Central Government

Rahul Gandhi
छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, बोले- लोकतांत्रिक आवाज को दबाया जा रहा है

नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सख्ती बरती जा रही है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं और छात्रों को अपनी मांग रखने का पूरा अधिकार है।   सोशल मीडिया पर सरकार को घेरा   राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि छात्रों पर बल प्रयोग और हिरासत जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की।   पेपर लीक और परीक्षा सुधार का उठाया मुद्दा   कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्र लंबे समय से पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, इन मुद्दों का समाधान करने के बजाय प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए।   सरकार का पक्ष भी आया सामने   केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। प्रशासन के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है तथा कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की गई है।   राजनीतिक बहस हुई तेज   राहुल गांधी के बयान के बाद छात्र आंदोलन और परीक्षा सुधार का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। विपक्ष सरकार पर छात्रों की आवाज अनसुनी करने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
Kumari Selja on Student Protest
कुमारी सैलजा ने छात्र आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर साधा निशाना, बोलीं- छात्रों के सवालों का जवाब दे सरकार

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस महासचिव और सांसद कुमारी सैलजा ने छात्र आंदोलन और परीक्षा प्रणाली को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देशभर के छात्र लगातार अपनी समस्याएं और मांगें उठा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी आवाज सुनने के बजाय उन्हें नजरअंदाज कर रही है। सैलजा ने सरकार से छात्रों के सवालों का जवाब देने और उनकी चिंताओं का समाधान करने की मांग की।   परीक्षा सुधार और पारदर्शिता की मांग उठाई   कुमारी सैलजा ने कहा कि पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही खामियों ने लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों के साथ संवाद स्थापित कर परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।   पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल   कांग्रेस नेता ने छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है और उनकी आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।   सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब   सैलजा ने कहा कि युवा रोजगार, निष्पक्ष परीक्षाओं और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देने और छात्रों का भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।   राजनीतिक बयानबाजी तेज   कुमारी सैलजा के बयान के बाद छात्र आंदोलन और परीक्षा सुधार का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। कांग्रेस ने सरकार पर युवाओं की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।

anjali kumari जुलाई 25, 2026 0
केंद्र और किसान संगठनों के बीच वार्ता का नया दौर, लंबित मांगों पर जल्द बैठक का आश्वासन
केंद्र और किसान संगठनों के बीच वार्ता का नया दौर, लंबित मांगों पर जल्द बैठक का आश्वासन

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच लंबे समय से लंबित मुद्दों को लेकर बातचीत का नया दौर शुरू होने की तैयारी है। हरियाणा सरकार की पहल के बाद किसानों को आश्वासन दिया गया है कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ अगले कुछ दिनों में औपचारिक बैठक आयोजित की जाएगी। इस आश्वासन के बाद किसानों ने फिलहाल दिल्ली मार्च स्थगित कर दिया है, हालांकि उन्होंने अपनी मांगों पर दबाव बनाए रखने की बात कही है।   MSP, व्यापार समझौते और अन्य मुद्दों पर होगी चर्चा   किसान संगठनों का कहना है कि बैठक में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी गारंटी, फसल खरीद व्यवस्था, किसानों पर दर्ज मामलों, कृषि क्षेत्र से जुड़े व्यापार समझौतों और अन्य लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। हाल के दिनों में प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी किसान संगठनों ने चिंता जताई है और कृषि क्षेत्र के हितों की सुरक्षा की मांग की है।   दिल्ली मार्च फिलहाल टला, आंदोलन जारी रहेगा   किसान संगठनों ने पहले दिल्ली के किसान घाट पर महापंचायत और प्रदर्शन का आह्वान किया था। हालांकि बातचीत का भरोसा मिलने के बाद उन्होंने फिलहाल मार्च रोक दिया है। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि तय समय के भीतर वार्ता नहीं होती या मांगों पर ठोस प्रगति नहीं दिखती, तो आंदोलन को फिर से तेज किया जाएगा।   सरकार ने बातचीत से समाधान निकालने पर दिया जोर   केंद्र और हरियाणा सरकार ने कहा है कि किसानों के साथ संवाद के माध्यम से समाधान निकालना उनकी प्राथमिकता है। सरकार का कहना है कि कृषि और किसानों के हित से जुड़े सभी मुद्दों पर खुले मन से चर्चा की जाएगी और व्यवहारिक समाधान तलाशने का प्रयास किया जाएगा।   बैठक पर टिकी किसानों की नजर   अब किसान संगठनों की निगाह प्रस्तावित बैठक पर है। उनका कहना है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय और समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता है। दूसरी ओर, सरकार को उम्मीद है कि वार्ता के जरिए गतिरोध समाप्त होगा और कृषि क्षेत्र से जुड़े लंबित मुद्दों पर सहमति का रास्ता निकलेगा।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 23, 2026 0
NITI Aayog CEO
अनुराग जैन बने नीति आयोग के नए CEO, केंद्र सरकार ने दो साल के कार्यकाल के लिए की नियुक्ति

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने 1989 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी अनुराग जैन को नीति आयोग (NITI Aayog) का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अनुराग जैन का कार्यकाल दो वर्ष का होगा। उनकी नियुक्ति को देश की आर्थिक नीति, औद्योगिक विकास और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।   मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव रहे हैं अनुराग जैन   अनुराग जैन वर्तमान में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत थे। इससे पहले वे उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के सचिव सहित केंद्र सरकार के कई अहम पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। निवेश प्रोत्साहन, औद्योगिक नीति, विनिर्माण और व्यापार सुधारों के क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें नीति आयोग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।   नीति आयोग की रणनीतियों को मिलेगी नई दिशा   नीति आयोग केंद्र सरकार का प्रमुख नीति निर्धारण संस्थान है, जो आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचा, रोजगार, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ी नीतियों पर केंद्र और राज्यों के साथ मिलकर काम करता है। अनुराग जैन के नेतृत्व में आयोग से निवेश बढ़ाने, 'विकसित भारत' के लक्ष्य को आगे बढ़ाने और राज्यों के साथ समन्वय को मजबूत करने की उम्मीद जताई जा रही है।   आर्थिक सुधारों और निवेश पर रहेगा विशेष फोकस   विशेषज्ञों का मानना है कि अनुराग जैन का औद्योगिक नीति और निवेश प्रबंधन का अनुभव नीति आयोग की कार्यप्रणाली को नई गति देगा। सरकार विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल इकोनॉमी, हरित ऊर्जा और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में बड़े सुधारों पर काम कर रही है, जिनमें नीति आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है।   जल्द संभालेंगे नई जिम्मेदारी   सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के बाद अनुराग जैन जल्द ही नीति आयोग के CEO का पदभार संभालेंगे। उनके नेतृत्व में आयोग से केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, सुधारों की गति तेज करने और दीर्घकालिक विकास रणनीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने की उम्मीद की जा रही है।

anjali kumari जुलाई 23, 2026 0
Female IPS Officer
प्रेग्नेंसी बनी विवाद की वजह, मेडिकल फिट महिला IPS अधिकारी को ट्रेनिंग से क्यों रोका? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा सवाल

नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट में एक महिला IPS प्रोबेशनर की ट्रेनिंग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की नीति पर अहम सवाल उठाए गए। अदालत ने कहा कि यदि कोई महिला अधिकारी चिकित्सकीय रूप से पूरी तरह फिट है, तो केवल गर्भावस्था या मातृत्व के आधार पर उसे प्रशिक्षण से वंचित करना उचित नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस संबंध में जवाब भी मांगा है।   क्या है पूरा मामला?   मामला वर्ष 2023 बैच की एक महिला IPS अधिकारी का है, जिन्होंने प्रशिक्षण के दौरान गर्भधारण किया और बाद में बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद उन्होंने मेडिकल बोर्ड से फिटनेस प्रमाणपत्र प्राप्त किया और प्रशिक्षण में शामिल होने की इच्छा जताई।   हालांकि, गृह मंत्रालय ने 1993 की एक नीति का हवाला देते हुए उन्हें तत्काल प्रशिक्षण में शामिल होने की अनुमति नहीं दी। इस नीति के अनुसार, प्रसव के बाद महिला IPS प्रोबेशनर को एक निश्चित अवधि पूरी होने के बाद ही प्रशिक्षण में शामिल किया जाता है।   कैसे पहुंचा मामला सुप्रीम कोर्ट?   महिला अधिकारी ने पहले सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) का रुख किया। CAT ने मेडिकल फिटनेस को आधार मानते हुए उन्हें अंतरिम राहत देते हुए प्रशिक्षण में शामिल करने का आदेश दिया।   इसके बाद केंद्र सरकार ने इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां CAT के आदेश पर रोक लगा दी गई। इसके बाद महिला अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां मामले की सुनवाई जारी है।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?   सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि यदि कोई महिला अधिकारी चिकित्सकीय रूप से पूरी तरह फिट है, तो उसे केवल गर्भावस्था या मातृत्व के आधार पर प्रशिक्षण से क्यों रोका जा रहा है।   अदालत ने यह भी कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए बनाई गई नीतियां उनके करियर में बाधा नहीं बननी चाहिए। यदि मेडिकल विशेषज्ञ किसी अधिकारी को सेवा और प्रशिक्षण के लिए फिट घोषित करते हैं, तो ऐसे मामलों में नियमों की निष्पक्ष और व्यावहारिक व्याख्या होनी चाहिए।   केंद्र सरकार का पक्ष   केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि गृह मंत्रालय की 1993 की नीति के तहत प्रसव के बाद महिला IPS प्रोबेशनर के प्रशिक्षण को लेकर निर्धारित दिशा-निर्देश हैं और उसी के अनुरूप निर्णय लिया गया था। सरकार का कहना है कि यह नीति महिला अधिकारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाई गई है।   अभी अंतिम फैसला नहीं आया   फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और मामले की सुनवाई जारी है। अंतिम फैसला आने के बाद यह तय होगा कि भविष्य में गर्भावस्था या मातृत्व के दौरान और उसके बाद महिला IPS अधिकारियों के प्रशिक्षण से जुड़े नियमों में कोई बदलाव होगा या नहीं।   क्यों अहम है यह मामला?   कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का असर केवल IPS अधिकारियों तक सीमित नहीं रहेगा। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला भविष्य में अन्य केंद्रीय सेवाओं और सरकारी संस्थानों में मातृत्व अवकाश, प्रशिक्षण और महिला अधिकारियों के अधिकारों से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

anjali kumari जुलाई 9, 2026 0
E25 Fuel Trial
केंद्र सरकार E25 (25% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल ) लागू करने से पहले देशभर में व्यापक परीक्षण कराएगी

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि 25% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E25) को देशभर में लागू करने से पहले व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों से विस्तृत चर्चा की जाएगी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने कहा कि सरकार फिलहाल E25 पर परीक्षण करा रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।   वाहन कंपनियों से भी होगी चर्चा   केंद्रीय मंत्री ने बताया कि परीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद ऑटोमोबाइल कंपनियों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से परामर्श किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि E25 ईंधन सभी मानकों पर सुरक्षित और व्यवहारिक साबित हो, तभी इसे लागू किया जाएगा।   E20 पर भी सरकार ने दी सफाई   सरकार ने E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही इंजन खराब होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि सही तरीके से मेंटेन किए गए वाहनों में ऐसी कोई व्यापक समस्या सामने नहीं आई है। सरकार का कहना है कि उच्च एथेनॉल मिश्रण की दिशा में हर कदम वैज्ञानिक परीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन के बाद ही उठाया जाएगा।   सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों को लाभ मिलेगा और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। हालांकि E25 को लागू करने का निर्णय केवल परीक्षण और तकनीकी मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।

anjali kumari जुलाई 8, 2026 0
Congress MP Shashi Tharoor questions the government's position on whether an Indian passport should serve as proof of citizenship
पासपोर्ट विवाद पर शशि थरूर का सरकार पर तंज, बोले- कानून में बड़ा विरोधाभास; नागरिकता नियम बदलने की मांग

  नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पासपोर्ट को लेकर केंद्र सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए इसे "अजीब कानूनी विरोधाभास" बताया है। उन्होंने कहा कि जब सरकार पासपोर्ट जारी करने से पहले सभी दस्तावेजों और पहचान की विस्तृत जांच करती है, तो फिर उसी पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना आम लोगों के लिए भ्रम पैदा करता है। थरूर ने सरकार से कानून में संशोधन कर पासपोर्ट और आधार को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाने की मांग की है। पासपोर्ट को लेकर सरकार के रुख पर उठाए सवाल शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं माना जाता, जबकि इसे जारी करने से पहले सरकार व्यापक सत्यापन प्रक्रिया अपनाती है। उन्होंने कहा कि यदि इतनी जांच के बाद भी पासपोर्ट नागरिकता साबित नहीं करता, तो यह कानूनी व्यवस्था में गंभीर विरोधाभास को दर्शाता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस भ्रम को दूर करने के लिए कानून में आवश्यक बदलाव किए जाएं। आधार कार्ड को लेकर भी जताई चिंता थरूर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आधार केवल पहचान और पते का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं। ऐसे में करोड़ों भारतीयों के पास सरकारी दस्तावेज तो हैं, लेकिन नागरिकता साबित करने के लिए कोई स्पष्ट और अंतिम दस्तावेज नहीं है। उनका कहना है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर नागरिकता का वैध और अंतिम प्रमाण कौन-सा दस्तावेज है। कानून में संशोधन की मांग कांग्रेस सांसद ने मांग की कि केंद्र सरकार कानून में बदलाव कर भारतीय पासपोर्ट और सामान्य आधार कार्ड को नागरिकता का वैध और अंतिम प्रमाण घोषित करे। उनका कहना है कि इससे नागरिकों को विभिन्न सरकारी प्रक्रियाओं में बार-बार अपनी नागरिकता साबित करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और प्रशासनिक व्यवस्था भी सरल होगी। गैर-नागरिकों के लिए अलग आधार कार्ड का सुझाव शशि थरूर ने यह भी सुझाव दिया कि भारत में रहने वाले गैर-नागरिकों के लिए अलग रंग या अलग पहचान वाला आधार कार्ड जारी किया जाए। उनका मानना है कि इससे नागरिकों और गैर-नागरिकों के बीच स्पष्ट अंतर किया जा सकेगा और सरकारी एजेंसियों के लिए पहचान संबंधी प्रक्रियाएं आसान होंगी। सरकार ने क्या कहा? केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण। सरकार का कहना है कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि लंबे समय से लागू कानूनी व्यवस्था का हिस्सा है। सरकार ने अपने पक्ष के समर्थन में पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पासपोर्ट जारी किया जाना अपने आप में नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं माना जा सकता।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
Petrol Pump Rule
अब पेट्रोल पंप से नहीं खरीद सकेंगे ज्यादा तेल! सरकार ने लागू किए नए नियम

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खरीद को लेकर नई गाइडलाइन जारी करते हुए बड़े औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए आदेश के तहत ऐसे उपभोक्ता अब सामान्य पेट्रोल पंपों (रिटेल आउटलेट्स) से ईंधन नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें अपनी आवश्यकता के अनुसार पेट्रोल और डीजल केवल अधिकृत बल्क सेल प्वाइंट्स (थोक बिक्री केंद्रों) से ही खरीदना होगा। यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर 90 दिनों के लिए लागू की गई है।   मध्य-पूर्व संकट के बीच लिया गया फैसला सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ कम रखने के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की, जबकि थोक ग्राहकों के लिए ईंधन महंगा कर दिया गया। इसी वजह से कई बड़े उद्योग और संस्थान सस्ता ईंधन पाने के लिए पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदने लगे, जिससे कई क्षेत्रों में आम लोगों के लिए आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई।   200 लीटर से अधिक डीजल नहीं मिलेगा नई गाइडलाइन के अनुसार, किसी भी संदिग्ध ग्राहक या वाहन को एक पेट्रोल पंप से एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही दिया जाएगा। इससे अधिक मात्रा में ईंधन खरीदने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा डीजल की बिक्री केवल वाहन के मुख्य ईंधन टैंक या पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से प्रमाणित कंटेनरों में ही की जाएगी।   नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल पंप से खरीदे गए डीजल को दोबारा मुनाफे के लिए बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, संस्थानों या पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही राज्य सरकारों को जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।   जांच और जब्ती का अधिकार भी बढ़ाया गया नए निर्देशों के तहत अधिकृत अधिकारी, डीएसपी स्तर या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारी तथा तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी पेट्रोल पंपों की जांच कर सकेंगे। यदि कहीं अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो वे ईंधन और संबंधित सामग्री जब्त करने की कार्रवाई भी कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना और कालाबाजारी पर रोक लगाना है।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Union Minister Kiren Rijiju speaking about Rahul Gandhi’s foreign visits and parliamentary rules
राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर किरेन रिजिजू का सवाल, बोले- संसद को पहले देनी चाहिए जानकारी

केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi की विदेश यात्राओं को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बिना पूर्व सूचना दिए विदेश यात्रा करते हैं, जबकि नियमों के तहत सांसदों को अपनी यात्रा की जानकारी पहले देना अनिवार्य है। ‘तीन हफ्ते पहले सूचना देना जरूरी’ किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि किसी भी सांसद को विदेश यात्रा से कम से कम तीन सप्ताह पहले लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय को इसकी सूचना देनी होती है। उन्होंने कहा, “यह अनुमति लेने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सूचना देने का नियम है। सांसद विदेश यात्रा कर सकते हैं, लेकिन उन्हें निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।” राहुल गांधी की यात्राओं पर उठाए सवाल रिजिजू ने दावा किया कि राहुल गांधी 2004 से सांसद हैं और अब तक उनकी 54 विदेश यात्राएं दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि केवल यात्राओं की संख्या ही नहीं, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि वह विदेश में कितने दिन रहे और उन यात्राओं पर कितना खर्च हुआ। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर कोई सांसद विदेश में किसी संस्था या संगठन की ओर से आतिथ्य स्वीकार करता है, तो वह मामला Foreign Contribution Regulation Act यानी FCRA के दायरे में आता है और इसकी जानकारी गृह मंत्रालय को देना जरूरी होता है। ‘कांग्रेस नियमों का पालन करे’ किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी से नियमों का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि विदेश यात्रा से पहले लोकसभा अध्यक्ष और संबंधित एजेंसियों को आवश्यक जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने इतनी विदेश यात्राएं क्यों कीं, किसने उन्हें आमंत्रित किया और विदेश में उनके खर्च का वहन किसने किया।” ‘कानून सबके लिए समान’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यात्रा करना किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता है, लेकिन सभी नागरिकों और खासकर सांसदों को देश के कानूनों का पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी मामले में जांच या कार्रवाई होती है, तो इसे किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं माना जाना चाहिए। “कानून सबके लिए बराबर है,” रिजिजू ने कहा।   

surbhi मई 15, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0