मेडिकल एडमिशन

तमिलनाडु विधानसभा में NEET खत्म करने का प्रस्ताव पारित
तमिलनाडु विधानसभा ने NEET खत्म करने की मांग वाला प्रस्ताव किया पास, 12वीं के अंकों से मेडिकल दाखिले की मांग

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु विधानसभा ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को स्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए NEET खत्म करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से NEET व्यवस्था को समाप्त कर तमिलनाडु में कक्षा 12 के अंकों के आधार पर मेडिकल दाखिले की व्यवस्था बहाल करने के लिए आवश्यक कानूनी बदलाव करने का आग्रह किया गया है।   स्वास्थ्य मंत्री ने पेश किया प्रस्ताव   यह प्रस्ताव तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री के. जी. अरुणराज ने विधानसभा में पेश किया। प्रस्ताव में कहा गया कि NEET सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है तथा मेडिकल शिक्षा के मामले में राज्यों के अधिकारों को प्रभावित करता है। राज्य सरकार का तर्क है कि एक केंद्रीकृत प्रवेश परीक्षा का असर ग्रामीण, आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के विद्यार्थियों पर पड़ता है। सरकार ने यह भी दावा किया कि NEET ने महंगे कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता बढ़ाई है।   ज्यादातर दलों ने किया समर्थन   विधानसभा में DMK, AIADMK, PMK और वाम दलों समेत कई दलों ने प्रस्ताव का समर्थन किया। हालांकि, BJP के एकमात्र विधायक ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया। BJP की ओर से तर्क दिया गया कि NEET ग्रामीण और गरीब विद्यार्थियों के लिए भी अवसर उपलब्ध कराता है।   12वीं के अंकों से दाखिले की मांग   प्रस्ताव में केंद्र से ऐसा कानूनी ढांचा तैयार करने का आग्रह किया गया है, जिससे तमिलनाडु में MBBS समेत स्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश कक्षा 12 के अंकों के आधार पर किया जा सके। राज्य पहले भी NEET से छूट की मांग करता रहा है। हालांकि, विधानसभा का यह प्रस्ताव अपने आप NEET को तमिलनाडु से खत्म नहीं करता। इसके लिए केंद्र स्तर पर संबंधित कानूनों में बदलाव और आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
NEET UG 2026 counselling begins for MBBS, BDS and BHMS admissions in Jharkhand medical colleges
NEET UG 2026: झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन प्रक्रिया शुरू, 14 अगस्त को आएगी मेरिट लिस्ट

रांची: झारखंड में NEET UG 2026 के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (JCECEB) ने राज्य स्तरीय मेडिकल काउंसलिंग का संशोधित शेड्यूल जारी कर दिया है। इसके तहत राज्य के मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS और BHMS पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाएगा। अभ्यर्थी अब 13 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसी दिन आवेदन में सुधार का मौका भी मिलेगा। NEET UG 2026 के स्कोर के आधार पर तैयार स्टेट मेरिट लिस्ट 14 अगस्त को जारी की जाएगी। 14 अगस्त से शुरू होगी पहले राउंड की काउंसलिंग मेरिट लिस्ट जारी होने के साथ ही 14 अगस्त से पहले राउंड की ऑनलाइन काउंसलिंग शुरू होगी। अभ्यर्थियों को अपनी पसंद के कॉलेज और पाठ्यक्रम के लिए ऑनलाइन च्वाइस फिलिंग करनी होगी। काउंसलिंग का प्रमुख शेड्यूल इस प्रकार है: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और च्वाइस फिलिंग: 14 से 19 अगस्त च्वाइस फिलिंग में संशोधन: 20 अगस्त सीट आवंटन और प्रोविजनल सीट अलॉटमेंट लेटर: 22 से 28 अगस्त डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: 23 से 28 अगस्त अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित तारीखों के भीतर सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करें, ताकि सीट आवंटन में किसी तरह की परेशानी न हो। MBBS, BDS और BHMS में मिलेगा दाखिला राज्य स्तरीय काउंसलिंग के माध्यम से NEET UG 2026 में सफल अभ्यर्थियों को झारखंड के मेडिकल संस्थानों में MBBS, BDS और BHMS पाठ्यक्रमों में प्रवेश का अवसर मिलेगा। सीट आवंटन अभ्यर्थियों की मेरिट, च्वाइस और उपलब्ध सीटों के आधार पर किया जाएगा। जियोलॉजी छात्रों के लिए भी बड़ी राहत इधर, झारखंड के जियोलॉजी से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण सूचना है। खान एवं भूतत्व विभाग के भूतत्व निदेशालय ने भूवैज्ञानिक जांच से संबंधित शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग के लिए आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। पहले आवेदन की अंतिम तिथि 25 जुलाई थी, जिसे बढ़ाकर 14 अगस्त 2026 कर दिया गया है। इच्छुक और योग्य छात्र अब तय समयसीमा के भीतर आवेदन कर सकते हैं। इन संस्थानों के छात्र कर सकेंगे आवेदन ट्रेनिंग कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में जियोलॉजी की पढ़ाई कर रहे योग्य छात्रों को शामिल किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से रांची विश्वविद्यालय, संत जेवियर कॉलेज, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, IIT-ISM धनबाद, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्यालय, सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, सेंट्रल यूनिवर्सिटी और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय शामिल हैं। आवेदन करने वाले छात्रों को अपनी शैक्षणिक योग्यता से जुड़े प्रमाणपत्र जमा करने होंगे। आरक्षण का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों को संबंधित श्रेणी का प्रमाणपत्र भी देना होगा। 24 अगस्त तक जमा करने होंगे दस्तावेज भूतत्व निदेशालय के निर्देश के अनुसार, ट्रेनिंग के लिए चयनित छात्रों से संबंधित जरूरी दस्तावेज 24 अगस्त 2026 तक निदेशालय में उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इसके बाद चयन और अन्य प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जाएंगी।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
NEET UG काउंसलिंग 2026 में मेडिकल कॉलेज चॉइस फिलिंग
NEET UG काउंसलिंग 2026: राउंड-1 चॉइस फिलिंग शुरू, 13 अगस्त तक दर्ज कर सकेंगे पसंद

नई दिल्ली, एजेंसियां। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने NEET UG काउंसलिंग 2026 के राउंड-1 की चॉइस फिलिंग शुरू कर दी है। जिन उम्मीदवारों ने काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन पूरा कर लिया है, वे अब अपनी पसंद के मेडिकल कॉलेज और पाठ्यक्रम दर्ज कर सकते हैं। चॉइस फिलिंग की अंतिम तारीख 13 अगस्त 2026 है।   MBBS और BDS समेत इन पाठ्यक्रमों में मिलेगा प्रवेश     MCC की काउंसलिंग के जरिए MBBS, BDS और अन्य स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में सीट आवंटन किया जाएगा। यह प्रक्रिया 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा समेत MCC के दायरे में आने वाले संस्थानों के लिए लागू है।   उम्मीदवारों को अपनी रैंक, उपलब्ध सीटों, कॉलेज की प्राथमिकता और पाठ्यक्रम के आधार पर विकल्प भरने होंगे। चॉइस फिलिंग के बाद निर्धारित समय के भीतर विकल्पों को लॉक करना भी जरूरी होगा।   13 अगस्त तक भर सकेंगे कॉलेज की पसंद     MCC ने राउंड-1 के लिए चॉइस फिलिंग की अंतिम तारीख 13 अगस्त 2026 निर्धारित की है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि अंतिम समय का इंतजार न करें और अपनी पसंद समय रहते दर्ज कर दें।   चॉइस भरते समय उम्मीदवारों को कॉलेज और पाठ्यक्रम की प्राथमिकता ध्यान से तय करनी चाहिए, क्योंकि सीट आवंटन में उनके द्वारा दर्ज विकल्प महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।   ऐसे पूरी करें चॉइस फिलिंग     उम्मीदवारों को MCC के काउंसलिंग पोर्टल पर लॉगिन करके उपलब्ध कॉलेज और पाठ्यक्रमों में से अपनी पसंद दर्ज करनी होगी। इसके बाद चुने गए विकल्पों को प्राथमिकता के क्रम में व्यवस्थित कर निर्धारित समय सीमा के भीतर लॉक करना होगा।   महत्वपूर्ण: चॉइस फिलिंग की अंतिम तारीख और लॉकिंग से संबंधित समय में MCC की ओर से बदलाव हो सकता है, इसलिए उम्मीदवारों को आधिकारिक पोर्टल पर जारी नवीनतम नोटिस जरूर देखना चाहिए।

ranjan kumar tiwari अगस्त 8, 2026 0
NEET UG 2026 काउंसलिंग नियम
NEET UG 2026 काउंसलिंग नियमों में MCC के बड़े बदलाव, सीट अपग्रेड और इस्तीफे की प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET UG 2026 की काउंसलिंग से पहले मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने प्रवेश प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए कई अहम बदलाव किए हैं। नई व्यवस्था में सीट अपग्रेड के लिए उम्मीदवारों को हर बार कॉलेज जाकर शारीरिक रूप से रिपोर्ट करने की जरूरत नहीं होगी। सीट छोड़ने यानी इस्तीफे की प्रक्रिया भी MCC पोर्टल के जरिए ऑनलाइन पूरी की जा सकेगी।   सीट अपग्रेड के लिए बार-बार कॉलेज जाने की जरूरत नहीं   नई व्यवस्था के तहत जिन उम्मीदवारों को काउंसलिंग के अगले चरण में बेहतर सीट मिलने की उम्मीद है, उन्हें सीट अपग्रेड की प्रक्रिया के लिए हर बार कॉलेज में जाकर शारीरिक रिपोर्टिंग नहीं करनी होगी। इससे विद्यार्थियों का समय और यात्रा खर्च दोनों बचेंगे और काउंसलिंग प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक होगी।   अब ऑनलाइन सीट छोड़ सकेंगे उम्मीदवार   MCC ने सीट से इस्तीफा देने की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन कर दिया है। उम्मीदवारों को सीट छोड़ने के लिए संबंधित कॉलेज में जाकर प्रक्रिया पूरी करने के बजाय MCC पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा मिलेगी। इससे दस्तावेजी प्रक्रिया और अनावश्यक भागदौड़ कम होने की उम्मीद है।   NRI उम्मीदवारों के दस्तावेज भी ऑनलाइन   NEET UG काउंसलिंग में NRI कोटे से आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए भी बदलाव किया गया है। अब NRI स्टेटस से जुड़े जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड किए जा सकेंगे। इसका उद्देश्य दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को अधिक आसान और व्यवस्थित बनाना है।   काउंसलिंग प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर   MCC के इन बदलावों का उद्देश्य मेडिकल दाखिले की प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और सुविधा बढ़ाना है। उम्मीदवारों को सीट उपलब्धता, फीस और प्रवेश से संबंधित जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। NEET UG 2026 के अभ्यर्थियों के लिए इन बदलावों को समझना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि सीट अपग्रेड और सीट छोड़ने के फैसले अब पहले की तुलना में अधिक डिजिटल तरीके से किए जा सकेंगे।

ranjan kumar tiwari अगस्त 1, 2026 0
MGM Medical College Jamshedpur campus for MBBS admission, fees, seats and NEET counselling information
MGM मेडिकल कॉलेज जमशेदपुर में लेना चाहते हैं MBBS में एडमिशन? जानें फीस, सीट, कट-ऑफ और प्रवेश प्रक्रिया की पूरी जानकारी

MGM Medical College Jamshedpur: अगर आप झारखंड के किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई करने का सपना देख रहे हैं, तो जमशेदपुर स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (MGM Medical College) आपके लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है। मेडिकल की पढ़ाई के लिए कॉलेज चुनते समय छात्रों और अभिभावकों के मन में फीस, सीटों की संख्या, कट-ऑफ, कोर्स और एडमिशन प्रक्रिया को लेकर कई सवाल होते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं MGM मेडिकल कॉलेज जमशेदपुर में MBBS और PG कोर्स से जुड़ी जरूरी जानकारी। MGM मेडिकल कॉलेज में कौन-कौन से कोर्स उपलब्ध हैं? महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर में UG स्तर पर MBBS और PG स्तर पर मेडिकल पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। MBBS में दाखिले के लिए छात्रों को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) में शामिल होना होता है। NEET में प्राप्त स्कोर और रैंक के आधार पर निर्धारित काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए सीट आवंटित की जाती है। इसलिए मेडिकल कॉलेज में दाखिले की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए NEET में बेहतर प्रदर्शन करना बेहद महत्वपूर्ण है। MBBS और PG के लिए कितनी सीटें हैं? कॉलेज की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार MGM मेडिकल कॉलेज में UG और PG स्तर पर सीटों की संख्या इस प्रकार बताई गई है: MBBS (UG): 150 सीटें PG: 51 सीटें MBBS की 150 सीटों के कारण यह कॉलेज झारखंड में मेडिकल शिक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए एक प्रमुख विकल्प माना जाता है। किस यूनिवर्सिटी से संबद्ध है MGM मेडिकल कॉलेज? MGM मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर कोल्हान यूनिवर्सिटी, चाईबासा से संबद्ध है। कॉलेज की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह जमशेदपुर का पहला सरकारी मेडिकल कॉलेज है। मेडिकल कॉलेज में दाखिले से पहले छात्रों को कॉलेज की मान्यता, संबद्धता और उस वर्ष की सीटों की स्थिति की आधिकारिक जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए। MGM मेडिकल कॉलेज की फीस कितनी है? MGM मेडिकल कॉलेज की सबसे बड़ी खासियतों में से एक इसकी अपेक्षाकृत कम फीस है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार MBBS छात्रों के लिए ट्यूशन फीस करीब 9,130 रुपये प्रति वर्ष बताई गई है। सरकारी मेडिकल कॉलेज होने के कारण इसकी ट्यूशन फीस कई निजी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में काफी कम है। हालांकि, छात्रों को हॉस्टल, परीक्षा, सिक्योरिटी, यूनिवर्सिटी और अन्य शुल्क के बारे में दाखिले के समय जारी आधिकारिक शुल्क विवरण जरूर देखना चाहिए। MGM मेडिकल कॉलेज का कट-ऑफ कितना रहा? MGM मेडिकल कॉलेज में MBBS में दाखिले के लिए कट-ऑफ हर साल NEET के परिणाम, कैटेगरी, सीटों की उपलब्धता और काउंसलिंग प्रक्रिया के आधार पर बदल सकता है। उपलब्ध 2025 के आंकड़ों के अनुसार कट-ऑफ स्कोर इस प्रकार बताया गया है: SC कैटेगरी: 488 OBC कैटेगरी: 559 General कैटेगरी: 564 ध्यान रखें कि ये पिछले वर्ष के आंकड़े हैं। 2026 में कट-ऑफ अलग हो सकता है। इसलिए एडमिशन लेने वाले छात्रों को केवल पिछले साल के कट-ऑफ पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और अपनी NEET रैंक, कैटेगरी तथा संबंधित काउंसलिंग के आधिकारिक डेटा के आधार पर कॉलेज की संभावना का आकलन करना चाहिए। एडमिशन के लिए क्या करना होगा? MGM मेडिकल कॉलेज में MBBS में दाखिले के लिए छात्रों को सबसे पहले NEET-UG परीक्षा में शामिल होना होगा। परीक्षा में क्वालिफाई करने के बाद निर्धारित मेडिकल काउंसलिंग प्रक्रिया में रजिस्ट्रेशन करना होता है। काउंसलिंग के दौरान NEET रैंक, कैटेगरी, उपलब्ध सीट और उम्मीदवार की पसंद के आधार पर कॉलेज का आवंटन किया जाता है। सीट मिलने के बाद छात्रों को निर्धारित समयसीमा के भीतर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फीस जमा करने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। एडमिशन से पहले इन बातों का रखें ध्यान MGM मेडिकल कॉलेज में दाखिले की तैयारी कर रहे छात्रों को कॉलेज की सीट, फीस और कट-ऑफ के साथ-साथ 2026-27 सत्र के लिए जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जरूर देखना चाहिए। सीटों, फीस, काउंसलिंग नियमों या कट-ऑफ में बदलाव संभव है। मेडिकल कॉलेज में दाखिले का फैसला केवल फीस या पिछले वर्ष के कट-ऑफ के आधार पर न लें। कॉलेज की मान्यता, पाठ्यक्रम, अस्पताल की सुविधाएं, क्लीनिकल एक्सपोजर, हॉस्टल और काउंसलिंग नियमों की भी जानकारी हासिल करना जरूरी है।  

surbhi अगस्त 2, 2026 0
Medical students reviewing NEET UG 2026 counselling updates with new MCC online seat upgrade and resignation rules.
NEET Counselling 2026: MBBS एडमिशन के 3 बड़े नियम बदले, छात्रों को मिलेगी बड़ी राहत

NEET Counselling 2026: NEET UG 2026 के जरिए MBBS, BDS और अन्य अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में प्रवेश की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर है। Medical Counselling Committee (MCC) ने काउंसलिंग प्रक्रिया को पहले से अधिक आसान और पारदर्शी बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए नियमों के तहत अब सीट अपग्रेड कराने या सीट छोड़ने (Seat Resignation) के लिए उम्मीदवारों को संबंधित मेडिकल कॉलेज में जाकर फिजिकल रिपोर्टिंग नहीं करनी होगी। इसके अलावा NRI कोटा के तहत आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के लिए दस्तावेज अपलोड करने की प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार ये बदलाव 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू होंगे। इसका उद्देश्य काउंसलिंग प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और डिजिटल बनाना है। क्या हैं MCC के 3 बड़े बदलाव? 1. सीट अपग्रेड के लिए कॉलेज में रिपोर्टिंग की जरूरत नहीं पहले यदि किसी उम्मीदवार को किसी राउंड में सीट मिल जाती थी और वह अगले राउंड में बेहतर कॉलेज या बेहतर ब्रांच के लिए Upgrade विकल्प चुनता था, तो उसे पहले अलॉट हुए कॉलेज में जाकर रिपोर्ट करना पड़ता था। अब नए नियम के अनुसार, यदि उम्मीदवार Upgrade/Willing to Upgrade विकल्प चुनता है, तो उसकी सीट MCC पोर्टल पर सुरक्षित रहेगी और वह बिना कॉलेज जाए अगले राउंड की काउंसलिंग में शामिल हो सकेगा। फायदा यात्रा का खर्च बचेगा। समय की बचत होगी। दूसरे राज्यों के छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। 2. अब सीट रिजाइन (Seat Resignation) भी पूरी तरह ऑनलाइन पहले किसी मेडिकल सीट को छोड़ने के लिए संबंधित कॉलेज जाकर औपचारिक प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। अब उम्मीदवार MCC Counselling Portal पर निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन Seat Resignation Letter जमा कर सकेंगे। फायदा कॉलेज जाने की आवश्यकता नहीं। पूरी प्रक्रिया तेज और आसान। ऑनलाइन ट्रैकिंग की सुविधा। 3. NRI कोटा डॉक्यूमेंट्स अब ऑनलाइन अपलोड होंगे डीम्ड यूनिवर्सिटीज में NRI कोटा के तहत आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को पहले दस्तावेज सत्यापन के लिए अलग प्रक्रिया अपनानी पड़ती थी। अब सभी आवश्यक दस्तावेज सीधे MCC Portal पर अपलोड किए जा सकेंगे। फायदा अलग से दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं। वेरिफिकेशन प्रक्रिया अधिक सरल। समय और परेशानी दोनों कम। कॉलेजों और राज्यों के लिए MCC के निर्देश नई ऑनलाइन काउंसलिंग प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए MCC ने राज्य काउंसलिंग प्राधिकरणों, मेडिकल कॉलेजों और नोडल अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इसके अलावा राज्यों और मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिए गए हैं कि वे— सीटों की संख्या कॉलेज फीस पात्रता अन्य आवश्यक जानकारी समय पर सार्वजनिक करें ताकि उम्मीदवार सही निर्णय ले सकें। उम्मीदवार क्या करें? NEET UG 2026 काउंसलिंग शुरू होने से पहले उम्मीदवारों को— सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखें। MCC की आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित अपडेट देखें। रजिस्ट्रेशन और Choice Filling की तारीखों पर नजर रखें। केवल आधिकारिक नोटिफिकेशन के आधार पर ही प्रक्रिया पूरी करें। महत्वपूर्ण सरकारी लिंक MCC Official Website (NEET UG Counselling): https://mcc.nic.in Official Notices & Counselling Updates: https://mcc.nic.in/#/home ध्यान रखें :-  नई व्यवस्था का उद्देश्य मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया को अधिक डिजिटल, पारदर्शी और छात्र-अनुकूल बनाना है। हालांकि, प्रत्येक काउंसलिंग राउंड की समय-सीमा और नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। आवेदन या सीट संबंधी कोई भी निर्णय लेने से पहले MCC द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन अवश्य पढ़ें।

anmol जुलाई 30, 2026 0
Indian students exploring affordable MBBS abroad options in Russia, Kazakhstan, Kyrgyzstan, Uzbekistan and Georgia after NEET.
NEET के बाद विदेश से MBBS का शानदार मौका, जानें 5 सबसे किफायती देश

MBBS Abroad for Indian Students: भारत में मेडिकल सीट न मिलने या प्राइवेट कॉलेजों की महंगी फीस से परेशान छात्रों के लिए विदेश में MBBS एक बेहतर विकल्प बन सकता है। रूस, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और जॉर्जिया जैसे देशों में अपेक्षाकृत कम खर्च में मेडिकल शिक्षा उपलब्ध है। हालांकि, एडमिशन से पहले NMC और WDOMS की मान्यता, स्टूडेंट वीजा प्रक्रिया और भारत में लागू मेडिकल लाइसेंसिंग नियमों की जानकारी जरूर जांच लें। हर साल लाखों छात्र NEET परीक्षा पास करने के बावजूद सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट नहीं मिलने या निजी मेडिकल कॉलेजों की ऊंची फीस के कारण डॉक्टर बनने का सपना पूरा नहीं कर पाते। ऐसे में विदेश से MBBS करना भारतीय छात्रों के लिए एक किफायती और व्यवहारिक विकल्प बनकर सामने आया है। रूस, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और जॉर्जिया जैसे देशों की कई मेडिकल यूनिवर्सिटीज भारतीय छात्रों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई, आधुनिक लैब, अस्पतालों में क्लिनिकल ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय स्तर की मेडिकल शिक्षा प्रदान करती हैं। इन देशों में भारत के कई प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की तुलना में कम खर्च में MBBS की पढ़ाई पूरी की जा सकती है। कम बजट में MBBS कराने वाले 5 देश 1. रूस (Russia) अनुमानित कुल खर्च: लगभग ₹18–25 लाख 6 वर्षीय MBBS प्रोग्राम सरकारी मेडिकल यूनिवर्सिटी और बेहतर क्लिनिकल ट्रेनिंग के लिए लोकप्रिय। 2. किर्गिस्तान (Kyrgyzstan) अनुमानित कुल खर्च: लगभग ₹18–25 लाख 5–6 वर्षीय कोर्स कम फीस और रहने-खाने का अपेक्षाकृत कम खर्च। 3. उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) अनुमानित कुल खर्च: लगभग ₹18–25 लाख भारतीय छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय। सुरक्षित माहौल और अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई। 4. कजाकिस्तान (Kazakhstan) अनुमानित कुल खर्च: लगभग ₹25–35 लाख आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर लैब और अस्पतालों में प्रशिक्षण। 5. जॉर्जिया (Georgia) अनुमानित कुल खर्च: लगभग ₹25–38 लाख यूरोपीय स्तर की मेडिकल शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर। विदेश से MBBS करने के प्रमुख फायदे भारत के कई प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की तुलना में कम खर्च। अधिकांश विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई। आधुनिक अस्पतालों में क्लिनिकल ट्रेनिंग। पारदर्शी एडमिशन प्रक्रिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर की मेडिकल शिक्षा। एडमिशन और स्टूडेंट वीजा प्रक्रिया विदेश में MBBS के लिए सबसे पहले NMC और WDOMS से मान्यता प्राप्त मेडिकल यूनिवर्सिटी का चयन करें। इसके बाद 10वीं-12वीं की मार्कशीट, NEET स्कोरकार्ड, पासपोर्ट और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करें। आवेदन स्वीकृत होने पर विश्वविद्यालय Admission/Invitation Letter जारी करता है। इसी पत्र के आधार पर संबंधित देश के Embassy में Student Visa के लिए आवेदन किया जाता है। वीजा स्वीकृत होने के बाद छात्र अपनी यात्रा और विश्वविद्यालय में रिपोर्टिंग की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। ध्यान रखें विदेश से MBBS करने का निर्णय लेने से पहले संबंधित विश्वविद्यालय की NMC मान्यता, WDOMS सूची, भारत में लागू FMGE/NExT नियम, इंटर्नशिप, भाषा, रहने का खर्च और लाइसेंसिंग प्रक्रिया की पूरी जानकारी अवश्य जांच लें। सही जानकारी और सही संस्थान का चयन आपके मेडिकल करियर की मजबूत शुरुआत बन सकता है।  

anmol जुलाई 21, 2026 0
Students checking NEET counselling process on laptop with documents and college choice list
NEET काउंसलिंग का पूरा खेल समझिए: सही रणनीति से ही मिलेगी मनचाही सीट

NEET परीक्षा पास करना मेडिकल करियर की दिशा में एक बड़ा कदम जरूर है, लेकिन असली चुनौती इसके बाद शुरू होती है–काउंसलिंग प्रक्रिया। हर साल हजारों छात्र अच्छे अंक लाने के बावजूद सिर्फ गलत निर्णय या अधूरी जानकारी के कारण अपनी पसंदीदा MBBS या BDS सीट से चूक जाते हैं। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि काउंसलिंग का हर चरण कितना महत्वपूर्ण है और इसे रणनीतिक तरीके से कैसे पूरा किया जाए। काउंसलिंग क्या है और क्यों है इतनी अहम? NEET काउंसलिंग वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से उम्मीदवारों को उनकी रैंक, कैटेगरी, सीट उपलब्धता और भरी गई पसंद (choice filling) के आधार पर मेडिकल कॉलेज आवंटित किए जाते हैं। यह प्रक्रिया दो स्तरों पर आयोजित होती है– All India Quota (AIQ): कुल सीटों का 15 प्रतिशत State Quota: कुल सीटों का 85 प्रतिशत दोनों ही स्तरों पर भाग लेना छात्रों के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे विकल्प बढ़ते हैं। रजिस्ट्रेशन से लेकर चॉइस फिलिंग तक–हर स्टेप मायने रखता है काउंसलिंग की शुरुआत रजिस्ट्रेशन से होती है, जहां उम्मीदवार को अपनी बेसिक जानकारी भरनी होती है। इसके बाद आता है सबसे महत्वपूर्ण चरण–चॉइस फिलिंग। यहीं पर सबसे ज्यादा गलतियां होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, छात्रों को निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए: अधिक से अधिक कॉलेज विकल्प भरें केवल टॉप कॉलेज पर निर्भर न रहें, बैकअप जरूर रखें अपनी रैंक के अनुसार यथार्थवादी विकल्प चुनें एक छोटी सी गलती यहां आपकी सीट छीन सकती है। सीट अलॉटमेंट: कैसे होता है फैसला? सीट आवंटन पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होता है, जो आपकी रैंक, कैटेगरी और चॉइस के आधार पर तय होता है। सीट मिलने के बाद आपके पास तीन विकल्प होते हैं: Accept and Freeze: सीट को फाइनल करना Float: बेहतर कॉलेज के लिए अगले राउंड का इंतजार Slide: उसी कॉलेज में बेहतर कोर्स के लिए इंतजार सही विकल्प चुनना आपकी आगे की दिशा तय करता है। इन गलतियों से बचना बेहद जरूरी कई छात्र कुछ आम गलतियां करते हैं, जिनसे उनका नुकसान हो सकता है: सिर्फ एक काउंसलिंग में भाग लेना कम चॉइस भरना डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में देरी समयसीमा (deadline) को नजरअंदाज करना इनसे बचना ही सफलता की कुंजी है। डॉक्यूमेंट्स पहले से रखें तैयार काउंसलिंग के दौरान किसी भी देरी से बचने के लिए जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें: NEET स्कोरकार्ड एडमिट कार्ड 10वीं और 12वीं की मार्कशीट कैटेगरी सर्टिफिकेट (यदि लागू हो) पासपोर्ट साइज फोटो

surbhi मई 4, 2026 0
Vedic Almanac
Vedic Almanac: l वैदिक पंचांग l 04 मई 2026, सोमवार l

दिनांक - 04 मई 2026 दिन - सोमवार विक्रम संवत 2083 शक संवत -1948 अयन - उत्तरायण ऋतु - ग्रीष्म ॠतु मास - ज्येष्ठ पक्ष - कृष्ण तिथि - तृतीया 05 मई  प्रातः 05:24 तक तत्पश्चात चतुर्थी नक्षत्र - अनुराधा सुबह 09:58 तक तत्पश्चात ज्येष्ठा योग  परिघ रात्रि 11:20 तक तत्पश्चात शिव राहुकाल - सुबह 07:44 से सुबह 09:21 तक सूर्योदय - 05:30 सूर्यास्त -  06:23 दिशाशूल - पूर्व दिशा मे व्रत पर्व विवरण-  विशेष - तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

Unknown मई 4, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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