पटना: पटना मेट्रो के विस्तार को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। खेमनीचक से मीठापुर तक 3.1 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड ट्रैक का निर्माण तेजी से चल रहा है। इस नए रूट पर अधिक यात्रियों को सफर कराने के लिए छह कोच वाली मेट्रो ट्रेनें चलाने की तैयारी है।
पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की ओर से तीन नई छह कोच वाली ट्रेन सेट मंगाई जा रही हैं। इन ट्रेनों के दिसंबर 2026 तक पटना पहुंचने की उम्मीद है। नए रूट के शुरू होने से राजधानी के कई प्रमुख इलाकों के यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है।
फिलहाल पटना मेट्रो में तीन कोच वाली ट्रेन सेट का परिचालन किया जा रहा है। यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए अब ज्यादा क्षमता वाली ट्रेनें शामिल करने की तैयारी है।
इसके लिए पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने पुणे मेट्रो को तीन छह-कोच ट्रेन सेट का ऑर्डर दिया है। इन्हें तीन साल की लीज पर लाने की योजना है।
नई ट्रेनों के आने के बाद खासकर व्यस्त समय में यात्रियों को अधिक जगह मिलने की उम्मीद है। इससे मेट्रो की यात्री क्षमता भी बढ़ेगी।
खेमनीचक और मीठापुर के बीच बन रहे एलिवेटेड कॉरिडोर की लंबाई करीब 3.1 किलोमीटर है। इस हिस्से का सुपर स्ट्रक्चर तैयार होने की जानकारी दी गई है।
इस रूट पर कुल चार स्टेशन प्रस्तावित हैं:
इन स्टेशनों पर निर्माण कार्य जारी है। यात्रियों की सुविधा के लिए लिफ्ट, एस्केलेटर और अन्य जरूरी सुविधाओं से जुड़े काम भी किए जा रहे हैं।
मीठापुर से खेमनीचक के बीच मेट्रो सेवा शुरू करने का लक्ष्य जून 2027 रखा गया है। परियोजना के निर्माण और संचालन से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की ओर से 628.32 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यह कॉरिडोर पटना के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को और मजबूत करेगा।
पटना मेट्रो के दूसरे महत्वपूर्ण हिस्से पर भी काम चल रहा है। मलाही पकड़ी से पटना जंक्शन तक करीब 10.54 किलोमीटर लंबी भूमिगत लाइन तैयार की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक इस टनल का करीब 100 मीटर हिस्सा अभी बाकी है और इसे नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस रूट पर राजेंद्रनगर, मोइनुल हक स्टेडियम, पटना विश्वविद्यालय, पीएमसीएच, गांधी मैदान, आकाशवाणी और पटना जंक्शन जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल होंगे। पूरे हिस्से को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
पटना मेट्रो नेटवर्क में खेमनीचक स्टेशन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है। इसे अक्टूबर में शुरू करने की तैयारी है।
यहां दो अलग-अलग कॉरिडोर आपस में जुड़ेंगे। एक लाइन मलाही पकड़ी की ओर जाएगी, जबकि दूसरी मीठापुर की दिशा में होगी। स्टेशन शुरू होने के बाद यात्रियों को यहां मेट्रो बदलने की सुविधा मिल सकेगी।
तीन मंजिला खेमनीचक स्टेशन दोनों कॉरिडोर के बीच कनेक्टिविटी का अहम केंद्र बनेगा।
मेट्रो परियोजना के अन्य हिस्सों में भी निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा है। पटना जंक्शन से रुकनपुरा तक अंडरग्राउंड मेट्रो का काम शुरू किया जा रहा है, जबकि रुकनपुरा से दानापुर के बीच एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण जारी है।
पटना जंक्शन से मीठापुर को जोड़ने के लिए प्रस्तावित अंडरग्राउंड टनल का काम अभी शुरू होना बाकी है।
पटना मेट्रो परियोजना की कुल लंबाई करीब 32.50 किलोमीटर बताई गई है। नेटवर्क में दानापुर से पटना सिटी तक का क्षेत्र शामिल है।
अलग-अलग कॉरिडोर और स्टेशनों का निर्माण पूरा होने के बाद पटना में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं, छह कोच वाली नई मेट्रो ट्रेनें बढ़ती यात्री संख्या को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पटना। बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन फिलहाल चुनाव की तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी बताया जा रहा है। मौजूदा तैयारियों को देखते हुए इस साल पंचायत चुनाव होने की संभावना कम है और मतदान 2027 के जुलाई-अगस्त से पहले नहीं होने की संभावना जताई जा रही है। परिसीमन के बाद ही तय होगी चुनाव की तारीख पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के मुताबिक पंचायतों का परिसीमन पूरा होने के बाद ही चुनाव कराए जाएंगे। परिसीमन के दौरान पंचायतों की सीमाओं और जनसंख्या में बदलाव किया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब एक साल लगने की संभावना है। परिसीमन का आधार 2011 की जनगणना के आंकड़े होंगे। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर पंचायतों की सीमाओं और जनसंख्या से जुड़े बदलाव तय किए जाएंगे। GIS मैपिंग का काम लगभग पूरा पंचायतों की GIS मैपिंग का काम तेजी से चल रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 8 अगस्त तक GIS मैपिंग का काम पूरा किया जा चुका है। अब मैपिंग से जुड़ी त्रुटियों को दूर करने और परिसीमन की अगली प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी है। इस दौरान राजस्व ग्रामों की सीमाओं, जनसंख्या के आंकड़ों और नक्शों में दर्ज विसंगतियों की जांच की जा रही है। मुखिया की सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना परिसीमन के बाद मुखिया समेत पंचायत प्रतिनिधियों की सीटों की संख्या में बदलाव हो सकता है। मुखिया की सीटों में करीब 60 फीसदी तक बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। मौजूदा आंकड़ों के आधार पर मुखिया की संख्या करीब 13 हजार तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि सीटों की वास्तविक संख्या परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। डेटाबेस तैयार करने का काम जारी परिसीमन के लिए पंचायतों की जनसंख्या का विस्तृत डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति समेत कुल आबादी के आंकड़ों को शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा पंचायतों की ऐतिहासिक स्थिति और जातिगत सर्वेक्षण 2022-23 के आंकड़ों के बीच समन्वय स्थापित करने का काम भी किया जा रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी निगरानी परिसीमन की प्रक्रिया की निगरानी के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय किया जाएगा। प्रशिक्षण, सत्यापन, प्रशासनिक मंजूरी और प्रकाशन समेत सभी चरणों के दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। संभावित उम्मीदवारों ने शुरू की तैयारी चुनाव की तारीख अभी दूर होने के बावजूद संभावित उम्मीदवारों ने गांवों में संपर्क अभियान शुरू कर दिया है। बैठकों और जनसंपर्क का दौर चल रहा है। कई संभावित प्रत्याशी अपनी उम्मीदवारी को लेकर लोगों से संपर्क साध रहे हैं। नामांकन के लिए दस्तावेज अभी से रखें तैयार मुखिया या अन्य पंचायत पदों के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखने की सलाह दी जा रही है। इनमें मतदाता सूची में नाम, पहचान पत्र, उम्र का प्रमाण, फोटो, शपथ-पत्र, निवास प्रमाण-पत्र और आरक्षित सीट होने पर जाति प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेज शामिल हैं। फिलहाल सबसे बड़ा फोकस परिसीमन पर है। पंचायतों की सीमाएं और सीटों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही बिहार पंचायत चुनाव की तारीख और कार्यक्रम को लेकर तस्वीर साफ होगी। मौजूदा परिस्थितियों में जुलाई-अगस्त 2027 से पहले चुनाव की संभावना कम मानी जा रही है।
पटना: पटना मेट्रो के विस्तार को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। खेमनीचक से मीठापुर तक 3.1 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड ट्रैक का निर्माण तेजी से चल रहा है। इस नए रूट पर अधिक यात्रियों को सफर कराने के लिए छह कोच वाली मेट्रो ट्रेनें चलाने की तैयारी है। पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की ओर से तीन नई छह कोच वाली ट्रेन सेट मंगाई जा रही हैं। इन ट्रेनों के दिसंबर 2026 तक पटना पहुंचने की उम्मीद है। नए रूट के शुरू होने से राजधानी के कई प्रमुख इलाकों के यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है। छह कोच वाली मेट्रो में ज्यादा यात्री कर सकेंगे सफर फिलहाल पटना मेट्रो में तीन कोच वाली ट्रेन सेट का परिचालन किया जा रहा है। यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए अब ज्यादा क्षमता वाली ट्रेनें शामिल करने की तैयारी है। इसके लिए पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने पुणे मेट्रो को तीन छह-कोच ट्रेन सेट का ऑर्डर दिया है। इन्हें तीन साल की लीज पर लाने की योजना है। नई ट्रेनों के आने के बाद खासकर व्यस्त समय में यात्रियों को अधिक जगह मिलने की उम्मीद है। इससे मेट्रो की यात्री क्षमता भी बढ़ेगी। मीठापुर-खेमनीचक के बीच बनेंगे चार स्टेशन खेमनीचक और मीठापुर के बीच बन रहे एलिवेटेड कॉरिडोर की लंबाई करीब 3.1 किलोमीटर है। इस हिस्से का सुपर स्ट्रक्चर तैयार होने की जानकारी दी गई है। इस रूट पर कुल चार स्टेशन प्रस्तावित हैं: मीठापुर रामकृष्ण नगर जगनपुरा खेमनीचक इन स्टेशनों पर निर्माण कार्य जारी है। यात्रियों की सुविधा के लिए लिफ्ट, एस्केलेटर और अन्य जरूरी सुविधाओं से जुड़े काम भी किए जा रहे हैं। जून 2027 तक शुरू हो सकता है परिचालन मीठापुर से खेमनीचक के बीच मेट्रो सेवा शुरू करने का लक्ष्य जून 2027 रखा गया है। परियोजना के निर्माण और संचालन से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की ओर से 628.32 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यह कॉरिडोर पटना के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को और मजबूत करेगा। मलाही पकड़ी से पटना जंक्शन तक अंडरग्राउंड लाइन पटना मेट्रो के दूसरे महत्वपूर्ण हिस्से पर भी काम चल रहा है। मलाही पकड़ी से पटना जंक्शन तक करीब 10.54 किलोमीटर लंबी भूमिगत लाइन तैयार की जा रही है। जानकारी के मुताबिक इस टनल का करीब 100 मीटर हिस्सा अभी बाकी है और इसे नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस रूट पर राजेंद्रनगर, मोइनुल हक स्टेडियम, पटना विश्वविद्यालय, पीएमसीएच, गांधी मैदान, आकाशवाणी और पटना जंक्शन जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल होंगे। पूरे हिस्से को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। खेमनीचक बनेगा बड़ा इंटरचेंज स्टेशन पटना मेट्रो नेटवर्क में खेमनीचक स्टेशन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है। इसे अक्टूबर में शुरू करने की तैयारी है। यहां दो अलग-अलग कॉरिडोर आपस में जुड़ेंगे। एक लाइन मलाही पकड़ी की ओर जाएगी, जबकि दूसरी मीठापुर की दिशा में होगी। स्टेशन शुरू होने के बाद यात्रियों को यहां मेट्रो बदलने की सुविधा मिल सकेगी। तीन मंजिला खेमनीचक स्टेशन दोनों कॉरिडोर के बीच कनेक्टिविटी का अहम केंद्र बनेगा। पटना जंक्शन से दानापुर तक भी निर्माण जारी मेट्रो परियोजना के अन्य हिस्सों में भी निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा है। पटना जंक्शन से रुकनपुरा तक अंडरग्राउंड मेट्रो का काम शुरू किया जा रहा है, जबकि रुकनपुरा से दानापुर के बीच एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण जारी है। पटना जंक्शन से मीठापुर को जोड़ने के लिए प्रस्तावित अंडरग्राउंड टनल का काम अभी शुरू होना बाकी है। 32.50 किलोमीटर का होगा पटना मेट्रो नेटवर्क पटना मेट्रो परियोजना की कुल लंबाई करीब 32.50 किलोमीटर बताई गई है। नेटवर्क में दानापुर से पटना सिटी तक का क्षेत्र शामिल है। अलग-अलग कॉरिडोर और स्टेशनों का निर्माण पूरा होने के बाद पटना में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं, छह कोच वाली नई मेट्रो ट्रेनें बढ़ती यात्री संख्या को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
पटना: बिहार में मानसून एक बार फिर सक्रिय होता नजर आ रहा है। मौसम विभाग ने राज्य के पांच जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। वहीं, पटना समेत कई जिलों में भी मौसम खराब रहने को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अलर्ट के बाद प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों पर नजर बढ़ा दी है। लोगों को खासकर बारिश और वज्रपात के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई है। पांच जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार राज्य के पांच जिलों में रात तक मौसम बिगड़ने की संभावना है। इन क्षेत्रों में भारी बारिश, तेज हवा, गरज-चमक और वज्रपात की स्थिति बन सकती है। आकाशीय बिजली को देखते हुए लोगों से विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। बारिश के दौरान पेड़ के नीचे खड़े होने, खुले मैदान में रहने और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है। पटना, नालंदा और गया में भी आंधी-बारिश का खतरा राजधानी पटना सहित कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पटना, नालंदा और गया में तेज बारिश के साथ आंधी चलने की संभावना है। भारी बारिश की स्थिति में निचले इलाकों में जलजमाव हो सकता है। इससे यातायात प्रभावित होने और लोगों को आवाजाही में परेशानी आने की आशंका भी है। छपरा में सबसे अधिक बारिश गुरुवार को बिहार के कई हिस्सों में बारिश देखने को मिली। कुछ इलाकों में तेज बारिश हुई, जबकि कई जगहों पर रुक-रुककर बूंदाबांदी दर्ज की गई। उपलब्ध मौसम अपडेट के अनुसार छपरा में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई। बारिश से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन लगातार या अत्यधिक बारिश से खेतों में पानी जमा होने की समस्या भी पैदा हो सकती है। आंधी और वज्रपात के दौरान रहें सावधान मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए लोगों को जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी गई है। तेज बारिश और बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों से दूर रहना जरूरी है। आंधी के समय कमजोर पेड़ों, पुराने भवनों, होर्डिंग और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। वाहन चालकों को भी बारिश के दौरान रफ्तार कम रखने और जलजमाव वाले रास्तों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। किसानों के लिए भी जरूरी सलाह बारिश और वज्रपात की संभावना को देखते हुए किसानों को खेतों में काम करने के दौरान विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। मौसम खराब होने के संकेत मिलने पर खुले खेतों में रुकने के बजाय सुरक्षित स्थान पर जाना बेहतर होगा। फिलहाल बिहार के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज अस्थिर बना हुआ है। रेड और ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों के लोगों को मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर रखने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।