नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडनेकर इन दिनों अपने एक सोशल मीडिया वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। जंतर-मंतर पर NEET-UG 2026 से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर भूमि ने आपत्ति जताई। उन्होंने युवाओं से अपील की कि असहमति और विरोध दर्ज कराते समय भाषा की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। हालांकि, उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर ही उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। पीएम मोदी के खिलाफ भाषा पर भूमि ने जताई आपत्ति भूमि पेडनेकर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करते हुए विरोध-प्रदर्शनों से सामने आए कुछ वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा पर चिंता जताई। उनका कहना था कि देश के युवाओं को अपनी नाराजगी और असहमति व्यक्त करते समय अपमानजनक या गाली-गलौज वाली भाषा से बचना चाहिए। भूमि ने देश की संस्कृति और सार्वजनिक संवाद में सम्मानजनक भाषा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जिस तरह हम अपने परिवार के बड़ों से बात करते हैं, क्या सार्वजनिक जीवन में भी संवाद की एक मर्यादा नहीं होनी चाहिए। अभिनेत्री ने युवाओं से शिक्षा और लैंगिक हिंसा जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने तथा एकता के साथ आगे बढ़ने की अपील की। बयान के बाद सोशल मीडिया पर घिरीं अभिनेत्री भूमि के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ यूजर्स ने उनके इस विचार का समर्थन किया कि राजनीतिक असहमति के बावजूद अपशब्दों से बचना चाहिए, लेकिन कई अन्य लोगों ने सवाल उठाया कि क्या विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और छात्रों के साथ हुई घटनाओं पर भी समान रूप से आवाज उठाई गई थी। आलोचकों ने आरोप लगाया कि भूमि ने प्रदर्शनकारियों की भाषा पर तो टिप्पणी की, लेकिन प्रदर्शन से जुड़े दूसरे विवादित पहलुओं पर उनकी प्रतिक्रिया दिखाई नहीं दी। कुछ यूजर्स ने उनके बयान को 'चुनिंदा' बताया और कहा कि किसी भी मुद्दे को केवल एक पक्ष से देखने के बजाय पूरे घटनाक्रम पर बात होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर कुछ टिप्पणियां बेहद तीखी भी रहीं। कुछ लोगों ने अभिनेत्री पर 'जमीनी हकीकत से दूर' होने का आरोप लगाया, जबकि कुछ यूजर्स ने यह सवाल किया कि क्या सम्मान की अपील करने से पहले सत्ता और प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। विवाद के बीच असली सवाल क्या है? इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग मुद्दे सामने आते हैं। पहला, किसी भी लोकतांत्रिक विरोध में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ भाषा की मर्यादा का सवाल। दूसरा, प्रदर्शनकारियों के साथ प्रशासन और पुलिस के व्यवहार को लेकर उठाए जा रहे सवाल। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की आलोचना और विरोध प्रदर्शन नागरिकों का महत्वपूर्ण अधिकार है। वहीं, किसी व्यक्ति या संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ हिंसक या अपमानजनक भाषा को लेकर सवाल उठाना भी अलग मुद्दा है। दोनों विषयों पर एक साथ चर्चा की जा सकती है। यही वजह है कि भूमि पेडनेकर के बयान ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक और सामाजिक बहस को और तेज कर दिया है। जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा विवाद यह विवाद उस समय सामने आया है जब NEET-UG 2026 से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बहस जारी है। प्रदर्शनकारियों की ओर से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं। प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल ने भी अलग बहस को जन्म दिया। भूमि पेडनेकर ने इसी पहलू पर प्रतिक्रिया देते हुए युवाओं से संयमित और सम्मानजनक भाषा अपनाने की अपील की। हालांकि, सोशल मीडिया पर उनकी प्रतिक्रिया के बाद सवाल यह भी उठ रहा है कि सार्वजनिक हस्तियों को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणी करते समय पूरे घटनाक्रम के सभी पक्षों पर बात करनी चाहिए या नहीं। सोशल मीडिया की बहस ने बढ़ाई चर्चा भूमि पेडनेकर के बयान के बाद सामने आई प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि NEET-UG 2026 से जुड़ा विवाद केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। अब इसमें विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक भाषा, पुलिस कार्रवाई, सार्वजनिक संवाद और सेलिब्रिटी की भूमिका जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए हैं। फिलहाल इस विवाद का सबसे बड़ा संदेश यही है कि लोकतांत्रिक असहमति में सवाल पूछना जरूरी है, लेकिन भाषा और संवाद की मर्यादा को लेकर बहस भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। साथ ही, किसी भी विवाद को समझने के लिए आरोपों, प्रतिक्रियाओं और उपलब्ध तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।
मुंबई: रियलिटी शो 'Lock Upp 2' में अभिनेत्री शिल्पा शिंदे की एक टिप्पणी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शो के हालिया एपिसोड में शिल्पा द्वारा सह-प्रतियोगी शिवांगी जोशी की निजी जिंदगी पर की गई टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई टीवी कलाकारों ने भी इस मामले में सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की है। क्या है पूरा मामला? हालिया एपिसोड में एक टास्क के बाद शिल्पा शिंदे और शिवांगी जोशी को एक ही सेल में रखा गया। इसके बाद दोनों के बीच कई बार मतभेद देखने को मिले। इसी दौरान बातचीत के दौरान शिल्पा शिंदे ने शिवांगी जोशी की निजी जिंदगी और कथित रिश्तों को लेकर टिप्पणी की, जिसे सोशल मीडिया पर कई लोगों ने आपत्तिजनक बताया। रिपोर्ट्स के अनुसार, बातचीत के दौरान अभिनेता कुशाल टंडन का नाम भी लिया गया, जिसके बाद यह विवाद और बढ़ गया। सोशल मीडिया पर हुई आलोचना एपिसोड प्रसारित होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई दर्शकों ने शिल्पा शिंदे की टिप्पणी की आलोचना की। यूजर्स का कहना है कि किसी की निजी जिंदगी या व्यक्तिगत संबंधों पर इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है, चाहे वह रियलिटी शो का हिस्सा ही क्यों न हो। टीवी इंडस्ट्री के कलाकार भी आए समर्थन में इस विवाद के बाद कई टीवी कलाकारों ने शिवांगी जोशी के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दी। विन्नी धूपर ने एक वीडियो साझा कर कहा कि किसी महिला की निजी जिंदगी, रिश्तों या व्यक्तिगत फैसलों का मजाक उड़ाना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि असहमति व्यक्त करने के कई तरीके हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियां सीमा पार कर देती हैं। जन्नत जुबैर ने क्या कहा? अभिनेत्री जन्नत जुबैर ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए शिवांगी जोशी का समर्थन किया। उन्होंने लिखा कि वह शिवांगी को वर्षों से जानती हैं और उनके व्यक्तित्व व मूल्यों से परिचित हैं। जन्नत ने कहा कि किसी महिला के चरित्र पर बिना तथ्यों के टिप्पणी करना या उसे मनोरंजन का हिस्सा बनाना गलत है। उन्होंने अपील की कि मतभेद होने के बावजूद व्यक्तिगत गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए। राजीव अदातिया की प्रतिक्रिया अभिनेता राजीव अदातिया ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए शिल्पा शिंदे की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी प्रतियोगी की निजी जिंदगी या व्यक्तिगत विषयों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचना चाहिए और रियलिटी शो में भी मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। बढ़ रही है शो की चर्चा 'Lock Upp 2' में लगातार बढ़ते विवाद, बहस और टकराव शो को चर्चा में बनाए हुए हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर अब तक शो के निर्माताओं या संबंधित पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है। एक वर्ग शिल्पा शिंदे की टिप्पणी की आलोचना कर रहा है, जबकि कुछ दर्शकों का मानना है कि रियलिटी शो में ऐसी परिस्थितियां अक्सर देखने को मिलती हैं।
नई दिल्ली: कॉमेडियन सुनील पाल एक बार फिर कॉमेडियन और कंटेंट क्रिएटर समय रैना को लेकर दिए गए अपने बयान की वजह से चर्चा में हैं। सुनील पाल ने दावा किया है कि समय रैना ने उन्हें 'India's Got Latent Season 2' में बतौर गेस्ट शामिल होने के लिए 25 लाख रुपये का ऑफर दिया था, लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। उनका कहना है कि शो की भाषा और कंटेंट उनकी सोच से मेल नहीं खाते, इसलिए उन्होंने हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। ₹25 लाख का ऑफर, लेकिन रख दी अपनी शर्त हाल ही में पैपराजी से बातचीत के दौरान सुनील पाल ने कहा कि समय रैना ने उन्हें शो में आने के लिए 25 लाख रुपये देने की बात कही थी। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि वह किसी भी कीमत पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करेंगे। सुनील पाल ने कहा, "उसने 25 लाख रुपये देने की बात की थी, लेकिन मैंने कहा कि मैं गाली नहीं दूंगा। इस पर उसने कहा कि आप मत दीजिए, लेकिन बाकी लोग तो देंगे।" उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर शो की कंटेंट स्टाइल और कॉमेडी को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। आलिया भट्ट पर भी कसा तंज जब उनसे पूछा गया कि शो में अभिनेत्री आलिया भट्ट और शरवरी भी आई थीं और उन्होंने भी गालियां नहीं दी थीं, तो सुनील पाल ने अपने अंदाज में तंज कसते हुए कहा, "जहां-जहां है आलिया, वहां-वहां हैं गालियां। बजा दो तालियां, वरना सपने में आएगा विजय माल्या।" उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पहले भी कर चुके हैं शो पर टिप्पणी यह पहली बार नहीं है जब सुनील पाल ने India's Got Latent को लेकर बयान दिया हो। इससे पहले उन्होंने कहा था कि अगर शो में वास्तविक पारिवारिक माहौल दिखाना है तो समय रैना को जज की कुर्सी पर अपने माता-पिता को बैठाकर उसी तरह का कंटेंट पेश करना चाहिए। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा था कि तभी पता चलेगा कि शो का कंटेंट परिवार के सामने भी सहजता से पेश किया जा सकता है या नहीं। विवाद की शुरुआत कैसे हुई? सुनील पाल और समय रैना के बीच विवाद की शुरुआत 'India's Got Latent' के पहले सीजन के दौरान हुई थी। शो के एक एपिसोड में रणवीर अल्लाहबादिया की विवादित टिप्पणी के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और कई जगह एफआईआर भी दर्ज हुईं। उस दौरान सुनील पाल ने शो के कंटेंट की खुलकर आलोचना की थी और समय रैना को लेकर भी कड़ी टिप्पणियां की थीं। बाद में दोनों 'The Great Indian Kapil Show' में साथ नजर आए, जहां मंच पर भी दोनों के बीच तंज और नोकझोंक देखने को मिली। क्या फिर बढ़ेगा विवाद? सुनील पाल के नए दावे के बाद एक बार फिर India's Got Latent और समय रैना चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। हालांकि अभी तक समय रैना या उनकी टीम की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान पर उनकी ओर से कोई जवाब आता है या नहीं।
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर्सनैलिटी और बॉलीवुड सेलिब्रिटीज के करीबी माने जाने वाले ओरी (ओरहान अवत्रामणि) एक बार फिर यूट्यूबर ध्रुव राठी पर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में एक पॉडकास्ट में ओरी ने ध्रुव राठी की आलोचना करते हुए उन्हें "एंटी नेशनल" बताया और कहा कि वह मुद्दों पर अपनी सुविधा के अनुसार बात करते हैं। "मुझे वह आदमी बिल्कुल पसंद नहीं है" 'KK Creates' पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान ओरी ने कहा कि ध्रुव राठी केवल उन्हीं विषयों पर बोलते हैं जो उनके नैरेटिव के अनुरूप होते हैं। उन्होंने कहा कि वह ध्रुव राठी के सभी वीडियो फॉलो नहीं करते, लेकिन उनके अनुसार कई बार यूट्यूबर ऐसी बातें करते हैं जिनका कोई मतलब नहीं होता, जबकि जिन मुद्दों पर उन्हें बोलना चाहिए, उन पर वह चुप रहते हैं। ओरी ने कहा, "मुझे वह आदमी बिल्कुल पसंद नहीं है।" पीएम नरेंद्र मोदी के साथ फोटो खिंचवाने का सपना पॉडकास्ट के दौरान ओरी ने यह भी बताया कि उनकी एक खास ख्वाहिश है। उन्होंने कहा कि वह एक दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने मशहूर पोज में तस्वीर खिंचवाना चाहते हैं और उम्मीद करते हैं कि यह सपना भविष्य में जरूर पूरा होगा। दिसंबर 2025 के विवाद से जुड़ा मामला यह विवाद नया नहीं है। दिसंबर 2025 में ध्रुव राठी ने 'The Fake Beauty of Bollywood Celebrities' शीर्षक से एक वीडियो जारी किया था, जिसमें कई बॉलीवुड अभिनेत्रियों के कथित कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट और सर्जरी पर चर्चा की गई थी। वीडियो के थंबनेल में जाह्नवी कपूर की तस्वीर भी इस्तेमाल की गई थी, जिसके बाद ओरी ने उनकी तरफ से खुलकर समर्थन किया था। कई अभिनेत्रियों का हुआ था जिक्र ध्रुव राठी के उस वीडियो में जाह्नवी कपूर के अलावा: प्रियंका चोपड़ा दीपिका पादुकोण काजोल जैसी कई अभिनेत्रियों का नाम भी शामिल था। वीडियो के समय और कंटेंट को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बहस देखने को मिली थी। पहले भी कर चुके हैं तीखी टिप्पणी इससे पहले भी ओरी ने सोशल मीडिया पर ध्रुव राठी को लेकर टिप्पणी करते हुए उन्हें "राष्ट्र-विरोधी" कहा था। उनका कहना था कि वह ध्रुव राठी को इसी पहचान से जानते हैं। हालांकि, ध्रुव राठी की ओर से ओरी के हालिया बयान पर फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मुंबई, एजेंसियां। फिल्म निर्माता और निर्देशक करन जोहर ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर कई बॉलीवुड सितारों को अनफॉलो कर सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी थी। उनकी फॉलोइंग लिस्ट से Shah Rukh Khan, Alia Bhatt, Kareena Kapoor Khan, Varun Dhawan और Sidharth Malhotra जैसे बड़े नाम अचानक गायब हो गए। इसके बाद फैंस के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या करण और उनके करीबी दोस्तों के बीच कोई अनबन चल रही है। करण ने पोस्ट शेयर कर दी सफाई लगातार बढ़ती अटकलों के बीच करण जौहर ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए पूरे मामले पर सफाई दी। उन्होंने बताया कि यह किसी विवाद या रिश्तों में खटास की वजह से नहीं, बल्कि उनके “डिजिटल डिटॉक्स” का हिस्सा है। करण ने लिखा कि वह सोशल मीडिया पर अपना समय और ऊर्जा बचाने के लिए लोगों को अनफॉलो कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि इसे “राष्ट्रीय खबर” बनाने की जरूरत नहीं है। प्रियंका चोपड़ा अब भी फॉलो लिस्ट में दिलचस्प बात यह रही कि जहां कई बॉलीवुड सितारे उनकी फॉलोइंग लिस्ट से हट गए, वहीं Priyanka Chopra अब भी उनकी फॉलो लिस्ट में शामिल हैं। इसके अलावा करण फिलहाल बेहद सीमित लोगों को फॉलो कर रहे हैं, जिनमें धर्मा प्रोडक्शंस के सीईओ अपूर्वा मेहता और उद्योगपति आदर पूनावाला शामिल हैं। फिल्मों में व्यस्त हैं करण सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले करण जौहर इन दिनों अपने फिल्मी प्रोजेक्ट्स में भी व्यस्त हैं। हाल ही में उन्होंने चांद मेरा दिल को प्रोड्यूस किया था। अब वह अपनी अगली फिल्म नागजिल्ला की तैयारी में जुटे हैं, जिसमें कार्तिक आर्यन मुख्य भूमिका निभाएंगे।
साउथ और बॉलीवुड फिल्मों के चर्चित अभिनेता Prakash Raj एक बार फिर अपने राजनीतिक तंज को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने एक वीडियो शेयर कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आम खाने की उनकी पसंद को लेकर व्यंग्य किया है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है। प्रकाश राज ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह आम को काटकर उसमें आइसक्रीम मिलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि “कॉकरोच ऐसे आम खाते हैं” और प्रधानमंत्री की ओर इशारा करते हुए टिप्पणी की। वीडियो में क्या दिखा? वीडियो में प्रकाश राज आम को एक अनोखे तरीके से तैयार करते नजर आते हैं और इसे “कॉकरोच स्टाइल” खाने का उदाहरण बताते हैं। उन्होंने पोस्ट के साथ हैशटैग #CockroachJantaParty भी इस्तेमाल किया, जो पहले से ही सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। इस बयान के बाद यूजर्स दो हिस्सों में बंट गए हैं-कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी और राजनीतिक व्यंग्य बता रहे हैं, जबकि कई इसे प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणी करार दे रहे हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ विवाद की पृष्ठभूमि यह पूरा विवाद उस समय और तेज हुआ जब सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान “कॉकरोच” शब्द का इस्तेमाल बेरोजगार युवाओं के संदर्भ में किया गया। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर #CockroachJantaParty नाम से एक व्यंग्यात्मक अभियान शुरू हुआ, जिसने तेजी से लोकप्रियता हासिल की। इस ऑनलाइन आंदोलन से कई फिल्मी हस्तियों और सोशल मीडिया यूज़र्स के जुड़ने की भी खबरें सामने आईं। इसी डिजिटल ट्रेंड को आधार बनाकर अब यह मुद्दा राजनीतिक और सोशल मीडिया बहस का केंद्र बन गया है। पीएम मोदी की आम पसंद का संदर्भ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मौकों पर आम को अपनी पसंदीदा फलों में शामिल बता चुके हैं। पुराने इंटरव्यू में भी उन्होंने आम के प्रति अपने लगाव का जिक्र किया था, जिसका हवाला देकर प्रकाश राज ने यह तंज कसा। सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया प्रकाश राज के इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भारी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। समर्थक इसे व्यंग्य और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक मर्यादा से बाहर का बयान मान रहे हैं।
सोशल मीडिया पर इन दिनों भारतीय क्रिकेटर Yuzvendra Chahal और एक्ट्रेस Taniya Chatterjee को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक वायरल वीडियो के बाद यह मामला सुर्खियों में आया, जिसमें तानिया ने दावा किया कि चहल ने उन्हें इंस्टाग्राम पर मैसेज भेजा था। क्या है पूरा मामला? तानिया चटर्जी ने पैपराजी के सामने बातचीत के दौरान अपने फोन में एक मैसेज दिखाने का दावा किया। उनके अनुसार, चहल ने उनके एक वीडियो पर रिएक्शन देते हुए उन्हें “क्यूट” कहा था। तानिया ने कहा, “आप क्यूट हो… ये मैसेज चहल ने भेजा है। वैसे क्यूट तो नॉर्मल चीज है, मुझे बहुत लोग बोलते हैं।” जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने इस मैसेज का जवाब दिया, तो उन्होंने साफ किया कि उन्होंने मैसेज काफी देर से देखा और तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी चहल से पहले कभी कोई बातचीत या मुलाकात नहीं हुई थी, जिससे वह खुद भी इस मैसेज को लेकर हैरान थीं। कौन हैं तानिया चटर्जी? तानिया चटर्जी कोलकाता की रहने वाली एक एक्ट्रेस, मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। उन्होंने कई OTT प्रोजेक्ट्स में काम किया है और वेब सीरीज में अपनी पहचान बनाई है। उनके चर्चित प्रोजेक्ट्स में शामिल हैं: Gandi Baat Season 4 Class of 2020 इंस्टाग्राम पर उनके 23 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं, जहां वह फैशन, लाइफस्टाइल और प्रमोशनल कंटेंट शेयर करती रहती हैं। चहल की पर्सनल लाइफ भी रही चर्चा में Yuzvendra Chahal की निजी जिंदगी भी हाल के समय में खबरों में रही है। साल 2025 की शुरुआत में उन्होंने अपनी पत्नी Dhanashree Verma से अलग होने का फैसला लिया था। इसके बाद उनका नाम RJ Mahvash के साथ भी जोड़ा गया, हालांकि बाद में दोनों के अनफॉलो करने की खबरें सामने आईं। सोशल मीडिया पर क्यों बढ़ी चर्चा? इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर इसलिए तूल पकड़ा क्योंकि: वीडियो वायरल हो गया तानिया का खुलकर बयान देना चहल की पहले से चर्चा में रही पर्सनल लाइफ हालांकि, इस मामले पर अभी तक चहल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रसिद्ध पार्श्व गायिका Asha Bhosle के निधन के बाद पूरे देश में शोक की लहर है। राजनीतिक हस्तियों से लेकर फिल्मी सितारों तक, हर कोई उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। इसी बीच अभिनेत्री Athiya Shetty की एक बड़ी चूक सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। श्रद्धांजलि में हुई बड़ी गलती अथिया शेट्टी ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए Asha Bhosle को श्रद्धांजलि दी, लेकिन गलती से उनकी जगह उनकी बड़ी बहन Lata Mangeshkar की तस्वीर शेयर कर दी। गौरतलब है कि Lata Mangeshkar का निधन साल 2022 में हो चुका है। हालांकि, अभिनेत्री ने अपनी गलती का एहसास होते ही पोस्ट डिलीट कर दिया, लेकिन तब तक इसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो चुका था। सोशल मीडिया पर भड़के यूजर्स इस चूक के बाद Athiya Shetty को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर जमकर आलोचना का सामना करना पड़ा। कई यूजर्स ने उनकी जानकारी पर सवाल उठाए, तो कुछ ने इसे “बेहद शर्मनाक” बताया। एक यूजर ने लिखा कि क्या किसी को उन्हें बताना चाहिए कि लता मंगेशकर का कई साल पहले निधन हो चुका है। वहीं कुछ अन्य यूजर्स ने कड़ी भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें ट्रोल किया। तेजी से बढ़ा विवाद सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से फैल गया और कई लोगों ने इसे संवेदनशील मौके पर की गई बड़ी लापरवाही बताया। हालांकि, अभी तक Athiya Shetty की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि सार्वजनिक मंचों पर की गई छोटी सी गलती भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है, खासकर जब मामला किसी सम्मानित हस्ती से जुड़ा हो।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।