भी काम चल रहा है। मलाही पकड़ी से पटना जंक्शन तक करीब 10.54 किलोमीटर लंबी भूमिगत लाइन तैयार की जा रही है। जानकारी के मुताबिक इस टनल का करीब 100 मीटर हिस्सा अभी बाकी है और इसे नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस रूट पर राजेंद्रनगर, मोइनुल हक स्टेडियम, पटना विश्वविद्यालय, पीएमसीएच, गांधी मैदान, आकाशवाणी और पटना जंक्शन जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल होंगे। पूरे हिस्से को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। खेमनीचक बनेगा बड़ा इंटरचेंज स्टेशन पटना मेट्रो नेटवर्क में खेमनीचक स्टेशन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है। इसे अक्टूबर में शुरू करने की तैयारी है। यहां दो अलग-अलग कॉरिडोर आपस में जुड़ेंगे। एक लाइन मलाही पकड़ी की ओर जाएगी, जबकि दूसरी मीठापुर की दिशा में होगी। स्टेशन शुरू होने के बाद यात्रियों को यहां मेट्रो बदलने की सुविधा मिल सकेगी। तीन मंजिला खेमनीचक स्टेशन दोनों कॉरिडोर के बीच कनेक्टिविटी का अहम केंद्र बनेगा। पटना जंक्शन से दानापुर तक भी निर्माण जारी मेट्रो परियोजना के अन्य हिस्सों में भी निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा है। पटना जंक्शन से रुकनपुरा तक अंडरग्राउंड मेट्रो का काम शुरू किया जा रहा है, जबकि रुकनपुरा से दानापुर के बीच एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण जारी है। पटना जंक्शन से मीठापुर को जोड़ने के लिए प्रस्तावित अंडरग्राउंड टनल का काम अभी शुरू होना बाकी है। 32.50 किलोमीटर का होगा पटना मेट्रो नेटवर्क पटना मेट्रो परियोजना की कुल लंबाई करीब 32.50 किलोमीटर बताई गई है। नेटवर्क में दानापुर से पटना सिटी तक का क्षेत्र शामिल है। अलग-अलग कॉरिडोर और स्टेशनों का निर्माण पूरा होने के बाद पटना में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं, छह कोच वाली नई मेट्रो ट्रेनें बढ़ती यात्री संख्या को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब विद्यार्थियों को पढ़ाई से जुड़े सवालों और विषयों की कठिनाइयों के समाधान के लिए केवल स्कूल के समय पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 15 अगस्त से छात्र रात 11 बजे तक ऑनलाइन शिक्षकों से जुड़कर अपनी पढ़ाई से जुड़े सवाल पूछ सकेंगे। इस सुविधा का उद्देश्य सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान आने वाली समस्याओं का समय पर समाधान उपलब्ध कराना और डिजिटल माध्यम से शिक्षा को ज्यादा सुलभ बनाना है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में आयोजित AAGAAZ 2026 कार्यक्रम के दौरान इस पहल की जानकारी दी। रात 11 बजे तक ऑनलाइन शिक्षक रहेंगे उपलब्ध मुख्यमंत्री के मुताबिक बिहार में पहले से चल रहे बिहार स्कूल लाइव क्लासेस कार्यक्रम को अब और विस्तारित किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत छात्र रात में भी ऑनलाइन शिक्षक से जुड़कर किसी विषय या टॉपिक से संबंधित अपनी शंका दूर कर सकेंगे। अगर किसी विद्यार्थी को पढ़ाई करते समय किसी सवाल को समझने में परेशानी होती है, तो उसे अगले दिन स्कूल खुलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वह निर्धारित समय के भीतर ऑनलाइन शिक्षक से सहायता ले सकेगा। सरकार का लक्ष्य खास तौर पर सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराना है। 551 मॉडल स्कूलों में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं राज्य में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 19 जुलाई को 551 मॉडल स्कूलों का शुभारंभ किया गया था। इन स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, ई-लाइब्रेरी और तकनीक आधारित शिक्षण जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इनका फायदा खास तौर पर कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को मिलने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराना है। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए डिजिटल सुविधाओं का विस्तार विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, क्योंकि उन्हें अतिरिक्त पढ़ाई के लिए हर बार बड़े शहरों या निजी संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। 211 ब्लॉकों में खुलेंगे डिग्री कॉलेज उच्च शिक्षा को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समीक्षा के दौरान राज्य के 211 ब्लॉकों में डिग्री कॉलेज नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बाद इन सभी ब्लॉकों में डिग्री कॉलेज स्थापित करने का निर्णय लिया गया। सरकार के अनुसार, इस दिशा में 15 जुलाई से काम शुरू कर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए अपने क्षेत्र से दूर जाने की मजबूरी कम करना और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को कॉलेज शिक्षा से जोड़ना है। कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने की तैयारी मुख्यमंत्री ने कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को लेकर भी सरकार की योजना बताई। उनके अनुसार, नियमित कॉलेजों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है। 10 अगस्त से नवनियुक्त शिक्षकों ने अलग-अलग कॉलेजों में योगदान देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक चिन्हित 211 कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति पूरी हो चुकी है और वहां पढ़ाई भी शुरू हो गई है। सरकार का लक्ष्य अगले तीन महीनों के भीतर राज्य के सभी कॉलेजों में स्थायी शिक्षकों की बहाली पूरी करना है। डिजिटल शिक्षा से सरकारी स्कूलों के छात्रों को फायदा बिहार सरकार की इन पहलों में स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक डिजिटल और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। रात 11 बजे तक ऑनलाइन शिक्षकों की उपलब्धता से विद्यार्थियों को घर पर पढ़ाई के दौरान आने वाली समस्याओं का समाधान मिलने की उम्मीद है। वहीं, मॉडल स्कूलों में आधुनिक सुविधाओं और नए डिग्री कॉलेजों के साथ शिक्षकों की नियुक्ति से स्कूली और उच्च शिक्षा दोनों स्तरों पर सुविधाओं को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
पटना: बिजली बिल का बड़ा बकाया होना उपभोक्ता के लिए परेशानी का कारण बन सकता है, लेकिन इसे सीधे बिजली चोरी नहीं माना जा सकता। करीब ₹5.39 लाख के बिजली बिल बकाया से जुड़े एक मामले में पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए बिजली चोरी के आरोप में दर्ज FIR को रद्द कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ बिजली बिल का भुगतान नहीं करना अपने आप में बिजली चोरी का अपराध साबित नहीं करता। बिजली चोरी का आपराधिक मामला बनाने के लिए कानून में निर्धारित जरूरी तथ्यों और साक्ष्यों का होना आवश्यक है। बकाया बिल के बाद काटा गया था कनेक्शन मामला एक ऐसे उपभोक्ता से जुड़ा था, जिस पर करीब 5.39 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया था। भुगतान नहीं होने पर बिजली विभाग ने उपभोक्ता का कनेक्शन काट दिया। इसके बाद विभाग की ओर से बिजली चोरी का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इस कार्रवाई को उपभोक्ता ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी और FIR रद्द करने की मांग की। हाईकोर्ट ने बताया बकाया और चोरी में अंतर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि बिजली बिल का भुगतान नहीं करना और जानबूझकर बिजली चोरी करना एक जैसी स्थिति नहीं है। सिर्फ इस आधार पर कि किसी उपभोक्ता पर बड़ी रकम का बिल बकाया है, उसके खिलाफ बिजली चोरी का आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता। बिल की बकाया राशि की वसूली के लिए विभाग के पास अलग कानूनी रास्ते मौजूद हैं। बिजली चोरी के लिए जरूरी है अलग आधार अदालत ने मामले में इस बात पर भी ध्यान दिया कि बिजली चोरी के आरोप के लिए केवल बकाया बिल पर्याप्त नहीं है। आपराधिक कार्रवाई के लिए यह देखना जरूरी है कि क्या उपभोक्ता ने बिजली का अवैध इस्तेमाल किया या विभाग को नुकसान पहुंचाने के लिए जानबूझकर कोई गलत तरीका अपनाया। इसलिए लाखों रुपये का बिजली बिल बाकी होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उपभोक्ता ने बिजली चोरी की है। FIR रद्द करने का दिया आदेश मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद पटना हाईकोर्ट ने बिजली चोरी से जुड़ी FIR को रद्द कर दिया। अदालत के इस फैसले से यह अंतर स्पष्ट हुआ कि बिजली बिल की वसूली का विवाद और बिजली चोरी का आपराधिक मामला अलग-अलग कानूनी विषय हैं। उपभोक्ताओं के लिए क्या है फैसले का मतलब? इस फैसले का यह अर्थ नहीं है कि बिजली बिल जमा नहीं करने पर विभाग कार्रवाई नहीं कर सकता। बकाया राशि की वसूली के लिए बिजली विभाग अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल कर सकता है और कनेक्शन काटने जैसी कार्रवाई भी नियमों के तहत की जा सकती है। हालांकि, केवल बिल बकाया होने के आधार पर किसी उपभोक्ता पर बिजली चोरी का आपराधिक आरोप लगाना पर्याप्त नहीं होगा। चोरी के आरोप के लिए उसके अनुरूप तथ्य और कानूनी आधार भी जरूरी होंगे। पटना हाईकोर्ट का यह फैसला बिजली बिल विवादों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अदालत ने बकाया राशि की वसूली और बिजली चोरी की आपराधिक कार्रवाई के बीच स्पष्ट कानूनी अंतर पर जोर दिया है।
पटना: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू होने जा रही है। राज्य में AI आधारित रियल-टाइम बेड ट्रैकिंग सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसके जरिए अस्पतालों में ICU, वार्ड और सामान्य बेड की उपलब्धता की जानकारी डिजिटल माध्यम से मिल सकेगी। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा गंभीर मरीजों को हो सकता है। डॉक्टर किसी मरीज को दूसरे अस्पताल में रेफर करने से पहले यह देख सकेंगे कि वहां आवश्यक बेड उपलब्ध है या नहीं। इससे मरीजों और उनके परिजनों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक भटकने की परेशानी कम हो सकती है। रेफर करने से पहले पता चलेगी बेड की स्थिति अक्सर गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज या बड़े अस्पताल में भेजा जाता है। लेकिन कई बार वहां पहुंचने के बाद पता चलता है कि ICU या वार्ड में बेड उपलब्ध नहीं है। नई डिजिटल व्यवस्था इसी समस्या को कम करने की कोशिश है। डॉक्टर रेफर करने से पहले संबंधित अस्पताल में उपलब्ध ICU, सामान्य और वार्ड बेड की स्थिति देख सकेंगे। इससे मरीज को उचित अस्पताल तक पहुंचाने में समय की बचत हो सकती है। 15 अगस्त से नई रेफरल व्यवस्था लागू करने की तैयारी के बीच इस डिजिटल सिस्टम को भी आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है। 14 हजार स्वास्थ्य संस्थानों को जोड़ने की तैयारी इस योजना का दायरा काफी बड़ा रखा गया है। बिहार के करीब 14 हजार स्वास्थ्य संस्थानों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है। इसमें हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और बड़े चिकित्सा संस्थान शामिल किए जा सकते हैं। नेटवर्क तैयार होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के पास राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं और संसाधनों की डिजिटल जानकारी उपलब्ध होगी। बेड के साथ डॉक्टर और दवाओं की भी होगी निगरानी AI आधारित सिस्टम को केवल बेड की उपलब्धता तक सीमित रखने की योजना नहीं है। इसके जरिए अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाओं के वितरण और विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं की भी डिजिटल निगरानी की जा सकेगी। इससे विभाग को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस अस्पताल में कौन-सी सुविधा उपलब्ध है और किन जगहों पर अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है। QR कोड से मिलेगा OPD टोकन बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने के लिए अन्य सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत QR कोड स्कैन करके OPD का डिजिटल टोकन लेने की सुविधा विकसित की जा रही है। इससे मरीजों को OPD में टोकन लेने के लिए लंबी कतार में खड़े रहने की जरूरत कम हो सकती है। इसके अलावा आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट के जरिए पर्चे, जांच रिपोर्ट और एक्स-रे जैसी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है। 3900 से अधिक केंद्रों पर टेलीमेडिसिन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले मरीजों के लिए टेलीमेडिसिन को भी इस डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है। राज्य में 3900 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टेलीमेडिसिन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम हो रहा है। इसके जरिए मरीज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह ले सकेंगे। जिला अस्पतालों को टेली-ICU सहायता से जोड़ने की योजना भी है, ताकि गंभीर मरीजों के इलाज में विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद समय पर मिल सके। अस्पतालों की जानकारी होगी डिजिटल बिहार सरकार की इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को कागजी रिकॉर्ड और स्थानीय स्तर की जानकारी तक सीमित रखने के बजाय एक डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना है। यदि AI आधारित बेड ट्रैकिंग सिस्टम प्रभावी तरीके से लागू होता है, तो डॉक्टरों को मरीजों के लिए सही अस्पताल चुनने में मदद मिल सकती है। ICU या सामान्य बेड की उपलब्धता, डॉक्टरों की मौजूदगी और स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी एक डिजिटल सिस्टम पर मिलने से रेफरल प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है। फिलहाल सिस्टम को विकसित और लागू करने की प्रक्रिया जारी है। इसके पूरी तरह प्रभावी होने के बाद बिहार में अस्पतालों के बीच समन्वय बेहतर होने और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पटना: बिहार में बालू की बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने नए बालू घाटों की पहचान की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया है। खान एवं भूतत्व विभाग ने सभी जिलों में ऐसे संभावित स्थानों की तलाश करने का निर्देश दिया है, जहां पर्याप्त मात्रा में बालू उपलब्ध है, लेकिन अभी तक उन्हें नीलामी के दायरे में नहीं लाया गया है। सरकार की इस पहल के बाद राज्य में नीलामी योग्य बालू घाटों की संख्या में करीब 10 से 12 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने का अनुमान है। हालांकि, वास्तविक संख्या स्थलीय जांच और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। हर जिले में खोजे जाएंगे नए संभावित घाट सरकार के निर्देश के बाद जिलों में सबसे पहले उन स्थानों की पहचान की जाएगी, जहां बालू का पर्याप्त भंडार होने की संभावना है। इसके लिए संभावित स्थलों की सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद संबंधित अधिकारी इन जगहों का मौके पर निरीक्षण करेंगे। जांच के दौरान बालू की उपलब्धता के साथ-साथ यह भी देखा जाएगा कि संबंधित स्थान खनन और नीलामी के लिए निर्धारित मानकों को पूरा करता है या नहीं। अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ही किसी स्थल को आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। DSR में शामिल किए जाएंगे उपयुक्त स्थल स्थलीय जांच में उपयुक्त पाए जाने वाले नए बालू घाटों को संबंधित जिले की District Survey Report यानी DSR में शामिल किया जाएगा। बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया में DSR की अहम भूमिका होती है। इस रिपोर्ट में खनिज की उपलब्धता और संबंधित क्षेत्र से जुड़े जरूरी सर्वेक्षण का विवरण दर्ज किया जाता है। इसलिए नए स्थलों को DSR में शामिल किए जाने के बाद ही उन्हें नीलामी की अगली प्रक्रिया में ले जाने का रास्ता साफ होगा। 10 से 12% तक बढ़ सकती है घाटों की संख्या विभागीय अनुमान के अनुसार नए स्थलों की पहचान और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बिहार में बालू घाटों की संख्या में 10 से 12 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। हालांकि यह केवल प्रारंभिक अनुमान है। कितने स्थल वास्तव में खनन के लिए उपयुक्त पाए जाते हैं और कितने नीलामी की प्रक्रिया तक पहुंचते हैं, यह सर्वेक्षण और विभागीय जांच के बाद ही तय होगा। निर्माण कार्यों को मिल सकती है राहत बालू की पर्याप्त उपलब्धता निर्माण क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मकान, सड़क, पुल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में बड़ी मात्रा में बालू की जरूरत होती है। नए घाटों से खनन शुरू होने के बाद बाजार में बालू की आपूर्ति बढ़ सकती है। इससे मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बेहतर होने की उम्मीद है और निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों को राहत मिल सकती है। बालू की कीमत पर भी पड़ सकता है असर घाटों की संख्या बढ़ने और आपूर्ति में सुधार होने से बालू की उपलब्धता बढ़ने की संभावना है। इसका असर बाजार की कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, केवल नए घाट खुलने से कीमतों में कितनी कमी आएगी, यह अभी तय नहीं है। परिवहन लागत, खनन शुल्क, मांग और अन्य बाजार कारक भी अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं। सरकार के राजस्व में भी होगा इजाफा नए बालू घाटों की नीलामी से राज्य सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है। अधिक घाट नीलामी के दायरे में आने पर वैध खनन गतिविधियों का विस्तार हो सकता है और सरकारी आय में भी बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल जिलों में संभावित स्थलों की पहचान, स्थलीय निरीक्षण और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके बाद DSR में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। इन सभी चरणों के पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि बिहार में कितने नए बालू घाट नीलामी के लिए उपलब्ध हो सकेंगे। कुल मिलाकर, सरकार की यह पहल बालू की उपलब्धता बढ़ाने, निर्माण गतिविधियों को गति देने और सरकारी राजस्व बढ़ाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
पटना: NEET UG 2026 में कथित धांधली की जांच कर रही बिहार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट, उसके भाई अश्विनी कुमार और डॉ. उज्ज्वल राज को गिरफ्तार किया है। जांच में कथित परीक्षा धांधली के ऐसे नेटवर्क का पता चलने का दावा किया गया है, जिसकी नजर अगली NEET परीक्षा पर भी थी। EOU के अनुसार, गिरोह पर प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को बैठाने, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और परीक्षा प्रक्रिया में कथित हेरफेर करने के आरोप हैं। जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर एक अभ्यर्थी से 12 लाख से 30 लाख रुपये तक की रकम ली जाती थी। लखीसराय से पटना तक फैला नेटवर्क जांच एजेंसी के मुताबिक डॉ. रविशंकर लखीसराय के कवैया और किऊल थानों में दर्ज तीन मामलों में मुख्य आरोपी है। आरोप है कि गिरोह प्रतियोगी परीक्षाओं में सॉल्वर या दूसरे परीक्षार्थियों का इस्तेमाल कर परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश करता था। रविशंकर और डॉ. उज्ज्वल राज की गिरफ्तारी पटना के जक्कनपुर स्थित आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय परीक्षा केंद्र के बाहर से की गई। दोनों के मेडिकल छात्र होने की जानकारी सामने आई है। 30 लाख रुपये तक की कथित वसूली EOU की जांच में कथित तौर पर परीक्षा में सेटिंग कराने के लिए 12 लाख से 30 लाख रुपये तक की डील का पता चला है। एजेंसी को संदेह है कि गिरोह फर्जी परीक्षार्थियों, पहचान से जुड़े दस्तावेजों और बायोमेट्रिक प्रक्रिया में हेरफेर के जरिए परीक्षा प्रणाली को चकमा देने की कोशिश करता था। जांच का दायरा अब लखीसराय के अलावा हाजीपुर, नवादा और नालंदा तक पहुंच गया है। इन इलाकों में बायोमेट्रिक से जुड़े कुछ लोगों की संभावित भूमिका भी जांच के घेरे में है। फर्जी प्रमाणपत्रों से काउंसलिंग में फायदा दिलाने का आरोप जांच के दौरान कथित तौर पर आय, जाति और दिव्यांगता से जुड़े फर्जी प्रमाणपत्र भी बरामद किए गए हैं। EOU को आशंका है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल मेडिकल काउंसलिंग के दौरान आरक्षण या अन्य लाभ हासिल करने के लिए किया जा सकता था। अश्विनी कुमार के पटना स्थित ठिकानों से विभिन्न परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, शैक्षणिक दस्तावेज, ट्रांसफर सर्टिफिकेट और दूसरे कागजात मिलने की बात कही गई है। जांच एजेंसी ने हस्ताक्षरित और खाली चेक के साथ नकदी बरामद होने का भी दावा किया है। अगली CBT आधारित NEET पर भी नजर? जांच में सामने आया एक और गंभीर पहलू अगली NEET परीक्षा से जुड़ा है। EOU के अनुसार, गिरोह आगामी कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT में भी कथित तौर पर सेंध लगाने की तैयारी कर रहा था। छापेमारी के दौरान पटना के एक ऑनलाइन परीक्षा केंद्र से जुड़ा अनुबंध पत्र मिलने की बात कही गई है। एजेंसी का दावा है कि गिरोह परीक्षा केंद्र में निवेश करने की कोशिश कर रहा था, जिससे भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की संभावना थी। पुराने परीक्षा मामलों से भी जुड़े आरोप जांच एजेंसी के मुताबिक डॉ. उज्ज्वल राज का नाम NEET UG 2024 में फर्जी अभ्यर्थी बैठाने से जुड़े एक मामले में भी सामने आया था। वहीं डॉ. रविशंकर पर रेलवे भर्ती परीक्षा से जुड़े पुराने मामले में आरोपी होने की बात EOU ने कही है। अब जांच एजेंसी नेटवर्क के दूसरे सदस्यों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है। मेडिकल, नर्सिंग और डेंटल कॉलेजों से जुड़े छात्रों के अलावा बायोमेट्रिक वेंडरों और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों से भी पूछताछ की जा रही है। NEET की पारदर्शिता पर फिर सवाल NEET देश की प्रमुख मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। ऐसे में परीक्षा में कथित गड़बड़ी और अगली परीक्षा को प्रभावित करने की तैयारी का खुलासा परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल EOU की जांच जारी है और एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और किन अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर इसका लाभ लेने की कोशिश की।
पटना: स्वतंत्रता दिवस से पहले बिहार में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर उत्साह बढ़ गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को लोकसेवक आवास पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया और देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले वीर सेनानियों को नमन किया। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लोगों से भी अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने नागरिकों से अपने घरों पर तिरंगा फहराने और राष्ट्रभक्ति के इस अभियान से जुड़ने का आग्रह किया। घर-घर तिरंगा फहराने की अपील मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत लोकसेवक आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को याद करना और उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करना हर नागरिक का गौरव है। उन्होंने बिहार समेत देशभर के लोगों से अपील की कि वे अपने घरों पर तिरंगा फहराएं और स्वतंत्रता दिवस के इस अभियान को जनभागीदारी का उत्सव बनाएं। सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करने को कहा सम्राट चौधरी ने लोगों से तिरंगे के साथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करने की भी अपील की। उन्होंने इसके लिए #HarGharTiranga हैशटैग का इस्तेमाल करने को कहा, ताकि अभियान की पहुंच अधिक से अधिक लोगों तक हो सके। सोशल मीडिया के जरिए नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने पर भी इस अभियान में विशेष जोर दिया जा रहा है। लोग तिरंगे के साथ तस्वीरें और देशभक्ति से जुड़े संदेश साझा कर अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन लोकसेवक आवास पर तिरंगा फहराने के दौरान मुख्यमंत्री ने उन वीर सपूतों और अमर बलिदानियों को याद किया, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का उद्देश्य नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना से जोड़ना है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर घरों और प्रतिष्ठानों पर तिरंगा फहराकर लोग स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के प्रति सम्मान व्यक्त कर रहे हैं। ‘जय हिंद’ के साथ किया आह्वान मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में लोगों से अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की और संदेश का समापन ‘जय हिंद’ के उद्घोष के साथ किया। स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले मुख्यमंत्री की इस अपील के बाद बिहार में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर जनभागीदारी और बढ़ने की उम्मीद है।
सड़क और सरकारी जमीन पर कब्जे के खिलाफ कार्रवाई, पुलिस बल की मौजूदगी में चला अभियान दरभंगा, एजेंसियां। बिहार के दरभंगा जिले के बेनीपुर में प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। नगर और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर सड़क किनारे और सरकारी जमीन पर किए गए अवैध निर्माणों को हटाया गया। अतिक्रमणकारियों को पहले दिया गया था नोटिस प्रशासन के अनुसार, कार्रवाई से पहले अतिक्रमण करने वाले लोगों को नोटिस देकर स्वयं अवैध निर्माण हटाने का निर्देश दिया गया था। तय समय सीमा के बाद भी कब्जा नहीं हटाने पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की। सड़क जाम और यातायात समस्या से राहत की कोशिश अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण के कारण कई जगहों पर सड़कें संकरी हो गई थीं, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। अभियान के बाद सड़क को खाली कराने और लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा देने का प्रयास किया गया। पुलिस बल की तैनाती के बीच हुई कार्रवाई अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान किसी भी विवाद की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन और सार्वजनिक रास्तों पर अवैध कब्जे के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया कुछ लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि अतिक्रमण हटने से बाजार और सड़कों की स्थिति बेहतर होगी। वहीं, प्रभावित लोगों ने प्रशासन से पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग भी की है।
बिजली विभाग ने कनेक्शन काटने और कानूनी नोटिस भेजने के दिए निर्देश, बड़े बकायेदारों पर सख्ती शुरू हाजीपुर, एजेंसियां। बिहार के हाजीपुर में बिजली बिल बकाया राशि को लेकर बिजली विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। जिले में करीब ₹450 करोड़ का बिजली बिल बकाया सामने आने के बाद विभाग ने बड़े बकायेदारों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। बिजली विभाग के कमिश्नर ने 23 हजार बड़े बकाएदारों के बिजली कनेक्शन काटने और उन्हें कानूनी नोटिस भेजने का निर्देश दिया है। बड़े बकाएदारों की तैयार की गई सूची बिजली विभाग ने लंबे समय से बिल जमा नहीं करने वाले उपभोक्ताओं की पहचान कर सूची तैयार की है। अधिकारियों के अनुसार, इन उपभोक्ताओं को कई बार बिल भुगतान के लिए सूचना दी गई थी, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। अब ऐसे उपभोक्ताओं पर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाएगी। पहले नोटिस, फिर कटेगा कनेक्शन विभाग की ओर से निर्देश दिया गया है कि बड़े बकाएदारों को कानूनी नोटिस भेजकर बकाया राशि जमा करने का मौका दिया जाए। इसके बाद भी भुगतान नहीं करने वालों का बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। राजस्व बढ़ाने और बिजली व्यवस्था सुधारने पर जोर बिजली विभाग का कहना है कि बड़ी मात्रा में बकाया रहने से बिजली कंपनियों की वित्तीय व्यवस्था प्रभावित होती है। बकाया वसूली से बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने और नए संसाधनों में निवेश करने में मदद मिलेगी। उपभोक्ताओं से समय पर बिल भुगतान की अपील विभाग ने सभी उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे समय पर बिजली बिल का भुगतान करें। अधिकारियों का कहना है कि छोटे उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, लेकिन बड़े बकाएदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
पटना: 17 अप्रैल 2026 को देशभर में पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें जारी कर दी गई हैं। इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय तेल कंपनियों ने आज के रेट अपडेट किए हैं। इस बार कीमतों में मिला-जुला असर देखने को मिला है, लेकिन बिहार के कई शहरों में पेट्रोल की कीमतों ने बढ़त दर्ज की है, जिससे आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। बिहार में बढ़ी कीमतें, आम आदमी पर असर राज्य के प्रमुख शहरों में आज पेट्रोल के दाम बढ़े हुए नजर आए: Patna: ₹105.54 (+0.31) Bhagalpur: ₹106.66 (+0.64) Muzaffarpur: ₹106.10 (+0.32) हालांकि, Gaya में हल्की राहत मिली है, जहां कीमत ₹106.25 (-0.03) रही। देश के बड़े शहरों में क्या है हाल? देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतों पर नजर डालें: Mumbai: ₹103.54 (+0.04) Delhi: ₹94.77 (कोई बदलाव नहीं) Kolkata: ₹105.41 (स्थिर) Chennai: ₹100.80 (-0.10) Bengaluru: ₹102.92 (-0.07) डीजल की कीमतों में मिली राहत डीजल के मोर्चे पर आज थोड़ी राहत देखने को मिली है: Mumbai: ₹90.03 (स्थिर) Delhi: ₹87.67 (स्थिर) Patna: ₹91.78 (+0.29) Bhagalpur: ₹92.81 (+0.60) Chennai: ₹92.39 (-0.09) क्यों बदलते रहते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम? भारत में ईंधन की कीमतें मुख्य रूप से इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति पर निर्भर करती हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्यों द्वारा लगाए गए वैट (VAT) का भी कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। घर बैठे ऐसे चेक करें अपने शहर का रेट आप SMS के जरिए भी अपने शहर का ताजा फ्यूल रेट जान सकते हैं: Indian Oil: “RSP” लिखकर 9224992249 पर भेजें BPCL: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें HPCL: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें
स्टेशन पर मचा हड़कंप कटिहार जंक्शन पर शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दो सरकारी विभागों के जवान आपस में ही भिड़ गए। जीआरपी और मद्य निषेध विभाग के बीच हुई इस झड़प में एक सिपाही घायल हो गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। शराब तस्करी की सूचना पर पहुंची थी टीम मद्य निषेध विभाग की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि बंगाल के रास्ते आने वाली ट्रेन में शराब की बड़ी खेप लाई जा रही है। इसी सूचना के आधार पर टीम कटिहार स्टेशन पर छापेमारी के लिए पहुंची थी। बताया जा रहा है कि जैसे ही टीम प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई शुरू करने लगी, तभी जीआरपी के जवान वहां पहुंच गए। बहस से शुरू हुई मारपीट प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। आरोप है कि जीआरपी के जवानों ने मद्य निषेध टीम के काम में हस्तक्षेप किया और फिर मामला हिंसक झड़प तक पहुंच गया। वीडियो वायरल, जांच के आदेश घटना के दौरान मौजूद लोगों ने पूरी झड़प का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने जांच के आदेश दे दिए हैं और रिपोर्ट तलब की गई है। सिपाही देव शंकर कुमार घायल इस झगड़े में मद्य निषेध विभाग के सिपाही देव शंकर कुमार घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए कटिहार सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर मद्य निषेध विभाग का आरोप है कि जीआरपी जानबूझकर उनकी कार्रवाई में बाधा डालती है और इसी कारण यह विवाद हुआ। विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि वे तस्करों को पकड़ने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें अपने ही वर्दीधारी साथियों के विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिस महकमे पर उठे सवाल इस घटना ने पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर कानून-व्यवस्था संभालने वाली ‘खाकी’ का इस तरह आपस में भिड़ना व्यवस्था की बड़ी खामी को उजागर करता है।
बिहार के औद्योगिक विकास को मिला बड़ा बूस्ट बिहार में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने जा रही है। देश की दिग्गज कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट ने राज्य में अपनी नई निर्माण इकाई स्थापित करने का फैसला लिया है। यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। बांका के कटोरिया में बनेगा प्लांट यह फैक्ट्री बांका जिले के कटोरिया औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित की जाएगी। करीब 59.47 एकड़ जमीन पर बनने वाला यह प्लांट क्षेत्र के औद्योगिक नक्शे को बदलने की क्षमता रखता है। इस परियोजना को राज्य सरकार से मंजूरी मिल चुकी है, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। 1200 करोड़ का निवेश, 1000 को सीधा रोजगार अल्ट्राटेक सीमेंट इस प्रोजेक्ट पर लगभग 1200 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इस बड़े निवेश से करीब 1000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को काम मिलेगा। लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट, निर्माण और छोटे व्यवसायों को भी इस फैक्ट्री के जरिए नई रफ्तार मिलेगी। बांका बनेगा नया इंडस्ट्रियल हब कटोरिया औद्योगिक क्षेत्र में इस फैक्ट्री के लगने से बांका और आसपास के इलाकों में औद्योगिक गतिविधियां तेज होंगी। लंबे समय से निवेश की प्रतीक्षा कर रहे इस क्षेत्र के लिए यह प्रोजेक्ट एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमेंट उद्योग किसी भी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को कई गुना बढ़ाने का काम करता है। सरकार की नीतियों का असर दिखा उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी गई। वहीं उद्योग विभाग और बियाडा की ओर से दी जा रही सुविधाओं ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार सृजन पर है, जिसका असर अब जमीन पर दिखने लगा है। निवेश के लिए तैयार हो रहा बिहार राज्य में लगातार बेहतर होती नीतियां और निवेश के अनुकूल माहौल यह संकेत दे रहे हैं कि बिहार अब उद्योगों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है। अल्ट्राटेक सीमेंट का यह निवेश ‘औद्योगिक बिहार’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। क्या होगा आम लोगों को फायदा? इस प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, छोटे व्यापारियों की आय बढ़ेगी और क्षेत्र का समग्र विकास होगा।
ऊर्जा क्षेत्र में बिहार की बड़ी छलांग बिहार अब ऊर्जा सेक्टर में तेजी से उभरता हुआ निवेश केंद्र बनता जा रहा है। भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 में ‘फोकस स्टेट’ के रूप में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराते हुए राज्य ने यह साफ संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में यहां ऊर्जा क्षेत्र में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिलेगा। 5 साल में 81,000 करोड़ का निवेश राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए करीब 81,000 करोड़ रुपए निवेश करने की योजना बनाई है। यह निवेश अलग-अलग सेक्टर में किया जाएगा, जिससे बिजली उत्पादन से लेकर सप्लाई तक की पूरी व्यवस्था मजबूत होगी। पावर जेनरेशन: 38,950 करोड़ रुपए ट्रांसमिशन सिस्टम: 16,194 करोड़ रुपए डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क: 22,951 करोड़ रुपए मेंटेनेंस और रख-रखाव: 3,346 करोड़ रुपए इस व्यापक योजना का मकसद राज्य में बिजली आपूर्ति को अधिक विश्वसनीय और सुचारु बनाना है। रिन्यूएबल एनर्जी में बड़ा लक्ष्य बिहार ने रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025 के तहत वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। साथ ही 6.1 गीगावाट की एनर्जी स्टोरेज क्षमता विकसित करने की भी योजना है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार कई सुविधाएं दे रही है, जैसे- ट्रांसमिशन शुल्क में छूट ऊर्जा बैंकिंग की सुविधा सिंगल विंडो क्लीयरेंस कार्बन क्रेडिट के प्रावधान ये सभी पहल बिहार को ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में मजबूत खिलाड़ी बनाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। 20 साल में दिखा बड़ा बदलाव समिट के दौरान राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में पिछले दो दशकों में हुए बदलावों को भी सामने रखा गया। 2005 में जहां केवल 700 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी, वहीं अब मांग 8,700 मेगावाट से ज्यादा हो चुकी है। राज्य में करीब 2.2 करोड़ उपभोक्ता बिजली नेटवर्क से जुड़ चुके हैं। वितरण कंपनियां, जो 2021 में 1,942 करोड़ के घाटे में थीं, अब 2025 तक करीब 2,000 करोड़ के मुनाफे में पहुंच गई हैं। निवेशकों के लिए क्यों खास है बिहार? ऊर्जा क्षेत्र में सुधार, पारदर्शी नीतियां और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते बिहार अब निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य बनकर उभर रहा है। सरकार की योजनाएं साफ संकेत देती हैं कि आने वाले समय में राज्य न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ेगा। क्या बदलेगा आम लोगों के लिए? इस बड़े निवेश का सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलेगा। बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर होगी, कटौती में कमी आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सकेगी।
जहानाबाद में CBI को मिला विरोध पटना के चर्चित हॉस्टल कांड में जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम को एक बार फिर निराशा हाथ लगी। टीम जब जहानाबाद जिले के रतनी स्थित छात्रा के पैतृक गांव पहुंची, तो परिजनों ने दरवाजा खोलने से साफ इनकार कर दिया। करीब 20 मिनट तक इंतजार करने के बाद अधिकारियों को बिना किसी बातचीत के ही लौटना पड़ा। शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा है मामला यह मामला शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा है, जहां रहकर छात्रा NEET की तैयारी कर रही थी। उसकी संदिग्ध मौत के बाद से ही यह केस लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। मौत के पीछे की वजह अब तक साफ नहीं हो सकी है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। DSP के नेतृत्व में पहुंची थी टीम गुरुवार को CBI की तीन सदस्यीय टीम, डीएसपी विभा कुमारी के नेतृत्व में गांव पहुंची थी। टीम का मकसद परिजनों से बातचीत कर कुछ अहम जानकारी जुटाना था, लेकिन परिवार ने सहयोग से इनकार कर दिया। परिजनों का कहना है कि कई बार पूछताछ के बावजूद जांच किसी नतीजे तक नहीं पहुंची है, जिससे उनका भरोसा कमजोर हो गया है। मां की हालत गंभीर, बात करने की स्थिति में नहीं परिवार के अनुसार, बेटी की मौत के बाद उसकी मां की हालत बेहद खराब है। वह मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो चुकी हैं और बार-बार बेहोश हो जाती हैं। ऐसे में परिवार ने उन्हें किसी भी तरह की पूछताछ से दूर रखने का फैसला किया है। पिता से भी नहीं हो सकी मुलाकात गांव से लौटने के बाद CBI टीम शकूराबाद थाना पहुंची और फिर छात्रा के पिता के कार्यस्थल प्लस टू प्रवेशिका विद्यालय शकूराबाद भी गई। लेकिन यहां भी टीम को निराशा मिली, क्योंकि पिता कुछ ही मिनट पहले वहां से निकल चुके थे। जांच में आ रही बाधाएं, बढ़ी उलझन इस मामले में CBI लगातार सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, लेकिन परिजनों का सहयोग न मिलना और अब तक किसी बड़े खुलासे या गिरफ्तारी का न होना जांच को और जटिल बना रहा है।
मुजफ्फरपुर में फिर निशाने पर वंदे भारत बिहार में एक बार फिर हाई-स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस बदमाशों के निशाने पर आ गई। इस बार घटना मुजफ्फरपुर जिले में सामने आई है, जहां अज्ञात लोगों ने चलती ट्रेन पर पत्थर फेंक दिए। राहत की बात यह रही कि इस हमले में कोई यात्री घायल नहीं हुआ, लेकिन ट्रेन की खिड़की का शीशा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। कांटी–मोतीपुर के बीच हुई घटना जानकारी के अनुसार, गाड़ी संख्या 26501 गोरखपुर-पाटलिपुत्र वंदे भारत एक्सप्रेस गुरुवार शाम मुजफ्फरपुर-गोरखपुर रेलखंड पर चल रही थी। इसी दौरान कांटी और मोतीपुर के बीच असामाजिक तत्वों ने ट्रेन को निशाना बनाते हुए पत्थरबाजी की। इस हमले में कोच C-5 की खिड़की का कांच पूरी तरह टूट गया। बताया जा रहा है कि सुरक्षा कवच वाला शीशा भी इस हमले को नहीं झेल सका। पुलिस और RPF जांच में जुटी घटना के बाद मामले को लेकर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने बापूधाम मोतिहारी में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस और रेलवे सुरक्षा एजेंसियां मिलकर पूरे मामले की जांच कर रही हैं। ट्रेन में मौजूद स्कॉर्ट टीम, गार्ड और ट्रेन मैनेजर से पूछताछ की गई है। साथ ही घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। बताया जा रहा है कि कपरपुरा और कांटी इलाके में सर्च ऑपरेशन भी चलाया जा रहा है। यात्रियों में बढ़ी दहशत इस घटना के बाद यात्रियों के बीच डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। वंदे भारत एक्सप्रेस देश की सबसे आधुनिक और तेज ट्रेनों में शामिल है, ऐसे में उस पर बार-बार हो रहे हमले सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं यह पहली बार नहीं है जब वंदे भारत ट्रेन पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई हो। इससे पहले भी बिहार के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह की वारदातें हो चुकी हैं। बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।
पटना: बिहार में मार्च की शुरुआत के साथ ही गर्मी का असर अब बिजली खपत पर साफ दिखाई देने लगा है। बढ़ते तापमान और LPG संकट के कारण राज्य में बिजली की मांग ने इस बार रिकॉर्ड स्तर छू लिया है। आंकड़ों के मुताबिक, 18 मार्च को जहां पिछले साल 405 मेगावाट बिजली की खपत दर्ज की गई थी, वहीं इस साल यह बढ़कर 517 मेगावाट तक पहुंच गई है। यानी इस बार खपत में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। गर्मी बढ़ते ही बढ़ी बिजली की खपत मार्च में ही तापमान बढ़ने के कारण लोगों ने पंखे, कूलर और एसी का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। आमतौर पर यह स्तर महीने के अंत में देखने को मिलता था, लेकिन इस बार पहले ही खपत 500 मेगावाट के पार पहुंच गई है। बिजली कंपनियों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है। गैस संकट ने बढ़ाया दबाव बढ़ती बिजली खपत के पीछे एक बड़ा कारण रसोई गैस की कमी भी है। LPG सिलेंडर की अनियमित आपूर्ति के चलते कई घरों में लोग खाना बनाने के लिए इंडक्शन चूल्हों और अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे घरेलू बिजली उपयोग में अचानक बढ़ोतरी हुई है, जिसने सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है। पटना बना सबसे बड़ा खपत केंद्र पूरे बिहार में इस समय करीब 4900 मेगावाट बिजली की खपत हो रही है। इसमें अकेले पटना जिला 600 से 650 मेगावाट खपत के साथ सबसे आगे है। अन्य शहरों में मुजफ्फरपुर में 210 मेगावाट, गया में 243 मेगावाट और पूर्णिया में 128 मेगावाट की औसत खपत दर्ज की जा रही है। इंडक्शन और इलेक्ट्रिक उपकरणों का बढ़ता चलन गैस संकट के कारण पटना समेत कई शहरों में इंडक्शन चूल्हा और इलेक्ट्रिक ओवन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही घरों में कूलर और एसी भी पूरे समय चल रहे हैं, जिससे बिजली की मांग और बढ़ गई है। बिजली कंपनियों का अनुमान है कि इस साल अधिकतम खपत 1000 मेगावाट के आंकड़े को भी पार कर सकती है। ‘जीरो ट्रिपिंग’ पर फोकस ऊर्जा विभाग ने बढ़ती मांग को देखते हुए सभी जिलों में मेंटेनेंस कार्य तेज कर दिया है। ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने निर्देश दिया है कि 31 मार्च तक सभी जरूरी मरम्मत कार्य पूरे कर लिए जाएं। साथ ही इंजीनियरों को ‘जीरो ट्रिपिंग’ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि तकनीकी खराबियों से बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो। सिस्टम को दुरुस्त करने में जुटी टीमें बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रांसमिशन लाइन और ट्रांसफार्मरों की लगातार जांच की जा रही है। ग्रिड की स्थिरता और वोल्टेज सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उद्देश्य साफ है-गर्मी के चरम पर पहुंचने से पहले ही व्यवस्था को मजबूत कर लिया जाए, ताकि लोगों को बिजली कटौती का सामना न करना पड़े। आने वाले दिनों में बढ़ सकती है चुनौती बिजली खपत में यह तेजी आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकती है। अगर गर्मी और बढ़ी और गैस संकट जारी रहा, तो मांग और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में उपभोक्ताओं से भी अपील की गई है कि वे पीक ऑवर्स में बिजली का संयम से उपयोग करें, ताकि सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव कम किया जा सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।