नई दिल्ली: सोशल एंटरप्रेन्योर और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने हॉलीवुड फिल्ममेकर क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म ‘द ओडिसी’ देखने के बाद भारतीय सिनेमा, खासकर बॉलीवुड की कहानी कहने की शैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने फिल्म की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि इसकी कहानी और थीम भारतीय सोच और परंपराओं से काफी करीब महसूस होती हैं। साथ ही उन्होंने बॉलीवुड से भारत की समृद्ध महागाथाओं और कहानियों को बड़े पैमाने पर, संवेदनशीलता और गहराई के साथ पर्दे पर उतारने की अपील की। गीतांजलि ने सोशल मीडिया पोस्ट में 2024 में न्यूयॉर्क में क्रिस्टोफर नोलन से हुई मुलाकात को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय जिस तरह की बातों पर चर्चा हुई थी, उन्हें अब फिल्म के पर्दे पर देखना उनके लिए खास अनुभव रहा। ‘द ओडिसी’ में दिखीं भारतीय सोच से मिलती-जुलती थीम गीतांजलि आंग्मो ने फिल्म देखने के बाद कहा कि ‘द ओडिसी’ की कई थीम उन्हें भारतीय विचार परंपरा के बेहद करीब लगीं। उन्होंने हीरो के सफर, धर्म और किस्मत, वनवास, प्रलोभन, घर वापसी और यात्रा के दौरान इंसान के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे विषयों का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, ऐसी कहानियां केवल किसी एक संस्कृति तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि इंसान के जीवन, संघर्ष और उसके भीतर होने वाले बदलाव से जुड़ी होती हैं। गीतांजलि ने नोलन के साथ अपनी पुरानी मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए फिल्म को बड़े पर्दे पर देखने के अनुभव को यादगार बताया। बॉलीवुड को क्यों दी सोचने की सलाह? गीतांजलि ने अपनी पोस्ट में भारत की कहानी कहने की परंपरा और यहां मौजूद महागाथाओं का जिक्र करते हुए बॉलीवुड को भी इस दिशा में गंभीरता से सोचने की सलाह दी। उनका कहना था कि भारत के पास ऐसी असंख्य महान कहानियां हैं, जिन्हें अगर बड़े पैमाने, संवेदनशीलता और बौद्धिक गहराई के साथ सिनेमा में पेश किया जाए तो उनका प्रभाव काफी व्यापक हो सकता है। उनके अनुसार, सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है। फिल्मों का असर समाज की सोच और लोगों की समझ पर भी पड़ता है। इसलिए भारतीय सिनेमा को अपनी इस भूमिका को दोबारा समझने की जरूरत है। यानी गीतांजलि का संदेश सिर्फ बॉलीवुड की आलोचना तक सीमित नहीं था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय फिल्म उद्योग को अपनी ही सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से नई कहानियां तलाशने और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। सोनम वांगचुक के आंदोलन के बाद आया बयान गीतांजलि आंग्मो का यह बयान ऐसे समय आया है जब उनके पति सोनम वांगचुक हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था और NEET-UG 2026 से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे विरोध प्रदर्शन का हिस्सा रहे हैं। वांगचुक ने अपनी मांगों को लेकर 26 दिन तक भूख हड़ताल की थी। प्रदर्शन के दौरान परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। बाद में सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद उन्होंने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। इसी दौरान बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान की भूमिका को लेकर भी चर्चा हुई थी। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सवाल उठाया था कि लंबे समय से ‘3 इडियट्स’ को सोनम वांगचुक के जीवन से प्रेरित बताने वाली चर्चाओं के बीच आमिर खान ने वांगचुक के आंदोलन पर सार्वजनिक रूप से समर्थन क्यों नहीं जताया। क्या ‘3 इडियट्स’ सोनम वांगचुक पर आधारित थी? यह सवाल लंबे समय से बॉलीवुड और सोनम वांगचुक से जुड़ी चर्चाओं में रहा है। हालांकि, आमिर खान ने हाल ही में इस दावे को खारिज किया है। ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट (BFI) में बातचीत के दौरान आमिर ने कहा कि ‘3 इडियट्स’ के निर्माण के समय उन्हें सोनम वांगचुक के बारे में जानकारी नहीं थी। उन्होंने इस दावे को गलतफहमी बताया और कहा कि फिल्म के निर्देशक राजकुमार हिरानी, लेखक अभिजात जोशी और वह खुद वांगचुक के बारे में नहीं जानते थे। हालांकि, आमिर ने सोनम वांगचुक के काम की तारीफ करते हुए यह भी कहा कि उनके काम का सम्मान करने के लिए उन्हें ‘3 इडियट्स’ के किरदार से जोड़ना जरूरी नहीं है। पुराने वीडियो ने फिर छेड़ी बहस आमिर खान के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर 2008 का एक पुराना वीडियो सामने आया, जिसमें आमिर खान और सोनम वांगचुक की मुलाकात दिखाई देती है। यह वीडियो ‘3 इडियट्स’ की रिलीज से करीब एक साल पहले का बताया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच एक बार फिर बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने आमिर खान के बयान पर सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों ने सोनम वांगचुक के काम और उनके अभियान के समर्थन में अपनी राय रखी। हालांकि, पुराने वीडियो और फिल्म की कहानी के बीच सीधा संबंध साबित करने के लिए केवल मुलाकात का वीडियो पर्याप्त नहीं है। इसलिए इस दावे को लेकर अलग-अलग राय सामने आती रही हैं। वांगचुक ने कब खत्म की भूख हड़ताल? सोनम वांगचुक ने सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह में अपनी 26 दिन लंबी भूख हड़ताल खत्म की थी। इसके बाद शिक्षा व्यवस्था से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम में भी बदलाव देखने को मिला। गीतांजलि आंग्मो का ‘द ओडिसी’ पर यह बयान इसी व्यापक पृष्ठभूमि के बीच सामने आया है। उनकी टिप्पणी ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या भारतीय सिनेमा अपनी विशाल सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक कथाओं को उतनी ही महत्वाकांक्षा, गहराई और वैश्विक दृष्टिकोण के साथ पर्दे पर ला पा रहा है, जितनी क्षमता भारत के पास मौजूद है। अब देखना यह होगा कि गीतांजलि की यह टिप्पणी केवल सोशल मीडिया बहस तक सीमित रहती है या भारतीय सिनेमा में कहानी कहने के तरीके को लेकर एक बड़ी चर्चा को जन्म देती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। शिक्षा सुधार और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक ने शनिवार को अस्पताल से एक वीडियो जारी कर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने वीडियो में कहा कि वह अस्पताल से जा रहे हैं और अगर प्रशासन उन्हें गिरफ्तार करना चाहता है तो कर सकता है। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर मामला चर्चा में आ गया है। अस्पताल में निगरानी का लगाया आरोप सोनम वांगचुक ने वीडियो में दावा किया कि अस्पताल में उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान उनकी आवाज को दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद उनके समर्थकों ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। वहीं अस्पताल प्रशासन और अधिकारियों की ओर से पूरे मामले को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की गई है। प्रशासन का कहना है कि वांगचुक के स्वास्थ्य को देखते हुए जरूरी चिकित्सा निगरानी की जा रही थी। 26 दिन के अनशन के बाद बिगड़ी थी तबीयत सोनम वांगचुक ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई और छात्रों के हितों को लेकर लंबा अनशन किया था। लगातार उपवास के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में उन्होंने सरकार की ओर से बातचीत और सुधार के आश्वासन के बाद अपना अनशन खत्म किया था। उन्होंने कहा था कि छात्रों के मुद्दों को लेकर संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। शिक्षा सुधार को लेकर आंदोलन जारी रखने का ऐलान वांगचुक लगातार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों की समस्याओं के समाधान की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं से युवाओं के भविष्य पर असर पड़ता है। उनके आंदोलन को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्रों और सामाजिक संगठनों ने समर्थन भी जताया है। अब आगे के कदम पर नजर सोनम वांगचुक के नए वीडियो के बाद उनके अगले कदम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं प्रशासन और आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।
लखनऊ, एजेंसियां। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि अगर समस्या की जड़ में बीमारी है तो सिर्फ ऊपर-ऊपर का समाधान करने से बात नहीं बनेगी। अखिलेश ने सरकार पर साधा निशाना अखिलेश यादव ने अपने बयान में लिखा कि "जब बीमारी ROOT में है तो FRUIT के इलाज से कोई नहीं मानने वाला"। उन्होंने इस बयान के जरिए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि समस्याओं का स्थायी समाधान मूल कारणों को दूर करने से ही संभव है। सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद तोड़ा अनशन लद्दाख से जुड़े मुद्दों और छात्रों के समर्थन में अनशन कर रहे सोनम वांगचुक ने सरकार के आश्वासन के बाद अपना अनशन समाप्त किया। इसके बाद अखिलेश यादव की यह प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी पर भी किया हमला अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में बीजेपी पर निशाना साधते हुए लिखा कि देश की कई समस्याओं की जड़ राजनीतिक व्यवस्था से जुड़ी हुई है। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए और बदलाव की जरूरत बताई। सपा नेताओं ने भी दी प्रतिक्रिया सपा नेताओं ने सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के फैसले का स्वागत किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि जीवन की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन जिन मुद्दों को लेकर आंदोलन हुआ है, उनका समाधान होना चाहिए।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने CJP (Cockroach Janta Party) से जुड़े छात्र प्रदर्शन और पेपर लीक विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। सलमान खान ने सोशल मीडिया के जरिए छात्रों के संघर्ष की सराहना की और कहा कि युवाओं की आवाज को सुना जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने और छात्रों से अपने परिवारों के पास लौटने की अपील की। सलमान ने छात्रों के साहस की तारीफ की सलमान खान ने अपने संदेश में प्रदर्शन में शामिल छात्रों की हिम्मत और एकजुटता की तारीफ की। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं गंभीर मुद्दा हैं और युवाओं के भविष्य से जुड़ी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील सलमान खान ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार की ओर से सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। उन्होंने भावनात्मक अंदाज में वांगचुक से कहा कि अब आंदोलन को आगे बढ़ाने के बजाय समाधान की दिशा में बढ़ना चाहिए। "छात्र अपने घर लौटें" संदेश अभिनेता ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से भी अपील की कि वे अपने परिवारों के पास लौटें और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की प्रक्रिया को मौका दें। सलमान ने छात्रों की सुरक्षा और भविष्य को प्राथमिकता देने की बात कही। सलमान के बयान पर सोशल मीडिया में चर्चा सलमान खान के बयान के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग उनके छात्रों के समर्थन वाले रुख की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग उनके संदेश को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। CJP (Cockroach Janta Party) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के 26 दिन के अनशन खत्म करने के बाद नया संदेश जारी किया है। दीपके ने कहा कि वांगचुक का अनशन खत्म होना राहत की बात है, लेकिन छात्रों के मुद्दों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। "विद्यार्थियों का त्याग व्यर्थ नहीं जाने देंगे" अभिजीत दीपके ने कहा कि इस आंदोलन में छात्रों ने जो संघर्ष और त्याग किया है, उसे बेकार नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को आगे बढ़ाने की अपील की। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम CJP दीपके ने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद भी CJP का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि संगठन अभी भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पेपर लीक मामलों में जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग पर कायम है। सरकार के साथ बातचीत, लेकिन आंदोलन जारी रखने का ऐलान अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। CJP का कहना है कि केवल नए कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करनी होगी। CJP आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं अभिजीत दीपके अभिजीत दीपके CJP आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया और जमीनी प्रदर्शन के जरिए युवाओं को जोड़ने का अभियान चलाया है।
गुरुग्राम, एजेंसियां। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुंचकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने डॉक्टरों से वांगचुक के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके उपचार की समीक्षा की। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद कराया गया भर्ती सोनम वांगचुक को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया गया था। उनकी पत्नी ने बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था, जिसके बाद कोर्ट ने अस्पताल बदलने की अनुमति दी। डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा उपचार मेदांता अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम वांगचुक के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रही है। लंबे समय से जारी अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अस्पताल प्रशासन उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। मुलाकात के बाद फिर तेज हुई चर्चा जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की अस्पताल में मुलाकात के बाद इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इस बीच, वांगचुक के समर्थकों ने आंदोलन जारी रखने की बात दोहराई है और सरकार से उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल करने की अपील की है।
नई दिल्ली,एजेंसियां। दिल्ली हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के समर्थक सोनम वांगचुक को इलाज के लिए मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी है। लंबे समय से जारी उनके अनशन के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने पर यह फैसला लिया गया। अदालत के आदेश के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। स्वास्थ्य बिगड़ने पर अदालत का हस्तक्षेप सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि लगातार अनशन के कारण सोनम वांगचुक की तबीयत खराब हो गई है और उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता है। इस पर हाईकोर्ट ने उनकी चिकित्सकीय देखभाल सुनिश्चित करने के लिए मेदांता अस्पताल में स्थानांतरण की अनुमति दे दी। डॉक्टरों की एक टीम उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी कर रही है। धरनास्थल पर लौटे समर्थक सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद उनके समर्थक और प्रदर्शनकारी फिर से अपने धरनास्थल पर लौट आए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा और वे अपनी मांगों को लेकर सरकार से बातचीत चाहते हैं। मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। सरकार से वार्ता की मांग जारी प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से जल्द बातचीत शुरू करने और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। वहीं प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर भी अस्पताल और प्रशासन नियमित जानकारी साझा कर रहे हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद मार्च और उससे जुड़े घटनाक्रम के बाद CJP (छात्र संगठन) और केंद्र सरकार के बीच पहली औपचारिक बातचीत हुई। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात कर छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर एक ज्ञापन सौंपा। लगभग 10 मिनट तक चली इस बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने अपनी प्रमुख मांगों को विस्तार से रखा और उन पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की। बैठक के बाद CJP नेताओं ने बताया बैठक के बाद CJP नेताओं ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने उनकी सभी मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और कहा कि इन मुद्दों पर सरकार तथा पार्टी नेतृत्व के साथ आंतरिक स्तर पर चर्चा की जाएगी। हालांकि, बैठक में किसी भी मांग पर तत्काल फैसला या लिखित आश्वासन नहीं दिया गया। सरकार की ओर से भी इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। CJP ने सरकार के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाया जाए। सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा किया जाए। परीक्षा विवाद के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। संगठन का कहना है कि इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई होने तक उसका आंदोलन जारी रहेगा। यह बैठक ऐसे समय हुई जब संसद के मानसून सत्र के पहले दिन CJP ने ‘चलो संसद’ मार्च आयोजित किया था। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए और कार्रवाई की। इस दौरान कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया, जिनमें संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके भी शामिल बताए गए। बैठक के बाद सौरव दास ने कहा बैठक के बाद सौरव दास ने कहा कि सरकार ने संवाद की शुरुआत की है, लेकिन अब निर्णय सरकार को लेना है। वहीं आशुतोष रांका ने कहा कि छात्रों और युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दों पर संगठन अपना संघर्ष जारी रखेगा। फिलहाल सरकार ने केवल मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में इन मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है और क्या यह बातचीत किसी ठोस समाधान का मार्ग प्रशस्त कर पाती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित संसद मार्च से पहले सोमवार सुबह जंतर-मंतर पर भारी हंगामा देखने को मिला। पुलिस ने मार्च को रोकने के लिए इलाके में कड़ी बैरिकेडिंग की थी और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। इसके विरोध में भीड़ ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। मौके पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा CJP का संसद मार्च सुबह नौ बजे शुरू होना था, लेकिन बैरिकेडिंग के कारण इसमें देरी हुई। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि उन्हें कोई नहीं रोक सकता और वे हर हाल में संसद तक पहुंचेंगे। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी, इसलिए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया। इसी बीच, 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए सरकार के सामने तीन शर्तें रखी हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक की जिम्मेदारी तय करने, CJP प्रतिनिधिमंडल को संसद जाने की अनुमति देने तथा सांसदों से मुद्दा उठाने का आश्वासन मांगा है। स्वास्थ्य कारणों से ऐसा संभव न होने पर उन्होंने सांसदों से सफदरजंग अस्पताल आकर आश्वासन देने की मांग की है।
रांची। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी है। इससे पहले झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता और विधायक जयराम महतो नई दिल्ली जाकर वांगचुक के आंदोलन के समर्थन में शामिल हुए थे। अब इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से वांगचुक के अनशन को लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय हित से जुड़ा मुद्दा बताया है। अपने फेसबुक पोस्ट में स्वास्थ्य मंत्री ने लिखा कि सोनम वांगचुक का अनशन केवल व्यक्तिगत मांगों का आंदोलन नहीं, बल्कि राष्ट्र और देश के युवाओं के हितों से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने भी अंग्रेजों के खिलाफ सत्याग्रह और अनशन का मार्ग अपनाया था तथा वांगचुक उसी गांधीवादी विचारधारा का अनुसरण कर रहे हैं। 'सरकार का पहला दायित्व संवाद और स्वास्थ्य की रक्षा' डॉ. अंसारी ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति अपराध नहीं, बल्कि उसकी आत्मा होती है। यदि कोई व्यक्ति अपनी मांगों को लेकर अनशन करता है, तो उसे किसी राजनीतिक दल या विचारधारा के नजरिए से नहीं, बल्कि एक नागरिक और राष्ट्रभक्त के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली जिम्मेदारी अनशनकारी की बात सुनना, उसके स्वास्थ्य की रक्षा करना और संवाद का रास्ता खोलना है। स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक ताकत विरोध को दबाने में नहीं, बल्कि उसे सुनने और उसका समाधान खोजने में होती है। उन्होंने कहा कि चाहे सरकार किसी भी राजनीतिक दल की हो, उसकी संवेदनशीलता इस बात से आंकी जाती है कि वह सबसे कमजोर और पीड़ित नागरिक के साथ कैसा व्यवहार करती है। डॉ. इरफान अंसारी ने कहा डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन मानवीय मूल्य हमेशा स्थायी रहते हैं। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर संवाद, सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ समाधान निकालने की अपील की। उनके अनुसार, सरकार को ऐसा रास्ता अपनाना चाहिए जिससे न किसी अनशनकारी का जीवन संकट में पड़े और न ही लोकतंत्र की गरिमा पर कोई प्रश्नचिह्न लगे।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि हाई कोर्ट के निर्देश और मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह के बाद उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए यह कदम उठाया गया। लंबे समय से उपवास और डिहाइड्रेशन के कारण उनकी स्थिति कमजोर हो गई थी। सफदरजंग अस्पताल के अनुसार सफदरजंग अस्पताल के अनुसार, सोनम वांगचुक को सुबह करीब 7:40 बजे भर्ती किया गया। अस्पताल ने बताया कि उनकी हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। शरीर में पानी की कमी और लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है। गीतांजलि डी. अंगमो ने अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखा इस बीच, उनकी पत्नी गीतांजलि डी. अंगमो ने अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखकर उन्हें किसी दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि वांगचुक का पोटेशियम स्तर 17 जुलाई की शाम 4.3 से घटकर 18 जुलाई की सुबह 2.9 हो गया है। गीतांजलि ने सफदरजंग अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह अस्पताल नहीं, बल्कि "जेल" जैसा माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोबाइल फोन रखने की अनुमति नहीं दी जा रही, जिससे आंदोलन का संचालन प्रभावित हो रहा है। गीतांजलि ने यह भी घोषणा की गीतांजलि ने यह भी घोषणा की कि अब यह आंदोलन पूरे देश में यात्रा के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सोनम वांगचुक स्वास्थ्य कारणों से इसमें शामिल नहीं हो पाए, तो वह स्वयं उनका प्रतिनिधित्व करेंगी। साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था सहित विभिन्न संस्थाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उधर, जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे तीन अन्य छात्र कार्यकर्ताओं की भी तबीयत बिगड़ने की खबर है। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश की। इस घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी और सांसद चंद्रशेखर आजाद सहित कई विपक्षी नेताओं ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना की। उनका कहना है कि पुलिस कार्रवाई के बजाय सरकार को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए था। विपक्ष ने इस घटना को लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध की भावना के लिए चिंताजनक बताया।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य बिगड़ने पर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद उनका आंदोलन और तेज हो गया है। उनके सहयोगी और Coackroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शनिवार को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि वांगचुक को अस्पताल ले जाने से आंदोलन खत्म नहीं होगा और उनकी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। 'आंदोलन नहीं रुकेगा' भूख हड़ताल शुरू करने के बाद अभिजीत दिपके ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों और नागरिकों की आवाज़ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। जंतर-मंतर पर बढ़ा तनाव शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को बिगड़ती सेहत के चलते जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया। इस दौरान प्रदर्शन स्थल पर तनाव की स्थिति बन गई। दिपके ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती की गई और शांतिपूर्ण आंदोलन को बाधित करने की कोशिश हुई। 20 जुलाई का 'चलो संसद' मार्च रहेगा जारी अभिजीत दिपके ने कहा कि सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद 20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च अपने तय कार्यक्रम के अनुसार निकाला जाएगा। उन्होंने समर्थकों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील भी की। सरकार से बातचीत की मांग आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर सरकार को जल्द संवाद शुरू करना चाहिए। वहीं प्रशासन का कहना है कि सोनम वांगचुक को केवल चिकित्सकीय सलाह और अदालत के निर्देश के आधार पर अस्पताल ले जाया गया है। फिलहाल सभी की निगाहें आंदोलन के अगले चरण और सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की तबीयत अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 21वें दिन बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने शनिवार तड़के उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के उस निर्देश के बाद की गई, जिसमें उनकी सेहत पर लगातार निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप करने को कहा गया था। जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाया गया शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस और मेडिकल टीम जंतर-मंतर पहुंची, जहां वांगचुक पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे। स्वास्थ्य में लगातार गिरावट और डॉक्टरों की सलाह के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। इस दौरान कुछ समर्थकों ने विरोध भी किया और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हुई कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में प्रशासन को निर्देश दिया था कि सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित जांच कराई जाए और हालत गंभीर होने पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। पुलिस का कहना है कि अस्पताल ले जाने का फैसला पूरी तरह मेडिकल सलाह के आधार पर लिया गया। पत्नी ने इलाज को लेकर रखी शर्त अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने कहा कि उनकी स्पष्ट सहमति के बिना कोई चिकित्सा प्रक्रिया या उपचार शुरू नहीं किया जाए। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल ले जाने से पहले परिवार को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। समर्थकों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया वांगचुक को अस्पताल भेजे जाने के बाद उनके समर्थकों ने आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है। आंदोलन से जुड़े नेताओं ने कहा कि उनकी मांगें पूरी होने तक विरोध जारी रहेगा और आगामी दिनों में विरोध कार्यक्रमों को और तेज किया जाएगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शुक्रवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गई। वह 28 जून से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। आंदोलन को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। डॉक्टरों के अनुसार डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय से भोजन न करने के कारण वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही है। उनका वजन अब 56.55 किलोग्राम रह गया है, जो पिछले 24 घंटे में 350 ग्राम कम हुआ है। बीते 20 दिनों में उनका वजन नौ किलोग्राम से अधिक घट चुका है। चिकित्सकों ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर 108/68, ब्लड शुगर 70 mg/dL और हार्ट रेट 72 बीट प्रति मिनट दर्ज किया गया है। शरीर में हल्के डिहाइड्रेशन के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक भोजन नहीं मिलने से पहले शरीर की चर्बी, फिर मांसपेशियां प्रभावित हुई हैं और अब आंतरिक अंगों पर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है। सोनम वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बावजूद सोनम वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि वह हर हाल में 20 जुलाई तक जीवित रहने की कोशिश करेंगे ताकि संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि 20 जुलाई का मार्च सफल नहीं हुआ तो "मैं भूत बनकर वापस आऊंगा।" आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने घोषणा की है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। संगठन ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की है। आंदोलन की प्रमुख मांगें केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करना हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आज दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक से मुलाकात की। वांगचुक लंबे समय से जारी अनशन के जरिए परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं। पवन खेड़ा ने सरकार पर साधा निशाना सोनम वांगचुक से मुलाकात के बाद पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई और सरकार से बातचीत कर समाधान निकालने की अपील की। अनशन में उठाए जा रहे हैं छात्रों से जुड़े मुद्दे सोनम वांगचुक का यह आंदोलन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं पर कार्रवाई और युवाओं के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर है। उनके अनशन को लेकर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं ने समर्थन जताया है। स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता लंबे समय से अनशन पर रहने के कारण सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार उनका वजन भी काफी कम हुआ है और लगातार निगरानी रखी जा रही है। लद्दाख के मुद्दों से भी जुड़े रहे हैं वांगचुक सोनम वांगचुक इससे पहले लद्दाख को राज्य का दर्जा देने, संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और स्थानीय अधिकारों की मांग को लेकर भी आंदोलन कर चुके हैं। लेकिन वर्तमान अनशन का मुख्य मुद्दा परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़ी मांगें हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की लगातार जारी भूख हड़ताल के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके स्वास्थ्य को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि हर नागरिक का जीवन कीमती है और किसी के जीवन को जोखिम में नहीं डाला जा सकता। अदालत ने सरकारी डॉक्टरों को वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित जांच करने तथा चिकित्सकीय आवश्यकता पड़ने पर उचित हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया। अदालत ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका का निस्तारण भी कर दिया। सरकार ने कोर्ट को दिया स्वास्थ्य निगरानी का भरोसा सुनवाई के दौरान केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि सरकारी चिकित्सकों की टीम सोनम वांगचुक की नियमित स्वास्थ्य जांच करेगी और जरूरत पड़ने पर आवश्यक चिकित्सकीय कदम उठाए जाएंगे। इस आश्वासन के बाद अदालत ने संतोष जताते हुए स्वास्थ्य निगरानी जारी रखने के निर्देश दिए। 19वें दिन भी जारी है भूख हड़ताल सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल गुरुवार को 19वें दिन में प्रवेश कर गई। डॉक्टरों के अनुसार, लंबे उपवास के कारण उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक घट चुका है। चिकित्सकों ने बताया कि लगातार उपवास से उनके ब्लड शुगर का स्तर कम हो रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। हालांकि, फिलहाल वह सक्रिय हैं और डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। 20 जुलाई को संसद मार्च की अपील सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि उनकी तबीयत पूरी तरह ठीक नहीं है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वह अपना अनशन जारी रखेंगे। साथ ही उन्होंने लोगों से 20 जुलाई को संसद तक प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि आंदोलन को मजबूत करना ही उनके समर्थन का सबसे प्रभावी तरीका होगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में खुला पत्र जारी किया है। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के आंदोलन को उचित बताते हुए सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। साथ ही, उन्होंने वांगचुक से स्वास्थ्य कारणों को देखते हुए अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। 'देश को आपकी आवाज़ की ज़रूरत है' अपने पत्र में शशि थरूर ने सोनम वांगचुक से कहा कि देश को उनकी आवाज़ और नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने लिखा कि आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए उनका स्वस्थ रहना अधिक जरूरी है, इसलिए उन्हें भूख हड़ताल समाप्त कर संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखना चाहिए। छात्रों के संघर्ष को बताया जायज़ थरूर ने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों से सबसे अधिक नुकसान मेहनत करने वाले सामान्य परिवारों के छात्रों को होता है। उन्होंने लिखा कि यह केवल परीक्षा का नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और उनके विश्वास का भी सवाल है। सरकार से बातचीत की अपील कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ सार्थक बातचीत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं की चिंताओं का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। मानसून सत्र में उठ सकता है मुद्दा शशि थरूर ने संकेत दिया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों की मांगों का मुद्दा संसद के आगामी मानसून सत्र में भी उठाया जा सकता है। उनका कहना है कि युवाओं का भरोसा बनाए रखना लोकतंत्र और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए जरूरी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल गुरुवार को 19वें दिन भी जारी रही। बिगड़ती सेहत के बीच जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने साफ कहा कि वह अभी अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि उनसे अनशन तोड़ने की मांग करने के बजाय 20 जुलाई को संसद तक प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होकर आंदोलन का समर्थन करें। 'अभी अनशन नहीं तोड़ूंगा' वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा, "मैं अच्छी स्थिति में नहीं हूं, लेकिन इतनी भी खराब हालत में नहीं हूं। मुझसे अनशन खत्म करने के लिए मत कहिए, बल्कि 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल होकर इस आंदोलन को मजबूत कीजिए।" उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता डॉक्टरों के अनुसार, लगातार भूख हड़ताल के कारण वांगचुक का वजन करीब 8.9 किलोग्राम तक घट चुका है। वह बेहद कमजोर हैं और चिकित्सकीय निगरानी में हैं। हालांकि उनकी जीवन रक्षक जांचों पर लगातार नजर रखी जा रही है। दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचा मामला वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति जताई है। याचिका में उनकी चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने और सरकार से आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है। 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान वांगचुक ने देशभर के छात्रों, युवाओं और नागरिकों से 20 जुलाई को संसद तक शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल उनकी भूख हड़ताल नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की लड़ाई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर बुधवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचीं, जहां उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उनके अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का समर्थन किया। वांगचुक कथित NEET परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से अनशन पर बैठे हैं। 'बच्चों के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं' स्वरा भास्कर ने वांगचुक से मुलाकात के बाद कहा कि वह देश के बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने उनके समर्थन में आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। कई हस्तियों ने भी जताया समर्थन स्वरा भास्कर के अलावा अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, जीनत अमान समेत कई कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता भी सोनम वांगचुक के आंदोलन के समर्थन में सामने आए हैं। कुछ हस्तियों ने वांगचुक से स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने की भी अपील की है। 20 जुलाई को संसद मार्च की तैयारी आंदोलन से जुड़े लोगों ने घोषणा की है कि 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। आंदोलनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
मुंबई, एजेंसियां। शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को 17वें दिन में पहुंच गई। उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर अब फिल्म जगत की कई हस्तियां भी खुलकर सामने आ गई हैं। अभिनेता अभय देओल, जीनत अमान, नसीरुद्दीन शाह और '3 इडियट्स' फेम ओमी वैद्या ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए वांगचुक के प्रति समर्थन जताते हुए उनकी स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। जीनत अमान ने सरकार से की बातचीत की अपील अभिनेता अभय देओल ने जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक की एक तस्वीर साझा करते हुए टूटे हुए दिल वाले इमोजी के साथ अपनी चिंता जाहिर की। वहीं, 74 वर्षीय अभिनेत्री जीनत अमान ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि उनके विचार इस समय देश की राजधानी में चल रहे इस आंदोलन के साथ हैं। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि लंबे उपवास के कारण वांगचुक की मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं और उन्हें असहनीय दर्द का सामना करना पड़ रहा है। जीनत अमान ने सरकार से क्या कहा जीनत अमान ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील करने के बजाय सरकार को उनसे बातचीत शुरू करनी चाहिए। उन्होंने वांगचुक के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्हें एसईसीएमओएल के संस्थापक, 'आइस स्तूप' (Ice Stupa) तकनीक के जनक, लद्दाख में शिक्षा सुधार के अग्रदूत और पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता बताया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि फिल्म 3 इडियट्स में आमिर खान का 'फुंसुक वांगडू' का किरदार सोनम वांगचुक से प्रेरित था। अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और ओमी वैद्या ने भी लोगों से वांगचुक के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की। 20 जुलाई को संसद मार्च का ऐलान विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संगठन के अनुसार, 28 जून से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक का अब तक करीब 9 किलो वजन कम हो चुका है और उनकी सेहत लगातार गिर रही है। संगठन का कहना है कि यह आंदोलन NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में चलाया जा रहा है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। 20 जून से शुरू हुए इस आंदोलन के तहत संगठन ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, 20 जुलाई को शांतिपूर्ण संसद मार्च की भी घोषणा की है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राजधानी के जंतर-मंतर पर परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और अंजलि भारद्वाज का समर्थन मिला। दोनों नेताओं ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर छात्रों और युवाओं से मुलाकात की तथा परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई। आंदोलन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। अंजलि भारद्वाज ने कहा अंजलि भारद्वाज ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि छात्रों और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या के समाधान के लिए भूख हड़ताल का सहारा लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र केवल अपने भविष्य के लिए नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2002 से 2026 के बीच देशभर में 45 बड़े पेपर लीक के मामले सामने आए, लेकिन केवल दो मामलों में ही दोषियों को सजा मिल सकी। उनके अनुसार, जब तक दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा। योगेंद्र यादव ने कहा वहीं, योगेंद्र यादव ने कहा कि जंतर-मंतर का सीमित होता प्रदर्शन स्थल लोकतांत्रिक अधिकारों के सिकुड़ने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन के लिए सार्वजनिक स्थान लगातार कम होते जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने आंदोलन को जनता की आवाज बताते हुए छात्रों और सामाजिक संगठनों की सराहना की। सोनम वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ रही है इस बीच भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की सेहत लगातार बिगड़ रही है। मेडिकल अपडेट के अनुसार उनका ब्लड शुगर घटकर 61 तक पहुंच गया है और पिछले तीन दिनों में उनका करीब 2.4 किलोग्राम वजन कम हुआ है। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को चिंताजनक बताया है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और पेपर लीक रोकने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।