मुंबई: हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय पार्श्व गायिकाओं में से एक Alka Yagnik को हाल ही में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया। यह पल उनके लिए और उनके प्रशंसकों के लिए गर्व का अवसर था, लेकिन समारोह के दौरान उनकी सेहत को लेकर सामने आई तस्वीरों ने फैंस की चिंता भी बढ़ा दी।
राष्ट्रपति Droupadi Murmu द्वारा आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में जब अलका याग्निक सम्मान लेने पहुंचीं, तो उन्हें सहारे के साथ मंच तक जाते देखा गया। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर भावुक पोस्ट साझा की, जिसने संगीत प्रेमियों और फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को भावुक कर दिया।
अलका याग्निक ने अपने पोस्ट में बताया कि वह पिछले दो वर्षों से एक दुर्लभ श्रवण समस्या 'सेंसोरीन्यूरल हियरिंग लॉस' (Sensorineural Hearing Loss) से जूझ रही हैं। इस स्वास्थ्य समस्या के कारण वह लंबे समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों, मीडिया और लाइमलाइट से दूर थीं।
उन्होंने बताया कि इस कठिन दौर में प्रशंसकों का प्यार, दुआएं और समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना रहा।
अपने पोस्ट में अलका ने कहा कि पद्म भूषण सम्मान प्राप्त करना उनके लिए बेहद विनम्र और भावुक करने वाला अनुभव रहा। उन्होंने इस सम्मान को केवल अपनी उपलब्धि नहीं बल्कि उन करोड़ों श्रोताओं का सम्मान बताया जिन्होंने उनकी आवाज़ और गीतों को पीढ़ियों तक प्यार दिया।
अलका ने लिखा कि यह सम्मान उनके नाम जरूर है, लेकिन इसकी असली भागीदारी उन लोगों की भी है जिन्होंने उनके संगीत को अपने जीवन का हिस्सा बनाया।
अलका याग्निक की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मशहूर गायक Shaan ने एक भावुक संदेश साझा किया, जिसने फैंस का दिल जीत लिया।
शान ने लिखा,
"अलका जी, आप हमारा गर्व और हमारी खुशी हैं। आपके प्रशंसकों को इससे ज्यादा खुशी किसी और बात से नहीं होगी कि आप पूरी तरह स्वस्थ होकर लौटें और एक बार फिर अपनी आवाज़ से हम सभी को मंत्रमुग्ध करें।"
शान का यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और प्रशंसक भी अलका के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।
अलका याग्निक के लिए संगीत और फिल्म जगत के कई बड़े कलाकारों ने शुभकामनाएं भेजीं।
Kumar Sanu ने लिखा कि अलका इस सम्मान की पूरी तरह हकदार हैं और ईश्वर उन्हें स्वस्थ रखे।
वहीं Ila Arun ने उन पर गर्व जताया, जबकि Akriti Kakar ने उन्हें संगीत जगत की 'क्वीन' बताते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।
इसके अलावा Bhumi Pednekar, Veer Pahariya और Aditi Singh Sharma सहित कई सितारों ने भी उनके लिए प्यार और समर्थन व्यक्त किया।
अलका याग्निक ने अपने संदेश में यह भी कहा कि वह अब धीरे-धीरे सामान्य जीवन में लौटने की कोशिश कर रही हैं। उनके मुताबिक, पद्म भूषण सम्मान ग्रहण करने के लिए समारोह में उपस्थित होना उनके लिए सिर्फ एक उपलब्धि नहीं बल्कि उम्मीद, साहस और दृढ़ता का प्रतीक था।
उन्होंने कहा कि यह पल उन्हें याद दिलाता है कि प्रेम, विश्वास और सकारात्मक सोच से किसी भी कठिन परिस्थिति का सामना किया जा सकता है।
90 के दशक से लेकर आज तक अलका याग्निक की आवाज़ भारतीय संगीत प्रेमियों के दिलों में खास जगह रखती है। उन्होंने हिंदी सिनेमा को अनगिनत सुपरहिट गीत दिए हैं और कई पीढ़ियों की पसंदीदा गायिका बनी हुई हैं।
उनकी सेहत को लेकर सामने आई जानकारी ने फैंस को चिंतित जरूर किया है, लेकिन जिस तरह से उन्होंने हिम्मत और सकारात्मकता के साथ अपनी वापसी का संकेत दिया है, उससे उनके प्रशंसकों में नई उम्मीद जगी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अभिनेत्री कंगना रनौत की चर्चित फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' एक नए विवाद में घिर गई है। फिल्म में नर्सों के कथित अपमानजनक और भ्रामक चित्रण को लेकर उठे विरोध ने अब केंद्र सरकार का ध्यान भी आकर्षित किया है। ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन (AIGNF) की शिकायत के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मामले को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भेज दिया है, जिससे फिल्म की सामग्री और उसके प्रमाणीकरण की समीक्षा की संभावना बढ़ गई है। नर्सिंग समुदाय ने जताई आपत्ति एआईजीएनएफ ने 4 जून को स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजे गए अपने शिकायत पत्र में आरोप लगाया था कि फिल्म के कुछ दृश्य और संवाद नर्सिंग पेशे की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। संगठन का कहना है कि फिल्म में नर्सों को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, उससे समाज में उनके प्रति नकारात्मक धारणा बन सकती है। नर्सिंग संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि नर्सें स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं और कोविड-19 महामारी समेत कई आपात परिस्थितियों में उन्होंने अग्रिम पंक्ति में रहकर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में उनके पेशे को अपमानजनक तरीके से दिखाना पूरे नर्सिंग समुदाय के सम्मान पर चोट पहुंचाने जैसा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भेजा मामला शिकायत पर संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय के नर्सिंग अनुभाग ने एक आधिकारिक ज्ञापन जारी कर मामला सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के फिल्म अनुभाग को भेज दिया है। अवर सचिव गणेश कुमार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि फिल्म की विषयवस्तु और उसके प्रमाणीकरण से जुड़ा मामला संबंधित मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए आगे की जांच और आवश्यक कार्रवाई वहीं की जाएगी। मंत्रालय के फैसले पर टिकी निगाहें मामला अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पास पहुंच चुका है। ऐसे में फिल्म की सामग्री की दोबारा समीक्षा, आपत्तिजनक दृश्यों की जांच या अन्य संभावित कार्रवाई पर फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल नर्सिंग समुदाय और विभिन्न स्वास्थ्य संगठनों की नजर मंत्रालय के अगले कदम पर टिकी हुई है। उनका कहना है कि नर्सों की पेशेवर गरिमा और सामाजिक सम्मान की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
Trisha Krishnan Thalapathy Vijay Romantic Photo: साउथ सुपरस्टार थलापति विजय के 52वें जन्मदिन के मौके पर फैंस को जिस पोस्ट का इंतजार था, वह आखिरकार सामने आ गई। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर विजय और अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन के रिश्ते को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। दोनों के एक-दूसरे को सोशल मीडिया पर फॉलो नहीं करने और जन्मदिन की शुभकामनाओं में देरी के कारण ब्रेकअप की खबरें भी चर्चा में थीं। लेकिन अब त्रिशा की एक पोस्ट ने इन सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया है। रोमांटिक अंदाज में किया विजय को बर्थडे विश त्रिशा कृष्णन ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक बेहद खास तस्वीर साझा की, जिसने कुछ ही मिनटों में इंटरनेट पर तहलका मचा दिया। तस्वीर में थलापति विजय प्रिंटेड शर्ट में मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं, जबकि त्रिशा उनकी ओर प्यार भरी मुस्कान के साथ देख रही हैं। दोनों एक किचन में खड़े दिखाई दे रहे हैं और उनके सामने पांच केक रखे हुए हैं। इस तस्वीर के साथ त्रिशा ने लिखा, "उस शख्स को जन्मदिन की शुभकामनाएं, जो हर चीज को खास और वर्थ इट बना देता है।" इसके साथ उन्होंने दिल और नजर से बचाने वाले इमोजी का इस्तेमाल किया। पोस्ट में "00.00" और स्पार्कल इमोजी जोड़ने से फैंस ने अंदाजा लगाया कि दोनों ने आधी रात को साथ मिलकर विजय का जन्मदिन सेलिब्रेट किया। ब्रेकअप की अफवाहों पर लगा फुल स्टॉप कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर चर्चा थी कि दोनों के बीच सबकुछ ठीक नहीं है। वजह यह थी कि इस बार त्रिशा ने विजय को जन्मदिन की शुभकामना देने में देर की और दोनों इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फॉलो भी नहीं करते हैं। हालांकि, इस एक तस्वीर ने फैंस को राहत दे दी और सोशल मीडिया पर #TrishaVijay फिर से ट्रेंड करने लगा। हर साल खास अंदाज में करती हैं विश यह पहली बार नहीं है जब त्रिशा ने विजय के लिए खास पोस्ट शेयर की हो। पिछले कई वर्षों से वह उनके जन्मदिन पर यादगार तस्वीरें साझा करती रही हैं। 2023 में उन्होंने फिल्म 'लियो' की शूटिंग के दौरान बर्फीले इलाके से तस्वीर साझा की थी। 2024 में दोनों की मिरर सेल्फी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। 2025 में त्रिशा ने विजय की अपने पालतू जानवर के साथ खेलते हुए तस्वीर पोस्ट की थी। साउथ सिनेमा की सबसे पसंदीदा जोड़ियों में शामिल त्रिशा कृष्णन और थलापति विजय की जोड़ी को तमिल सिनेमा की सबसे लोकप्रिय ऑन-स्क्रीन जोड़ियों में गिना जाता है। दोनों ने कई सुपरहिट फिल्मों में साथ काम किया है, जिनमें: घिल्ली थिरुपाची आथी कुरुवी इन फिल्मों में दोनों की शानदार केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब पसंद किया। समय-समय पर उनके रिश्ते को लेकर अफवाहें भी सामने आती रहीं, लेकिन दोनों कलाकार हमेशा यह स्पष्ट करते रहे हैं कि वे सिर्फ अच्छे दोस्त हैं। फैंस के बीच फिर बढ़ी चर्चा त्रिशा की इस नई पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर फैंस लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि दोनों के बीच की बॉन्डिंग आज भी उतनी ही मजबूत है, जितनी सालों पहले थी। हालांकि, दोनों कलाकारों ने कभी भी किसी रोमांटिक रिश्ते की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और हमेशा एक-दूसरे को अच्छा दोस्त बताया है।
Lock Upp: Sach Ya Sazaa Season 2 के ग्रैंड लॉन्च के दौरान अभिनेता और होस्ट रितेश देशमुख का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे सलमान खान और संजय दत्त को लेकर एक विवादित सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बेहद सख्त प्रतिक्रिया देते हुए सवाल को ही अनुचित करार दिया। सवाल सुनकर भड़के रितेश देशमुख रितेश देशमुख और फराह खान इस बार नेटफ्लिक्स के रियलिटी शो 'Lock Upp: Sach Ya Sazaa' सीजन 2 को होस्ट कर रहे हैं। लॉन्च इवेंट के दौरान एक मीडिया प्रतिनिधि ने रितेश से पूछा कि उनके करीबी दोस्त सलमान खान और संजय दत्त अपने जीवन में कानूनी परेशानियों का सामना कर चुके हैं, ऐसे में क्या वह उन्हें शो में बुलाना चाहेंगे और उन्हें किस तरह की सजा देंगे? यह सवाल सुनते ही रितेश देशमुख असहज नजर आए और उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "सबसे पहले मुझे नहीं लगता कि आपके सवाल का जवाब देकर मैं उसे कोई गरिमा देना चाहूंगा।" दोबारा पूछे जाने पर भी दिया स्पष्ट जवाब जब उनसे फिर पूछा गया कि क्या वह सलमान खान और संजय दत्त को शो में आमंत्रित करना चाहेंगे, तो रितेश ने कहा कि एक होस्ट के तौर पर उनका काम केवल शो को प्रस्तुत करना है। उन्होंने कहा, "मैं उन्हें नहीं बुलाऊंगा क्योंकि मेरा काम होस्टिंग करना है। एक होस्ट के तौर पर मुझे पहले से नहीं पता होता कि शो में कौन-कौन प्रतिभागी या मेहमान आने वाले हैं। जो भी गेस्ट आते हैं, हम उनसे बातचीत करते हैं।" फराह खान और रितेश की जोड़ी पर नेटफ्लिक्स की प्रतिक्रिया लॉन्च इवेंट में मौजूद नेटफ्लिक्स इंडिया की कंटेंट प्रमुख मोनिका शेरगिल ने फराह खान और रितेश देशमुख की जोड़ी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि अगर किसी जेल में जाना पड़े तो फराह और रितेश से ज्यादा मनोरंजक जेलर कहीं नहीं मिल सकते। मोनिका ने कहा कि फराह खान के सामने कुछ छिपाना लगभग नामुमकिन है, जबकि रितेश अपने मजाकिया अंदाज से किसी की भी क्लास लगा सकते हैं और सामने वाले को बुरा भी नहीं लगेगा। 27 जून से शुरू होगा नया सीजन बहुप्रतीक्षित 'Lock Upp: Sach Ya Sazaa Season 2' का प्रीमियर 27 जून 2026 से नेटफ्लिक्स पर होगा। नए सीजन को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।