AC energy saving

Smart electrochromic coating on walls and windows could reduce AC and heater energy consumption in buildings
Electrochromic Coating: AC-हीटर की बिजली खपत घटाएगी स्मार्ट कोटिंग, मौसम के हिसाब से बदलेंगी दीवारें और खिड़कियां

नई दिल्ली: बढ़ती गर्मी, बदलता मौसम और लगातार बढ़ती बिजली की मांग के बीच घरों और दफ्तरों को आरामदायक तापमान पर बनाए रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। खासकर गर्मियों में एयर कंडीशनर और सर्दियों में हीटर का इस्तेमाल बिजली की खपत और बिल दोनों बढ़ा देता है। इसी समस्या को कम करने के लिए वैज्ञानिक ऐसी स्मार्ट इलेक्ट्रोक्रोमिक कोटिंग पर काम कर रहे हैं, जो मौसम के हिसाब से इमारत की सतहों के व्यवहार को बदल सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह तकनीक दीवारों, छतों और खिड़कियों पर इस्तेमाल की जा सकती है। इसका उद्देश्य गर्म मौसम में सूरज की गर्मी को बाहर रखना और ठंड के दौरान इमारत के भीतर गर्माहट बनाए रखने में मदद करना है। खास बात यह है कि कोटिंग का मोड बदलने के लिए बहुत कम बिजली की जरूरत होती है, जो पारंपरिक AC या हीटर की ऊर्जा खपत की तुलना में काफी कम हो सकती है। क्या है स्मार्ट इलेक्ट्रोक्रोमिक कोटिंग? स्मार्ट इलेक्ट्रोक्रोमिक कोटिंग एक एडवांस्ड सामग्री तकनीक है, जिसे इमारतों की बाहरी सतहों और खिड़कियों पर लगाया जा सकता है। यह बाहरी मौसम के अनुसार अपने तापीय व्यवहार को बदलने में सक्षम होती है। गर्मियों में इसका इस्तेमाल सूर्य की किरणों और गर्मी को अधिक मात्रा में रिफ्लेक्ट करने के लिए किया जा सकता है। इससे इमारत के अंदर गर्मी का प्रवेश कम करने में मदद मिलती है। वहीं ठंड के मौसम में यही तकनीक गर्मी को बनाए रखने में सहायता कर सकती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि भवन के तापमान को नियंत्रित करने का कुछ काम कोटिंग खुद संभाल सकती है, जिससे AC और हीटर पर निर्भरता घट सकती है। कैसे काम करती है यह तकनीक? रिपोर्ट के अनुसार, इस स्मार्ट कोटिंग में बेहद पतले ग्राफीन और कॉपर-बिस्मथ जैसे पदार्थों का इस्तेमाल किया गया है। इलेक्ट्रिक कंट्रोल के जरिए कोटिंग के अलग-अलग मोड बदले जा सकते हैं। इसके काम करने को आसान भाषा में इस तरह समझा जा सकता है: गर्म मौसम में कूलिंग मोड: कोटिंग सूर्य की गर्मी को रिफ्लेक्ट करने में मदद करती है, जिससे इमारत अपेक्षाकृत ठंडी रह सकती है। ठंड के मौसम में हीटिंग मोड: यह इमारत में गर्मी बनाए रखने में मदद करती है, जिससे अंदर का तापमान बढ़ाने में सहायता मिल सकती है। कम बिजली की जरूरत: मोड बदलने के लिए थोड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है। पावर कट के दौरान भी प्रभाव: रिपोर्ट के अनुसार, बिजली बंद होने के बाद कोटिंग आखिरी सेट किए गए मोड में काम करना जारी रख सकती है। लैब और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की छत पर किए गए परीक्षणों में इस तकनीक ने इमारत के तापमान को आसपास की हवा की तुलना में लगभग 1 डिग्री तक कम करने की क्षमता दिखाई। वहीं हीटिंग मोड में तापमान को 33 डिग्री तक बढ़ाने की क्षमता का भी उल्लेख किया गया है। AC और हीटर की खपत कितनी घट सकती है? इस तकनीक को लेकर किए गए कंप्यूटर सिमुलेशन में ऊर्जा बचत की संभावनाओं का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में स्मार्ट कोटिंग के इस्तेमाल से AC और हीटिंग सिस्टम की ऊर्जा खपत में औसतन 73.69 MBtu तक की कमी का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट में इसे लगभग 21,600 यूनिट बिजली के बराबर बताया गया है। इसके अलावा, कम ऊर्जा खपत का सीधा फायदा पर्यावरण को भी हो सकता है। अनुमान के मुताबिक, प्रत्येक इमारत सालाना करीब 4,063 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बच सकती है। हालांकि, इन आंकड़ों को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने से पहले यह समझना जरूरी है कि ऊर्जा बचत इमारत की डिजाइन, स्थानीय मौसम, आकार, सामग्री और इस्तेमाल के तरीके जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी। सिर्फ बिजली बिल ही नहीं, पर्यावरण को भी फायदा इमारतों में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है और इसका एक बड़ा हिस्सा तापमान नियंत्रित करने में खर्च होता है। अगर बाहरी सतहें और खिड़कियां खुद ही गर्मी के आदान-प्रदान को नियंत्रित करने में मदद करें, तो HVAC सिस्टम पर दबाव कम किया जा सकता है। इसका संभावित फायदा तीन स्तरों पर हो सकता है: AC और हीटर के इस्तेमाल में कमी बिजली की खपत और ऊर्जा लागत में संभावित बचत कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद यानी यह तकनीक सिर्फ घरों को ठंडा या गर्म रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की ऊर्जा-कुशल इमारतों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। क्या यह AC और हीटर को पूरी तरह खत्म कर देगी? फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। स्मार्ट इलेक्ट्रोक्रोमिक कोटिंग को AC या हीटर का सीधा विकल्प नहीं, बल्कि उनकी ऊर्जा जरूरत कम करने वाली सहायक तकनीक के तौर पर देखना ज्यादा उचित है। बहुत ज्यादा गर्मी या अत्यधिक ठंड वाले इलाकों में पारंपरिक HVAC सिस्टम की जरूरत बनी रह सकती है। हालांकि, अगर भवन की सतहें पहले से ही तापमान नियंत्रण में मदद करेंगी, तो AC या हीटर को कम मेहनत करनी पड़ सकती है। बाजार में आने से पहले कई चुनौतियां तकनीक की संभावनाएं आकर्षक हैं, लेकिन इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने से पहले कई चुनौतियों का समाधान जरूरी है। वैज्ञानिकों के सामने प्रमुख सवाल हैं कि इस कोटिंग को बड़े स्तर पर कम लागत में कैसे बनाया जाए, यह कितने वर्षों तक प्रभावी रहेगी और अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में इसका प्रदर्शन कितना स्थिर रहेगा। खासकर बेहद ठंडे क्षेत्रों में इसकी हीटिंग क्षमता को और बेहतर बनाने की जरूरत बताई जा रही है। इसके अलावा वास्तविक इमारतों में लंबे समय तक परीक्षण के बाद ही इसकी व्यावसायिक उपयोगिता का सही आकलन किया जा सकेगा। भविष्य की इमारतों के लिए क्यों अहम है यह तकनीक? भविष्य में घर और दफ्तर सिर्फ बिजली से चलने वाले AC, हीटर और अन्य उपकरणों पर निर्भर नहीं रहेंगे। बिल्डिंग की दीवारें, छतें और खिड़कियां भी ऊर्जा प्रबंधन का हिस्सा बन सकती हैं। स्मार्ट इलेक्ट्रोक्रोमिक कोटिंग इसी दिशा में एक संभावित कदम है। अगर इसे टिकाऊ, किफायती और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए तैयार किया जाता है, तो यह ऊर्जा की मांग कम करने और पर्यावरण पर दबाव घटाने में उपयोगी साबित हो सकती है। फिलहाल यह तकनीक विकास और परीक्षण के चरण में है, लेकिन इसकी क्षमता यह संकेत जरूर देती है कि आने वाले समय में इमारतें सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि खुद तापमान नियंत्रित करने वाली स्मार्ट संरचनाएं भी बन सकती हैं।  

surbhi अगस्त 3, 2026 0
AC tips rainy season
जानिए बारिश के मौसम में AC चलाने का सही तरीका,वरना गलत मोड से बढ़ सकता है बिजली बिल

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी के बीच होने वाली बारिश जहां तापमान को कम करती है, वहीं घरों में नमी और उमस की परेशानी बढ़ा देती है। ऐसे मौसम में लोग राहत पाने के लिए एयर कंडीशनर यानी AC का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन कई बार सही मोड की जानकारी न होने के कारण AC पूरी तरह आराम नहीं दे पाता। विशेषज्ञों के अनुसार बरसात के मौसम में AC को गलत मोड पर चलाने से न सिर्फ बिजली की खपत बढ़ती है, बल्कि मशीन पर अतिरिक्त दबाव भी पड़ता है।   बरसात में कौन-सा मोड सबसे बेहतर?   बरसात के मौसम में AC को सामान्य “Cool Mode” की बजाय “Dry Mode” पर चलाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। यह मोड कमरे की हवा में मौजूद अतिरिक्त नमी को कम करता है और वातावरण को आरामदायक बनाता है। अक्सर बारिश के दिनों में तापमान बहुत ज्यादा नहीं होता, लेकिन हवा में नमी बढ़ जाने से चिपचिपाहट महसूस होती है। Dry Mode इसी समस्या को दूर करने में मदद करता है। इस मोड में AC कंप्रेसर लगातार नहीं चलता, बल्कि जरूरत के हिसाब से काम करता है। इससे बिजली की खपत कम होती है और कमरे में संतुलित ठंडक बनी रहती है। खासकर उन इलाकों में जहां लगातार बारिश होती है, वहां यह फीचर काफी उपयोगी साबित होता है।   बिजली बचाने के साथ बढ़ती है AC की लाइफ विशेषज्ञों का कहना है कि सही मोड पर AC चलाने से मशीन की कार्यक्षमता बेहतर रहती है। Dry Mode AC पर अतिरिक्त लोड नहीं पड़ने देता, जिससे उसकी लाइफ बढ़ सकती है। कई आधुनिक AC में “Auto Mode” भी दिया जाता है, जो कमरे के तापमान और नमी के हिसाब से खुद सेटिंग बदल लेता है। अगर मौसम ज्यादा उमस भरा हो, तो Auto Mode भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि बारिश के दौरान Dry Mode को सबसे प्रभावी माना जाता है।   कम तापमान पर AC चलाना हो सकता है नुकसानदायक कई लोग तेज ठंडक पाने के लिए AC को बहुत कम तापमान पर चला देते हैं, लेकिन ऐसा करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे सर्दी-जुकाम, शरीर दर्द और गले में संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञ 24 से 26 डिग्री सेल्सियस तापमान को सबसे उपयुक्त मानते हैं।   फिल्टर की सफाई भी है जरूरी बरसात के मौसम में AC फिल्टर जल्दी गंदे हो सकते हैं। इसलिए नियमित अंतराल पर फिल्टर की सफाई और समय-समय पर सर्विसिंग करवाना जरूरी है। साफ फिल्टर न सिर्फ स्वच्छ हवा देते हैं, बल्कि AC की कूलिंग क्षमता भी बेहतर बनाए रखते हैं। सही तरीके से इस्तेमाल किया गया AC न केवल आराम देता है, बल्कि बिजली और रखरखाव दोनों में बचत भी करता है।

Unknown मई 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 30, 2026 0