बॉलीवुड के मशहूर गायक कुमार सानू के बेटे और 'बिग बॉस 14' के पूर्व प्रतियोगी जान कुमार सानू COVID-19 की चपेट में आ गए हैं। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर अपने फैंस को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी। उनकी पोस्ट वायरल होने के बाद प्रशंसक उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं। अस्पताल से वीडियो शेयर कर दी जानकारी जान कुमार सानू ने अस्पताल के बेड से एक वीडियो पोस्ट करते हुए अपने खास अंदाज में बताया कि उनकी COVID-19 रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। गंभीर स्थिति के बावजूद उन्होंने अपने पोस्ट में हल्का-फुल्का हास्य भी शामिल किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा कि COVID-19 उनके पास "चीन से आया दोस्त" बनकर पहुंचा है। साथ ही अस्पताल की ड्रेस को लेकर भी उन्होंने मजेदार टिप्पणी की, जिससे उनकी पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। फैंस और सेलेब्स ने की जल्द स्वस्थ होने की कामना जान कुमार सानू की पोस्ट सामने आते ही उनके प्रशंसकों और टीवी इंडस्ट्री से जुड़े कई कलाकारों ने कमेंट कर उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग उनके अच्छे स्वास्थ्य की दुआ करते नजर आए। कौन हैं जान कुमार सानू? जान कुमार सानू, बॉलीवुड के दिग्गज पार्श्व गायक कुमार सानू के बेटे हैं। वह खुद भी एक गायक और परफॉर्मर हैं। उन्हें देशभर में पहचान रियलिटी शो 'बिग बॉस 14' में हिस्सा लेने के बाद मिली। इसके अलावा वह अपने म्यूजिक प्रोजेक्ट्स और सोशल मीडिया एक्टिविटी के जरिए भी चर्चा में रहते हैं। आंध्र प्रदेश में भी सामने आए नए COVID-19 मामले जान कुमार सानू के संक्रमित होने की खबर के बीच आंध्र प्रदेश के वाईएसआर कडप्पा जिले से भी हाल के दिनों में COVID-19 के नए मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में पिछले कुछ सप्ताह में कई नए संक्रमित मरीज मिले हैं, जिसके बाद प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे घबराने की बजाय सावधानी बरतें, भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जरूरत पड़ने पर मास्क पहनें और व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। स्वास्थ्य का रखें ध्यान विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बुखार, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो समय पर जांच कराना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना जरूरी है।
नई दिल्ली: अभिनेता अनिल कपूर की भाभी और बिजनेसमैन संजय कपूर की पत्नी महीप कपूर ने पहली बार खुलकर बताया कि कैसे टाइप 1 डायबिटीज की वजह से उनका वजन अचानक 15 किलोग्राम तक कम हो गया और शुरुआत में उन्होंने इसे कोविड-19 का असर समझ लिया। अभिनेत्री सोहा अली खान के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान महीप ने अपनी बीमारी, गलतफहमी और समय पर इलाज न मिलने से जुड़ी पूरी कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि बीमारी का पता चलने से पहले उनका शरीर लगातार संकेत दे रहा था, लेकिन कोविड महामारी के दौरान डॉक्टर के पास जाने से बचने और लक्षणों को वायरस का प्रभाव मान लेने के कारण सही समय पर बीमारी की पहचान नहीं हो सकी। हालात इतने गंभीर हो गए कि एक यात्रा के दौरान दिल्ली पहुंचते ही वह अचानक गिर पड़ीं और उन्हें तुरंत अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। कोविड का असर समझती रहीं, लेकिन वजह थी डायबिटीज महीप कपूर ने बताया कि डायबिटीज का पता चलने से पहले उन्हें टाइफाइड भी हुआ था। इसके साथ ही उनके पीरियड्स अनियमित होने लगे, वजन तेजी से घटने लगा और उन्हें महसूस हो रहा था कि शरीर पहले जैसा नहीं रहा। उस समय वह पेरीमेनोपॉज के दौर से भी गुजर रही थीं, इसलिए कई बदलाव सामान्य हार्मोनल परिवर्तन जैसे लगे। कोविड-19 संक्रमण के बाद उनका वजन लगभग 15 किलोग्राम कम हो गया। उन्होंने इसे कोविड का साइड इफेक्ट समझ लिया और करीब तीन महीने तक लगातार काम और यात्रा करती रहीं। इस दौरान उनकी वास्तविक बीमारी लगातार बढ़ती रही। दिल्ली पहुंचते ही बिगड़ी तबीयत महीप ने बताया कि लगातार यात्रा के बाद जैसे ही वह दिल्ली पहुंचीं, उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह गिर पड़ीं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाकर आईसीयू में भर्ती किया गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने टाइप 1 डायबिटीज की पुष्टि की और इंसुलिन थेरेपी शुरू की। उन्होंने कहा कि अब वह अपनी सेहत को लेकर बेहद सतर्क रहती हैं और नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करती हैं ताकि किसी भी तरह की जटिलता से बचा जा सके। उन्हें वर्ष 2022 में टाइप 1 डायबिटीज का निदान हुआ था। टाइप 1 डायबिटीज में वजन तेजी से क्यों घटता है? टाइप 1 डायबिटीज में शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता। इंसुलिन का काम रक्त में मौजूद ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाकर उसे ऊर्जा में बदलना होता है। जब इंसुलिन की कमी होती है, तो शरीर ग्लूकोज का उपयोग नहीं कर पाता। ऐसे में शरीर ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के लिए फैट और मांसपेशियों को तोड़ना शुरू कर देता है। यही वजह है कि मरीज का वजन तेजी से कम होने लगता है। इसके अलावा, रक्त में बढ़ी हुई शुगर को बाहर निकालने के लिए किडनी अधिक मेहनत करती है, जिससे शरीर की ऊर्जा और तेजी से खर्च होती है। परिणामस्वरूप व्यक्ति में कमजोरी, थकान और तेजी से वजन घटने जैसी समस्याएं दिखाई देने लगती हैं। क्या है टाइप 1 डायबिटीज? टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अग्न्याशय (Pancreas) की उन बीटा कोशिकाओं पर हमला कर देता है जो इंसुलिन बनाती हैं। जब ये कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, तो शरीर में इंसुलिन का उत्पादन लगभग बंद हो जाता है और मरीज को जीवनभर इंसुलिन पर निर्भर रहना पड़ सकता है। क्या केवल बच्चों को होती है टाइप 1 डायबिटीज? आम धारणा है कि टाइप 1 डायबिटीज केवल बच्चों या किशोरों में होती है, लेकिन ऐसा पूरी तरह सही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी के कई मामले वयस्कों में भी सामने आते हैं। कई बार डॉक्टर भी शुरुआती लक्षणों को टाइप 2 डायबिटीज समझ लेते हैं, जिससे सही इलाज में देरी हो सकती है। कुछ मामलों में 70–80 वर्ष की उम्र में भी टाइप 1 डायबिटीज का पता चलता है। किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें? बिना किसी स्पष्ट कारण के तेजी से वजन कम होना बार-बार प्यास लगना बार-बार पेशाब आना अत्यधिक थकान और कमजोरी धुंधला दिखाई देना लगातार भूख लगना यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ के हालिया खुलासे के बाद गॉलब्लैडर स्टोन (पित्ताशय की पथरी) एक बार फिर चर्चा में है। दिलजीत ने बताया कि करीब 10 साल पहले जांच के दौरान उनके गॉलब्लैडर में 11-12 मिमी की पथरी का पता चला था, लेकिन उन्होंने अब तक इसकी सर्जरी नहीं कराई है। इसके बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या लंबे समय तक गॉलब्लैडर स्टोन के साथ रहना सुरक्षित है और इसका इलाज टालने से क्या खतरे हो सकते हैं। गॉलब्लैडर और किडनी स्टोन में होता है अंतर गॉलब्लैडर स्टोन पित्ताशय में कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन के जमा होने से बनती है, जबकि किडनी स्टोन मूत्र में मौजूद कैल्शियम ऑक्सलेट, यूरिक एसिड और अन्य खनिजों के क्रिस्टल से बनती है। कई लोगों में पथरी वर्षों तक बिना किसी लक्षण के रहती है, लेकिन कुछ मामलों में छोटी पथरी भी असहनीय दर्द का कारण बन सकती है। इलाज में देरी से बढ़ सकती हैं जटिलताएं गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. विपिन राय के अनुसार, गॉलब्लैडर स्टोन का समय पर इलाज जरूरी है। यदि पथरी पित्त नली को अवरुद्ध कर दे तो बार-बार पित्ताशय में सूजन, संक्रमण, पीलिया, अग्न्याशय (पैंक्रियास) में सूजन और गंभीर जटिलताएं विकसित हो सकती हैं। लंबे समय तक इलाज न होने पर गॉलब्लैडर कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है, हालांकि यह स्थिति दुर्लभ मानी जाती है। इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें विशेषज्ञों का कहना है कि पेट के दाहिने हिस्से में तेज दर्द, तैलीय भोजन के बाद दर्द बढ़ना, मतली, उल्टी, पीलिया, पेशाब में परेशानी या कमर में लगातार दर्द जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। अल्ट्रासाउंड से गॉलब्लैडर स्टोन की पहचान की जाती है और जरूरत पड़ने पर कोलेसिस्टेक्टॉमी (गॉलब्लैडर हटाने की सर्जरी) की जाती है। पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ वजन बनाए रखना पथरी के खतरे को कम करने में मददगार माना जाता है।
मुंबई: हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय पार्श्व गायिकाओं में से एक Alka Yagnik को हाल ही में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया। यह पल उनके लिए और उनके प्रशंसकों के लिए गर्व का अवसर था, लेकिन समारोह के दौरान उनकी सेहत को लेकर सामने आई तस्वीरों ने फैंस की चिंता भी बढ़ा दी। राष्ट्रपति Droupadi Murmu द्वारा आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में जब अलका याग्निक सम्मान लेने पहुंचीं, तो उन्हें सहारे के साथ मंच तक जाते देखा गया। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर भावुक पोस्ट साझा की, जिसने संगीत प्रेमियों और फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को भावुक कर दिया। दुर्लभ सुनने की बीमारी से जूझ रहीं हैं अलका याग्निक अलका याग्निक ने अपने पोस्ट में बताया कि वह पिछले दो वर्षों से एक दुर्लभ श्रवण समस्या 'सेंसोरीन्यूरल हियरिंग लॉस' (Sensorineural Hearing Loss) से जूझ रही हैं। इस स्वास्थ्य समस्या के कारण वह लंबे समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों, मीडिया और लाइमलाइट से दूर थीं। उन्होंने बताया कि इस कठिन दौर में प्रशंसकों का प्यार, दुआएं और समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना रहा। पद्म भूषण सम्मान पर भावुक हुईं अलका अपने पोस्ट में अलका ने कहा कि पद्म भूषण सम्मान प्राप्त करना उनके लिए बेहद विनम्र और भावुक करने वाला अनुभव रहा। उन्होंने इस सम्मान को केवल अपनी उपलब्धि नहीं बल्कि उन करोड़ों श्रोताओं का सम्मान बताया जिन्होंने उनकी आवाज़ और गीतों को पीढ़ियों तक प्यार दिया। अलका ने लिखा कि यह सम्मान उनके नाम जरूर है, लेकिन इसकी असली भागीदारी उन लोगों की भी है जिन्होंने उनके संगीत को अपने जीवन का हिस्सा बनाया। शान ने लिखा दिल छू लेने वाला संदेश अलका याग्निक की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मशहूर गायक Shaan ने एक भावुक संदेश साझा किया, जिसने फैंस का दिल जीत लिया। शान ने लिखा, "अलका जी, आप हमारा गर्व और हमारी खुशी हैं। आपके प्रशंसकों को इससे ज्यादा खुशी किसी और बात से नहीं होगी कि आप पूरी तरह स्वस्थ होकर लौटें और एक बार फिर अपनी आवाज़ से हम सभी को मंत्रमुग्ध करें।" शान का यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और प्रशंसक भी अलका के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। संगीत जगत के सितारों ने जताया प्यार अलका याग्निक के लिए संगीत और फिल्म जगत के कई बड़े कलाकारों ने शुभकामनाएं भेजीं। Kumar Sanu ने लिखा कि अलका इस सम्मान की पूरी तरह हकदार हैं और ईश्वर उन्हें स्वस्थ रखे। वहीं Ila Arun ने उन पर गर्व जताया, जबकि Akriti Kakar ने उन्हें संगीत जगत की 'क्वीन' बताते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। इसके अलावा Bhumi Pednekar, Veer Pahariya और Aditi Singh Sharma सहित कई सितारों ने भी उनके लिए प्यार और समर्थन व्यक्त किया। 'धीरे-धीरे जीवन में वापसी कर रही हूं' अलका याग्निक ने अपने संदेश में यह भी कहा कि वह अब धीरे-धीरे सामान्य जीवन में लौटने की कोशिश कर रही हैं। उनके मुताबिक, पद्म भूषण सम्मान ग्रहण करने के लिए समारोह में उपस्थित होना उनके लिए सिर्फ एक उपलब्धि नहीं बल्कि उम्मीद, साहस और दृढ़ता का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि यह पल उन्हें याद दिलाता है कि प्रेम, विश्वास और सकारात्मक सोच से किसी भी कठिन परिस्थिति का सामना किया जा सकता है। करोड़ों दिलों की आवाज़ हैं अलका याग्निक 90 के दशक से लेकर आज तक अलका याग्निक की आवाज़ भारतीय संगीत प्रेमियों के दिलों में खास जगह रखती है। उन्होंने हिंदी सिनेमा को अनगिनत सुपरहिट गीत दिए हैं और कई पीढ़ियों की पसंदीदा गायिका बनी हुई हैं। उनकी सेहत को लेकर सामने आई जानकारी ने फैंस को चिंतित जरूर किया है, लेकिन जिस तरह से उन्होंने हिम्मत और सकारात्मकता के साथ अपनी वापसी का संकेत दिया है, उससे उनके प्रशंसकों में नई उम्मीद जगी है।
मुंबई: कॉमेडियन समय रैना का चर्चित शो इंडियाज गॉट लेटेंट अपने दूसरे सीजन के साथ वापस आ चुका है। पहले ही एपिसोड में बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट की मौजूदगी ने दर्शकों का ध्यान खींचा, लेकिन शो का एक छोटा सा मजेदार पल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। दरअसल, आलिया अपने साथ एक खास पानी की बोतल लेकर पहुंची थीं, जिसे देखकर समय रैना ने मजाकिया अंदाज में उनकी खिंचाई कर दी। समय रैना ने पूछा- "ये कौन-सा अमीरों वाला पानी है?" शो के दौरान जब समय रैना ने आलिया भट्ट को सामान्य पानी और प्रोटीन ड्रिंक ऑफर किया, तो अभिनेत्री ने बताया कि उनके पास अपना पानी है। इस पर समय ने हंसते हुए कहा, "आप हम नॉर्मल लोगों का पानी नहीं पीते हो क्या? ये कौन-सा अमीरों वाला पानी है?" इस मजेदार सवाल के जवाब में आलिया ने बताया कि उनकी बोतल में साधारण पानी नहीं बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स मिला हुआ पानी है, जो उन्हें स्टेज पर नर्वसनेस और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से बचाने में मदद करता है। क्या होते हैं इलेक्ट्रोलाइट्स? इलेक्ट्रोलाइट्स ऐसे जरूरी मिनरल्स होते हैं जो शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने, नसों और मांसपेशियों के सही कामकाज और ऊर्जा स्तर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं: सोडियम पोटैशियम कैल्शियम मैग्नीशियम क्लोराइड फॉस्फोरस बायकार्बोनेट कब होती है इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत? विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक पसीना आने, गर्मी में लंबे समय तक रहने, डिहाइड्रेशन, दस्त, उल्टी या शरीर में तरल पदार्थ की कमी होने पर इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसे में व्यक्ति को थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, हाथ-पैर कांपना और तेज धड़कन जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। घर पर ऐसे बनाएं इलेक्ट्रोलाइट्स वाला पानी अगर आपको अतिरिक्त इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत महसूस होती है, तो आप घर पर भी आसान तरीके से ओआरएस जैसा घोल तैयार कर सकते हैं। विधि: 1 लीटर साफ पीने का पानी लें। इसमें 6 छोटी चम्मच चीनी मिलाएं। आधी छोटी चम्मच नमक डालें। अच्छी तरह घोलकर तैयार करें। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में धीरे-धीरे सेवन करें। सावधानी भी है जरूरी स्वस्थ व्यक्ति सीमित मात्रा में इलेक्ट्रोलाइट्स वाला पानी पी सकता है, लेकिन किडनी, लिवर, हाई ब्लड प्रेशर या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका सेवन करना चाहिए। शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की अधिकता भी नुकसान पहुंचा सकती है। कुल मिलाकर, आलिया भट्ट के "स्पेशल पानी" ने शो में हंसी का माहौल जरूर बनाया, लेकिन इसके पीछे छिपी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी कई लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।