सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली हाई कोर्ट की अनुमति के बाद सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। उन्हें एंबुलेंस के जरिए मेदांता ले जाया गया, जहां अब विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी में इलाज करेगी। यह फैसला वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की याचिका पर सुनवाई के बाद लिया गया। उन्होंने निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति मांगी थी। हाई कोर्ट ने क्या कहा? दिल्ली हाई कोर्ट की पीठ ने निर्देश दिया कि सोनम वांगचुक का इलाज मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों की सलाह और निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाए। अदालत ने अस्पताल प्रबंधन को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गठित करने और उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मिला ट्रांसफर हाई कोर्ट ने एम्स, सफदरजंग अस्पताल और वांगचुक की मेडिकल टीम की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद ट्रांसफर की अनुमति दी। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि सफदरजंग अस्पताल वांगचुक के सभी मेडिकल रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट मेदांता अस्पताल को उपलब्ध कराए, ताकि इलाज में कोई बाधा न आए। केंद्र सरकार ने नहीं किया विरोध सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार को वांगचुक को मेदांता अस्पताल भेजे जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि वांगचुक को लगातार मेडिकल निगरानी की जरूरत है और अस्पताल से छुट्टी देने का फैसला केवल डॉक्टरों की सलाह पर ही होना चाहिए। डिस्चार्ज के समय क्या थी स्वास्थ्य स्थिति? सफदरजंग अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि डिस्चार्ज के समय वांगचुक के वाइटल पैरामीटर स्थिर थे। हालांकि, उन्हें पैनसाइटोपेनिया की समस्या बनी हुई है और उनका सीरम पोटैशियम स्तर 3.4 mEq/L दर्ज किया गया, जिसके चलते डॉक्टरों ने लगातार निगरानी की सलाह दी है। पत्नी ने लगाया 'हिरासत' जैसा व्यवहार का आरोप वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए आरोप लगाया कि सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराना एक तरह की हिरासत जैसा था। उन्होंने कहा कि पुलिस वांगचुक को अस्पताल लेकर गई और उन्हें बिना आवश्यकता आईसीयू में रखा गया। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल पर रोक होने के कारण वह परिवार और समर्थकों से संपर्क भी नहीं कर पा रहे थे। 'हालत गंभीर नहीं, लेकिन निगरानी जरूरी' गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि वांगचुक की कुछ मेडिकल रिपोर्ट सामान्य नहीं हैं, लेकिन उनकी स्थिति फिलहाल जानलेवा नहीं है। उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान मरीज की मानसिक स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है और परिवार को यह अधिकार होना चाहिए कि वह तय करे कि मरीज का इलाज किस अस्पताल में कराया जाए। 28 जून से अनशन पर हैं वांगचुक सोनम वांगचुक 28 जून से कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं। दिल्ली पुलिस ने 19 जुलाई को उन्हें चिकित्सकीय जरूरत और न्यायिक निर्देशों का हवाला देते हुए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था। अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद उनका इलाज गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में जारी रहेगा।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को 24वें दिन में पहुंच गई। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि उनकी सेहत पर लगातार नजर रखना जरूरी है। लंबे समय तक भोजन नहीं करने और शरीर में पानी की कमी के कारण मेडिकल टीम उनकी नियमित जांच कर रही है। क्या है सोनम वांगचुक का ताजा हेल्थ अपडेट? डॉक्टरों के मुताबिक सोनम वांगचुक की स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। ब्लड शुगर सामान्य से कम बना हुआ है, जिससे कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बना हुआ है। जांच में पोटैशियम का स्तर 3.2 mEq/L पाया गया है, जो सामान्य सीमा से कम है। खून की जांच में एनीमिया के लक्षण मिले हैं। सफेद रक्त कोशिकाओं (WBC) की संख्या भी कम पाई गई है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे उपवास के कारण शरीर में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की स्थिति बनी हुई है, इसलिए उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। इलाज कैसे चल रहा है? डॉक्टरों की सलाह पर सोनम वांगचुक फिलहाल ORS और पोटैशियम सप्लीमेंट ले रहे हैं। मेडिकल टीम ने उन्हें शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी दूर करने के लिए IV फ्लूइड और ग्लूकोज लेने की सलाह दी है, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। सफदरजंग अस्पताल और AIIMS के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम उनकी स्वास्थ्य स्थिति की लगातार समीक्षा कर रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जरूरत के अनुसार सभी चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। 28 जून से जारी है भूख हड़ताल सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उन्होंने अपना अनशन समाप्त नहीं किया है। 18 जुलाई को बिगड़ी थी तबीयत लगातार तीन सप्ताह तक भूख हड़ताल करने के बाद 18 जुलाई को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल लेकर गई, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज शुरू किया गया। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने की इच्छा जताई थी। उन्होंने CJP के 'संसद चलो मार्च' में शामिल होने के लिए अस्पताल से डिस्चार्ज करने की भी मांग की थी, लेकिन डॉक्टरों ने स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल में ही रहने की सलाह दी। एक नजर में पूरा हेल्थ अपडेट अनशन का आज: 24वां दिन अस्पताल: सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली हालत: फिलहाल स्थिर ब्लड शुगर: सामान्य से कम पोटैशियम: 3.2 mEq/L एनीमिया: जांच में पुष्टि WBC: सामान्य से कम क्या ले रहे हैं: ORS और पोटैशियम की दवा क्या लेने से इनकार किया: IV फ्लूइड और ग्लूकोज इलाज: सफदरजंग और AIIMS के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम की निगरानी में डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल वांगचुक की स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लंबे समय तक जारी भूख हड़ताल के कारण किसी भी तरह की चिकित्सीय जटिलता से बचने के लिए 24 घंटे निगरानी और नियमित मेडिकल जांच बेहद जरूरी है।
Spider Bite First Aid: बरसात के मौसम में मकड़ी के काटने पर दर्द, खुजली और सूजन होना आम बात है। WHO के Technical Advisor के अनुसार सही फर्स्ट एड अपनाने और गंभीर लक्षणों की पहचान करना बेहद जरूरी है। मानसून के दौरान घरों और आसपास मकड़ियों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में यदि मकड़ी काट ले, तो अधिकांश मामलों में हल्का दर्द, खुजली, लालपन या सूजन हो सकती है। हालांकि घबराने या बिना सलाह के घरेलू इलाज करने की बजाय सही फर्स्ट एड अपनाना जरूरी है। WHO के Technical Advisor और हेल्थ एजुकेटर डॉ. जेम्स ओ'डोनोवन के अनुसार, मकड़ी के काटने के बाद सबसे पहले प्रभावित हिस्से को साफ पानी और हल्के साबुन से धोएं ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके। यदि दर्द या सूजन हो, तो साफ कपड़े में बर्फ लपेटकर 10–15 मिनट तक सिकाई करें। बर्फ को सीधे त्वचा पर न लगाएं और खुजली होने पर उस जगह को बार-बार न खुजलाएं, क्योंकि इससे संक्रमण बढ़ सकता है। मकड़ी के काटने के सामान्य लक्षण दर्द या जलन खुजली हल्की सूजन लालपन छोटे धब्बे या फफोले इन लक्षणों पर तुरंत अस्पताल जाएं सांस लेने में परेशानी चेहरे, होंठ या गले में सूजन तेज बुखार या ठंड लगना पूरे शरीर में एलर्जी या चकत्ते काटी गई जगह पर तेज दर्द या पस चक्कर आना, उल्टी या बेहोशी महसूस होना ध्यान रखें ज्यादातर मकड़ी के काटने के मामले गंभीर नहीं होते, लेकिन यदि लक्षण तेजी से बढ़ें या एलर्जिक रिएक्शन दिखाई दे, तो तुरंत मेडिकल सहायता लें। समय पर सही इलाज गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद कर सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहा विरोध प्रदर्शन मंगलवार को अपने 11वें दिन में पहुंच गया। यह आंदोलन शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, पर्यावरण संरक्षण और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चलाया जा रहा है। इसी प्रदर्शन के तहत पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का आज तीसरा दिन है। लगातार उपवास के चलते उनका ब्लड शुगर लेवल घटकर 66 तक पहुंच गया है, जो सामान्य स्तर से काफी नीचे है। इससे उनके समर्थकों और डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के अनुसार, वांगचुक पिछले तीन दिनों से सिर्फ पानी और नमक के सहारे भूख हड़ताल पर हैं, और डॉक्टर नियमित रूप से उनकी नाड़ी, ब्लड प्रेशर तथा अन्य स्वास्थ्य संकेतकों की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने आगाह किया कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो मामला गंभीर हो सकता है। छात्र, शिक्षक, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता आंदोलन के 11वें दिन भी बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता धरना स्थल पर पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से नारेबाजी करते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील की। आयोजकों का कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि देश के छात्रों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और सरकारी भर्तियों में जवाबदेही की मांग के साथ-साथ पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों को भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अच्छी शिक्षा और सुरक्षित पर्यावरण दोनों देश के विकास के लिए जरूरी हैं। धरना स्थल पर रोज विभिन्न राज्यों से लोग पहुंचकर समर्थन दे रहे हैं, कुछ सांकेतिक उपवास रख रहे हैं तो कुछ कई दिनों से डटे हुए हैं। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा।
मुंबई: हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय पार्श्व गायिकाओं में से एक Alka Yagnik को हाल ही में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया गया। यह पल उनके लिए और उनके प्रशंसकों के लिए गर्व का अवसर था, लेकिन समारोह के दौरान उनकी सेहत को लेकर सामने आई तस्वीरों ने फैंस की चिंता भी बढ़ा दी। राष्ट्रपति Droupadi Murmu द्वारा आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में जब अलका याग्निक सम्मान लेने पहुंचीं, तो उन्हें सहारे के साथ मंच तक जाते देखा गया। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर भावुक पोस्ट साझा की, जिसने संगीत प्रेमियों और फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को भावुक कर दिया। दुर्लभ सुनने की बीमारी से जूझ रहीं हैं अलका याग्निक अलका याग्निक ने अपने पोस्ट में बताया कि वह पिछले दो वर्षों से एक दुर्लभ श्रवण समस्या 'सेंसोरीन्यूरल हियरिंग लॉस' (Sensorineural Hearing Loss) से जूझ रही हैं। इस स्वास्थ्य समस्या के कारण वह लंबे समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों, मीडिया और लाइमलाइट से दूर थीं। उन्होंने बताया कि इस कठिन दौर में प्रशंसकों का प्यार, दुआएं और समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना रहा। पद्म भूषण सम्मान पर भावुक हुईं अलका अपने पोस्ट में अलका ने कहा कि पद्म भूषण सम्मान प्राप्त करना उनके लिए बेहद विनम्र और भावुक करने वाला अनुभव रहा। उन्होंने इस सम्मान को केवल अपनी उपलब्धि नहीं बल्कि उन करोड़ों श्रोताओं का सम्मान बताया जिन्होंने उनकी आवाज़ और गीतों को पीढ़ियों तक प्यार दिया। अलका ने लिखा कि यह सम्मान उनके नाम जरूर है, लेकिन इसकी असली भागीदारी उन लोगों की भी है जिन्होंने उनके संगीत को अपने जीवन का हिस्सा बनाया। शान ने लिखा दिल छू लेने वाला संदेश अलका याग्निक की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मशहूर गायक Shaan ने एक भावुक संदेश साझा किया, जिसने फैंस का दिल जीत लिया। शान ने लिखा, "अलका जी, आप हमारा गर्व और हमारी खुशी हैं। आपके प्रशंसकों को इससे ज्यादा खुशी किसी और बात से नहीं होगी कि आप पूरी तरह स्वस्थ होकर लौटें और एक बार फिर अपनी आवाज़ से हम सभी को मंत्रमुग्ध करें।" शान का यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और प्रशंसक भी अलका के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। संगीत जगत के सितारों ने जताया प्यार अलका याग्निक के लिए संगीत और फिल्म जगत के कई बड़े कलाकारों ने शुभकामनाएं भेजीं। Kumar Sanu ने लिखा कि अलका इस सम्मान की पूरी तरह हकदार हैं और ईश्वर उन्हें स्वस्थ रखे। वहीं Ila Arun ने उन पर गर्व जताया, जबकि Akriti Kakar ने उन्हें संगीत जगत की 'क्वीन' बताते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। इसके अलावा Bhumi Pednekar, Veer Pahariya और Aditi Singh Sharma सहित कई सितारों ने भी उनके लिए प्यार और समर्थन व्यक्त किया। 'धीरे-धीरे जीवन में वापसी कर रही हूं' अलका याग्निक ने अपने संदेश में यह भी कहा कि वह अब धीरे-धीरे सामान्य जीवन में लौटने की कोशिश कर रही हैं। उनके मुताबिक, पद्म भूषण सम्मान ग्रहण करने के लिए समारोह में उपस्थित होना उनके लिए सिर्फ एक उपलब्धि नहीं बल्कि उम्मीद, साहस और दृढ़ता का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि यह पल उन्हें याद दिलाता है कि प्रेम, विश्वास और सकारात्मक सोच से किसी भी कठिन परिस्थिति का सामना किया जा सकता है। करोड़ों दिलों की आवाज़ हैं अलका याग्निक 90 के दशक से लेकर आज तक अलका याग्निक की आवाज़ भारतीय संगीत प्रेमियों के दिलों में खास जगह रखती है। उन्होंने हिंदी सिनेमा को अनगिनत सुपरहिट गीत दिए हैं और कई पीढ़ियों की पसंदीदा गायिका बनी हुई हैं। उनकी सेहत को लेकर सामने आई जानकारी ने फैंस को चिंतित जरूर किया है, लेकिन जिस तरह से उन्होंने हिम्मत और सकारात्मकता के साथ अपनी वापसी का संकेत दिया है, उससे उनके प्रशंसकों में नई उम्मीद जगी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की ताजा मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी गई है। व्हाइट हाउस द्वारा जारी स्वास्थ्य रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हैं और राष्ट्रपति के रूप में अपनी सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में सक्षम हैं। हालांकि डॉक्टरों ने उन्हें वजन कम करने, नियमित व्यायाम करने और खान-पान में सुधार करने की सलाह भी दी है। व्हाइट हाउस ने जारी की मेडिकल रिपोर्ट व्हाइट हाउस ने शुक्रवार (29 मई) को राष्ट्रपति की वार्षिक स्वास्थ्य जांच से जुड़ी मेडिकल रिपोर्ट जारी की। राष्ट्रपति के चिकित्सक Sean Barbabella ने एक आधिकारिक मेमो में ट्रंप की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के हृदय, फेफड़ों और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली सामान्य पाई गई है। डॉक्टरों ने उनकी मानसिक क्षमता और संज्ञानात्मक स्थिति को भी संतोषजनक बताया है। राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारियों के लिए पूरी तरह फिट मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ट्रंप राष्ट्रपति और कमांडर-इन-चीफ के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी उम्र को देखते हुए स्वास्थ्य स्थिति अच्छी है और किसी गंभीर बीमारी या ऐसी समस्या के संकेत नहीं मिले हैं जो उनके सार्वजनिक दायित्वों को प्रभावित कर सके। वजन घटाने की सलाह रिपोर्ट में उनकी समग्र स्वास्थ्य स्थिति को सकारात्मक बताया गया है, लेकिन डॉक्टरों ने ट्रंप को वजन नियंत्रित करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उम्र में वजन कम करने से हृदय संबंधी जोखिम घट सकते हैं और शारीरिक क्षमता को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखा जा सकता है। इसी वजह से उन्हें नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाने की सिफारिश की गई है। खान-पान और जीवनशैली में सुधार की जरूरत मेडिकल टीम ने ट्रंप को अपनी डाइट में सुधार करने और शारीरिक गतिविधियां बढ़ाने की सलाह दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से उनकी फिटनेस और बेहतर हो सकती है। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि नियमित स्वास्थ्य जांच और सक्रिय दिनचर्या उनके दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद रहेगी। 14 जून को 80 वर्ष के होंगे ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप 14 जून को 80 वर्ष के हो जाएंगे। उनकी उम्र को लेकर अक्सर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस होती रही है, खासकर तब जब वे अमेरिका के सबसे वरिष्ठ उम्र वाले नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में व्हाइट हाउस की ओर से जारी यह मेडिकल रिपोर्ट उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मानी जा रही है। उम्र को लेकर चर्चा के बीच आई रिपोर्ट अमेरिका में शीर्ष राजनीतिक नेताओं की उम्र और स्वास्थ्य पिछले कुछ वर्षों से महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बने हुए हैं। इसी संदर्भ में ट्रंप की स्वास्थ्य रिपोर्ट पर भी व्यापक नजर रखी जा रही थी। व्हाइट हाउस का कहना है कि मेडिकल जांच के निष्कर्ष बताते हैं कि राष्ट्रपति की शारीरिक और मानसिक स्थिति स्थिर है तथा वे अपने कार्यकाल की जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने में सक्षम हैं।
इजरायली प्रधानमंत्री ने खुद दी स्वास्थ्य की जानकारी इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने खुलासा किया है कि उन्हें शुरुआती चरण का प्रोस्टेट कैंसर हुआ था। हालांकि, समय रहते इलाज कराने के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि यह जानकारी सार्वजनिक करने में देरी इसलिए की गई ताकि मौजूदा युद्ध के दौरान ईरान इसे इजरायल के खिलाफ प्रचार के तौर पर इस्तेमाल न कर सके। नियमित जांच में सामने आई बीमारी नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि एक साल पहले बढ़े हुए लेकिन गैर-कैंसरयुक्त प्रोस्टेट की सफल सर्जरी के बाद वह लगातार मेडिकल निगरानी में थे। हाल ही में हुई जांच में प्रोस्टेट में एक सेंटीमीटर से भी छोटा धब्बा पाया गया। डॉक्टरों ने आगे की जांच में इसे शुरुआती चरण का कैंसर बताया। राहत की बात यह रही कि कैंसर शरीर के किसी अन्य हिस्से में नहीं फैला था। डॉक्टरों ने दिए थे दो विकल्प नेतन्याहू के अनुसार, डॉक्टरों ने उन्हें दो विकल्प सुझाए थे। पहला, नियमित निगरानी के जरिए स्थिति पर नजर रखना। दूसरा, लक्षित उपचार के माध्यम से कैंसर को पूरी तरह खत्म करना। उन्होंने दूसरा विकल्प चुना। नेतन्याहू ने बताया कि कुछ छोटी उपचार प्रक्रियाओं के बाद कैंसर का निशान पूरी तरह समाप्त हो गया। इलाज के दौरान भी जारी रखा काम इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि इलाज के दौरान उन्होंने अपना काम नहीं रोका। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उपचार के दौरान उन्होंने एक किताब भी पढ़ डाली और अपने सरकारी कार्यों को भी जारी रखा। उन्होंने Hadassah Medical Center के डॉक्टरों और मेडिकल टीम का आभार व्यक्त किया। युद्ध के बीच स्वास्थ्य पर उठे थे सवाल यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष लगातार जारी है। ऐसे में नेतन्याहू की सेहत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हो रही थी। शुरुआती पहचान से संभव है सफल इलाज प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाले आम कैंसरों में से एक है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि इसकी पहचान शुरुआती चरण में हो जाए तो इसका इलाज बेहद प्रभावी साबित होता है। नेतन्याहू का मामला भी इसी का उदाहरण है।
एक नई मेडिकल स्टडी ने Diabetes से जूझ रहे लोगों के लिए चिंता बढ़ा दी है। शोध के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों में Adhesive Capsulitis यानी ‘फ्रोजन शोल्डर’ होने का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में लगभग 4 गुना ज्यादा होता है। क्या कहती है स्टडी? 2026 की इस बड़ी समीक्षा और मेटा-एनालिसिस में 3.5 लाख से ज्यादा लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि डायबिटीज के मरीजों में फ्रोजन शोल्डर होने की संभावना 3.69 गुना अधिक है। यह स्थिति कंधे में दर्द और धीरे-धीरे मूवमेंट कम होने से जुड़ी होती है, खासकर हाथ को बाहर की ओर घुमाने में परेशानी होती है। क्यों बढ़ता है खतरा? विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज में लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर (हाइपरग्लाइसीमिया) शरीर में कई बदलाव लाता है: कोलेजन की संरचना प्रभावित होती है कंधे के टिश्यू सख्त होने लगते हैं फाइब्रोसिस (टिश्यू का कठोर होना) बढ़ता है शरीर में हल्की लेकिन लगातार सूजन बनी रहती है ये सभी कारक मिलकर कंधे की गतिशीलता को कम कर देते हैं। किन लोगों में ज्यादा जोखिम? स्टडी में कुछ अतिरिक्त जोखिम कारक भी सामने आए: खराब शुगर कंट्रोल मोटापा हाई कोलेस्ट्रॉल (हाइपरलिपिडेमिया) हाई ब्लड प्रेशर थायरॉयड की समस्या 40 से 65 वर्ष की उम्र महिलाओं में ज्यादा जोखिम धूम्रपान और शराब का सेवन इलाज और बचाव क्यों जरूरी? डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटीज के मरीज अगर कंधे में दर्द या जकड़न महसूस करें, तो इसे नजरअंदाज न करें। शुरुआती पहचान और सही इलाज से कंधे की मूवमेंट को बेहतर किया जा सकता है। लंबे समय से अनियंत्रित डायबिटीज वाले मरीजों के लिए नियमित स्क्रीनिंग भी जरूरी बताई गई है। स्टडी की सीमाएं हालांकि, यह स्टडी मुख्य रूप से ऑब्जर्वेशनल डेटा पर आधारित है, इसलिए सीधे कारण-परिणाम का निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। उम्र, वजन और शारीरिक गतिविधि जैसे कारक भी इस संबंध को प्रभावित कर सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।