मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में बना हुआ है। 19 अगस्त 2026 को रुपया 95.7525 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि पिछले सत्र में यह 95.68 पर था। यह जुलाई के बाद रुपये का सबसे कमजोर बंद स्तर है। कच्चा तेल 92 डॉलर के करीब पहुंचा रुपये पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से आ रहा है। ब्रेंट क्रूड लगातार चार कारोबारी सत्रों में बढ़कर करीब 91.87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान तनाव ने तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। 96 रुपये प्रति डॉलर का स्तर बना अहम बाजार में अब 96 रुपये प्रति डॉलर का स्तर मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कारोबारियों के मुताबिक यदि रुपये पर दबाव बढ़ता है तो यह स्तर टूट सकता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक की संभावित डॉलर बिक्री ने रुपये की गिरावट को सीमित करने में मदद की है। महंगे तेल से बढ़ सकता है आयात बिल भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऊंची तेल कीमतें महंगाई के लिए भी जोखिम बढ़ाती हैं। RBI की हालिया MPC बैठक के मिनट्स में भी तेल कीमतों को महंगाई के प्रमुख जोखिमों में गिना गया है। RBI की नजर रुपये और तेल दोनों पर रुपये में तेज गिरावट रोकने के लिए RBI के बाजार में हस्तक्षेप की संभावना बनी हुई है। विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर की मांग, पश्चिम एशिया की स्थिति और RBI का रुख रुपये की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।
लंदन, एजेंसियां। ब्रिटेन में महंगाई दर जुलाई 2026 में बढ़कर 2.9% हो गई, जो जून के 2.6% के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक अधिक है। यह चार महीने का उच्चतम स्तर है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार महंगाई में इस बढ़ोतरी की प्रमुख वजह गैस और बिजली की कीमतों में तेज वृद्धि रही। ऊर्जा कीमतों ने बढ़ाई महंगाई जुलाई में ब्रिटेन के घरेलू ऊर्जा बिलों पर नियामक Ofgem की नई मूल्य सीमा लागू हुई, जिसके बाद ऊर्जा कीमतों में करीब 13% की बढ़ोतरी हुई। गैस की कीमतों में उछाल का महंगाई पर खास असर पड़ा और घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया। जून के 2.6% से बढ़कर 2.9% जून में ब्रिटेन की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 2.6% थी। जुलाई में यह बढ़कर 2.9% हो गई। हालांकि, कोर महंगाई 2.6% पर स्थिर रही और सेवाओं की महंगाई थोड़ी घटकर 3.4% रही। वहीं खाद्य और गैर-मादक पेय पदार्थों की महंगाई 1.3% तक कम हुई। बैंक ऑफ इंग्लैंड के सामने नई चुनौती महंगाई के 2% लक्ष्य से ऊपर बने रहने के कारण बैंक ऑफ इंग्लैंड के सामने ब्याज दरों को लेकर चुनौती बढ़ गई है। ऊर्जा कीमतों में आगे भी तेजी बनी रहने पर आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। आम लोगों के खर्च पर बढ़ा दबाव गैस और बिजली के महंगे होने से ब्रिटेन के परिवारों के घरेलू खर्च और जीवन-यापन की लागत पर दबाव बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव जारी रहा तो महंगाई में दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है।
नई दिल्ली। देश में महंगाई का दबाव जुलाई में बढ़ता नजर आया है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2026 में खुदरा महंगाई दर (CPI) बढ़कर 4.45 प्रतिशत हो गई, जबकि जून में यह 4.38 प्रतिशत थी। खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण रही। खासतौर पर प्याज, लहसुन और अदरक के दामों में तेज वृद्धि ने घरेलू बजट पर दबाव बढ़ाया है। खाद्य महंगाई भी बढ़ी जुलाई में खाद्य महंगाई दर 5.52 प्रतिशत रही, जो जून के 5.32 प्रतिशत से अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.79 प्रतिशत रही, जबकि शहरी इलाकों में यह 5.05 प्रतिशत दर्ज की गई। महंगाई में बढ़ोतरी के बावजूद जुलाई का आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के करीब 4.50 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ा नीचे रहा। प्याज, लहसुन और अदरक के दामों ने बढ़ाई चिंता रसोई में सबसे ज्यादा असर कुछ चुनिंदा सब्जियों और मसालों की कीमतों में देखने को मिला। प्याज की महंगाई जून के 4.73 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई में 22.54 प्रतिशत हो गई। लहसुन की महंगाई 17.93 प्रतिशत से बढ़कर 35.36 प्रतिशत पहुंच गई। वहीं अदरक की महंगाई दर 83.62 प्रतिशत के बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच गई, जो जून में 50.41 प्रतिशत थी। इन जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल से आम परिवारों के मासिक रसोई बजट पर सीधा असर पड़ा है। कुछ सब्जियों से मिली राहत महंगाई की तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं रही। कुछ सब्जियों की कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई। आलू की कीमतों में सालाना आधार पर 16.56 प्रतिशत की गिरावट रही। इसके अलावा भिंडी में 5.52 प्रतिशत, मटर में 5.27 प्रतिशत और टमाटर में 4.59 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रसोई के बाहर भी बढ़ी महंगाई महंगाई का दबाव सिर्फ खाद्य पदार्थों तक सीमित नहीं रहा। जुलाई में परिवहन से जुड़ी महंगाई बढ़कर 4.43 प्रतिशत रही। व्यक्तिगत देखभाल और विविध सेवाओं की महंगाई दर 14.77 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं होटल और रेस्टोरेंट सेवाओं में महंगाई 7.72 प्रतिशत रही। कपड़े और जूते-चप्पल 3.38 प्रतिशत, शिक्षा 3.64 प्रतिशत, मकान किराया 2.22 प्रतिशत और स्वास्थ्य सेवाओं में 1.34 प्रतिशत की महंगाई दर्ज की गई। RBI के 4% लक्ष्य से ऊपर महंगाई जुलाई की 4.45 प्रतिशत खुदरा महंगाई दर RBI के 4 प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। हालांकि यह 2 से 6 प्रतिशत के निर्धारित सहिष्णुता दायरे के भीतर है। RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने महंगाई अनुमान में भी बदलाव किया है। केंद्रीय बैंक को उम्मीद है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और सप्लाई में सुधार से आगे कीमतों पर कुछ दबाव कम हो सकता है। आने वाले महीनों में भी रह सकता है दबाव RBI के अनुमानों के अनुसार महंगाई में आने वाले महीनों में कुछ और बढ़ोतरी हो सकती है। दूसरी तिमाही के लिए महंगाई का अनुमान 4.7 प्रतिशत रखा गया है, जबकि तीसरी तिमाही में यह 5.9 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। चौथी तिमाही में इसके घटकर करीब 5.5 प्रतिशत आने की संभावना जताई गई है। ऐसे में आने वाले महीनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतें, मौसम, सप्लाई और कच्चे तेल का रुझान महंगाई की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
RBI की मौद्रिक नीति पर आज फैसला, रेपो रेट को लेकर बाजार की नजर MPC बैठक पर मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) आज अपनी द्विमासिक बैठक के फैसले का ऐलान करेगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा मौद्रिक नीति का फैसला पेश करेंगे। बाजार की सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट में कोई बदलाव करता है या उसे मौजूदा स्तर पर बरकरार रखता है। 5.25 फीसदी रेपो रेट पर टिकी नजर जून की पिछली MPC बैठक में RBI ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा था। इस बार भी अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों के बीच दर को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की उम्मीद मजबूत है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, 72 में से 68 अर्थशास्त्रियों ने दरों में बदलाव नहीं होने का अनुमान जताया है। फिलहाल बाजार का फोकस केवल रेपो रेट पर नहीं है, बल्कि RBI के महंगाई और आर्थिक विकास के अनुमान तथा आगे की मौद्रिक नीति को लेकर गवर्नर के संकेतों पर भी रहेगा। महंगाई और आर्थिक विकास पर RBI का रुख अहम मौद्रिक नीति के फैसले में महंगाई और आर्थिक विकास दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। हाल के महीनों में महंगाई के मोर्चे पर स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं, जबकि घरेलू आर्थिक गतिविधियां भी मजबूत बनी हुई हैं। ऐसे में RBI के सामने विकास को समर्थन देने और महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने के बीच संतुलन कायम रखने की चुनौती है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और मानसून से जुड़े जोखिमों पर भी केंद्रीय बैंक की नजर रहेगी। लोन और EMI पर भी पड़ेगा असर अगर RBI रेपो रेट में बदलाव करता है तो इसका असर बैंकों की उधारी लागत पर पड़ सकता है। खासतौर पर रेपो रेट से जुड़े होम लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की ब्याज दरों और EMI पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। वहीं, दरों को स्थिर रखने पर तत्काल EMI में बदलाव की संभावना कम रहेगी। अब सभी की नजर RBI के आधिकारिक फैसले और गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान पर है। इससे आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा और बाजार की चाल को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले आम लोगों को महंगाई का झटका लगा है। देशभर में चीनी और चावल की कीमतों में पिछले एक महीने के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक कमजोर मानसून, अल-नीनो का असर, जमाखोरी, वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती उत्पादन लागत इसके प्रमुख कारण हैं। चीनी की कीमतों में 5% से अधिक उछाल उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चीनी की थोक कीमतें पिछले एक महीने में 5 प्रतिशत से अधिक बढ़कर औसतन 4,593 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई हैं। वहीं खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 47.11 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 49.53 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। सालाना आधार पर भी चीनी की कीमतों में 7.64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। चावल भी हुआ महंगा चावल की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत एक महीने में 44.13 रुपये से बढ़कर 45.13 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में चावल की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे घरेलू बजट और मासिक राशन का खर्च बढ़ गया है। क्यों बढ़ रहे हैं दाम? विशेषज्ञों के अनुसार, चीनी की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में पुराने स्टॉक का कम होना तथा गन्ने का इथेनॉल उत्पादन की ओर अधिक उपयोग है। वहीं क्षेत्रीय आपूर्ति में असंतुलन और जमाखोरी ने भी कीमतों को बढ़ावा दिया है。 चावल की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अल-नीनो के कारण कमजोर मानसून, कम वर्षा, उत्पादन प्रभावित होने की आशंका और जमाखोरी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इससे खुले बाजार में आपूर्ति कम होने के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ा है। 50% तक महंगा हो सकता है चावल प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय की एक नीति रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि अल-नीनो के कारण उत्पादन में गिरावट जारी रही और बड़े पैमाने पर भंडारण (स्टॉकिंग) बढ़ा, तो वैश्विक बाजार में चावल की कीमतें 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। वैश्विक संकट का भी असर विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और उर्वरकों की बढ़ती लागत, जलवायु परिवर्तन, प्रमुख कृषि उत्पादक क्षेत्रों में मौसम संबंधी चुनौतियां और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव भी खाद्य वस्तुओं की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक सामान भी हो सकते हैं महंगे इस बीच, वैश्विक बाजार में तांबे की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। चिली में बाढ़, बर्फबारी और खदानों में उत्पादन प्रभावित होने से तांबे की आपूर्ति पर असर पड़ा है। इसका असर आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों, ऑटोमोबाइल और घरेलू उपकरणों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। त्योहारी सीजन के दौरान खाद्य पदार्थों और उपभोक्ता वस्तुओं की बढ़ती कीमतें आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती हैं।
कभी सफलता की पहचान थी छह अंकों वाली सैलरी, अब उठ रहे हैं सवाल एक समय था जब हर महीने 1 लाख रुपये या उससे अधिक कमाना आर्थिक सफलता की पहचान माना जाता था। यह अच्छी नौकरी, स्थिर भविष्य और आरामदायक जीवन का प्रतीक समझा जाता था। लेकिन अब तेजी से बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच यह धारणा कमजोर पड़ती नजर आ रही है। हाल ही में बेंगलुरु के एक आईटी प्रोफेशनल के अतिरिक्त आय के लिए टैक्सी चलाने की खबर ने देशभर के लाखों नौकरीपेशा लोगों का ध्यान खींचा। यह घटना केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि शहरी भारत के उस वर्ग की चिंता को दर्शाती है जो अच्छी कमाई के बावजूद आर्थिक सुरक्षा को लेकर असमंजस में है। बढ़ती आय के साथ और तेजी से बढ़ रहे खर्च देश के बड़े शहरों जैसे बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद और पुणे में रहने की लागत पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। सबसे ज्यादा असर इन क्षेत्रों में देखने को मिला है: घरों का किराया और प्रॉपर्टी की कीमतें बच्चों की शिक्षा स्वास्थ्य सेवाएं और मेडिकल खर्च बीमा प्रीमियम वाहन और होम लोन की ईएमआई दैनिक जीवन की बढ़ती लागत नतीजतन, वेतन बढ़ने के बावजूद अधिकांश परिवारों के पास बचत के लिए अपेक्षाकृत कम पैसा बच रहा है। ज्यादा कमाई, लेकिन कम आर्थिक संतोष विशेषज्ञों का मानना है कि आज की पीढ़ी अपने माता-पिता की तुलना में कहीं अधिक कमाई कर रही है, लेकिन आर्थिक रूप से खुद को उतना सुरक्षित महसूस नहीं करती। ईएमआई, स्कूल फीस, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल, स्वास्थ्य बीमा और अन्य जिम्मेदारियों के बाद आय का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है। यही वजह है कि अच्छी सैलरी पाने वाले लोग भी भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं। साइड इनकम का बढ़ता ट्रेंड बेंगलुरु के आईटी प्रोफेशनल की तरह अब कई नौकरीपेशा लोग अतिरिक्त कमाई के रास्ते तलाश रहे हैं। आज बड़ी संख्या में लोग: फ्रीलांसिंग कर रहे हैं ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं कंसल्टिंग सेवाएं दे रहे हैं निवेश और ट्रेडिंग कर रहे हैं छोटे व्यवसाय शुरू कर रहे हैं इनमें से अधिकांश लोग आर्थिक संकट में नहीं हैं, बल्कि बढ़ती आकांक्षाओं और खर्चों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या समस्या सैलरी की है या बढ़ती उम्मीदों की? विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि केवल महंगाई ही समस्या नहीं है, बल्कि जीवनशैली की अपेक्षाएं भी काफी बदल गई हैं। आज का शहरी मध्यम वर्ग एक साथ कई लक्ष्य हासिल करना चाहता है: अपना घर खरीदना बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाना बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं लेना नियमित छुट्टियां मनाना नई तकनीक और गैजेट्स खरीदना निवेश और रिटायरमेंट प्लानिंग करना इन सभी जरूरतों को एक ही आय के जरिए पूरा करना पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। सोशल मीडिया ने भी बढ़ाया दबाव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने लोगों की जीवनशैली और सफलता की परिभाषा बदल दी है। लक्जरी घर, विदेश यात्राएं, महंगी कारें और हाई-एंड लाइफस्टाइल अब लगातार लोगों की स्क्रीन पर दिखाई देती हैं। इससे कई बार लोग अपनी तुलना समाज के सबसे संपन्न वर्ग से करने लगते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक असंतोष का एक कारण यह भी है कि सफलता का पैमाना लगातार बदल रहा है। आर्थिक असुरक्षा केवल मानसिक नहीं, वास्तविक भी है आज के शहरी परिवारों के सामने कई वित्तीय जिम्मेदारियां एक साथ मौजूद हैं। उन्हें: घर की लागत संभालनी है बच्चों की उच्च शिक्षा की योजना बनानी है बुजुर्ग माता-पिता का सहारा बनना है रिटायरमेंट फंड तैयार करना है मेडिकल आपात स्थितियों के लिए बचत करनी है इसी वजह से अच्छी आय होने के बावजूद आर्थिक असुरक्षा की भावना बनी रहती है। बदल गया है मिडिल क्लास का सपना मध्यम वर्ग के सपने आज भी वही हैं—स्थिर नौकरी, अपना घर, बच्चों की अच्छी शिक्षा और सुरक्षित रिटायरमेंट। लेकिन इन लक्ष्यों को हासिल करने की लागत पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज आर्थिक सुरक्षा केवल अधिक कमाने से नहीं, बल्कि बेहतर वित्तीय योजना, अनुशासित बचत और समझदारी से निवेश करने से मिलेगी। 1 लाख रुपये महीना आज भी भारत के अधिकांश लोगों के लिए एक बड़ी आय मानी जाती है। लेकिन बड़े शहरों में बढ़ती महंगाई, जीवनशैली के खर्च और वित्तीय जिम्मेदारियों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या केवल अच्छी सैलरी ही आर्थिक सुरक्षा की गारंटी दे सकती है? आज के भारत में जवाब शायद "नहीं" है। अब आर्थिक सफलता केवल कमाई पर नहीं, बल्कि उस कमाई को संभालने और बढ़ाने की क्षमता पर भी निर्भर करती है।
नई दिल्ली: विपक्षी गठबंधन INDIA (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) ने केंद्र सरकार के खिलाफ साझा मोर्चा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सोमवार (8 जून) को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित बैठक में 23 विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया और कई राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने कहा कि गठबंधन पांच प्रमुख मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष करेगा और इन विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा। NEET और CBSE विवाद पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग बैठक में NEET-UG परीक्षा और CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। INDIA गठबंधन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan से तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल करने के लिए जवाबदेही तय होना जरूरी है। मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल बैठक में चुनावी पारदर्शिता को लेकर भी चर्चा हुई। गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी निष्पक्षता से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की। इस संबंध में INDIA गठबंधन ने निर्णय लिया कि वह Surya Kant को पत्र लिखकर चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग करेगा। बेरोजगारी और महंगाई पर सर्वदलीय बैठक की मांग विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से देश की आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। गठबंधन का कहना है कि इन मुद्दों का असर सीधे आम जनता पर पड़ रहा है और इन पर व्यापक राजनीतिक संवाद की आवश्यकता है। मानसून सत्र के लिए विपक्ष की तैयारी बैठक में संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर भी रणनीति बनाई गई। विपक्षी दलों ने तय किया कि सत्र के दौरान समन्वय बनाए रखने के लिए प्रतिदिन नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में बैठक आयोजित की जाएगी। इसके अलावा गठबंधन की नियमित बैठकों का सिलसिला जारी रखने पर सहमति बनी है। निर्णय लिया गया कि INDIA गठबंधन की अगली बैठक हैदराबाद में आयोजित की जाएगी। बैठक में शामिल हुए प्रमुख नेता बैठक में कांग्रेस की ओर से Sonia Gandhi, Rahul Gandhi और मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद रहे। इसके अलावा Mamata Banerjee, Akhilesh Yadav, Tejashwi Yadav, Supriya Sule और Uddhav Thackeray समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। वहीं Omar Abdullah, Mehbooba Mufti, D Raja और Dipankar Bhattacharya ने भी बैठक में भाग लिया। DMK और AAP ने बनाई दूरी बैठक में Dravida Munnetra Kazhagam और Aam Aadmi Party शामिल नहीं हुईं। AAP पहले ही सार्वजनिक रूप से INDIA गठबंधन से दूरी बना चुकी है, जबकि DMK ने राजनीतिक कारणों का हवाला देते हुए बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया था। भाजपा के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ विपक्षी एकता पर जोर बैठक के दौरान नेताओं ने देश में भाजपा के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और विपक्षी दलों के सामने मौजूद चुनौतियों पर भी चर्चा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सभी सहयोगी दलों से एकजुटता बनाए रखने और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ साझा संघर्ष जारी रखने की अपील की। गठबंधन नेताओं का मानना है कि आगामी राजनीतिक और संसदीय चुनौतियों का सामना करने के लिए विपक्षी एकता को और मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
नई दिल्ली: घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को महंगाई के मुद्दे पर घेरा और कई सवाल उठाए। रविवार को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। इसी बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। महंगाई पर बीजेपी की चुप्पी पर उठाए सवाल मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान महंगाई के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करने वाले भाजपा नेता अब चुप क्यों हैं। उन्होंने पूछा कि जो नेता पहले गैस सिलेंडर लेकर सड़कों पर बैठते थे, वे आज बढ़ती कीमतों के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं। खरगे ने कहा कि घरेलू एलपीजी की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ रहा है और इससे मध्यम वर्ग तथा गरीब परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है। प्रधानमंत्री के दावों पर उठाया सवाल कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन बयानों का भी उल्लेख किया, जिनमें पश्चिम एशिया संकट के दौरान कई देशों से ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। उन्होंने सवाल किया कि यदि ईंधन आपूर्ति के पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं, तो फिर घरेलू गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि क्यों हो रही है। साथ ही उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उज्ज्वला योजना को लेकर भी घेरा खरगे ने दावा किया कि बड़ी संख्या में लाभार्थी परिवार उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिलने के बावजूद नियमित रूप से सिलेंडर रिफिल नहीं करवा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों परिवार गैस सिलेंडर दोबारा भरवाने में सक्षम नहीं हैं, तो यह बढ़ती कीमतों और आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक बोझ का संकेत है। कांग्रेस ने उठाए तीन प्रमुख सवाल अपने बयान में कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से तीन प्रमुख सवाल पूछे— पश्चिम एशिया संकट के बावजूद ईंधन आपूर्ति के दावों के बाद भी गैस की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? बड़ी संख्या में उज्ज्वला लाभार्थी सिलेंडर रिफिल क्यों नहीं करा पा रहे हैं? महंगाई के मुद्दे पर पहले विरोध करने वाले भाजपा नेता अब चुप क्यों हैं? चार महीनों में 89 रुपये महंगा हुआ सिलेंडर एलपीजी कीमतों में यह वृद्धि पिछले चार महीनों में दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। मार्च 2026 में भी घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाए गए थे। ताजा बढ़ोतरी के बाद चार महीनों के भीतर घरेलू सिलेंडर की कीमत कुल 89 रुपये बढ़ चुकी है। विपक्षी दलों का आरोप है कि बढ़ती गैस कीमतें आम लोगों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा रही हैं, जबकि सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों का असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है।
नई दिल्ली: घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। केंद्र सरकार ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 7 जून से लागू हो गई हैं। इसके बाद राजधानी दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। यह पिछले तीन महीनों में दूसरी बार है जब घरेलू एलपीजी की कीमतों में वृद्धि की गई है। इससे पहले मार्च 2026 में प्रति सिलेंडर 60 रुपये का इजाफा किया गया था। इस तरह चार महीनों के भीतर घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत कुल 89 रुपये बढ़ चुकी है, जिससे आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। कांग्रेस ने साधा निशाना कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि लगातार बढ़ रही गैस की कीमतों ने आम जनता की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई को नियंत्रित करने में विफल रही है और इसका सीधा असर मध्यम वर्ग तथा गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। खरगे ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सरकार ने वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान वैकल्पिक ईंधन आपूर्ति के पर्याप्त इंतजाम किए थे, तो घरेलू उपभोक्ताओं को बार-बार मूल्य वृद्धि का सामना क्यों करना पड़ रहा है। आम लोगों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत पर पड़ रहा है, लेकिन सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। उनका कहना है कि पहले से बढ़ती महंगाई और स्थिर आय के बीच घरेलू गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि परिवारों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। शरद पवार ने भी जताई नाराजगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने भी बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर सीधे आम नागरिकों की जेब पर पड़ रहा है। पवार ने दावा किया कि यदि महंगाई इसी तरह बढ़ती रही, तो इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है और जनता चुनावों में अपनी प्रतिक्रिया दे सकती है। भाजपा पर विपक्ष का दोहरा रवैया अपनाने का आरोप महाराष्ट्र विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि विपक्ष में रहते हुए भाजपा महंगाई के मुद्दे पर सरकारों को घेरती थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद उसकी प्राथमिकताएं बदल गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ी हैं। रसोई बजट पर असर की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर सीधे परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ता है। खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए रसोई गैस की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय बन सकती हैं। सरकार की ओर से अभी तक इस बढ़ोतरी को लेकर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और आयात लागत में बदलाव को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
जून महीने की शुरुआत के साथ ही होटल, रेस्तरां, कैटरिंग और छोटे कारोबारियों को महंगाई का एक और झटका लगा है। तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 1 जून से लागू हो गई हैं। राजधानी दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की वृद्धि की गई है, जिसके बाद इसकी कीमत बढ़कर 3,113.50 रुपये हो गई है। वहीं कोलकाता में सिलेंडर 53.50 रुपये महंगा होकर 3,255.50 रुपये का हो गया है। इसके अलावा 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडर की कीमत में भी 11 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में इसकी नई कीमत 821.50 रुपये तय की गई है। प्रमुख शहरों में नई कीमतें देश के अन्य बड़े शहरों में भी कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। शहर नई कीमत (19 किग्रा कमर्शियल LPG) दिल्ली ₹3,113.50 मुंबई ₹3,067.50 कोलकाता ₹3,255.50 चेन्नई ₹3,283.00 लखनऊ ₹3,236.00 जयपुर ₹3,155.00 घरेलू उपभोक्ताओं को राहत आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर फिलहाल 913 रुपये में उपलब्ध रहेगा। कारोबारियों पर बढ़ेगा दबाव कमर्शियल LPG की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, ढाबा, रेस्तरां और कैटरिंग उद्योग पर पड़ सकता है। कारोबारी संगठनों का कहना है कि परिचालन लागत बढ़ने से खाने-पीने की वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। क्या है कीमत बढ़ने की वजह? विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव इसका प्रमुख कारण है। ईरान और खाड़ी क्षेत्र से जुड़े घटनाक्रमों के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे LPG की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव बढ़ा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर घरेलू LPG कीमतों पर भी दिखाई देता है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में ताजा बढ़ोतरी से छोटे और मध्यम कारोबारियों की लागत बढ़ने की आशंका है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत बरकरार रखी गई है।
पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। ईंधन लागत में बढ़ोतरी के बाद वाराणसी के ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने माल ढुलाई दरों में वृद्धि करने का फैसला लिया है। इस निर्णय के बाद खाद्य और दैनिक उपयोग की कई वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है। 1 जून से माल भाड़े में 20 फीसदी बढ़ोतरी ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी रविंद्र सिंह ने बताया कि डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण माल ढुलाई की लागत लगातार बढ़ रही है। इसी मुद्दे पर ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें सर्वसम्मति से माल भाड़े में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी का फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि यह नई दरें 1 जून से लागू होंगी। इसका असर देश के विभिन्न हिस्सों से वाराणसी की मंडियों तक आने वाले ट्रांसपोर्ट वाहनों पर पड़ेगा। व्यापारियों ने जताई महंगाई बढ़ने की आशंका व्यापारियों का मानना है कि माल ढुलाई खर्च बढ़ने का सीधा असर वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। उनका कहना है कि यदि परिवहन लागत बढ़ती है तो कारोबारियों को अतिरिक्त खर्च उपभोक्ताओं तक पहुंचाना पड़ सकता है। व्यापारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में कई जरूरी वस्तुओं के दाम 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। चीनी, दाल, तेल और सूखे मेवे हो सकते हैं महंगे व्यापारियों ने बताया कि जिन वस्तुओं की आपूर्ति दूसरे राज्यों से होती है, उन पर सबसे अधिक असर पड़ सकता है। इनमें चीनी, दाल, सरसों, खाद्य तेल, बादाम और अन्य किराना उत्पाद शामिल हैं। माल ढुलाई महंगी होने से इन वस्तुओं की खरीद लागत बढ़ेगी, जिसका असर खुदरा बाजार में भी देखने को मिल सकता है। पूर्वांचल की बड़ी मंडी है विशेश्वरगंज वाराणसी की विशेश्वरगंज मंडी पूर्वांचल की प्रमुख थोक मंडियों में गिनी जाती है। यहां देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी मात्रा में कृषि और खाद्य उत्पाद पहुंचते हैं। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाला सामान इसी मंडी के जरिए पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक पहुंचता है। ऐसे में माल भाड़े में वृद्धि का प्रभाव व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है। आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि परिवहन लागत बढ़ने पर सप्लाई चेन का खर्च भी बढ़ जाता है। यदि माल भाड़े में 20 प्रतिशत तक वृद्धि लागू होती है, तो आने वाले हफ्तों में रोजमर्रा की कई वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं का मासिक बजट प्रभावित हो सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। शाम की चाय हो या बच्चों की हल्की भूख, बिस्किट लगभग हर घर की पसंद होते हैं। हालांकि बाजार में मिलने वाले ज्यादातर बिस्किट मैदे और प्रिजर्वेटिव्स से बने होते हैं, जो सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद नहीं माने जाते। ऐसे में अगर घर पर ही गेहूं के आटे से स्वादिष्ट और खस्ता बिस्किट तैयार किए जाएं, तो यह स्वाद और सेहत दोनों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। खास बात यह है कि इन बिस्किट्स को बनाने के लिए ज्यादा सामग्री या मेहनत की जरूरत नहीं होती। घर की रसोई में मौजूद चीजों से ही इन्हें आसानी से तैयार किया जा सकता है। बिस्किट बनाने के लिए जरूरी सामग्री गेहूं के आटे के बिस्किट बनाने के लिए दो कप गेहूं का आटा, आधा कप पिसी चीनी, 4 से 5 बड़े चम्मच देसी घी या तेल, आधा चम्मच इलायची पाउडर, थोड़ा सफेद तिल या सौंफ और एक चुटकी नमक की जरूरत होती है। आटा गूंथने के लिए हल्का गुनगुना दूध या पानी इस्तेमाल किया जा सकता है। सही मोयन से आएगा खस्ता स्वाद बिस्किट को बाजार जैसा खस्ता बनाने के लिए मोयन सबसे अहम भूमिका निभाता है। सबसे पहले आटे में चीनी, इलायची और नमक मिलाएं। इसके बाद घी डालकर दोनों हाथों से अच्छी तरह रगड़ें। जब आटा मुट्ठी में दबाने पर बंधने लगे, तो समझिए मोयन सही है। इसके बाद थोड़ा-थोड़ा दूध या पानी डालकर सख्त आटा गूंथ लें। आटा ज्यादा मुलायम नहीं होना चाहिए, वरना बिस्किट कुरकुरे नहीं बनेंगे। आटे को 10 से 15 मिनट ढककर रख दें। धीमी आंच पर तलें या बेक करें आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें हल्का दबाएं और मनचाहा आकार दें। डिजाइन बनाने के लिए कांटे या चाकू का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसके बाद कड़ाही में हल्का गर्म तेल या घी लें और धीमी आंच पर बिस्किट्स को सुनहरा होने तक तलें। अगर हेल्दी विकल्प चाहते हैं, तो इन्हें 180 डिग्री सेल्सियस पर ओवन या एयर फ्रायर में 15 से 20 मिनट तक बेक भी किया जा सकता है। हफ्तों तक रहेगा स्वाद बरकरार तलने या बेक करने के बाद बिस्किट्स को पूरी तरह ठंडा होने दें। ठंडे होने के बाद ये और ज्यादा कुरकुरे हो जाते हैं। इन्हें एयरटाइट डिब्बे में स्टोर करने पर कई दिनों तक ताजा रखा जा सकता है। घर पर बने ये आटा बिस्किट स्वादिष्ट होने के साथ सेहतमंद भी होते हैं। यही वजह है कि एक बार इन्हें खाने के बाद बाजार के बिस्किट फीके लगने लगते हैं।
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। सोमवार (25 मई) से पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा हो गया है। मई 2026 में यह चौथी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। लगातार बढ़ती कीमतों से आम लोगों की जेब पर असर साफ दिखाई देने लगा है। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी के कारण इम्पोर्ट लागत बढ़ी है, जिसके चलते दाम बढ़ाने पड़े। चार महानगरों में पेट्रोल के नए दाम एमएस (पेट्रोल) खुदरा बिक्री मूल्य (RSP) Delhi - ₹102.12 प्रति लीटर (+₹2.61) Kolkata - ₹113.51 प्रति लीटर (+₹2.87) Mumbai - ₹111.21 प्रति लीटर (+₹2.72) Chennai - ₹107.77 प्रति लीटर (+₹2.46) चार महानगरों में डीजल के नए दाम हाई स्पीड डीजल खुदरा बिक्री मूल्य (RSP) Delhi - ₹95.20 प्रति लीटर (+₹2.71) Kolkata - ₹99.82 प्रति लीटर (+₹2.80) Mumbai - ₹97.83 प्रति लीटर (+₹2.81) Chennai - ₹99.55 प्रति लीटर (+₹2.57) मई 2026 में कब-कब बढ़े दाम? मई महीने में अब तक चार बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ चुके हैं: 15 मई 2026: पहली बार करीब ₹3 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी 19 मई 2026: पेट्रोल लगभग 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा 23 मई 2026: फिर पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे बढ़े 25 मई 2026: पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा आम लोगों में नाराजगी ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। दिल्ली के जनपथ स्थित एक पेट्रोल पंप पर ग्राहक ने कहा कि रोजाना की कमाई का बड़ा हिस्सा अब पेट्रोल पर खर्च हो रहा है। ग्राहक ने कहा कि महंगाई पहले ही लोगों की परेशानी बढ़ा चुकी है, ऐसे में बार-बार ईंधन महंगा होने से आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उसने सरकार से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने की मांग की।
Indian Railway Catering and Tourism Corporation और Indian Railways से जुड़ी खानपान सेवाओं को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। ईरान-इजरायल तनाव के बाद बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों के बीच अब ट्रेन में मिलने वाला खाना भी महंगा हो सकता है। रेलवे कैटरर्स के संगठन ने खाने-पीने की चीजों के रेट बढ़ाने की मांग की है। रेलवे कैटरर्स ने IRCTC को लिखा पत्र ट्रेनों में खानपान सेवा देने वाले ठेकेदारों के संगठन Indian Railway Mobile Caterers Association ने IRCTC को पत्र लिखकर तत्काल टैरिफ रिवीजन की मांग की है। संगठन के अध्यक्ष शरण बिहारी अग्रवाल ने अपने पत्र में कहा है कि: पेंट्री कार में बिकने वाले खाने-पीने के दाम आखिरी बार 2019 में तय हुए थे तब से खाद्य सामग्री, गैस और ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है कर्मचारियों का वेतन भी बढ़ा है मौजूदा रेट पर क्वालिटी बनाए रखना मुश्किल हो रहा है कैटरर्स का दावा है कि कई वस्तुओं की लागत में 250% तक बढ़ोतरी हो चुकी है। किन ट्रेनों पर पड़ सकता है असर? रेलवे में खानपान सेवाएं मुख्य रूप से दो तरह की होती हैं: 1. प्री-पेड कैटरिंग इनमें यात्री टिकट बुकिंग के दौरान ही खाने का पैसा दे देते हैं। यह सुविधा मुख्य रूप से: Rajdhani Express Shatabdi Express Vande Bharat Express जैसी प्रीमियम ट्रेनों में मिलती है। 2. पोस्ट-पेड कैटरिंग इन ट्रेनों में यात्री खाना खरीदने के बाद भुगतान करते हैं। कैटरर्स संगठन ने दोनों कैटेगरी में कीमतें बढ़ाने की मांग की है। क्या तुरंत बढ़ सकते हैं खाने के दाम? रेलवे से जुड़े जानकारों के अनुसार, पेंट्री कार सेवाओं के टेंडर “फिक्स रेट सप्लाई” मॉडल पर दिए जाते हैं। इसका मतलब है कि: टेंडर अवधि के दौरान तय कीमतें नहीं बदली जा सकतीं पुराने कॉन्ट्रैक्ट में बीच में रेट बढ़ाने का प्रावधान नहीं होता नई कीमतें केवल भविष्य के टेंडर पर लागू हो सकती हैं यानी फिलहाल यात्रियों को तुरंत महंगे खाने का सामना शायद न करना पड़े। अगर घाटा हो रहा है तो क्या करेंगे कैटरर्स? रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हर टेंडर में “एग्जिट क्लॉज” मौजूद होता है। यदि किसी ठेकेदार को तय दरों पर काम करना घाटे का सौदा लग रहा है, तो वह कॉन्ट्रैक्ट छोड़ सकता है। अधिकारियों के मुताबिक रेलवे किसी ठेकेदार पर पुराने रेट पर काम जारी रखने का दबाव नहीं बनाता। महंगाई का असर रेलवे सेवाओं तक पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब रेलवे कैटरिंग तक पहुंचता दिख रहा है। अगर भविष्य में नए टेंडर्स में कीमतें बढ़ाई जाती हैं, तो यात्रियों को ट्रेन में चाय, नाश्ता और भोजन के लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। हालांकि रेलवे फिलहाल पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स के नियमों के तहत ही सेवाएं जारी रखे हुए है।
महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों को अब रोजमर्रा के नाश्ते पर भी ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। सोना-चांदी, पेट्रोल-डीजल और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब Mumbai और आसपास के इलाकों में ब्रेड और पाव की कीमतें भी बढ़ा दी गई हैं। कई बड़ी कंपनियों ने 16 मई 2026 से नई दरें लागू कर दी हैं, जिससे लाखों कामकाजी लोगों, छात्रों और मजदूरों की जेब पर सीधा असर पड़ने वाला है। नई कीमतों के तहत अलग-अलग प्रकार की ब्रेड पर ₹2 से ₹5 तक की बढ़ोतरी की गई है। इसका असर खासतौर पर वड़ा-पाव, सैंडविच और ब्रेड आधारित नाश्ते पर दिखाई देगा, जो मुंबई की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा माने जाते हैं। आखिर क्यों बढ़ गए ब्रेड और पाव के दाम? बेकरी उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक कीमतों में इस बढ़ोतरी के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। प्लास्टिक पैकेजिंग महंगी हुई ब्रेड की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक कच्चा माल विदेशों से आयात किया जाता है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी के कारण आयात लागत काफी बढ़ गई है। इससे पैकेजिंग खर्च में बड़ा इजाफा हुआ है। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ी हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर अब खाद्य उत्पादों पर भी दिखने लगा है। ट्रकों के भाड़े में बढ़ोतरी होने से कच्चे माल को बेकरियों तक पहुंचाना और तैयार ब्रेड को दुकानों तक सप्लाई करना महंगा हो गया है। प्रिजर्वेटिव्स और दूध की कीमतें बढ़ीं ब्रेड को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रिजर्वेटिव्स की कीमतें भी बढ़ गई हैं। इसके अलावा दूध कंपनियों द्वारा हाल में किए गए रेट बढ़ोतरी के फैसले ने भी बेकरी उत्पादों की लागत बढ़ा दी है। मुंबई में ब्रेड-पाव का नया रेट कार्ड ब्रेड की वैरायटी पुरानी कीमत नई कीमत 400 ग्राम सैंडविच ब्रेड ₹35 ₹40 ब्राउन ब्रेड ₹45 ₹50 होल व्हीट ब्रेड ₹55 ₹60 मल्टिग्रेन ब्रेड ₹60 ₹65 स्मॉल ब्राउन लोफ ₹28 ₹30 व्हाइट लोफ ₹20 ₹22 आम लोगों पर क्या होगा असर? ब्रेड और पाव की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे आम लोगों के रसोई बजट पर पड़ेगा। मुंबई जैसे शहरों में लाखों लोग सुबह के नाश्ते और फास्ट फूड के लिए ब्रेड और पाव पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में वड़ा-पाव, सैंडविच और पाव-भाजी जैसे लोकप्रिय खाद्य पदार्थों की कीमतें भी आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईंधन और आयात लागत में कमी नहीं आई, तो आने वाले समय में अन्य बेकरी उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं।
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। पिछले पांच दिनों में यह दूसरी बार है जब तेल कंपनियों ने ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। ताजा बढ़ोतरी के बाद आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। नई दरें लागू होने के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। महानगरों में पेट्रोल-डीजल के नए दाम मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल 91 पैसे महंगा होकर 107.59 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डीजल 94 पैसे बढ़कर 94.08 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया। कोलकाता कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में सबसे अधिक 96 पैसे की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां पेट्रोल अब 109.70 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं डीजल 94 पैसे महंगा होकर 96.07 रुपये प्रति लीटर हो गया है। चेन्नई चेन्नई में पेट्रोल 82 पैसे बढ़कर 104.49 रुपये प्रति लीटर हो गया, जबकि डीजल की कीमत 86 पैसे बढ़ने के बाद 96.11 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। 15 मई को भी बढ़े थे दाम इससे पहले 15 मई को भी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की थी। उस समय दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गया था। उसी दिन अन्य महानगरों में भी ईंधन की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था। कोलकाता में पेट्रोल 108.74 रुपये, मुंबई में 106.68 रुपये और चेन्नई में 103.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया था। वहीं डीजल की कीमत कोलकाता में 95.13 रुपये, मुंबई में 93.14 रुपये और चेन्नई में 95.25 रुपये प्रति लीटर हो गई थी। आम लोगों पर बढ़ेगा असर लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का सीधा असर आम जनता की दैनिक जिंदगी पर पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ने की आशंका है, जिसका असर खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
देशभर में बढ़ती महंगाई के बीच आम लोगों की रसोई पर एक और बोझ बढ़ गया है। देश के सबसे बड़े डेयरी ब्रांड Amul ने दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। नई कीमतें आज यानी 14 मई 2026 से लागू हो चुकी हैं। इस फैसले का असर करोड़ों उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि अमूल दूध का इस्तेमाल देश के लगभग हर हिस्से में बड़े पैमाने पर किया जाता है। दूध की कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पहले से ही सब्जियां, गैस सिलेंडर और रोजमर्रा की जरूरत की कई चीजें महंगी हो चुकी हैं। ऐसे में अब दूध के दाम बढ़ने से घरेलू बजट और बिगड़ सकता है। क्यों बढ़ाए गए अमूल दूध के दाम? अमूल ब्रांड के तहत उत्पाद बेचने वाली Gujarat Cooperative Milk Marketing Federation (GCMMF) ने बताया कि दूध उत्पादन से जुड़ी लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। संस्था के अनुसार पिछले कुछ महीनों में पशु आहार, पैकेजिंग सामग्री, ट्रांसपोर्टेशन और ईंधन की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है। इन बढ़ती लागतों का सीधा असर डेयरी उद्योग पर पड़ा है, जिसके कारण कंपनी को दूध के दाम बढ़ाने का फैसला लेना पड़ा। GCMMF का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की गई है ताकि उपभोक्ताओं पर ज्यादा बोझ न पड़े। कितनी बढ़ीं कीमतें? नई दरों के लागू होने के बाद अब अमूल दूध के अलग-अलग वेरिएंट्स के दाम 2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं। संस्था के मुताबिक यह बढ़ोतरी कुल कीमत का लगभग 2.5 से 3.5 प्रतिशत है, जो मौजूदा खाद्य महंगाई दर से कम बताई जा रही है। हालांकि, आम ग्राहकों का मानना है कि लगातार बढ़ती कीमतों का असर सीधे घरेलू खर्च पर पड़ रहा है, खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वाले परिवारों पर। किसानों को भी मिलेगा फायदा GCMMF ने यह भी साफ किया कि दूध की बढ़ी कीमतों का फायदा केवल कंपनी को नहीं, बल्कि दूध उत्पादक किसानों को भी मिलेगा। फेडरेशन के अनुसार सदस्य डेयरी संघों ने किसानों से दूध खरीदने की कीमत में भी बढ़ोतरी की है। मई 2025 की तुलना में दूध खरीद मूल्य में करीब 30 रुपये प्रति किलोग्राम फैट तक का इजाफा किया गया है। इससे डेयरी किसानों की आय में सुधार होने की उम्मीद है। संस्था का दावा है कि अमूल अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा सीधे किसानों तक पहुंचाने की नीति पर काम करता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। लगातार दूसरी बार बढ़े दूध के दाम गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अमूल ने दूध की कीमतों में इजाफा किया हो। इससे पहले मई 2025 में भी कंपनी ने दाम बढ़ाए थे। अब करीब एक साल बाद फिर से कीमतों में बढ़ोतरी होने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में ईंधन और पशु आहार की कीमतें और बढ़ती हैं, तो डेयरी उत्पादों की कीमतों में आगे भी इजाफा देखने को मिल सकता है।
वैश्विक संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर मध्य पूर्व में जारी तनाव और तेल आपूर्ति में बाधा का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका RBI गवर्नर ने कहा कि अभी तक सरकार ने खुदरा ईंधन कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन स्थिति लगातार बिगड़ती रही तो कीमतों का बोझ आम जनता पर डाला जा सकता है। उनका कहना है कि लंबे समय तक वैश्विक तेल संकट जारी रहने पर कीमतें बढ़ना लगभग तय है। भारत पर तेल संकट का सीधा असर मध्य पूर्व में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम तेल मार्गों में बाधा के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर वैश्विक बाजार के साथ-साथ भारत पर भी पड़ रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। भारत की स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि देश खाद्य तेल और उर्वरक के लिए भी विदेशों पर निर्भर रहता है। रुपये में गिरावट से बढ़ी चिंता इसी बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखा जा रहा है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होकर 95 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे आयात और महंगा हो गया है। सरकार की नीति और कदम सरकार ने अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय दबाव रहने पर स्थिति बदल सकती है। प्रधानमंत्री ने भी ईंधन की खपत कम करने और बचत पर जोर देने की अपील की है ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सके। वैश्विक हालात और भारत की चुनौती RBI गवर्नर ने स्विट्जरलैंड में एक सम्मेलन के दौरान कहा कि सरकार अब तक वित्तीय अनुशासन की नीति पर चल रही है, लेकिन वैश्विक अस्थिरता के कारण आने वाले समय में महंगाई और ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। मध्य पूर्व संकट यदि लंबे समय तक जारी रहता है तो भारत में ईंधन महंगा होना तय माना जा रहा है। ऐसे में सरकार और आम जनता दोनों के लिए आर्थिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
देशभर में महंगाई के मोर्चे पर एक और बड़ा झटका लगा है। कमर्शियल LPG सिलिंडर के साथ-साथ 5 किलोग्राम वाले ‘छोटू’ (FTL) सिलिंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे खासतौर पर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ना तय माना जा रहा है। कमर्शियल सिलिंडर में भारी उछाल नई दरों के अनुसार, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलिंडर की कीमत में करीब 993 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। नई दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर अब 3,071.50 रुपये हो गई है। 5 किलो वाला ‘छोटू’ भी महंगा सिर्फ बड़े सिलिंडर ही नहीं, बल्कि 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलिंडर की कीमत में भी 261 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यह सिलिंडर छोटे दुकानदारों, ढाबों और सीमित व्यावसायिक उपयोग के लिए ज्यादा इस्तेमाल होता है, इसलिए इसका असर छोटे कारोबारियों पर भी पड़ेगा। घरेलू उपभोक्ताओं को राहत राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलिंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह वही सिलिंडर है जिसका इस्तेमाल देश के करोड़ों घरों में खाना बनाने के लिए किया जाता है। किन पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? कमर्शियल LPG महंगा होने का सीधा असर इन सेक्टर्स पर पड़ेगा: रेस्टोरेंट और होटल बेकरी और फूड आउटलेट कैटरिंग सर्विस छोटे ढाबे और स्ट्रीट फूड विक्रेता आमतौर पर ऐसे व्यवसाय बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालते हैं, जिससे आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं। क्यों बढ़ती हैं कीमतें? 5 किलो वाला FTL सिलिंडर सब्सिडी फ्री होता है और इसकी कीमत बाजार के हिसाब से तय होती है। इसलिए इसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर जल्दी देखने को मिलता है। क्या आगे और बढ़ सकती है महंगाई? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कमर्शियल LPG की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो इसका असर खाने-पीने की कीमतों पर साफ दिखाई देगा।
देशभर में महंगाई के मोर्चे पर एक और बड़ा झटका सामने आया है। 1 मई से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में ₹993 की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। राजधानी दिल्ली में अब इस सिलेंडर की नई कीमत ₹3,071.50 हो गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और छोटे व्यवसायों पर पड़ेगा, जहां LPG का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। तेल कंपनियों द्वारा लिया गया यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पहले से ही कारोबारी लागत बढ़ी हुई है। लगातार दूसरे महीने कीमतों में इजाफा होने से छोटे व्यापारियों के लिए खर्च संभालना और मुश्किल हो सकता है। पिछले महीने भी 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर के दाम ₹195 से ₹218 तक बढ़ाए गए थे, वहीं 5 किलो वाले मिनी सिलेंडर की कीमत में करीब ₹51 का इजाफा हुआ था। घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, कीमत में कोई बदलाव नहीं जहां कमर्शियल सिलेंडर महंगा हुआ है, वहीं आम जनता के लिए राहत की खबर है। 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में इसकी कीमत अभी ₹913 पर ही बनी हुई है। इससे पहले 7 मार्च को इसमें ₹60 की बढ़ोतरी की गई थी। हर महीने की पहली तारीख को तय होते हैं दाम देश की प्रमुख तेल कंपनियां–इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम–हर महीने की पहली तारीख को LPG सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। इनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और रुपये-डॉलर के उतार-चढ़ाव के आधार पर तय होती हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल ₹94.72 प्रति लीटर और डीजल ₹87.62 प्रति लीटर मिल रहा है। पिछले साल मार्च में ₹2 प्रति लीटर की कटौती के बाद से इनके दाम स्थिर बने हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बनी वजह कमर्शियल LPG की कीमतों में इस तेज बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन में रुकावट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50% तक की वृद्धि हो चुकी है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम मार्ग पर असर पड़ने से वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर अब घरेलू बाजार में भी दिखने लगा है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 6.9% से घटाकर 6.8% कर दिया है। यह कटौती ऐसे समय में की गई है, जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और खासकर होर्मुज स्ट्रेट में आई बाधा से आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी है। क्या कहा RBI गवर्नर ने? RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार: भारत मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स के साथ नए वित्त वर्ष में प्रवेश कर रहा है लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष से ग्रोथ पर असर पड़ सकता है होर्मुज स्ट्रेट में बाधा से तेल सप्लाई और कीमतों पर दबाव बढ़ा है उन्होंने माना कि इन परिस्थितियों का असर भारत की आर्थिक रफ्तार पर पड़ना तय है। FY27 के लिए नया GDP अनुमान RBI ने अलग-अलग तिमाहियों के लिए ग्रोथ अनुमान में बदलाव किया है: Q1: 6.9% ➝ 6.8% Q2: 7.0% ➝ 6.7% Q3: 7.0% (स्थिर) Q4: 7.2% पूरे FY27 के लिए ग्रोथ अनुमान करीब 6.9% रखा गया है। क्यों बढ़ा जोखिम? 1. तेल-गैस की कीमतों में उछाल होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल सप्लाई का अहम रास्ता है। यहां बाधा आने से: क्रूड ऑयल महंगा हो सकता है भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दबाव बढ़ता है 2. महंगाई का खतरा फिलहाल कोर महंगाई कंट्रोल में है लेकिन खाद्य कीमतों और मौसम का असर बढ़ सकता है 3. ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता ईरान-अमेरिका तनाव से वित्तीय बाजार प्रभावित निवेशक सुरक्षित विकल्प (Safe Haven) की ओर बढ़े डॉलर मजबूत, अन्य मुद्राओं पर दबाव फिर भी भारत की स्थिति क्यों बेहतर? RBI के मुताबिक: भारत की अर्थव्यवस्था पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में अच्छा मोमेंटम वैश्विक झटकों को झेलने की क्षमता बेहतर
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।